साइबर कैफे हुआ बंद, जेब में नहीं थे पैसे… फिर 30 हजार से शुरू किया सैंडविच का काम और बदल गई जिंदगी!
आज के डिजिटल दौर में सीखने के लिए किसी बड़े संस्थान या महंगे कोर्स में दाखिला लेना ही जरूरी नहीं रह गया है। इंटरनेट और खासकर YouTube जैसे प्लेटफॉर्म ने लोगों के सामने सीखने के कई नए रास्ते खोल दिए हैं। भोपाल के अभिषेक साहू की कहानी भी इसी बदलाव की एक मिसाल के तौर पर सामने आई है। उन्होंने अपना कारोबार शुरू करने से पहले किसी बड़े होटल या संस्थान में जाकर सैंडविच बनाना नहीं सीखा, बल्कि YouTube वीडियो देखकर इसकी बारीकियां समझीं और फिर महज 30 हजार रुपये उधार लेकर एक छोटे से ठेले से अपना काम शुरू किया।
आज उनके कारोबार का नाम भोपाल में पहचाना जाने लगा है। सोशल मीडिया पर वायरल हुई उनकी कहानी के मुताबिक, उनका सैंडविच कारोबार हर महीने करीब 25 लाख रुपये के टर्नओवर तक पहुंच चुका है। हालांकि, यहां यह समझना जरूरी है कि 25 लाख रुपये का टर्नओवर और व्यक्तिगत कमाई या मुनाफा एक ही चीज नहीं होती। कारोबार से होने वाली कुल बिक्री में से कच्चा माल, कर्मचारियों की मजदूरी, किराया, बिजली, टैक्स और दूसरे खर्च निकालने के बाद वास्तविक मुनाफा तय होता है।
अभिषेक की कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि यह उनकी पहली कोशिश की सफलता की कहानी नहीं है। इससे पहले उन्होंने साइबर कैफे का कारोबार शुरू किया था, लेकिन वह सिर्फ करीब एक साल ही चल सका। पहला बिजनेस बंद होने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और बिल्कुल अलग क्षेत्र में अपना भविष्य तलाशने की कोशिश की।
This is Abhishek Sahu.
— Pratham (@CapitalLens_) September 1, 2026
15 years ago, he moved to Bhopal and started an internet café. It shut down within a year.
He then took a ₹30,000 loan and started a small sandwich cart after learning recipes on YouTube.
Today, Hari Har Sandwich sells:
⁰• 600+ sandwiches on weekdays… pic.twitter.com/mwjGaaChuU
पहला बिजनेस हुआ फेल, लेकिन हिम्मत नहीं हारी
बताया जाता है कि अभिषेक करीब 15 साल पहले भोपाल आए थे। उन्होंने यहां अपना साइबर कैफे शुरू किया। उस समय इंटरनेट और कंप्यूटर से जुड़ी सेवाओं की मांग को देखते हुए उन्हें उम्मीद थी कि यह कारोबार अच्छा चलेगा।
लेकिन कारोबार उम्मीद के मुताबिक नहीं चला और करीब एक साल के भीतर ही साइबर कैफे बंद करना पड़ा।
किसी भी कारोबारी के लिए शुरुआती बिजनेस का इस तरह बंद हो जाना बड़ा झटका हो सकता है। कई लोग ऐसी स्थिति में दोबारा जोखिम लेने से बचते हैं। लेकिन अभिषेक ने इसे अपनी आखिरी मंजिल नहीं माना। उन्होंने कारोबार बदलने का फैसला किया और खाने-पीने के क्षेत्र में कदम रखने की

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