सोने के भाव में आने वाली है सबसे बड़ी गिरावट? ₹1.52 लाख से सीधे ₹1 लाख पर पहुंचेगा Gold, जानिए इस दावे के पीछे का पूरा राज!
सोने की कीमतों में हाल के दिनों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। कुछ समय पहले रिकॉर्ड ऊंचाई की तरफ बढ़ने के बाद अब अंतरराष्ट्रीय और भारतीय बाजार में सोने की कीमतों पर दबाव दिखाई दे रहा है। इसी बीच सोशल मीडिया और बाजार से जुड़ी चर्चाओं में यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि क्या सोने का भाव आने वाले समय में गिरकर 10 ग्राम के लिए ₹1 लाख के आसपास पहुंच सकता है?
मौजूदा कीमतों को देखें तो ऐसा स्तर अभी काफी नीचे है। 25 सितंबर 2026 को भारत में 24 कैरेट सोने का औसत खुदरा भाव करीब ₹15,284 प्रति ग्राम यानी ₹1,52,840 प्रति 10 ग्राम था। 22 कैरेट सोने का भाव करीब ₹14,010 प्रति ग्राम यानी ₹1,40,100 प्रति 10 ग्राम रहा। दिल्ली में 24 कैरेट सोने का भाव करीब ₹1,52,990 प्रति 10 ग्राम बताया गया।
ऐसे में अगर 24 कैरेट सोना वास्तव में ₹1 लाख प्रति 10 ग्राम पर पहुंचता है, तो मौजूदा स्तर से लगभग ₹52,800 की गिरावट होगी। यानी करीब 34 फीसदी की भारी गिरावट। इसलिए ₹1 लाख का स्तर कोई मामूली उतार-चढ़ाव नहीं होगा, बल्कि सोने के बाजार में बहुत बड़ी गिरावट मानी जाएगी।
लेकिन बड़ा सवाल यही है—क्या वास्तव में सोना ₹1 लाख तक गिर सकता है?
25 सितंबर को क्या था सोने का भाव?
25 सितंबर 2026 के उपलब्ध बाजार आंकड़ों के अनुसार भारत में 24 कैरेट सोने की कीमत लगभग ₹15,284 प्रति ग्राम थी। 22 कैरेट सोना करीब ₹14,010 प्रति ग्राम और 18 कैरेट सोना करीब ₹11,463 प्रति ग्राम के स्तर पर था। अलग-अलग शहरों में स्थानीय कर, बाजार और ज्वेलर्स के कारण कीमत में थोड़ा अंतर दिखाई देता है।
दिल्ली में 24 कैरेट सोने का भाव करीब ₹1,52,820 प्रति 10 ग्राम बताया गया, जबकि बेंगलुरु में भी यही स्तर दर्ज किया गया। बेंगलुरु में एक दिन पहले 24 कैरेट सोना ₹1,54,360 प्रति 10 ग्राम था, यानी एक दिन में करीब ₹1,540 की गिरावट दर्ज की गई।
यह आंकड़ा बताता है कि बाजार में उतार-चढ़ाव काफी तेज है।
MCX पर भी दिखी हलचल
भारत में सोने की कीमतों को समझने के लिए MCX यानी मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज के भाव भी महत्वपूर्ण होते हैं। 25 सितंबर को MCX पर सोने का भाव करीब ₹1,54,263 प्रति 10 ग्राम के आसपास कारोबार करता बताया गया था। उस समय सोने के फ्यूचर्स में तेजी भी दिखाई दे रही थी।
दूसरी तरफ कुछ बाजार विश्लेषकों ने हालिया तेज गिरावट के बाद सोने को स्थिर होने की कोशिश करते हुए बताया। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार MCX गोल्ड अक्टूबर फ्यूचर्स करीब ₹1,50,800 के आसपास कंसोलिडेट कर रहा था और बाजार में हालिया करेक्शन के बाद स्थिरता के संकेत देखे जा रहे थे।
इसका अर्थ यह है कि बाजार में इस समय एकतरफा तस्वीर नहीं है। कहीं गिरावट के बाद स्थिरता दिखाई दे रही है तो कहीं अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम के कारण उतार-चढ़ाव बना हुआ है।
फिर ₹1 लाख तक गिरने की बात कहां से आई?
सोशल मीडिया और कुछ बाजार चर्चाओं में सोने के ₹1 लाख प्रति 10 ग्राम तक आने की संभावना की बात की जा रही है। लेकिन मौजूदा उपलब्ध बाजार रिपोर्टों में ₹1 लाख का स्तर किसी निश्चित भविष्यवाणी के रूप में स्थापित नहीं है।
अगर 24 कैरेट सोना ₹1,52,840 से गिरकर ₹1 लाख पर आता है, तो उसे लगभग 34.5 प्रतिशत की गिरावट झेलनी होगी। इतनी बड़ी गिरावट के लिए बाजार में कई बड़े और लगातार प्रभाव डालने वाले कारणों की जरूरत होगी।
मसलन, अमेरिकी डॉलर में बड़ी मजबूती, ब्याज दरों में अपेक्षा से ज्यादा बढ़ोतरी, सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की मांग में भारी कमी, वैश्विक तनाव में कमी और निवेशकों की बिकवाली जैसी कई परिस्थितियां एक साथ बननी पड़ सकती हैं।
फिलहाल बाजार में इनमें से कुछ कारक मौजूद जरूर हैं, लेकिन इससे सीधे यह निष्कर्ष निकालना कि सोना निश्चित रूप से ₹1 लाख तक गिर जाएगा, उचित नहीं होगा।
अमेरिकी ब्याज दरों का सोने पर असर
सोने की कीमत पर अमेरिका की मौद्रिक नीति का बड़ा प्रभाव पड़ता है। जब ब्याज दरें ऊंची रहती हैं, तो बिना ब्याज देने वाली संपत्ति के रूप में सोने की आकर्षकता कुछ हद तक कम हो सकती है।
हाल की रिपोर्टों में अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति को सोने पर दबाव डालने वाला महत्वपूर्ण कारण बताया गया है। Reuters के मुताबिक सितंबर में फेड की दर बढ़ोतरी के बाद डॉलर मजबूत हुआ और ऊंची ब्याज दरों की संभावना ने सोने पर दबाव बनाया।
25 सितंबर की रिपोर्ट में भी विश्लेषकों ने अमेरिकी ब्याज दरों की उम्मीद, ट्रेजरी यील्ड और डॉलर को सोने की दिशा के लिए महत्वपूर्ण कारक बताया।
अगर आने वाले समय में अमेरिका में ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं और डॉलर मजबूत बना रहता है, तो सोने पर दबाव बढ़ सकता है।
डॉलर और रुपये का खेल भी समझिए
भारत में सोने की कीमत केवल अंतरराष्ट्रीय बाजार से तय नहीं होती। भारतीय रुपये और अमेरिकी डॉलर के बीच विनिमय दर भी घरेलू सोने की कीमत को प्रभावित करती है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना डॉलर में कारोबार करता है। अगर रुपया कमजोर होता है, तो भारत में आयात होने वाला सोना महंगा हो सकता है। इसके विपरीत अगर रुपये में मजबूती आती है और अंतरराष्ट्रीय सोने की कीमत भी गिरती है, तो भारतीय बाजार में गिरावट का असर अधिक दिखाई दे सकता है।
इसीलिए यह संभव है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत कम हो, लेकिन भारत में गिरावट उतनी बड़ी न दिखाई दे।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्या हो रहा है?
25 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड करीब $4,288 प्रति औंस के आसपास था और सप्ताह के दौरान करीब 2 प्रतिशत नीचे था। अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स करीब $4,323 प्रति औंस के स्तर पर कारोबार कर रहे थे।
यह गिरावट बताती है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने को लेकर दबाव जरूर है। लेकिन कीमत अभी भी ऐतिहासिक रूप से बहुत ऊंचे स्तर पर है।
इसलिए मौजूदा स्थिति को सीधे 'Gold Crash' कहना भी सावधानी से किया जाना चाहिए। बाजार में करेक्शन और अस्थायी गिरावट होना अलग बात है, जबकि लंबे समय तक चलने वाली बड़ी गिरावट अलग।
अगस्त के मुकाबले सितंबर में करेक्शन
सितंबर में सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ा है। कुछ रिपोर्टों के अनुसार अगस्त की ऊंचाई से भारतीय बाजार में सोना करीब ₹8,000 तक नीचे आया था और सितंबर में लगभग 4-5 फीसदी का करेक्शन देखने को मिला।
यानी सोने में पहले ही कुछ मुनाफावसूली हो चुकी है।
यही वजह है कि अब निवेशकों की नजर इस बात पर है कि मौजूदा गिरावट यहीं रुकती है या बाजार में एक और बड़ा करेक्शन आता है।
क्या ₹1 लाख पर सोना खरीदने का मौका मिलेगा?
यह सवाल उन लोगों के लिए सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है जो सोने की कीमत गिरने का इंतजार कर रहे हैं।
अगर कभी 24 कैरेट सोना ₹1 लाख प्रति 10 ग्राम तक पहुंचता है, तो मौजूदा ₹1.52 लाख से यह बहुत बड़ी गिरावट होगी। लेकिन ऐसा स्तर आने की कोई निश्चित पुष्टि या गारंटी फिलहाल उपलब्ध नहीं है।
सोने की कीमत कई वैश्विक कारकों पर निर्भर करती है। इसलिए केवल सोशल मीडिया पोस्ट या किसी वीडियो में कही गई बात के आधार पर यह मान लेना कि सोना निश्चित रूप से ₹1 लाख हो जाएगा, जोखिम भरा हो सकता है।
शादी के लिए सोना खरीदने वालों के लिए क्या मतलब?
भारत में सोने की खरीद केवल निवेश के लिए नहीं होती। शादी-ब्याह और त्योहारों के मौसम में भी सोने की मांग बढ़ सकती है।
ज्वेलरी खरीदते समय ग्राहक को केवल 24 कैरेट के बाजार भाव को नहीं देखना चाहिए। आभूषणों में आमतौर पर 22 कैरेट या अन्य शुद्धता का सोना इस्तेमाल होता है। इसके अलावा मेकिंग चार्ज, GST और अन्य लागत भी अंतिम बिल को प्रभावित करती हैं।
इसलिए बाजार में 24 कैरेट का भाव ₹1.52 लाख प्रति 10 ग्राम होने का मतलब यह नहीं है कि किसी दुकान पर 10 ग्राम का 22 कैरेट आभूषण ठीक इसी कीमत पर मिलेगा।
अगर सोना ₹1 लाख तक गिरा तो कितना बड़ा बदलाव होगा?
मौजूदा करीब ₹1,52,840 प्रति 10 ग्राम से ₹1 लाख तक आने पर लगभग ₹52,840 की गिरावट होगी।
प्रतिशत में देखें तो यह करीब 34.5 फीसदी की गिरावट होगी।
इतना बड़ा बदलाव सोने के बाजार के लिए असाधारण होगा। इसलिए ₹1 लाख का लक्ष्य फिलहाल एक संभावित या काल्पनिक बाजार परिदृश्य के रूप में ही देखा जाना चाहिए, न कि पक्की भविष्यवाणी के रूप में।
आगे किन चीजों पर नजर रखनी होगी?
आने वाले दिनों में सोने की दिशा समझने के लिए निवेशकों को कई संकेतकों पर नजर रखनी होगी।
सबसे पहले अमेरिकी फेड की ब्याज दर नीति महत्वपूर्ण होगी। इसके अलावा डॉलर इंडेक्स, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, वैश्विक महंगाई, केंद्रीय बैंकों की सोने की खरीद, भू-राजनीतिक तनाव और भारत में रुपये की स्थिति भी महत्वपूर्ण रहेगी।
अगर डॉलर मजबूत होता है और ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं, तो सोने पर दबाव रह सकता है। वहीं वैश्विक तनाव बढ़ने या निवेशकों की सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ने पर सोने को दोबारा समर्थन मिल सकता है।
तो क्या सच में आएगा Gold Price Crash?
फिलहाल उपलब्ध आंकड़ों से इतना जरूर कहा जा सकता है कि सोने में हालिया ऊंचाई से करेक्शन आया है और बाजार में उतार-चढ़ाव तेज है। 25 सितंबर को घरेलू बाजार में 24 कैरेट सोना करीब ₹1.52 लाख प्रति 10 ग्राम और MCX पर सोना करीब ₹1.54 लाख के आसपास कारोबार कर रहा था।
लेकिन ₹1 लाख प्रति 10 ग्राम तक गिरने की बात को अभी निश्चित भविष्यवाणी नहीं माना जा सकता। इसके लिए मौजूदा स्तर से करीब 34 फीसदी की अतिरिक्त गिरावट चाहिए होगी।
इसलिए Gold Price Today देखने वाले लोगों के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि सोने की कीमत में गिरावट जरूर आई है, लेकिन ₹1 लाख का स्तर फिलहाल बाजार में प्रमाणित लक्ष्य नहीं है। सोने की कीमत आगे बढ़ेगी या गिरेगी, यह वैश्विक ब्याज दरों, डॉलर, रुपये, भू-राजनीतिक घटनाक्रम और निवेश मांग जैसे कई कारकों पर निर्भर करेगा।
सोने के खुदरा भाव शहर, शुद्धता, GST, मेकिंग चार्ज और ज्वेलर के अनुसार अलग हो सकते हैं। निवेश या खरीद-बिक्री का फैसला केवल किसी वायरल दावे के आधार पर नहीं लेना चाहिए।

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