महिलाओं के शरीर में चुपचाप बढ़ रहा हो सकता है संक्रमण! ये 4 संकेत दिखें तो तुरंत हो जाएं सावधान, वरना बढ़ सकती है परेशानी
महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ी कई ऐसी समस्याएं हैं, जिनके शुरुआती लक्षण बेहद सामान्य दिखाई दे सकते हैं। यही वजह है कि कई बार महिलाएं उन्हें थकान, मौसम में बदलाव, पीरियड्स की अनियमितता या सामान्य कमजोरी समझकर नजरअंदाज कर देती हैं। लेकिन कुछ मामलों में यही लक्षण शरीर में मौजूद संक्रमण या पेल्विक हिस्से से जुड़ी समस्या की ओर इशारा कर सकते हैं।
महिलाओं की प्रजनन प्रणाली में होने वाला संक्रमण शुरुआत में हल्के लक्षणों के साथ सामने आ सकता है और कुछ मामलों में लक्षण बहुत कम या बिल्कुल स्पष्ट नहीं होते। अगर संक्रमण बढ़कर गर्भाशय, फैलोपियन ट्यूब या आसपास के पेल्विक अंगों तक पहुंच जाए, तो पेट के निचले हिस्से में दर्द, असामान्य योनि स्राव, पीरियड्स में बदलाव और बुखार जैसी समस्याएं दिखाई दे सकती हैं।
इसलिए शरीर में बार-बार होने वाले या लगातार बने रहने वाले बदलावों को समझना जरूरी है। खासकर अगर एक साथ कई लक्षण दिखाई दे रहे हों तो डॉक्टर से जांच कराने में देरी नहीं करनी चाहिए।
1. पेट के निचले हिस्से में लगातार दर्द
महिलाओं में पेट के निचले हिस्से या पेल्विक क्षेत्र में दर्द कई कारणों से हो सकता है। यह पीरियड्स, ओव्यूलेशन, यूरिनरी ट्रैक्ट की समस्या, पाचन संबंधी परेशानी या अन्य स्वास्थ्य स्थितियों से भी जुड़ा हो सकता है। लेकिन अगर दर्द लगातार बना रहता है या बार-बार वापस आता है, तो इसे केवल सामान्य समस्या मानकर छोड़ना ठीक नहीं है।
पेल्विक संक्रमण की स्थिति में पेट के निचले हिस्से में दर्द या भारीपन महसूस हो सकता है। कुछ महिलाओं में दर्द हल्का होता है, जबकि कुछ मामलों में यह धीरे-धीरे बढ़ सकता है। कभी-कभी कमर या पेल्विक क्षेत्र में भी असहजता महसूस हो सकती है।
खास बात यह है कि अगर दर्द के साथ असामान्य डिस्चार्ज, बुखार, पीरियड्स में बदलाव या पेशाब करते समय परेशानी भी हो रही है, तो डॉक्टर से सलाह लेना अधिक जरूरी हो जाता है।
तेज या लगातार बढ़ता हुआ पेल्विक दर्द विशेष रूप से नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
2. योनि से असामान्य डिस्चार्ज
योनि से कुछ मात्रा में सामान्य स्राव होना महिलाओं में सामान्य शारीरिक प्रक्रिया का हिस्सा है। इसका रंग और मात्रा मासिक चक्र के अलग-अलग चरणों में बदल सकती है। लेकिन अगर डिस्चार्ज में अचानक बदलाव आए तो इस पर ध्यान देना जरूरी है।
अगर स्राव सामान्य से काफी अधिक हो जाए, उसका रंग बदल जाए या उसमें तेज और असामान्य गंध आने लगे, तो यह संक्रमण समेत कई स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ा हो सकता है।
कुछ संक्रमणों में डिस्चार्ज के साथ खुजली, जलन या पेल्विक क्षेत्र में परेशानी भी हो सकती है। हालांकि केवल डिस्चार्ज देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि संक्रमण किस प्रकार का है। इसके लिए चिकित्सकीय जांच जरूरी हो सकती है।
इसलिए बार-बार असामान्य डिस्चार्ज होने पर खुद से दवा लेने के बजाय स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर रहता है।
3. पीरियड्स में बदलाव या बीच में ब्लीडिंग
मासिक धर्म में कभी-कभार बदलाव कई सामान्य कारणों से भी हो सकता है। तनाव, वजन में बदलाव, हार्मोनल परिवर्तन और अन्य कारणों से पीरियड्स प्रभावित हो सकते हैं। लेकिन अगर पीरियड्स के पैटर्न में लगातार बदलाव हो रहा है, तो इसकी वजह समझना जरूरी है।
पेल्विक संक्रमण की कुछ स्थितियों में पीरियड्स अधिक दर्दनाक हो सकते हैं या सामान्य से अलग रक्तस्राव हो सकता है। कुछ महिलाओं में पीरियड्स के बीच स्पॉटिंग या रक्तस्राव की समस्या भी हो सकती है। सेक्स के बाद रक्तस्राव भी ऐसी स्थिति है जिसकी वजह की जांच कराना जरूरी है।
हालांकि इन लक्षणों का मतलब हमेशा संक्रमण नहीं होता। गर्भाशय या गर्भाशय ग्रीवा से जुड़ी अन्य समस्याएं, हार्मोनल बदलाव और दूसरी स्वास्थ्य स्थितियां भी इसका कारण हो सकती हैं।
इसलिए बार-बार होने वाली असामान्य ब्लीडिंग को सामान्य मानकर लंबे समय तक टालना सही नहीं है।
4. बुखार और पेशाब करते समय जलन
जब शरीर में संक्रमण होता है तो कुछ लोगों में बुखार, कमजोरी या सामान्य रूप से अस्वस्थ महसूस होने जैसी समस्या हो सकती है। अगर पेल्विक दर्द और असामान्य डिस्चार्ज के साथ बुखार भी हो, तो संक्रमण की संभावना को ध्यान में रखते हुए चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी हो सकता है।
कुछ महिलाओं को पेशाब करते समय जलन या दर्द की शिकायत भी हो सकती है। लेकिन यह लक्षण केवल प्रजनन तंत्र के संक्रमण में ही नहीं होता। यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन जैसी दूसरी समस्याओं में भी पेशाब के दौरान जलन हो सकती है।
इसी वजह से केवल एक लक्षण के आधार पर खुद से किसी बीमारी का निष्कर्ष निकालना ठीक नहीं है। लक्षणों का पूरा पैटर्न और जरूरत पड़ने पर जांच के आधार पर ही सही कारण का पता लगाया जा सकता है।
संक्रमण बढ़ने पर क्या हो सकता है?
कुछ पेल्विक संक्रमणों का समय पर इलाज न होने पर संक्रमण प्रजनन तंत्र के दूसरे हिस्सों तक फैल सकता है। ऐसी स्थिति में दर्द बढ़ सकता है और स्वास्थ्य संबंधी जटिलताएं पैदा हो सकती हैं।
विशेष रूप से पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज यानी PID जैसी स्थितियों में गर्भाशय, फैलोपियन ट्यूब और आसपास के अंग प्रभावित हो सकते हैं। कुछ मामलों में इलाज में देरी से लंबे समय तक पेल्विक दर्द या प्रजनन क्षमता से जुड़ी समस्याएं भी हो सकती हैं।
हालांकि हर पेट दर्द या डिस्चार्ज को PID या किसी गंभीर संक्रमण का संकेत नहीं माना जा सकता। इसी वजह से सही समय पर डॉक्टर की सलाह महत्वपूर्ण होती है।
कब तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए?
अगर पेट के निचले हिस्से में लगातार या तेज दर्द हो रहा है, असामान्य डिस्चार्ज बना हुआ है, पीरियड्स के बीच बार-बार ब्लीडिंग हो रही है या बुखार के साथ कमजोरी महसूस हो रही है, तो स्त्री रोग विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए।
वहीं अगर पेल्विक दर्द अचानक बहुत तेज हो जाए, रक्तस्राव काफी ज्यादा हो, तेज बुखार आए, चक्कर या बेहोशी जैसा महसूस हो या हालत तेजी से बिगड़ रही हो, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है।
ऐसी स्थिति में घर पर इंतजार करना या बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक अथवा अन्य दवाएं लेना सही नहीं है।
खुद से इलाज करने की बजाय जांच जरूरी
महिलाओं में प्रजनन तंत्र से जुड़े संक्रमण कई अलग-अलग कारणों से हो सकते हैं और उनके लक्षण भी एक-दूसरे से मिलते-जुलते हो सकते हैं। इसलिए इंटरनेट पर लक्षण पढ़कर खुद बीमारी तय करना या बिना जांच के दवा शुरू करना नुकसानदायक हो सकता है।
डॉक्टर जरूरत के अनुसार शारीरिक जांच, सैंपल टेस्ट, यूरिन टेस्ट या अन्य जांच की सलाह दे सकते हैं। सही कारण पता चलने के बाद ही उचित उपचार निर्धारित किया जाता है।
साफ-सफाई का ध्यान रखना, सुरक्षित यौन व्यवहार अपनाना और किसी भी असामान्य बदलाव को लंबे समय तक नजरअंदाज न करना स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है।
हर लक्षण का मतलब गंभीर बीमारी नहीं
सबसे जरूरी बात यह समझना है कि इनमें से किसी एक लक्षण का होना अपने आप में किसी गंभीर बीमारी की पुष्टि नहीं करता। पेट दर्द, डिस्चार्ज, पीरियड्स में बदलाव या पेशाब में जलन कई सामान्य और इलाज योग्य कारणों से भी हो सकते हैं।
लेकिन जब कोई लक्षण लगातार बना रहे, बार-बार हो या उसके साथ दूसरे संकेत भी दिखाई देने लगें, तो उसकी जांच कराना समझदारी है।
महिलाओं को अपने शरीर में होने वाले बदलावों पर ध्यान देना चाहिए और शर्म या झिझक की वजह से स्त्री रोग संबंधी समस्याओं को टालना नहीं चाहिए। समय पर जांच और सही उपचार से कई संक्रमणों को गंभीर होने से रोका जा सकता है।
इसलिए अगर पेट के निचले हिस्से में लगातार दर्द, असामान्य योनि स्राव, पीरियड्स के बीच ब्लीडिंग, बुखार या पेशाब करते समय जलन जैसी समस्या बार-बार हो रही है, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

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