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शादी का झांसा देकर बुलाता, फिर नदी में फेंक देता था… इस सीरियल किलर का खौफनाक राज खुला तो कांप उठे लोग



ढाका/चांदपुर। अपराध की दुनिया में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनकी कहानी सुनकर लोगों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं। बांग्लादेश के चांदपुर से सामने आया रासू खान (Rasu Kha) का मामला भी ऐसा ही है। पुलिस और अभियोजन पक्ष के मुताबिक, रासू ने पूछताछ के दौरान कम से कम 11 महिलाओं की हत्या करने की बात कबूल की थी। इनमें अधिकांश महिलाएं गारमेंट फैक्ट्रियों में काम करती थीं। उसके खिलाफ कई अलग-अलग हत्या के मुकदमे चले और कम से कम दो मामलों में अदालतों ने उसे मौत की सजा सुनाई। जुलाई 2024 में बांग्लादेश हाई कोर्ट ने परवीन अख्तर की हत्या के मामले में उसकी मौत की सजा बरकरार रखी।

रासू खान का मामला 2009 में उस समय सामने आया, जब पुलिस ने उसे एक मस्जिद से पंखे चोरी करने के मामले में गिरफ्तार किया। पूछताछ के दौरान पुलिस को उसके मोबाइल फोन और महिलाओं से जुड़े मामलों के बारे में जानकारी मिली। इसके बाद जांच आगे बढ़ी और रासू ने पुलिस के सामने कई महिलाओं की हत्या की बात स्वीकार की। हालांकि, उसके सभी कथित अपराधों को अदालतों में समान रूप से साबित नहीं किया गया। एक मामले में हाई कोर्ट ने उसकी दोषसिद्धि और मौत की सजा को खारिज कर दिया था। इसलिए उसके बारे में उपलब्ध रिकॉर्ड को अलग-अलग मामलों और अदालतों के फैसलों के संदर्भ में समझना जरूरी है।

एक हत्या के मामले में सुनाई गई थी मौत की सजा

रासू खान के खिलाफ सबसे चर्चित मामलों में से एक शाहिदा बेगम की हत्या का था। अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार, दिसंबर 2008 में चांदपुर इलाके में शाहिदा की हत्या का मामला दर्ज हुआ था। बाद में रासू की गिरफ्तारी और पूछताछ के बाद इस मामले की जांच फिर से आगे बढ़ी।

बांग्लादेशी मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, शाहिदा गारमेंट सेक्टर में काम करती थीं। अप्रैल 2015 में चांदपुर की एक अदालत ने रासू खान को शाहिदा की हत्या के मामले में मौत की सजा सुनाई थी। उसे अतिरिक्त सजा और जुर्माना भी लगाया गया था। रासू ने इस फैसले के खिलाफ अपील की थी।

शाहिदा मामले में अदालत के सामने अभियोजन पक्ष ने कहा था कि रासू ने महिला को अपने विश्वास में लिया और बाद में उसकी हत्या कर दी। पुलिस जांच में शव को नदी के पास बरामद किए जाने की बात सामने आई थी। इस मामले में जांच और अदालत की कार्रवाई कई वर्षों तक चली।

गिरफ्तारी चोरी के मामले में हुई, खुलने लगीं हत्याओं की परतें

रासू खान की गिरफ्तारी किसी हत्या के मामले में सीधे तौर पर नहीं हुई थी। 2009 में पुलिस ने उसे कथित तौर पर एक मस्जिद से पंखे चोरी करने के मामले में पकड़ा था। इसके बाद जांच के दौरान पुलिस को उसके संपर्क में रहे लोगों और मोबाइल फोन से जुड़ी जानकारी मिली।

एक महिला की हत्या के मामले में मोबाइल फोन की जांच के दौरान पुलिस को रासू से जुड़ा लिंक मिला। इसके बाद उससे पूछताछ की गई। रिपोर्टों के मुताबिक, पूछताछ के दौरान उसने एक के बाद एक कई महिलाओं की हत्या के बारे में जानकारी दी। पुलिस के अनुसार, उसने 11 महिलाओं की हत्या की बात स्वीकार की थी।

उसके कबूलनामे के बाद पुलिस ने अलग-अलग स्थानों पर दर्ज पुराने मामलों की भी जांच शुरू की। रिपोर्टों में बताया गया कि कथित हत्याएं चांदपुर के विभिन्न इलाकों में हुई थीं।

ज्यादातर पीड़िताएं गारमेंट सेक्टर से जुड़ी थीं

पुलिस और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, रासू ने जिन महिलाओं की हत्या करने की बात स्वीकार की थी, उनमें अधिकांश गारमेंट फैक्ट्रियों में काम करती थीं। वह महिलाओं से संपर्क बनाने के लिए कथित तौर पर प्रेम संबंध या शादी का भरोसा देने का तरीका अपनाता था।

इसके बाद वह उन्हें चांदपुर के अपेक्षाकृत सुनसान इलाकों में ले जाता था। पुलिस के सामने दिए गए उसके कथित बयान के अनुसार, वहां वह महिलाओं पर हमला करता और उनकी हत्या कर देता था। कई मामलों में शवों को पानी या नदी के आसपास छोड़ने की बात भी सामने आई थी।

हालांकि, इन कबूलनामों में बताए गए हर मामले का कानूनी परिणाम एक जैसा नहीं रहा। कुछ मामलों में उसे दोषी ठहराया गया, जबकि कम से कम एक हत्या के मामले में अदालत ने उसे बरी कर दिया। यह अंतर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पुलिस के सामने कथित स्वीकारोक्ति और अदालत में अपराध सिद्ध होना दो अलग-अलग कानूनी बातें हैं।

101 महिलाओं को निशाना बनाने का दावा

रासू खान के मामले को और अधिक भयावह बनाने वाली बात उसका कथित 101 महिलाओं की हत्या का लक्ष्य था। पुलिस और बांग्लादेशी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उसने पूछताछ के दौरान दावा किया था कि वह 101 महिलाओं की हत्या करना चाहता था।

रिपोर्टों में उसके हवाले से कहा गया कि युवावस्था में एक लड़की द्वारा कथित तौर पर ठुकराए जाने और उसके परिवार के लोगों से विवाद के बाद उसके मन में महिलाओं के प्रति बदला लेने की भावना पैदा हुई। इसके बाद उसने 101 महिलाओं को मारने का लक्ष्य तय करने की बात कही।

यह भी रिपोर्ट किया गया कि 101 हत्याओं के बाद वह दुनिया से अलग होकर किसी सूफी दरगाह में साधु जैसा जीवन बिताने की योजना की बात करता था। हालांकि, यह उसके द्वारा जांच के दौरान बताया गया कथित मकसद था, जिसे उसके अपराधों का स्वतंत्र प्रमाण नहीं माना जा सकता।

11 हत्याओं की बात कबूल करने का दावा

2009 में पुलिस के सामने रासू द्वारा कम से कम 11 महिलाओं की हत्या की बात कबूल करने की खबर सामने आई थी। उस समय पुलिस ने बताया था कि उसने अलग-अलग इलाकों में महिलाओं को निशाना बनाने की बात कही। उसके कथित कबूलनामे में छह हत्याएं फरिदगंज, चार चांदपुर सदर और एक हत्या हाइमचर क्षेत्र से जुड़ी बताई गई थी।

उस समय पुलिस ने यह भी कहा था कि सभी कथित पीड़ितों की पहचान तत्काल नहीं हो सकी थी। बाद की रिपोर्टों में कुछ महिलाओं की पहचान का उल्लेख किया गया।

यही वजह थी कि पुलिस के सामने आए उसके बयान के बाद कई पुराने और अनसुलझे मामलों की फाइलें फिर से जांच के दायरे में आईं।

परवीन अख्तर हत्या मामले में भी मिली मौत की सजा

रासू खान के खिलाफ एक अन्य महत्वपूर्ण मामला परवीन अख्तर की हत्या से जुड़ा था। मार्च 2018 में चांदपुर की महिला एवं बाल उत्पीड़न रोकथाम अदालत ने रासू खान, उसके भतीजे जाहिरुल इस्लाम और एक अन्य आरोपी यूनुस को परवीन की हत्या के मामले में मौत की सजा सुनाई थी।

मामला बाद में हाई कोर्ट पहुंचा। जुलाई 2024 में बांग्लादेश हाई कोर्ट ने परवीन अख्तर हत्या मामले में रासू खान की मौत की सजा बरकरार रखी। वहीं उसके साथ दोषी ठहराए गए दो अन्य लोगों की मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया गया।

यह फैसला रासू खान के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के इतिहास में महत्वपूर्ण पड़ाव माना गया।

एक मामले में हाई कोर्ट ने सजा रद्द भी की

रासू खान से जुड़े मामलों की कहानी पूरी तरह एकतरफा नहीं है। बांग्लादेश के सुप्रीम कोर्ट की प्रकाशित सामग्री के अनुसार, 2015 में एक मामले में निचली अदालत ने उसे हत्या का दोषी ठहराते हुए मौत की सजा दी थी, लेकिन हाई कोर्ट डिवीजन ने बाद में उस मामले में अभियोजन के साक्ष्यों और कथित कबूलनामे की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए मौत की सजा को खारिज कर दिया और उसे बरी कर दिया।

अदालत ने विशेष रूप से इस बात पर ध्यान दिया कि अभियोजन की बताई गई हत्या की प्रक्रिया और चिकित्सकीय साक्ष्यों में अंतर था। इससे स्पष्ट होता है कि किसी व्यक्ति का पुलिस के सामने कथित कबूलनामा अपने आप में हर मामले में दोष सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं होता और अदालत साक्ष्यों की कानूनी जांच करती है।

सालों बाद भी बना रहा मामला चर्चा में

रासू खान की गिरफ्तारी 2009 में हुई थी, लेकिन उसके खिलाफ कई मामलों की कानूनी प्रक्रिया वर्षों तक चलती रही। 2015 में शाहिदा बेगम हत्या मामले में उसे मौत की सजा मिली। 2018 में परवीन अख्तर हत्या मामले में भी उसे मौत की सजा सुनाई गई। इसके बाद अपील की प्रक्रिया चली और जुलाई 2024 में हाई कोर्ट ने परवीन मामले में उसकी मौत की सजा बरकरार रखी।

रासू खान की कहानी इस वजह से भी चर्चा में रही कि उसकी गिरफ्तारी एक कथित चोरी के मामले से हुई और उसी जांच के दौरान पुलिस के सामने कई गंभीर हत्या के आरोपों की परतें खुलने लगीं।

इस मामले से जुड़े तथ्यों को समझना जरूरी

रासू खान को बांग्लादेशी मीडिया ने 'सीरियल किलर' के रूप में रिपोर्ट किया है और उसने पुलिस के सामने 11 महिलाओं की हत्या करने की बात स्वीकार करने का दावा किया था। हालांकि, उसके खिलाफ दर्ज हर मामले का फैसला एक जैसा नहीं रहा। कुछ मामलों में मौत की सजा सुनाई गई, जबकि एक मामले में हाई कोर्ट ने उसे बरी कर दिया।

इसलिए इस मामले की सबसे अहम बात केवल उसके कथित 101 महिलाओं के लक्ष्य की कहानी नहीं, बल्कि यह भी है कि अलग-अलग हत्या के मामलों में अदालतों ने उपलब्ध सबूतों के आधार पर अलग-अलग निष्कर्ष दिए।

जुलाई 2024 तक उपलब्ध विश्वसनीय रिपोर्टों के अनुसार, परवीन अख्तर हत्या मामले में बांग्लादेश हाई कोर्ट ने रासू खान की मौत की सजा बरकरार रखी थी। यह मामला बांग्लादेश में लंबे समय तक चर्चा में रहे उन आपराधिक मामलों में शामिल है, जिसमें पुलिस जांच, कथित स्वीकारोक्ति, अलग-अलग हत्या के मुकदमे और वर्षों तक चली अपील की प्रक्रिया एक-दूसरे से जुड़ी रही।

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