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भारत में 50 अरब डॉलर लगाने की तैयारी! AI और Data Centre पर इतना बड़ा दांव, जानिए क्यों बदली दुनिया की नजर



भारत की तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की बढ़ती मांग के बीच देश के लिए एक बड़ी कारोबारी खबर सामने आई है। स्वीडन की ग्लोबल प्राइवेट इक्विटी कंपनी EQT ने भारत में अगले कुछ वर्षों के दौरान करीब 50 अरब डॉलर निवेश करने की योजना बताई है। कंपनी का बड़ा हिस्सा डेटा सेंटर, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रिन्यूएबल एनर्जी और प्राइवेट इक्विटी में लगाया जा सकता है।

इस प्रस्तावित निवेश की सबसे बड़ी खासियत यह है कि करीब 30 अरब डॉलर डेटा सेंटर क्षेत्र में लगाए जाने की योजना है। इसके अलावा लगभग 5 अरब डॉलर सोलर और रिन्यूएबल एनर्जी में तथा करीब 15 से 20 अरब डॉलर प्राइवेट इक्विटी से जुड़े निवेश में लगाए जा सकते हैं।

यह ऐलान ऐसे समय हुआ है जब भारत में AI आधारित सेवाओं, क्लाउड कंप्यूटिंग और डिजिटल कारोबार के लिए बड़े पैमाने पर डेटा सेंटर की जरूरत बढ़ रही है।

AI की बढ़ती मांग ने बदली निवेश की दिशा

पिछले कुछ वर्षों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने दुनिया भर में कारोबार का तरीका बदल दिया है। AI मॉडल को चलाने, प्रशिक्षित करने और बड़ी मात्रा में डेटा को सुरक्षित रखने के लिए अत्याधुनिक कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत होती है।

इसी वजह से डेटा सेंटर अब सिर्फ IT कंपनियों के लिए जरूरी बुनियादी ढांचा नहीं रह गए हैं, बल्कि वे AI अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं।

EQT की भारत रणनीति में भी यही बदलाव दिखाई दे रहा है। कंपनी ने बताया है कि भारत में उसके निवेश का एक बड़ा हिस्सा अब डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा सेंटर की तरफ बढ़ रहा है। कंपनी के मुताबिक भारत में उसके डेटा सेंटर निवेश पहले ही लगभग 10 अरब डॉलर तक पहुंच चुके हैं और 2030 तक इसमें करीब 20 अरब डॉलर अतिरिक्त लगाए जा सकते हैं।

30 अरब डॉलर सिर्फ Data Centre में लगाने की तैयारी

EQT की योजना में डेटा सेंटर सबसे बड़ा निवेश क्षेत्र दिखाई दे रहा है। कंपनी के मुताबिक भारत में डेटा सेंटर से जुड़े कुल निवेश को लगभग 30 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य है।

इन परियोजनाओं का बड़ा हिस्सा EQT की ग्लोबल डेटा सेंटर प्लेटफॉर्म कंपनी EdgeConneX के माध्यम से किया जा सकता है। भारत में EdgeConneX का Adani Enterprises के साथ संयुक्त उपक्रम भी है।

कंपनी की योजना के अनुसार भारत में उसकी डेटा सेंटर क्षमता मौजूदा करीब 1 गीगावाट से बढ़कर आने वाले वर्षों में लगभग 5 गीगावाट तक पहुंच सकती है। यह विस्तार मुख्य रूप से AI और क्लाउड सेवाओं की बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए किया जा रहा है।

भारत में Data Centre की मांग क्यों बढ़ रही है?

भारत में इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसके साथ ही ऑनलाइन वीडियो, डिजिटल भुगतान, ई-कॉमर्स, क्लाउड सेवाओं और AI आधारित एप्लीकेशन का इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ रहा है।

इन सभी सेवाओं के पीछे बड़ी मात्रा में डेटा को स्टोर और प्रोसेस करने की जरूरत होती है। यही वजह है कि देश में डेटा सेंटर की क्षमता बढ़ाने पर कंपनियां बड़ा निवेश कर रही हैं।

JLL की 2026 की रिपोर्ट के अनुसार भारत की डेटा सेंटर क्षमता 2026 के मध्य में करीब 1.6 गीगावाट से बढ़कर 2029 तक लगभग 6 गीगावाट तक पहुंच सकती है। रिपोर्ट में AI और क्लाउड कंप्यूटिंग को इस विस्तार का प्रमुख कारण बताया गया है।

इससे साफ है कि आने वाले वर्षों में डेटा सेंटर भारत के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा बनने जा रहे हैं।

5 अरब डॉलर Renewable Energy में लगाने की योजना

डेटा सेंटर को चलाने के लिए भारी मात्रा में बिजली की जरूरत होती है। AI आधारित कंप्यूटिंग के बढ़ने के साथ बिजली की मांग और भी बढ़ सकती है।

इसी कारण EQT ने अपनी निवेश योजना में रिन्यूएबल एनर्जी को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया है। कंपनी लगभग 5 अरब डॉलर सोलर और अन्य रिन्यूएबल एनर्जी परियोजनाओं में लगाने की योजना बना रही है।

इसका उद्देश्य सिर्फ डेटा सेंटर के लिए ऊर्जा उपलब्ध कराना ही नहीं है, बल्कि भविष्य में बढ़ने वाली डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की बिजली जरूरतों को अधिक टिकाऊ तरीके से पूरा करना भी हो सकता है।

डेटा सेंटर और रिन्यूएबल एनर्जी का यह संयोजन भारत के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि AI और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार के साथ बिजली की मांग भी बढ़ने की संभावना है।

Private Equity में भी बड़ी रकम

EQT भारत में केवल डेटा सेंटर और ऊर्जा क्षेत्र तक सीमित नहीं रहना चाहती। कंपनी की योजना करीब 15 से 20 अरब डॉलर प्राइवेट इक्विटी और संबंधित निवेश रणनीतियों में लगाने की है।

इसमें बड़ी कंपनियों के साथ-साथ मिड-मार्केट कारोबार और शुरुआती चरण की टेक्नोलॉजी कंपनियां भी शामिल हो सकती हैं।

EQT के अधिकारियों के अनुसार कंपनी भारत में शुरुआती चरण की टेक कंपनियों में भी निवेश के अवसर तलाश रही है। विशेष रूप से Series B और Series C स्तर की ऐसी कंपनियों पर ध्यान दिया जा सकता है, जिनका प्रोडक्ट-मार्केट फिट पहले से स्थापित हो चुका है।

ऐसी कंपनियों में EQT करीब 20 से 50 मिलियन डॉलर तक के निवेश पर विचार कर सकती है और लगभग 3 से 10 प्रतिशत हिस्सेदारी लेने की रणनीति अपना सकती है।

भारत क्यों बना EQT के लिए महत्वपूर्ण?

EQT के अधिकारियों ने भारत को कंपनी की वैश्विक रणनीति में महत्वपूर्ण बाजार बताया है। कंपनी ने 1998 से अब तक भारत में करीब 26 अरब डॉलर का निवेश किया है और लगभग 30 निवेश किए हैं। पिछले तीन वर्षों में कंपनी ने भारत में करीब 7 अरब डॉलर का निवेश किया है।

कंपनी के भारत में निवेश का क्षेत्र भी लगातार बदलता रहा है। शुरुआत में इसका ध्यान मुख्य रूप से टेक्नोलॉजी और IT सर्विसेज पर था। इसके बाद हेल्थकेयर, फार्मास्यूटिकल्स और अन्य क्षेत्रों में निवेश बढ़ा और अब डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तथा डेटा सेंटर कंपनी की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गए हैं।

रोजगार और कारोबार पर क्या असर पड़ सकता है?

इतने बड़े निवेश से सीधे और अप्रत्यक्ष रूप से कई क्षेत्रों में कारोबारी गतिविधियां बढ़ सकती हैं।

डेटा सेंटर परियोजनाओं के निर्माण के लिए जमीन, बिजली, फाइबर नेटवर्क, कूलिंग सिस्टम, इंजीनियरिंग, सुरक्षा और तकनीकी सेवाओं की जरूरत होती है। इसके अलावा डेटा सेंटर के संचालन के लिए IT और तकनीकी विशेषज्ञों की भी आवश्यकता होती है।

रिन्यूएबल एनर्जी परियोजनाओं से सोलर, बैटरी स्टोरेज, पावर ट्रांसमिशन और इंजीनियरिंग से जुड़े कारोबार को भी फायदा मिल सकता है।

वहीं शुरुआती और मिड-मार्केट टेक कंपनियों में निवेश से भारत के स्टार्टअप और टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम को पूंजी मिल सकती है।

भारत के Data Centre सेक्टर में पहले से बढ़ रही है हलचल

EQT का यह निवेश प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब भारत में डेटा सेंटर क्षेत्र में कई बड़ी कंपनियां निवेश कर रही हैं।

JLL के अनुसार भारत में 2026 के मध्य तक डेटा सेंटर क्षमता करीब 1.6 गीगावाट तक पहुंच चुकी थी और 2029 तक इसके 6 गीगावाट तक पहुंचने का अनुमान है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि AI और क्लाउड सेवाओं की मांग इस क्षेत्र के विस्तार की प्रमुख वजह है।

इसका अर्थ है कि आने वाले वर्षों में भारत में डेटा सेंटर के लिए जमीन, बिजली, फाइबर कनेक्टिविटी और नवीकरणीय ऊर्जा की मांग काफी बढ़ सकती है।

क्या भारत बन सकता है AI का बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर हब?

EQT की योजना को भारत में AI इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार के बड़े संकेत के तौर पर देखा जा सकता है।

AI कंपनियों को बड़े कंप्यूटिंग क्लस्टर, हाई-स्पीड नेटवर्क और अत्यधिक विश्वसनीय बिजली की जरूरत होती है। यदि भारत में डेटा सेंटर क्षमता तेजी से बढ़ती है, तो देश में AI सेवाओं और क्लाउड कंप्यूटिंग के लिए आधारभूत ढांचा भी मजबूत हो सकता है।

हालांकि, इस विस्तार के साथ कई चुनौतियां भी जुड़ी हैं। डेटा सेंटर को भारी मात्रा में बिजली और पानी की आवश्यकता हो सकती है। इसके अलावा जमीन, ग्रिड कनेक्शन, फाइबर नेटवर्क और पर्यावरणीय मंजूरियां भी महत्वपूर्ण मुद्दे होंगे।

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह निवेश?

EQT की 50 अरब डॉलर की योजना सिर्फ एक कंपनी के निवेश की कहानी नहीं है। यह इस बात का संकेत भी है कि वैश्विक निवेशक भारत के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, AI और ऊर्जा क्षेत्र में लंबे समय के अवसर देख रहे हैं।

अगर प्रस्तावित निवेश योजना चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ती है तो भारत में डेटा सेंटर क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ रिन्यूएबल एनर्जी, टेक्नोलॉजी कंपनियों और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में भी पूंजी का प्रवाह बढ़ सकता है।

फिलहाल EQT की योजना अगले कुछ वर्षों में भारत में करीब 50 अरब डॉलर लगाने की है, जिसमें करीब 30 अरब डॉलर डेटा सेंटर, लगभग 5 अरब डॉलर रिन्यूएबल एनर्जी और करीब 15 से 20 अरब डॉलर प्राइवेट इक्विटी में जाने की योजना बताई गई है।

अब नजर इस बात पर होगी कि यह निवेश किन राज्यों और शहरों में किया जाता है, कितने चरणों में परियोजनाएं शुरू होती हैं और भारत में AI तथा डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का यह विस्तार किस रफ्तार से आगे बढ़ता है।

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