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सोने के बाजार में चीन का बड़ा खेल! 8 महीने में 1000 टन से ज्यादा खरीद, भारत पर भी पड़ेगा असर?



नई दिल्ली। सोने की कीमतों और वैश्विक बाजार में चीन की गतिविधियों ने एक बार फिर दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। चीन ने साल 2026 के शुरुआती आठ महीनों में ही 1000 टन से ज्यादा सोना आयात कर लिया है। यह मात्रा इतनी बड़ी है कि इसकी तुलना भारत के आधिकारिक स्वर्ण भंडार से की जा रही है। विश्व स्वर्ण परिषद के आंकड़ों के मुताबिक भारत के केंद्रीय बैंक के पास करीब 880 टन सोना है, जबकि चीन का केवल जनवरी से अगस्त के बीच का आयात इससे अधिक हो गया है।

चीन की इस तेज खरीदारी ने वैश्विक गोल्ड मार्केट में हलचल पैदा कर दी है। खास बात यह है कि चीन ने पूरे साल 2025 में जितना सोना आयात किया था, 2026 के केवल पहले आठ महीनों में ही उसका आंकड़ा पार कर लिया। रिपोर्टों के मुताबिक जनवरी से अगस्त 2026 के बीच चीन ने 1000 टन से ज्यादा सोना आयात किया और इस खरीद पर करीब 158.8 अरब डॉलर खर्च किए।

इस घटनाक्रम का असर सिर्फ चीन तक सीमित नहीं है। दुनिया के सबसे बड़े सोना बाजारों में से एक होने के कारण चीन की खरीदारी अंतरराष्ट्रीय मांग, निवेश धारणा और आगे चलकर सोने की कीमतों को प्रभावित कर सकती है।

चीन ने आखिर इतनी बड़ी मात्रा में क्यों खरीदा सोना?

चीन में सोने की बढ़ती मांग के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण है निवेशकों का सुरक्षित संपत्ति की तरफ बढ़ता रुझान।

चीन के घरेलू शेयर बाजार, प्रॉपर्टी सेक्टर और अन्य निवेश विकल्पों को लेकर अनिश्चितता के बीच सोने को एक वैकल्पिक निवेश के रूप में देखा जा रहा है। खासकर ऐसे समय में जब निवेशक अपनी संपत्ति को किसी एक परिसंपत्ति में रखने के बजाय अलग-अलग जगह बांटना चाहते हैं।

इसके अलावा सोने की कीमतों में आने वाली गिरावट का इस्तेमाल चीनी निवेशकों और संस्थागत खरीदारों ने खरीदारी के अवसर के तौर पर किया। विश्व स्वर्ण परिषद के अनुसार 2026 की पहली छमाही में चीन ने 764 टन सोना आयात किया था, जो पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 138 प्रतिशत अधिक था। जून में अकेले चीन का शुद्ध सोना आयात 152 टन रहा।

भारत के रिजर्व से बड़ी है चीन की 8 महीने की खरीदारी

इस खबर की सबसे ज्यादा चर्चा इसलिए हो रही है क्योंकि चीन द्वारा आठ महीनों में आयात किया गया सोना भारत के केंद्रीय बैंक के आधिकारिक स्वर्ण भंडार से अधिक है।

विश्व स्वर्ण परिषद के अनुसार मार्च 2026 तक भारतीय रिजर्व बैंक के पास करीब 880 टन सोना था। भारत के स्वर्ण भंडार में पिछले कुछ समय से अपेक्षाकृत स्थिरता रही है, हालांकि सोने की कीमत बढ़ने के कारण विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी का मूल्य बढ़ा है।

यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। चीन द्वारा 1000 टन से ज्यादा सोने का आयात और उसके केंद्रीय बैंक के पास मौजूद सोना एक ही चीज नहीं है। आयात में निजी निवेशक, बैंक, उद्योग और अन्य खरीदारों की जरूरत भी शामिल होती है। वहीं केंद्रीय बैंक का रिजर्व सरकारी आधिकारिक भंडार होता है।

इसलिए चीन के 1000 टन से ज्यादा आयात की तुलना भारत के करीब 880 टन आधिकारिक रिजर्व से मात्रा के लिहाज से की जा सकती है, लेकिन दोनों आंकड़े एक ही श्रेणी के नहीं हैं।

चीन के केंद्रीय बैंक ने भी बढ़ाई खरीदारी

चीन की गोल्ड रणनीति का दूसरा बड़ा हिस्सा उसका केंद्रीय बैंक यानी पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना (PBoC) है।

विश्व स्वर्ण परिषद के अनुसार अगस्त 2026 में PBoC ने करीब 20.2 टन सोना अपने रिजर्व में जोड़ा। यह अक्टूबर 2023 के बाद उसकी सबसे बड़ी मासिक खरीदारी थी। इसके साथ ही चीन के आधिकारिक स्वर्ण भंडार में लगातार 22वें महीने बढ़ोतरी दर्ज की गई और अगस्त के अंत तक यह करीब 2,387 टन पहुंच गया।

इसका मतलब है कि चीन सिर्फ निजी निवेशकों की मांग के कारण ही सोना नहीं खरीद रहा, बल्कि उसका केंद्रीय बैंक भी लगातार अपने रिजर्व में सोने की हिस्सेदारी बढ़ा रहा है।

केंद्रीय बैंक सोने को आमतौर पर रिजर्व डाइवर्सिफिकेशन के एक साधन के रूप में देखते हैं। यानी विदेशी मुद्रा भंडार में अलग-अलग परिसंपत्तियों का संतुलन बनाए रखने के लिए सोने का इस्तेमाल किया जाता है।

Gold ETF में भी बढ़ी दिलचस्पी

चीन में सोने की मांग केवल बार और सिक्कों तक सीमित नहीं है। गोल्ड ETF में भी निवेशकों की सक्रियता दिखाई दे रही है।

विश्व स्वर्ण परिषद के अनुसार जुलाई में चीनी गोल्ड ETF में करीब 744 मिलियन डॉलर का शुद्ध निवेश आया और कुल ETF holdings लगभग 5 टन बढ़कर 282 टन हो गईं। जनवरी से जुलाई के बीच चीनी गोल्ड ETF में करीब 34 टन की वृद्धि दर्ज की गई। अगस्त में भी ETF में लगातार निवेश जारी रहने की जानकारी दी गई थी।

इससे संकेत मिलता है कि चीन में निवेशक सोने को केवल आभूषण के रूप में नहीं, बल्कि एक वित्तीय निवेश और संपत्ति संरक्षण के विकल्प के रूप में भी देख रहे हैं।

घरेलू कीमत और आयात का कनेक्शन

चीन में घरेलू सोने की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय कीमतों के बीच अंतर भी आयात को प्रभावित करता है। जब घरेलू बाजार में सोना अंतरराष्ट्रीय बाजार की तुलना में प्रीमियम पर कारोबार करता है, तो विदेश से सोना लाने वाले आयातकों के लिए अतिरिक्त आय का अवसर बन सकता है।

मांग मजबूत होने पर यह प्रीमियम आयात को और बढ़ावा दे सकता है। यही वजह है कि चीन में निवेश की मांग बढ़ने के साथ आयात के आंकड़े भी ऊंचे दिखाई दे रहे हैं।

हालांकि

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