SIM कार्ड को लेकर बड़ा अलर्ट! आपके नाम का नंबर गलत काम में इस्तेमाल हुआ तो…
अगर आपके नाम पर जारी कोई SIM कार्ड किसी दूसरे व्यक्ति के पास है या आपको यह तक नहीं पता कि आपकी पहचान से कितने मोबाइल नंबर एक्टिव हैं, तो अब इसकी जांच करना जरूरी हो गया है। दूरसंचार विभाग (DoT) ने मोबाइल यूजर्स को SIM कार्ड और दूसरे टेलीकॉम आइडेंटिफायर के दुरुपयोग को लेकर चेतावनी दी है।
21 सितंबर को सामने आई एडवाइजरी से जुड़ी रिपोर्ट के मुताबिक, फर्जी दस्तावेजों, धोखाधड़ी या किसी दूसरे व्यक्ति की पहचान का इस्तेमाल करके SIM हासिल करना और IMEI या Calling Line Identification जैसे टेलीकॉम आइडेंटिफायर से छेड़छाड़ गंभीर कानूनी कार्रवाई का कारण बन सकती है।
Telecommunications Act, 2023 की धारा 42 के कुछ प्रावधानों के तहत ऐसे अपराधों के लिए तीन साल तक की जेल, 50 लाख रुपये तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।
DoT की चेतावनी ऐसे समय आई है जब साइबर अपराधों में फर्जी या दूसरे लोगों के नाम पर जारी SIM कार्ड के इस्तेमाल को लेकर लगातार कार्रवाई की जा रही है।
अपने नाम का SIM दूसरे को देना क्यों पड़ सकता है भारी?
बहुत से लोग अपने नाम पर SIM कार्ड लेकर परिवार के किसी सदस्य, परिचित या अन्य व्यक्ति को इस्तेमाल करने के लिए दे देते हैं। कई मामलों में यह लंबे समय तक चलता रहता है और जिस व्यक्ति के नाम पर कनेक्शन है, उसे यह जानकारी भी नहीं रहती कि उस नंबर का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जा रहा है।
DoT ने यूजर्स को अपने नाम पर जारी SIM को बेचने, ट्रांसफर करने या ऐसे व्यक्ति को सौंपने से बचने की सलाह दी है जो उसका गलत इस्तेमाल कर सकता है।
यहां यह समझना जरूरी है कि केवल SIM किसी दूसरे व्यक्ति के हाथ में होने का मतलब यह नहीं है कि तुरंत 50 लाख रुपये का जुर्माना लग जाएगा। लेकिन अगर SIM का इस्तेमाल धोखाधड़ी, साइबर अपराध या कानून के तहत प्रतिबंधित गतिविधियों में किया जाता है, तो मामला गंभीर हो सकता है।
इसलिए मोबाइल कनेक्शन को सामान्य वस्तु की तरह किसी को सौंप देना सुरक्षित नहीं माना जा सकता।
साइबर फ्रॉड में इस्तेमाल होने वाले ‘म्यूल SIM’ से बड़ा खतरा
DoT ने विशेष रूप से ‘म्यूल SIM’ को लेकर भी सावधान किया है।
म्यूल SIM ऐसे मोबाइल कनेक्शन को कहा जाता है जिसे किसी दूसरे व्यक्ति के नाम पर हासिल कर साइबर फ्रॉड या अन्य गैरकानूनी गतिविधियों में इस्तेमाल किया जाता है। कई मामलों में अपराध करने वाला व्यक्ति अपनी असली पहचान छिपाने के लिए दूसरे व्यक्ति की पहचान पर जारी मोबाइल कनेक्शन का इस्तेमाल कर सकता है।
अगर किसी व्यक्ति ने अपने नाम पर SIM लिया और फिर उसे किराए, पैसे या किसी अन्य फायदे के बदले ऐसे व्यक्ति को दे दिया जो इसका इस्तेमाल साइबर अपराध में करता है, तो यह गंभीर कानूनी परेशानी का कारण बन सकता है।
इसीलिए DoT की सलाह है कि अपने नाम पर जारी मोबाइल कनेक्शन पर नियंत्रण बनाए रखें और समय-समय पर यह जांच करते रहें कि आपकी पहचान से कौन-कौन से नंबर सक्रिय हैं।
फर्जी दस्तावेज से SIM लेना भी गंभीर मामला
चेतावनी केवल अपने नाम का SIM दूसरे को देने तक सीमित नहीं है।
Telecommunications Act, 2023 की धारा 42(3)(e) में धोखाधड़ी, cheating या impersonation के जरिए SIM या अन्य telecommunication identification प्राप्त करने को प्रतिबंधित किया गया है।
उदाहरण के तौर पर किसी दूसरे व्यक्ति के दस्तावेजों या पहचान का इस्तेमाल करके उसकी जानकारी के बिना मोबाइल कनेक्शन लेना कानूनी कार्रवाई का कारण बन सकता है।
इसका मतलब है कि SIM खरीदते समय KYC प्रक्रिया और पहचान संबंधी दस्तावेजों का सही इस्तेमाल बेहद महत्वपूर्ण है।
छत्तीसगढ़ के मामले के बाद फिर बढ़ी चिंता
ताजा चेतावनी के पीछे सामने आए एक मामले ने भी चिंता बढ़ाई है।
रिपोर्ट के अनुसार, साइबर अपराध की जांच के दौरान छत्तीसगढ़ में एक Point of Sale यानी PoS एजेंट पर आरोप सामने आया कि उसने नागरिकों के पहचान दस्तावेजों का उनकी जानकारी या सहमति के बिना इस्तेमाल कर 25 मोबाइल कनेक्शन सक्रिय कर दिए।
मामला सामने आने के बाद DoT और टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स ने संबंधित PoS को ब्लैकलिस्ट कर दिया, जिससे वह आगे SIM जारी न कर सके।
इन मोबाइल कनेक्शनों की DoT के Digital Intelligence Platform के जरिए भी जांच की गई। संदिग्ध पाए गए कनेक्शनों को दोबारा सत्यापन के लिए भेजा गया और सत्यापन में विफल नंबरों को निष्क्रिय कर दिया गया।
यह मामला बताता है कि कई बार किसी व्यक्ति को जानकारी तक नहीं होती कि उसके दस्तावेजों के आधार पर कोई दूसरा मोबाइल नंबर चल रहा है।
IMEI नंबर से छेड़छाड़ पर भी बड़ी चेतावनी
DoT ने सिर्फ SIM कार्ड ही नहीं बल्कि मोबाइल फोन के IMEI नंबर को लेकर भी महत्वपूर्ण चेतावनी दी है।
IMEI यानी International Mobile Equipment Identity प्रत्येक मोबाइल डिवाइस से जुड़ी एक विशिष्ट पहचान होती है। मोबाइल नेटवर्क पर डिवाइस की पहचान करने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
Telecommunications Act के तहत telecommunication identifier से जानबूझकर छेड़छाड़ करना अपराध हो सकता है।
DoT के फरवरी 2025 के आधिकारिक परामर्श में स्पष्ट किया गया था कि CLI, IP address और IMEI जैसे telecom identifiers में बदलाव या छेड़छाड़ की सुविधा देने वाले ऐप या सेवाएं भी कानून के दायरे में आ सकती हैं।
धारा 42(3) के संबंधित अपराध में अधिकतम तीन साल की कैद या 50 लाख रुपये तक जुर्माना अथवा दोनों का प्रावधान है।
CLI बदलकर कॉल करने वाले टूल भी निशाने पर
Calling Line Identification यानी CLI सामान्य तौर पर कॉल प्राप्त करने वाले व्यक्ति को कॉल करने वाले नंबर की पहचान उपलब्ध कराता है।
अगर कोई व्यक्ति तकनीकी साधनों की मदद से इसे इस तरह बदल देता है कि सामने वाले व्यक्ति को कोई दूसरा नंबर दिखाई दे, तो इसे CLI spoofing कहा जाता है।
DoT पहले भी ऐसे टूल और ऐप के खिलाफ चेतावनी जारी कर चुका है। विभाग का कहना है कि telecom identification से छेड़छाड़ करने वाली सेवाएं Telecommunications Act के प्रावधानों का उल्लंघन कर सकती हैं।
साइबर अपराधों में spoofed calls का इस्तेमाल लोगों को भ्रमित करने के लिए किया जा सकता है। यही कारण है कि सरकार telecom identifiers की सुरक्षा को गंभीरता से ले रही है।
कैसे पता करें आपके नाम पर कितने SIM चल रहे हैं?
आम मोबाइल यूजर के लिए सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि वह कैसे पता करे कि उसकी पहचान पर कितने मोबाइल नंबर जारी हैं।
इसके लिए सरकार ने Sanchar Saathi प्लेटफॉर्म पर सुविधा उपलब्ध कराई है। वहां ‘Know Mobile Connections in Your Name’ सेवा के जरिए अपने नाम से जुड़े मोबाइल कनेक्शन देखे जा सकते हैं।
अगर सूची में ऐसा कोई नंबर दिखाई देता है जिसे आपने कभी नहीं लिया, या ऐसा कनेक्शन है जिसकी अब आपको जरूरत नहीं है, तो उसे रिपोर्ट करने का विकल्प उपलब्ध है।
यह सुविधा खास तौर पर उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जिन्होंने कई सालों में अलग-अलग टेलीकॉम कंपनियों के SIM लिए हैं और अब उन्हें याद नहीं कि कितने कनेक्शन अभी भी उनके नाम पर सक्रिय हैं।
आज ही कर लें ये जरूरी जांच
मोबाइल यूजर्स को समय-समय पर अपने नाम पर चल रहे कनेक्शनों की समीक्षा करनी चाहिए।
यदि कोई अनजान नंबर दिखाई देता है तो उसे नजरअंदाज करने के बजाय रिपोर्ट करना बेहतर है। इसी तरह यदि आपका पुराना SIM किसी दूसरे व्यक्ति के पास है, तो कनेक्शन की स्थिति की जांच करना और जरूरत के मुताबिक अधिकृत प्रक्रिया अपनाना समझदारी होगी।
पुराने DoT निर्देशों में भी यह व्यवस्था बताई गई है कि कुछ परिस्थितियों में blood relative या legal heir द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे कनेक्शन को निर्धारित प्रक्रिया के तहत ट्रांसफर किया जा सकता है।
इसलिए केवल SIM हाथ में देकर जिम्मेदारी खत्म मान लेना सही तरीका नहीं है।
सेकेंड हैंड फोन खरीदते समय IMEI जरूर जांचें
Sanchar Saathi पर केवल मोबाइल कनेक्शन ही नहीं, फोन के IMEI की वैधता जांचने की सुविधा भी उपलब्ध है।
‘Know Genuineness of Your Mobile Handset’ सेवा के जरिए मोबाइल के IMEI की स्थिति देखी जा सकती है।
सरकारी CEIR प्लेटफॉर्म के मुताबिक, मोबाइल फोन का IMEI पैकेजिंग बॉक्स या बिल पर मिल सकता है। फोन पर *#06# डायल करके भी IMEI देखा जा सकता है।
अगर जांच में मोबाइल का IMEI black-listed, duplicate या already in use दिखाई देता है तो सरकारी पोर्टल ऐसे डिवाइस को खरीदने से बचने की सलाह देता है।
यह सुविधा सेकेंड हैंड मोबाइल खरीदने वालों के लिए खास तौर पर उपयोगी हो सकती है।
एक छोटी लापरवाही बन सकती है बड़ी परेशानी
DoT की चेतावनी का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही है कि मोबाइल SIM और फोन की डिजिटल पहचान को सामान्य चीज समझकर लापरवाही नहीं करनी चाहिए।
आज मोबाइल नंबर बैंक खाते, UPI, सोशल मीडिया, ईमेल, आधार से जुड़ी सेवाओं और OTP आधारित कई महत्वपूर्ण सुविधाओं में इस्तेमाल होता है। ऐसे में गलत हाथों में गया मोबाइल कनेक्शन गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है।
इसलिए अपने नाम पर जारी SIM को किसी अनजान व्यक्ति को देना, पैसे के बदले उपलब्ध कराना या अपनी पहचान का इस्तेमाल किसी दूसरे व्यक्ति को नया कनेक्शन लेने के लिए करने देना जोखिम भरा हो सकता है।
साथ ही यह भी समझना जरूरी है कि ₹50 लाख जुर्माना और तीन साल जेल की अधिकतम सजा हर सामान्य SIM-sharing की स्थिति में स्वतः लागू नहीं होती। यह Telecommunications Act में निर्धारित विशिष्ट अपराधों और परिस्थितियों पर निर्भर करती है।
फिर भी DoT की ताजा चेतावनी के बाद मोबाइल यूजर्स के लिए सबसे सुरक्षित कदम यही है कि वे अपने नाम से जारी सभी मोबाइल कनेक्शन जांचें, अनजान नंबर तुरंत रिपोर्ट करें और IMEI या दूसरे telecom identifiers से किसी तरह की छेड़छाड़ से पूरी तरह दूर रहें।

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