पति की मौत, गोद में मासूम बेटी और 6 साल का इंतजार… ससुराल के दरवाजे पर पहुंची महिला तो सामने आया बड़ा राज
झांसी में पति की मौत के बाद एक महिला और उसकी बेटी के सामने रहने और भरण-पोषण का संकट खड़ा होने का मामला सामने आया है। महिला अपनी मासूम बेटी के साथ वर्षों बाद ससुराल पहुंची और घर के बाहर बैठ गई। महिला का आरोप है कि पति की मौत के कुछ समय बाद ही उसे बेटी समेत ससुराल से बाहर कर दिया गया था। इसके बाद वह मायके में रहकर मेहनत-मजदूरी करती रही और किसी तरह अपनी बेटी की परवरिश करती रही।
महिला का कहना है कि पिछले करीब पांच-छह वर्षों से वह अपने और अपनी बेटी के अधिकारों के लिए अधिकारियों के चक्कर लगा रही है। उसने मुख्यमंत्री और प्रशासनिक अधिकारियों से शिकायत कर मामले में हस्तक्षेप की मांग की। शिकायत के बाद पुलिस महिला को लेकर उसके ससुराल पहुंची, लेकिन वहां भी विवाद का तत्काल समाधान नहीं हो सका। महिला के मुताबिक पुलिस की मौजूदगी में उसकी सास ने उसे घर में रखने से इनकार कर दिया।
इसके बाद महिला अपनी बेटी के साथ ससुराल के दरवाजे पर बैठ गई और अपने अधिकारों की मांग करने लगी। घटना की जानकारी सामने आने के बाद इलाके में भी मामला चर्चा का विषय बन गया है।
पति की मौत के समय गर्भवती थी महिला
बताया जा रहा है कि पूरा मामला झांसी के मऊरानीपुर थाना क्षेत्र के परवारीपुरा मोहल्ले से जुड़ा है। ग्राम भंडरा निवासी नेहा की शादी परवारीपुरा निवासी वासुदेव प्रजापति के साथ हुई थी।
नेहा के अनुसार वर्ष 2019 में उसके पति वासुदेव की मौत हो गई थी। महिला का दावा है कि उस समय वह गर्भवती थी। पति की मौत के बाद उसके जीवन में अचानक बड़ा संकट खड़ा हो गया। महिला के अनुसार पति की मौत के कुछ समय बाद ही ससुराल पक्ष ने उसे घर से बाहर कर दिया।
इसके बाद उसे अपनी बेटी के साथ मायके लौटना पड़ा। महिला का कहना है कि उस समय उसकी बेटी छोटी थी और उसके सामने सबसे बड़ी चुनौती बच्ची के पालन-पोषण के साथ रहने की व्यवस्था करना था।
नेहा के मुताबिक पति की मौत के बाद उसे उम्मीद थी कि ससुराल में उसे और उसकी बेटी को सहारा मिलेगा, लेकिन परिस्थितियां इसके विपरीत हो गईं। इसके बाद उसने मायके में रहकर अपनी जिंदगी दोबारा शुरू करने की कोशिश की।
मजदूरी करके बेटी को पालने का दावा
नेहा का कहना है कि ससुराल से अलग होने के बाद उसके पास आय का कोई स्थायी साधन नहीं था। ऐसे में उसने मेहनत-मजदूरी शुरू कर दी। महिला के अनुसार पिछले करीब पांच-छह वर्षों से वह मजदूरी करके अपनी बेटी का पालन-पोषण कर रही है।
उसका कहना है कि बेटी की पढ़ाई, खाने-पीने और रोजमर्रा की जरूरतों का खर्च उठाने की जिम्मेदारी भी उसी के ऊपर रही है। आर्थिक परेशानियों के बावजूद उसने अपनी बेटी को संभालने की कोशिश की।
महिला का आरोप है कि इतने वर्षों के दौरान उसने कई बार अपने ससुराल पक्ष से संपर्क कर अपनी स्थिति बताई, लेकिन उसे घर में रहने की अनुमति नहीं मिली। उसका यह भी दावा है कि पति से जुड़े संपत्ति और अन्य अधिकारों को लेकर भी उसे स्पष्ट जानकारी या अपना हक नहीं मिल सका।
हालांकि इन आरोपों की वास्तविक स्थिति क्या है, यह संबंधित दस्तावेजों और जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
मुख्यमंत्री से शिकायत के बाद पुलिस पहुंची ससुराल
काफी समय तक समाधान नहीं मिलने के बाद नेहा ने मुख्यमंत्री सहित जिला और स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों को प्रार्थना पत्र देकर अपनी समस्या बताई। उसने शिकायत में अपनी और अपनी बेटी की स्थिति का उल्लेख करते हुए न्याय की मांग की।
महिला का कहना है कि उसने अधिकारियों से यह भी मांग की कि उसे और उसकी बेटी को उनके वैधानिक अधिकार दिलाए जाएं तथा पति से संबंधित संपत्ति और अन्य मामलों की जांच कराई जाए।
शिकायत के बाद पुलिस महिला को लेकर उसके ससुराल पहुंची। महिला को उम्मीद थी कि पुलिस की मौजूदगी में बातचीत होगी और लंबे समय से चला आ रहा विवाद खत्म हो जाएगा।
लेकिन महिला के मुताबिक ससुराल पहुंचने के बाद भी स्थिति नहीं बदली। उसका आरोप है कि उसकी सास ने पुलिस के सामने ही उसे घर में रखने से इनकार कर दिया।
ताले नहीं खुले तो दरवाजे पर बैठ गई महिला
महिला के अनुसार ससुराल पहुंचने के बाद घर के कमरों के ताले नहीं खोले गए। इसके बाद वह अपनी बेटी के साथ घर के बाहर ही बैठ गई।
नेहा का कहना है कि वह कई वर्षों से मायके में रहकर अपनी बेटी की परवरिश कर रही है। अब वह चाहती है कि उसके और उसकी बेटी के अधिकारों को लेकर उचित निर्णय हो।
महिला ने कहा कि वह किसी विवाद को बढ़ाना नहीं चाहती, लेकिन वह अपनी बेटी के भविष्य को लेकर चिंतित है। उसका कहना है कि इतने वर्षों तक संघर्ष करने के बाद वह अब प्रशासन से न्याय की उम्मीद कर रही है।
घर के बाहर बैठी महिला और उसकी बेटी की स्थिति देखकर मौके पर मौजूद लोगों में भी मामले को लेकर चर्चा शुरू हो गई।
पति की एलआईसी पॉलिसी को लेकर भी उठाया सवाल
मामले में नेहा ने अपने पति के नाम रही एलआईसी पॉलिसी का मुद्दा भी उठाया है। महिला का आरोप है कि उसके पति के नाम मौजूद पॉलिसी की रकम कथित तौर पर गलत रिपोर्ट के माध्यम से निकाल ली गई।
नेहा ने प्रशासन से इस मामले की भी जांच कराने की मांग की है। उसका कहना है कि यदि पति के नाम कोई बीमा पॉलिसी, संपत्ति या अन्य आर्थिक अधिकार थे तो उनकी वास्तविक स्थिति सामने आनी चाहिए।
महिला की मांग है कि संबंधित दस्तावेजों की जांच की जाए और यह पता लगाया जाए कि पॉलिसी की रकम किसे और किस आधार पर मिली। साथ ही वह चाहती है कि पति की संपत्ति और अन्य वित्तीय मामलों में उसके और उसकी बेटी के अधिकारों की भी जांच की जाए।
हालांकि एलआईसी की रकम को लेकर लगाए गए आरोपों की पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसकी वास्तविक स्थिति संबंधित रिकॉर्ड और दस्तावेजों की जांच के बाद ही सामने आ सकती है।
ससुराल पक्ष ने आरोपों से किया इनकार
दूसरी तरफ ससुराल पक्ष ने महिला के सभी आरोपों को स्वीकार नहीं किया है। वासुदेव की मां अंगूरी बाई ने कहा कि उनकी बहू अपनी बच्ची के साथ अपने हक की मांग को लेकर घर आई है, लेकिन वह उसे अपने साथ रखने की स्थिति में नहीं हैं।
अंगूरी बाई के मुताबिक उनके बेटे वासुदेव की मौत फांसी लगाने से हुई थी। उन्होंने कहा कि उनके पास खुद जीवन-यापन के पर्याप्त साधन नहीं हैं और ऐसी स्थिति में वह अपनी बहू और नातिन की जिम्मेदारी उठाने में सक्षम नहीं हैं।
सास ने बहू की ओर से लगाए गए कुछ अन्य आरोपों को भी गलत बताया। उनका कहना है कि उन पर बच्ची को गोद लेने समेत अन्य आरोप लगाए जा रहे हैं, लेकिन वह इन आरोपों से सहमत नहीं हैं।
इस तरह मामले में दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं और विवाद का वास्तविक तथ्य जांच के बाद ही सामने आ सकेगा।
बेटी के भविष्य को लेकर चिंतित है महिला
पूरे मामले में सबसे अहम मुद्दा महिला की बेटी का भविष्य बताया जा रहा है। नेहा का कहना है कि पति की मौत के समय वह गर्भवती थी और इसके बाद उसने अकेले ही बच्ची की परवरिश की।
महिला के मुताबिक उसने अपनी आर्थिक परेशानियों के बावजूद मजदूरी करके बच्ची को बड़ा किया। अब वह चाहती है कि उसकी बेटी को भी उसके पिता से जुड़े वैधानिक अधिकार मिलें।
महिला का कहना है कि वह वर्षों से संघर्ष कर रही है और अब प्रशासन से उम्मीद है कि मामले में निष्पक्ष तरीके से जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस जुटा रही मामले की जानकारी
फिलहाल पुलिस दोनों पक्षों के बयानों और शिकायतों के आधार पर मामले की जानकारी जुटा रही है। पति की मौत से जुड़े पुराने रिकॉर्ड, संपत्ति से संबंधित दस्तावेज, एलआईसी पॉलिसी और महिला-बेटी के वैधानिक अधिकार जैसे अलग-अलग पहलुओं की जांच आवश्यक होगी।
मामले में यह भी देखा जाना होगा कि महिला और उसकी बेटी के अधिकार क्या हैं और संबंधित संपत्ति या बीमा राशि को लेकर कानूनी स्थिति क्या बनती है।
पुलिस और प्रशासन की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि महिला द्वारा लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और ससुराल पक्ष की ओर से कही गई बातों का वास्तविक तथ्य क्या है।
वर्षों बाद फिर ससुराल के दरवाजे पर पहुंची महिला
पति की मौत के बाद वर्षों तक मायके में रहकर बेटी का पालन-पोषण करने वाली नेहा अब दोबारा अपने ससुराल के दरवाजे पर पहुंची है। उसके साथ उसकी बेटी भी है। महिला का कहना है कि वह अपने और अपनी बेटी के अधिकारों के लिए संघर्ष कर रही है।
फिलहाल मामला प्रशासन और पुलिस के सामने है। एक तरफ महिला अपने पति से जुड़े अधिकारों और बेटी के भविष्य को लेकर न्याय की मांग कर रही है, जबकि दूसरी तरफ ससुराल पक्ष उसे घर में रखने से इनकार कर रहा है।
पति की मौत, संपत्ति, एलआईसी की रकम और महिला-बेटी के अधिकारों से जुड़े सभी सवालों का अंतिम जवाब संबंधित दस्तावेजों और आधिकारिक जांच के बाद ही सामने आएगा। फिलहाल महिला और उसकी बेटी को उम्मीद है कि प्रशासन पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर उन्हें उचित राहत दिलाएगा।

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