फेड के एक फैसले से सोना-चांदी में मची खलबली! डॉलर की चाल ने बढ़ाई टेंशन, अब आगे क्या होगा?
अमेरिकी फेडरल रिजर्व के एक बड़े फैसले के बाद बुधवार को वैश्विक वित्तीय बाजारों में हलचल तेज हो गई। फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) ने 15-16 सितंबर 2026 की बैठक में अमेरिकी फेडरल फंड्स रेट में 25 बेसिस पॉइंट यानी 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी का फैसला किया। इसके बाद ब्याज दर का लक्ष्य दायरा 3.75% से बढ़कर 4% हो गया। यह 2023 के बाद फेड की पहली दर बढ़ोतरी है।
फेड का यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब अमेरिका में महंगाई अभी भी केंद्रीय बैंक के 2% लक्ष्य से काफी ऊपर बनी हुई है। अमेरिकी ब्यूरो ऑफ लेबर स्टैटिस्टिक्स के मुताबिक, अगस्त 2026 में कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स यानी CPI सालाना आधार पर 3.4% बढ़ा। महीने के आधार पर भी CPI में 0.4% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। वहीं, खाद्य और ऊर्जा को छोड़कर कोर CPI सालाना आधार पर 2.9% बढ़ा।
फेड ने अपने बयान में कहा कि महंगाई अभी भी ऊंची है और मौद्रिक नीति का उद्देश्य इसे 2% के लक्ष्य की ओर वापस लाना है। केंद्रीय बैंक ने यह भी कहा कि आर्थिक गतिविधियां ठोस गति से बढ़ रही हैं और घरेलू खर्च लचीला बना हुआ है।
2023 के बाद पहली बार बढ़ी ब्याज दर
फेडरल रिजर्व की सितंबर बैठक पर दुनियाभर के निवेशकों की नजर थी। बैठक से पहले बाजार में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की उम्मीद काफी हद तक बन चुकी थी। आखिरकार फेड ने उसी दिशा में फैसला लिया।
FOMC ने सर्वसम्मति से ब्याज दर को 3.75%-4% के लक्ष्य दायरे में करने के पक्ष में मतदान किया। फेड की ओर से जारी आधिकारिक बयान के मुताबिक समिति का फैसला 12-0 मतों से हुआ।
इस फैसले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि फेड ने 2023 के बाद पहली बार दरों में बढ़ोतरी की है। यानी लंबे समय तक दरों को स्थिर रखने के बाद अमेरिकी केंद्रीय बैंक ने महंगाई के दबाव को देखते हुए फिर से मौद्रिक नीति को सख्त दिशा में मोड़ा है।
बाजार के लिए अब सिर्फ मौजूदा 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि आगे फेड किस दिशा में जाता है, यह ज्यादा अहम हो गया है।
आगे भी दर बढ़ने के संकेत से बढ़ी चिंता
फेड की सितंबर 2026 की आर्थिक projections से पता चलता है कि नीति निर्माताओं के बीच इस साल के अंत तक ब्याज दर के और ऊपर जाने की संभावना को लेकर महत्वपूर्ण समर्थन है। सितंबर के projections में 2026 के अंत के लिए फेड फंड्स रेट का median अनुमान 4.1% रखा गया है, जबकि 18 प्रतिभागियों के अनुमानों में कई 4.125% और 4.375% के आसपास के स्तर पर हैं।
इसका अर्थ यह नहीं है कि अगली बैठक में दर बढ़ोतरी निश्चित है। फेड के ये projections नीति निर्माताओं के उस समय उपलब्ध आंकड़ों और उनके आकलन पर आधारित होते हैं। आने वाले महंगाई, रोजगार, आर्थिक वृद्धि और वित्तीय परिस्थितियों के आंकड़े आगे के फैसलों को प्रभावित कर सकते हैं।
फेड के projections में 2026 के लिए PCE महंगाई का median अनुमान 3.7% है, जबकि 2027 में इसके 2.3% और 2028 में 2.1% तक आने का अनुमान लगाया गया है। इससे संकेत मिलता है कि केंद्रीय बैंक महंगाई के 2% लक्ष्य तक लौटने में समय लगने की संभावना देख रहा है।
फेड के फैसले के बाद सोने में तेज उतार-चढ़ाव
ब्याज दर बढ़ने के बाद सोने की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला। दरअसल, सोना ब्याज देने वाली संपत्ति नहीं है। ऐसे में जब अमेरिका में ब्याज दर और बॉन्ड यील्ड बढ़ती हैं, तो निवेशकों के लिए ब्याज देने वाली परिसंपत्तियां अपेक्षाकृत आकर्षक हो सकती हैं। इससे सोने पर दबाव बन सकता है।
रॉयटर्स के अनुसार, फेड के फैसले के बाद स्पॉट गोल्ड एक समय 1% से अधिक गिरकर लगभग 4,240 डॉलर प्रति औंस तक आ गया था। इससे पहले दिन में सोना 4,365 डॉलर से ऊपर भी पहुंचा था। यानी फेड के फैसले के आसपास बाजार में जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिला।
यह भी महत्वपूर्ण है कि पूरे दिन सोने की चाल एकतरफा नहीं रही। फेड के फैसले से पहले सोना करीब 1% से ज्यादा ऊपर कारोबार कर रहा था। इससे पता चलता है कि बाजार में पहले से मौजूद उम्मीदों और फेड के आगे के संकेतों के बीच कीमतों में तेजी से बदलाव हुआ।
चांदी पर भी दिखा असर
सोने के साथ चांदी की कीमतों में भी फेड के फैसले के बाद दबाव देखने को मिला। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, फैसले के बाद चांदी में करीब 1.7% की गिरावट दर्ज की गई थी।
चांदी की कीमत पर भी अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड का असर पड़ता है। चूंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी की कीमत डॉलर में तय होती है, इसलिए डॉलर मजबूत होने पर अन्य मुद्राओं में खरीदारी करने वाले निवेशकों के लिए यह अपेक्षाकृत महंगी हो सकती है।
हालांकि, चांदी की मांग केवल निवेश से संबंधित नहीं है। इसका औद्योगिक इस्तेमाल भी बड़े पैमाने पर होता है। इसलिए इसकी कीमत पर वैश्विक औद्योगिक गतिविधि, विनिर्माण, सोलर सेक्टर और अन्य मांग से जुड़े कारकों का भी प्रभाव पड़ता है।
डॉलर और बॉन्ड यील्ड पर बाजार की नजर
फेड की दर बढ़ोतरी के बाद अमेरिकी डॉलर में मजबूती देखने को मिली। बाजार के लिए यह प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण है क्योंकि डॉलर और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड दोनों ही सोने तथा अन्य कमोडिटी की कीमतों को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक हैं।
फेड की ओर से दर बढ़ाने के साथ यह संदेश भी गया कि महंगाई को नियंत्रित करने के लिए मौद्रिक नीति को जरूरत पड़ने पर और सख्त रखा जा सकता है। इसी वजह से निवेशकों का ध्यान अब अमेरिकी बॉन्ड बाजार और डॉलर की दिशा पर भी केंद्रित हो गया है।
हाल की बाजार रिपोर्टों में अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड लगभग 5% के आसपास पहुंचने की बात सामने आई है। फेड की नीति और आगे के ब्याज दर संकेतों के बीच यील्ड में होने वाले बदलाव का सीधा असर वैश्विक निवेश धारणा पर पड़ सकता है।
भारतीय बाजार के लिए क्यों महत्वपूर्ण है फेड का फैसला?
अमेरिकी फेडरल रिजर्व का फैसला केवल अमेरिकी बाजार तक सीमित नहीं रहता। भारत जैसे उभरते बाजारों पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है। अमेरिकी ब्याज दरों में बढ़ोतरी से वैश्विक निवेशकों के लिए डॉलर आधारित परिसंपत्तियों का आकर्षण बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति में उभरते बाजारों से पूंजी के प्रवाह पर असर पड़ सकता है।
भारतीय शेयर बाजार में भी विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधियों पर इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है। हालांकि भारतीय शेयर बाजार की दिशा केवल अमेरिकी ब्याज दर से तय नहीं होती। घरेलू आर्थिक आंकड़े, कंपनियों के नतीजे, रुपये की चाल, कच्चे तेल की कीमत, विदेशी निवेश और वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियां भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
इसी तरह भारत में सोने की कीमत केवल अंतरराष्ट्रीय सोने की कीमत पर निर्भर नहीं करती। डॉलर-रुपया विनिमय दर, आयात लागत, स्थानीय मांग और घरेलू बाजार की स्थितियां भी सोने के दाम को प्रभावित करती हैं।
आगे सोने-चांदी की दिशा किन चीजों से तय होगी?
फेड के फैसले के बाद अब निवेशकों की निगाह कई प्रमुख संकेतकों पर रहेगी। इनमें अमेरिकी महंगाई, रोजगार के आंकड़े, डॉलर इंडेक्स, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड और फेड अधिकारियों के अगले बयान प्रमुख हैं।
अगर महंगाई अपेक्षा से अधिक बनी रहती है, तो बाजार फेड की सख्त नीति को लेकर अपनी उम्मीदों में बदलाव कर सकता है। दूसरी तरफ अगर महंगाई में लगातार नरमी आती है और आर्थिक गतिविधियों में कमजोरी दिखाई देती है, तो भविष्य की मौद्रिक नीति को लेकर बाजार का आकलन बदल सकता है।
सोने और चांदी के तकनीकी स्तरों पर भी ट्रेडर्स की नजर बनी रहेगी। कुछ बाजार विश्लेषकों ने हाल की परिस्थितियों में सोने के लिए लगभग 4,275 डॉलर के आसपास और चांदी के लिए 62-63 डॉलर के क्षेत्र को महत्वपूर्ण स्तरों के रूप में देखा है। हालांकि ये बाजार विश्लेषण हैं, निश्चित भविष्यवाणी नहीं।
महंगाई अभी भी फेड के लिए सबसे बड़ी चुनौती
फेड के सितंबर बयान में साफ कहा गया कि महंगाई अभी भी ऊंची है। अगस्त की 3.4% CPI महंगाई दर फेड के 2% लक्ष्य से काफी ऊपर है। यही वजह है कि केंद्रीय बैंक के सामने एक कठिन संतुलन बना हुआ है—एक तरफ महंगाई को नियंत्रित करना है और दूसरी तरफ अर्थव्यवस्था तथा रोजगार बाजार पर अत्यधिक दबाव से बचना है।
फेड ने सितंबर बैठक में आर्थिक गतिविधियों को ठोस बताया और कहा कि रोजगार में बढ़ोतरी श्रमबल के अनुरूप बनी हुई है। बेरोजगारी दर में भी बहुत बड़ा बदलाव नहीं हुआ है।
अब आने वाले आर्थिक आंकड़े यह तय करने में महत्वपूर्ण होंगे कि फेड की मौद्रिक नीति आगे कितनी सख्त रहती है।
बाजार के लिए अगला बड़ा सवाल क्या?
फेड ने 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी कर दी है, लेकिन बाजार की असली चिंता अब आगे की राह को लेकर है। क्या यह केवल एक बार की बढ़ोतरी है या आने वाले महीनों में ब्याज दरें और बढ़ सकती हैं? इसका जवाब आने वाले महंगाई और आर्थिक आंकड़ों से मिलेगा।
सितंबर के projections में 2026 के अंत के लिए फेड फंड्स रेट का median 4.1% है। हालांकि यह कोई निश्चित नीति घोषणा नहीं है, बल्कि अधिकारियों के उस समय के अनुमानों का प्रतिनिधित्व करता है।
इसलिए सोना, चांदी, डॉलर, बॉन्ड और शेयर बाजार में आगे भी तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। खासकर तब, जब बाजार को फेड के अगले कदमों को लेकर नई जानकारी मिलती रहेगी।
कुल मिलाकर, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की 25 बेसिस पॉइंट की दर बढ़ोतरी ने वैश्विक बाजारों को एक स्पष्ट संदेश दिया है कि महंगाई के खिलाफ लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। सोने और चांदी में शुरुआती प्रतिक्रिया ने भी दिखाया कि ब्याज दर, डॉलर और बॉन्ड यील्ड जैसे कारक कीमती धातुओं की कीमतों के लिए कितने महत्वपूर्ण हैं। अब बाजार की नजर आने वाले अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और फेड की अगली बैठकों पर रहेगी।大小规律

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