किचन में मिला सिर, ट्रेन में पहुंचा धड़... 4 लाख और गहनों के लालच में हयात की हत्या, 24 दिन बाद ऐसे खुला खौफनाक राज!
गुनाह कितना भी शातिर तरीके से क्यों न किया जाए, अपराधी अक्सर कोई न कोई ऐसी गलती कर बैठता है, जो उसे कानून के शिकंजे तक पहुंचा देती है। तमिलनाडु से आगरा तक फैले एक सनसनीखेज हत्याकांड में भी कुछ ऐसा ही हुआ। आरोपियों ने कथित तौर पर एक महिला की हत्या के बाद उसके शव को ठिकाने लगाने के लिए करीब 2 हजार किलोमीटर दूर भेजने की योजना बनाई थी। उन्हें भरोसा था कि ट्रेन में लावारिस हालत में शव मिलने के बाद पुलिस के लिए हत्या की कड़ी चेन्नई तक पहुंचाना बेहद मुश्किल होगा।
लेकिन एक लाल ट्रॉली बैग, CCTV कैमरे और एक ऐसी गलती, जिसे आरोपी शायद मामूली समझकर आगे बढ़ गए थे, आखिरकार पूरी साजिश पर भारी पड़ गई।
मामला 5 अगस्त की सुबह करीब 5 बजे का है। आगरा कैंट रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर एक पर तमिलनाडु एक्सप्रेस आकर रुकी। ट्रेन के पिछले जनरल कोच में मौजूद यात्रियों ने कुछ देर पहले एक लाल रंग के ट्रॉली बैग से दुर्गंध आने की शिकायत की थी। सूचना मिलने पर GRP के जवान कोच में पहुंचे।
सीट के नीचे एक लाल ट्रॉली बैग पड़ा था। बैग से संदिग्ध तरल पदार्थ बाहर निकल रहा था। पुलिस ने जब बैग खोला तो उसके अंदर महिला के शव के कटे हुए हिस्से मिले। शव का सिर गायब था। इसके बाद मामला केवल लावारिस शव का नहीं रहा, बल्कि पुलिस के सामने एक बेहद गंभीर हत्या की गुत्थी खड़ी हो गई।
एक लाल बैग ने शुरू की पूरी जांच
पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल था कि मृतका कौन है और आखिर इस शव को इतनी दूर ट्रेन में कौन छोड़कर गया?
जांच के दौरान शव को जिस सामग्री में लपेटा गया था, उससे चेन्नई का सुराग मिला। इसके बाद पुलिस ने यह संभावना मानकर जांच आगे बढ़ाई कि हत्या का संबंध तमिलनाडु से हो सकता है।
जांचकर्ताओं ने चेन्नई सेंट्रल रेलवे स्टेशन के CCTV कैमरों की रिकॉर्डिंग खंगालनी शुरू की। घंटों की फुटेज के बीच पुलिस को दो संदिग्ध नजर आए। एक महिला और एक पुरुष लाल रंग का वैसा ही ट्रॉली बैग लेकर प्लेटफॉर्म पर दिखाई दिए, जैसा बाद में आगरा में बरामद हुआ था।
CCTV में दोनों कथित तौर पर बैग को ट्रेन के जनरल कोच में रखते दिखाई दिए। इसके बाद दोनों ट्रेन में सवार होने के बजाय स्टेशन से बाहर निकल गए।
यहीं से जांच को पहली बड़ी सफलता मिली।
चेहरों की पहचान बनी पुलिस के लिए चुनौती
चेन्नई जैसे बड़े शहर में केवल CCTV फुटेज के आधार पर दो लोगों की पहचान करना आसान नहीं था। पुलिस के पास चेहरे थे, लेकिन नाम और ठिकाना नहीं।
जांच टीम ने CCTV फुटेज, स्थानीय स्तर की जानकारी और खुफिया तंत्र की मदद से संदिग्धों की तलाश शुरू की। कई दिनों तक कोई ठोस सफलता नहीं मिली।
फिर जांचकर्ताओं को गुडुवांचेरी इलाके से एक अहम सुराग मिला।
एक किराए के मकान से जुड़े लोगों की गतिविधियां पुलिस की जांच के दायरे में आईं। पुलिस जब वहां पहुंची तो घर बंद मिला। मकान के अंदर तलाशी शुरू की गई।
किचन के पतीले ने खोला दूसरा राज
कमरे, अलमारी और दूसरी जगहों की तलाशी के बाद पुलिस की नजर किचन में रखे एक बड़े भारी पतीले पर गई। पतीले पर ढक्कन लगा था।
पुलिस को संदेह हुआ और जब ढक्कन हटाया गया तो जांचकर्ताओं के सामने ऐसा सुराग आया, जिसने पूरे मामले को और भयावह बना दिया। पुलिस के मुताबिक, पतीले के अंदर मृतका का गायब सिर और शव के कुछ अन्य हिस्से मिले।
अब पुलिस के सामने सिर्फ यह सवाल नहीं था कि शव आगरा तक कैसे पहुंचा, बल्कि यह भी स्पष्ट होने लगा कि हत्या के बाद शव के अलग-अलग हिस्सों को अलग-अलग जगहों पर छिपाने की कोशिश की गई थी।
जिस मकान से यह बरामदगी हुई, वहां मनिकउद्दीन लस्कर नाम का व्यक्ति भगवती माझी के साथ रहता था। पुलिस ने जब आसपास के लोगों से पूछताछ की तो पता चला कि दोनों कुछ समय से वहां रह रहे थे और बाद में अचानक गायब हो गए।
पड़ोसियों ने यह भी बताया कि उनके साथ हयात उन निशा नाम की एक महिला भी रहने आई थी। इसके बाद पुलिस ने हयात की गुमशुदगी को मामले से जोड़कर जांच शुरू की।
17 साल के बेटे की शिकायत से मिला बड़ा सुराग
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि स्थानीय थाने में एक 17 वर्षीय लड़के ने अपनी मां के लापता होने की शिकायत दर्ज कराई थी। उसकी मां का नाम हयात उन निशा था।
इसके बाद पुलिस ने लड़के से पूछताछ की। पूछताछ में सामने आया कि हयात मूल रूप से ओडिशा के जगतसिंहपुर की रहने वाली थी और चेन्नई में काम करती थी।
बताया गया कि उसकी नजदीकी मनिकउद्दीन से हुई थी। बाद में हयात उसी मकान में रहने लगी, जहां मनिकउद्दीन और भगवती रहते थे।
पुलिस ने अब आगरा से मिले शव और चेन्नई में मिली बरामदगी को हयात की गुमशुदगी से जोड़कर जांच आगे बढ़ाई।
ओडिशा पहुंची पुलिस, परिवार ने की पहचान
जांच टीम ओडिशा के जगतसिंहपुर पहुंची और हयात के परिवार से संपर्क किया। पुलिस ने आगरा से मिले शव से संबंधित तस्वीरें और अन्य पहचान संबंधी जानकारी परिवार के सामने रखी।
परिवार की पहचान और जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर पुलिस को विश्वास हुआ कि आगरा में मिला शव हयात उन निशा का ही है।
इससे हत्या की गुत्थी का एक बड़ा हिस्सा सुलझ गया। अब पुलिस के सामने मुख्य सवाल था—हयात की हत्या किसने की और क्यों?
पैसे और गहनों के लिए हत्या का आरोप
पुलिस पूछताछ में आरोपियों से जुड़े जो दावे सामने आए, वे इस मामले को और गंभीर बनाते हैं। पुलिस के मुताबिक, हयात के पास बैंक खाते में करीब 4 लाख रुपये थे। इसके अलावा उसके पास सोने के कुछ आभूषण भी थे।
जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपियों ने कथित तौर पर इन्हीं पैसों और गहनों को हासिल करने के इरादे से हत्या की साजिश रची।
आरोप है कि हयात जब सो रही थी, तभी उसका गला दबाकर हत्या कर दी गई। इसके बाद शव को ठिकाने लगाने के लिए उसे कई हिस्सों में बांटा गया।
धड़ और शरीर के कुछ हिस्सों को लाल ट्रॉली बैग में रखा गया, जबकि सिर और कुछ अन्य हिस्सों को किचन में छिपा दिया गया।
दिल्ली तक पहुंचाने की बनाई थी योजना
जांच के मुताबिक, आरोपियों ने शव को तमिलनाडु एक्सप्रेस में इसलिए रखा ताकि वह चेन्नई से बहुत दूर चला जाए। कथित योजना यह थी कि ट्रेन के दिल्ली पहुंचने तक शव बरामद होगा और पुलिस को हत्या की असली जगह तक पहुंचने में काफी मुश्किल होगी।
लेकिन यह योजना पूरी तरह सफल नहीं हो सकी।
ट्रेन में ही यात्रियों को बैग से दुर्गंध आने लगी और इसकी सूचना पुलिस तक पहुंच गई। आगरा में बैग खुला तो हत्या का राज सामने आ गया।
इसके बाद जांच का सबसे अहम हिस्सा शुरू हुआ—आगरा से मिले शव को चेन्नई से जोड़ना।
एक छोटी सी गलती ने सब कुछ बदल दिया
आरोपियों की सबसे बड़ी गलती CCTV कैमरे बने। पुलिस के मुताबिक, दोनों संदिग्ध जब लाल ट्रॉली बैग लेकर चेन्नई स्टेशन पहुंचे तो उन्होंने अपने चेहरे छिपाने की कोशिश नहीं की।
वे कैमरों में साफ नजर आए।
इसके अलावा शव को लपेटने में इस्तेमाल सामग्री पर चेन्नई से जुड़ा संकेत भी मिला। इसने जांचकर्ताओं को सही दिशा में आगे बढ़ने में मदद की।
एक तरफ CCTV फुटेज ने संदिग्धों के चेहरे दिखाए तो दूसरी तरफ स्थानीय जांच ने उनके संभावित ठिकाने तक पहुंचने का रास्ता तैयार किया।
मणिपुर तक पहुंची पुलिस की तलाश
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि मनिकउद्दीन और भगवती चेन्नई से काफी दूर निकल चुके हैं। सर्विलांस और अन्य जांच के आधार पर उनके मणिपुर के जिरीबाम इलाके में होने की जानकारी मिली।
इसके बाद चेन्नई पुलिस की विशेष टीम मणिपुर पहुंची। कई दिनों तक तलाश करने के बाद पुलिस ने 28 अगस्त को दोनों आरोपियों को कथित तौर पर एक झोपड़ी से गिरफ्तार कर लिया।
इसके बाद उन्हें स्थानीय अदालत में पेश किया गया और ट्रांजिट रिमांड के जरिए चेन्नई लाया गया।
अब जांच में कई सवालों के जवाब बाकी
इस मामले में पुलिस के सामने अब कई अहम सवाल हैं। हत्या की पूरी योजना कब बनाई गई? इसमें कितने लोग शामिल थे? हत्या के बाद शव के हिस्सों को अलग-अलग जगहों पर रखने का फैसला किसने लिया? पैसे और गहने कहां गए? और क्या हत्या के पीछे सिर्फ आर्थिक लालच था या इसके पीछे कोई और वजह भी थी?
पुलिस इन सभी पहलुओं की जांच कर रही है।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह दिखाया कि अपराधी कितनी भी सावधानी से अपराध को अंजाम देने की कोशिश करें, जांच एजेंसियों के लिए छोटी से छोटी चीज भी बड़ा सुराग बन सकती है।
इस मामले में एक लाल ट्रॉली बैग ने पुलिस को आगरा तक पहुंचाया, पैकिंग सामग्री ने चेन्नई का रास्ता दिखाया, CCTV ने संदिग्धों के चेहरे सामने रखे और बंद मकान में रखा एक पतीला हत्या की गुत्थी की सबसे अहम कड़ी बन गया।
करीब 2 हजार किलोमीटर दूर शव को फेंककर पुलिस को चकमा देने की कथित योजना आखिरकार उसी जगह से टूट गई, जहां आरोपियों ने शायद सबसे कम खतरा समझा था—कैमरे की नजर के सामने।
अब अदालत में होने वाली सुनवाई और पुलिस की आगे की जांच से यह स्पष्ट होगा कि इस खौफनाक हत्याकांड में वास्तव में पूरी साजिश कैसे रची गई और इसमें आरोपियों की भूमिका किस स्तर तक थी।

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