आसमान में फिर मंडराया बड़ा खतरा! 19 राज्यों में तबाही का अलर्ट, 85 KM की रफ्तार से आएगा तूफान; इन इलाकों में मचेगी भारी बारिश
मानसून की सक्रियता के बीच देश के कई हिस्सों में मौसम का मिजाज एक बार फिर तेजी से बदलता दिखाई दे रहा है। भारी बारिश, तेज हवाओं, आंधी और बिजली गिरने की आशंका ने कई राज्यों में चिंता बढ़ा दी है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, 27 सितंबर को देश के कई राज्यों में भारी बारिश के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं, जबकि कुछ इलाकों में बहुत भारी बारिश की स्थिति भी बन सकती है।
बताया जा रहा है कि बंगाल की खाड़ी और उससे सटे पूर्वी भारत के आसपास सक्रिय मौसम प्रणाली के प्रभाव से ओडिशा, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, झारखंड, बिहार, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना समेत कई क्षेत्रों में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। कुछ स्थानों पर हवा की गति काफी तेज रहने की संभावना है। ऐसे में पेड़ गिरने, बिजली के खंभों को नुकसान पहुंचने, जलभराव और यातायात प्रभावित होने जैसी परिस्थितियां बन सकती हैं।
पहाड़ी राज्यों में लगातार बारिश के कारण भूस्खलन और सड़कें बाधित होने का जोखिम भी बढ़ सकता है। मौसम की इस स्थिति को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियों को सतर्क रहने की जरूरत है।
डीप डिप्रेशन के प्रभाव से बदला मौसम
मौसम में इस बदलाव के पीछे बंगाल की खाड़ी तथा पूर्व-मध्य भारत के आसपास सक्रिय निम्न दबाव क्षेत्र और उसके मजबूत होने की स्थिति को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जब समुद्र के ऊपर कोई मजबूत मौसम प्रणाली विकसित होती है, तो उसके प्रभाव से आसपास के राज्यों में नमी बढ़ती है और बादलों के विकसित होने की प्रक्रिया तेज हो जाती है।
दक्षिण छत्तीसगढ़ और दक्षिण ओडिशा के आसपास बने सिस्टम का असर पूर्वी और मध्य भारत के कई हिस्सों तक देखा जा सकता है। इसके कारण कई इलाकों में गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है।
मौसम प्रणाली के उत्तर और उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर बढ़ने की स्थिति में इसका प्रभाव मध्य भारत और उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में भी दिखाई दे सकता है। यही वजह है कि कई राज्यों में अगले 24 से 48 घंटे मौसम के लिहाज से महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
19 राज्यों में बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट
27 सितंबर के लिए जिन राज्यों में बारिश और खराब मौसम की संभावना बताई गई है, उनमें उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और असम शामिल हैं।
हालांकि सभी राज्यों में मौसम की तीव्रता एक जैसी नहीं रहेगी। कुछ इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है, जबकि मौसम प्रणाली के नजदीकी क्षेत्रों में भारी बारिश और तेज हवाओं की स्थिति बन सकती है।
पूर्वी भारत के राज्यों में गरज-चमक और बिजली गिरने का खतरा विशेष रूप से बना रह सकता है। ऐसे मौसम में खुले मैदान, खेत, पेड़ के नीचे या बिजली के खंभों के आसपास खड़े होने से बचने की सलाह दी जाती है।
80 से 85 किलोमीटर प्रति घंटे तक चल सकती हैं हवाएं
मौसम के इस सिस्टम की सबसे बड़ी चिंता तेज हवाओं को लेकर है। कुछ प्रभावित क्षेत्रों में 80 से 85 किलोमीटर प्रति घंटे तक की तेज हवा चलने की संभावना जताई गई है।
इतनी तेज हवाओं के कारण कमजोर पेड़ और उनकी शाखाएं टूट सकती हैं। बिजली और संचार के तार प्रभावित हो सकते हैं। कच्चे मकानों, टीन की छतों और अस्थायी ढांचों को भी नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है।
शहरी इलाकों में तेज हवा के साथ भारी बारिश होने पर सड़क पर दृश्यता कम हो सकती है। जलभराव के कारण यातायात की रफ्तार भी प्रभावित हो सकती है।
उत्तर प्रदेश में कई जिलों पर बारिश का असर
उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में 27 सितंबर को मौसम खराब रहने की संभावना है। पश्चिमी, मध्य और पूर्वी उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में बारिश और तेज हवाओं का असर देखने को मिल सकता है।
मुरादाबाद, बरेली, पीलीभीत, रामपुर, लखीमपुर खीरी, बहराइच, श्रावस्ती, कानपुर, सिद्धार्थनगर, बलरामपुर, गोरखपुर, गोंडा, संतकबीर नगर, महाराजगंज, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, लखनऊ, गाजीपुर, कासगंज और फतेहपुर जैसे जिलों में मौसम को लेकर विशेष सतर्कता जरूरी है।
कुछ इलाकों में तेज हवा के साथ बारिश होने पर खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान पहुंच सकता है। किसानों को मौसम की स्थिति पर नजर रखने और खुले स्थानों पर कृषि उपकरण या अन्य सामान सुरक्षित रखने की सलाह दी जाती है।
बिहार में भी आंधी और बारिश का असर
बिहार के कई जिलों में भी मौसम सक्रिय रहने की संभावना है। पटना, भोजपुर, बक्सर, सीवान, सारण, पूर्वी चंपारण, अरवल, रोहतास, वैशाली, समस्तीपुर, दरभंगा, मधुबनी, सहरसा, सुपौल, कटिहार, भागलपुर, मुंगेर, बेगूसराय और खगड़िया में बारिश और तेज हवाओं का असर देखने को मिल सकता है।
बिहार में बारिश के दौरान निचले इलाकों में पानी जमा होने की स्थिति बन सकती है। ग्रामीण क्षेत्रों में कच्ची सड़कों और जल निकासी की व्यवस्था पर इसका प्रभाव पड़ सकता है।
झारखंड में 27-28 सितंबर को खराब मौसम
झारखंड में भी 27 और 28 सितंबर के दौरान कई जिलों में बारिश की गतिविधियां बढ़ने की संभावना है। जमशेदपुर, रांची, बोकारो, पलामू, धनबाद, खूंटी, रामगढ़, देवघर, गिरिडीह और पश्चिमी सिंहभूम जैसे क्षेत्रों में मौसम पर नजर रखना जरूरी होगा।
गरज-चमक के दौरान बिजली गिरने का खतरा भी हो सकता है। ऐसे समय में ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
पहाड़ी राज्यों में बढ़ा लैंडस्लाइड का खतरा
उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में बारिश का असर केवल सामान्य जनजीवन तक सीमित नहीं रहता। लगातार या भारी बारिश के कारण पहाड़ी ढलानों पर मिट्टी और चट्टानों के खिसकने की संभावना बढ़ जाती है।
उत्तराखंड में चमोली, ऋषिकेश, हरिद्वार, नैनीताल, टिहरी गढ़वाल, पिथौरागढ़, देहरादून, रुद्रप्रयाग और अल्मोड़ा जैसे क्षेत्रों में बारिश के दौरान यात्रियों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।
हिमाचल प्रदेश के शिमला, कांगड़ा, किन्नौर, सोलन, हमीरपुर, बिलासपुर और कुल्लू में भी बारिश के कारण सड़क मार्ग प्रभावित हो सकते हैं।
जम्मू-कश्मीर में रियासी, गांदरबल, कठुआ, डोडा, अनंतनाग, किश्तवाड़, जम्मू और राजौरी जैसे क्षेत्रों में भी मौसम पर नजर रखने की जरूरत है।
पश्चिम बंगाल और ओडिशा में तेज हवाओं का असर
पश्चिम बंगाल और ओडिशा मौसम प्रणाली के प्रभाव वाले प्रमुख क्षेत्रों में शामिल हैं। कोलकाता, बांकुड़ा, जलपाईगुड़ी, अलीपुरद्वार, बीरभूम, दार्जिलिंग, हावड़ा और कालिम्पोंग में बारिश के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं।
समुद्र के आसपास मौसम खराब होने की स्थिति में मछुआरों के लिए विशेष सावधानी जरूरी हो जाती है। तेज हवा और ऊंची लहरों के दौरान समुद्र में जाना जोखिम भरा हो सकता है।
ओडिशा के तटीय और आसपास के जिलों में भी भारी बारिश और तेज हवाओं के कारण स्थानीय स्तर पर नुकसान की स्थिति पैदा हो सकती है।
किसानों और मछुआरों के लिए विशेष सावधानी
मौसम विभाग की चेतावनी का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा किसानों और मछुआरों से जुड़ा है। तेज बारिश और आंधी के दौरान खेतों में काम कर रहे लोगों को खुले स्थानों से सुरक्षित जगह पर चले जाना चाहिए।
मछुआरों को समुद्र में जाने से पहले मौसम संबंधी आधिकारिक चेतावनियों की जानकारी लेनी चाहिए। यदि समुद्र में खराब मौसम की चेतावनी हो, तो नाव लेकर बाहर निकलने से बचना जरूरी है।
किसानों को भी फसल और कृषि उपकरणों को सुरक्षित रखने के उपाय करने चाहिए। तेज हवा के दौरान पेड़ों या बिजली के खंभों के नीचे खड़े होने से बचना चाहिए।
बिजली गिरने के दौरान क्या करें?
गरज-चमक वाले मौसम में बिजली गिरने का खतरा बढ़ जाता है। यदि आसमान में तेज गर्जना हो रही हो तो खुले मैदान में खड़े रहने से बचना चाहिए।
घर के अंदर रहना अपेक्षाकृत सुरक्षित विकल्प होता है। बिजली के उपकरणों को अनावश्यक रूप से छूने से बचना चाहिए। पेड़ के नीचे शरण लेना भी सुरक्षित नहीं माना जाता, क्योंकि बिजली अक्सर ऊंची वस्तुओं को प्रभावित कर सकती है।
प्रमुख शहरों का संभावित तापमान
| शहर | अधिकतम तापमान | न्यूनतम तापमान |
|---|---|---|
| दिल्ली | 30°C | 22°C |
| मुंबई | 32°C | 26°C |
| चेन्नई | 34°C | 27°C |
| कोलकाता | 33°C | 26°C |
| लखनऊ | 26°C | 22°C |
| पटना | 31°C | 24°C |
| रांची | 28°C | 21°C |
| भोपाल | 31°C | 22°C |
| जयपुर | 34°C | 23°C |
| शिमला | 22°C | 14°C |
| नैनीताल | 17°C | 16°C |
लोगों को सतर्क रहने की सलाह
मौसम की ऐसी परिस्थितियों में सबसे जरूरी है कि लोग स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग की ताजा चेतावनियों पर नजर रखें। बारिश के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचना चाहिए, खासकर उन इलाकों में जहां जलभराव, बाढ़ या भूस्खलन की आशंका हो।
तेज हवाओं के दौरान घर की खिड़कियां और दरवाजे सुरक्षित रखें तथा बालकनी या छत पर रखी हल्की वस्तुओं को पहले ही सुरक्षित स्थान पर रख दें।
कुल मिलाकर, 27 सितंबर को देश के कई हिस्सों में मौसम सक्रिय रहने वाला है। बंगाल की खाड़ी से जुड़ी मौसम प्रणाली के प्रभाव से पूर्वी और मध्य भारत में बारिश तथा तेज हवाओं का दौर देखने को मिल सकता है। वहीं उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में भी बारिश और आंधी का असर जारी रहने की संभावना है। पहाड़ी राज्यों में भूस्खलन और पूर्वी भारत में बिजली गिरने के खतरे को देखते हुए लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है। मौसम की वास्तविक स्थिति स्थानीय स्तर पर अलग-अलग हो सकती है, इसलिए किसी भी यात्रा या बाहरी गतिविधि से पहले नवीनतम आधिकारिक मौसम चेतावनी देखना जरूरी है।

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