पथरी के ऑपरेशन के बाद मौत, पोस्टमार्टम में खुला चौंकाने वाला राज! पेट के अंदर मिला ऐसा सबूत कि मेडिकल बोर्ड भी जुटा जांच में
गाजीपुर: उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के भुड़कुड़ा कोतवाली क्षेत्र से एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। रामवन स्थित धनरावती अस्पताल में पित्ताशय की पथरी का ऑपरेशन कराने के बाद राकेश यादव की मौत हो गई। मौत के बाद सामने आई पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। रिपोर्ट में पेट के अंदर खून मिले तरल पदार्थ के साथ बड़ी आंत के एक हिस्से पर कई टांके मिलने की बात सामने आई है।
मामले को गंभीर मानते हुए प्रभारी सीएमओ डॉ. रामकुमार ने मेडिकल बोर्ड का गठन कर दिया है। अब बोर्ड ऑपरेशन के दौरान हुई संभावित अंदरूनी क्षति, उपचार की प्रक्रिया और मरीज की हालत बिगड़ने के बाद किए गए इलाज समेत तमाम पहलुओं की जांच कर रहा है।
इस मामले में मृतक के भाई की तहरीर पर अस्पताल संचालक समेत अन्य लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। वहीं अस्पताल संचालक की ओर से भी तोड़फोड़, मारपीट और धमकी देने के आरोप में अलग मुकदमा दर्ज कराया गया है।
ऑपरेशन के अगले दिन से शुरू हो गया था पेट में दर्द
स्वजन के मुताबिक, राकेश यादव का 30 अगस्त की शाम धनरावती अस्पताल में पित्ताशय की पथरी का ऑपरेशन किया गया था। ऑपरेशन के बाद अगले दिन से ही राकेश ने पेट में दर्द की शिकायत शुरू कर दी थी।
परिवार के लोगों का कहना है कि शुरुआत में उन्होंने इसे ऑपरेशन के बाद होने वाली सामान्य परेशानी माना, लेकिन धीरे-धीरे राकेश की हालत बिगड़ती चली गई।
1 सितंबर को स्थिति तेजी से खराब होने लगी। बताया गया कि उसका रक्तचाप और नाड़ी की गति कम होने लगी थी। इसके साथ ही उसे सांस लेने में भी परेशानी होने लगी।
हालात गंभीर होने पर उसे आजमगढ़ स्थित रमा हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां उसकी दोबारा सर्जरी की गई। हालांकि, इलाज के बावजूद 2 सितंबर की सुबह उसकी मौत हो गई।
दोबारा सर्जरी में पेट पर लगाया गया बड़ा चीरा
मामले में सामने आई जानकारी के मुताबिक, राकेश को आजमगढ़ के अस्पताल ले जाने के बाद डॉक्टरों ने उसकी स्थिति को देखते हुए दोबारा ऑपरेशन किया।
इस दौरान पेट में करीब 25 सेंटीमीटर लंबा चीरा लगाया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी पेट पर इतने ही लंबे चीरे का उल्लेख किया गया है। इसे बंद करने के लिए करीब 21 टांके लगाए गए थे।
लेकिन पोस्टमार्टम के दौरान जो चीजें सामने आईं, उन्होंने पूरे मामले की गंभीरता बढ़ा दी।
पेट के अंदर मिला करीब एक लीटर खून मिला तरल
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, राकेश के पेट के अंदर करीब एक लीटर खून मिला हुआ तरल पदार्थ मौजूद था।
इसके अलावा बड़ी आंत के करीब सात सेंटीमीटर हिस्से पर कई टांके पाए गए। रिपोर्ट में लिवर की सतह पर पित्त रस फैले होने का भी उल्लेख किया गया है। पीछे की ओर धातु की दो क्लिप लगे होने की बात भी सामने आई है।
इन निष्कर्षों के बाद मामले की जांच को और गंभीरता से लिया जा रहा है।
मेडिकल बोर्ड ने क्या बताया मौत का कारण?
मेडिकल बोर्ड के अनुसार, मौत का कारण आंत में छेद होने से पैदा हुआ संक्रमण यानी परफोरेशन पेरिटोनिटिस और अत्यधिक रक्तस्राव से लगा आघात बताया गया है।
सरल शब्दों में कहें तो जांच में आंत में छेद से संक्रमण और शरीर में अत्यधिक रक्तस्राव की स्थिति सामने आई, जिसके कारण मरीज की हालत गंभीर हुई और उसकी मौत हो गई।
हालांकि, यह निर्धारित करना कि आंत को क्षति कब और किस प्रक्रिया के दौरान हुई तथा इसके पीछे वास्तव में क्या कारण था, अब मेडिकल बोर्ड की विस्तृत जांच का विषय है।
ऑपरेशन किस डॉक्टर ने किया था?
मामले में एक और महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। शुरुआती स्तर पर यह जानकारी सामने आई थी कि धनरावती अस्पताल के संचालक डॉ. नंदलाल यादव ने ऑपरेशन किया था।
लेकिन जांच के दौरान सामने आया कि डॉ. नंदलाल यादव एनेस्थीसिया के डॉक्टर हैं, जबकि राकेश का ऑपरेशन आजमगढ़ के रमा हॉस्पिटल से बुलाए गए सर्जन डॉ. अमित सिंह ने किया था।
अब मेडिकल बोर्ड इस पहलू की भी जांच कर रहा है कि ऑपरेशन के दौरान क्या प्रक्रिया अपनाई गई थी, मरीज की स्थिति कैसी थी और ऑपरेशन के बाद सामने आए जटिल लक्षणों का इलाज किस तरह किया गया।
अस्पताल में ऑपरेशन के बाद बिगड़ी हालत
परिवार के मुताबिक, ऑपरेशन के अगले दिन से ही राकेश पेट दर्द की शिकायत कर रहा था। इसके बाद उसकी हालत लगातार खराब होती गई।
जब 1 सितंबर को ब्लड प्रेशर और नाड़ी की गति कम होने लगी और सांस लेने में परेशानी हुई, तब उसे आजमगढ़ के रमा हॉस्पिटल ले जाया गया।
वहां चिकित्सकों ने दोबारा सर्जरी की। परिवार को उम्मीद थी कि दोबारा उपचार से उसकी हालत संभल जाएगी, लेकिन अगले ही दिन उसकी मौत हो गई।
राकेश की मौत के बाद परिवार ने मामले को लेकर सवाल उठाए और पुलिस में शिकायत दी।
दोनों पक्षों की ओर से दर्ज हुए मुकदमे
मामले में मृतक राकेश यादव के भाई राजेश यादव की तहरीर पर अस्पताल संचालक डॉ. नंदलाल यादव समेत अन्य लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।
वहीं, अस्पताल संचालक की ओर से भी शिकायत दी गई है। उनकी ओर से तीन नामजद लोगों समेत करीब 100 अज्ञात लोगों के खिलाफ तोड़फोड़, मारपीट और धमकी देने के आरोप में मुकदमा दर्ज कराया गया है।
इससे मामला केवल चिकित्सकीय जांच तक सीमित नहीं रहा, बल्कि दोनों पक्षों की शिकायतों के बाद पुलिस जांच भी जारी है।
अधिकारियों ने क्या कहा?
भुड़कुड़ा थाने के प्रभारी निरीक्षक धर्मेंद्र पांडेय ने बताया कि शुरुआत में यह जानकारी थी कि ऑपरेशन डॉ. नंदलाल यादव ने किया था। जांच में सामने आया कि वह एनेस्थीसिया के डॉक्टर हैं और ऑपरेशन आजमगढ़ के रमा हॉस्पिटल के सर्जन डॉ. अमित सिंह ने किया था।
उन्होंने बताया कि मामले में मुकदमा दर्ज है और सीएमओ कार्यालय की ओर से भी जांच की जा रही है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
वहीं, सीएचसी जखनियां के अधीक्षक डॉ. अवधेश ने बताया कि घटना के समय अस्पताल के पंजीकरण की जांच का निर्देश मिला था और उसकी रिपोर्ट भेजी जा चुकी है। अब मेडिकल बोर्ड गठित किया गया है, जिसमें वह भी सदस्य हैं।
सर्जन के लौटने के बाद लिया जाएगा स्पष्टीकरण
प्रभारी सीएमओ डॉ. रामकुमार ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि इसी वजह से मेडिकल बोर्ड का गठन किया गया है।
उन्होंने बताया कि ऑपरेशन करने वाले सर्जन डॉ. अमित सिंह फिलहाल दिल्ली गए हुए हैं। उनके वापस लौटने के बाद उनसे स्पष्टीकरण लिया जाएगा। इसके बाद मेडिकल बोर्ड की जांच रिपोर्ट के आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी।
अब मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट पर टिकी नजर
राकेश यादव की मौत के मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पेट के अंदर करीब एक लीटर खून मिले तरल पदार्थ का मिलना, बड़ी आंत के हिस्से पर टांके और लिवर की सतह पर पित्त रस का उल्लेख मामले को गंभीर बनाता है।
हालांकि, इन मेडिकल निष्कर्षों के आधार पर किसी डॉक्टर या अस्पताल की लापरवाही को अंतिम रूप से साबित नहीं माना जा सकता। यह तय करना जांच का विषय है कि अंदरूनी क्षति कैसे हुई, ऑपरेशन के दौरान क्या हुआ और मरीज की हालत बिगड़ने के बाद उपचार में कौन-कौन से कदम उठाए गए।
फिलहाल पुलिस केस दर्ज कर चुकी है और स्वास्थ्य विभाग की ओर से मेडिकल बोर्ड जांच में जुटा है। अब सभी की नजर मेडिकल बोर्ड की अंतिम रिपोर्ट पर है, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

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