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आसमान में बना खतरनाक सिस्टम! 29 सितंबर तक इन राज्यों में तबाही वाली बारिश, IMD के अलर्ट ने बढ़ाई चिंता



देश के कई हिस्सों में सितंबर के आखिरी दिनों में मौसम एक बार फिर करवट लेता नजर आ रहा है। दक्षिण और मध्य भारत से लेकर उत्तर भारत तक कई राज्यों में बारिश का दौर तेज होने की संभावना है। भारत मौसम विज्ञान विभाग यानी IMD ने 25 सितंबर को जारी अपने मौसम संबंधी बुलेटिन में कई राज्यों के लिए भारी, बहुत भारी और कुछ स्थानों पर अत्यंत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। खास तौर पर उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, झारखंड, ओडिशा और हिमालयी क्षेत्रों में मौसम पर विशेष नजर रखने की जरूरत बताई गई है।

इस पूरे मौसम परिवर्तन के पीछे दक्षिण छत्तीसगढ़ और उससे सटे दक्षिणी आंतरिक ओडिशा के ऊपर बना डिप्रेशन महत्वपूर्ण कारण है। IMD के अनुसार यह सिस्टम उत्तर-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ रहा था। 25 सितंबर की सुबह यह करीब 15 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से आगे बढ़ रहा था और अगले कुछ घंटों तक डिप्रेशन की स्थिति बनाए रखने के बाद इसके धीरे-धीरे कमजोर होने का अनुमान था।

लेकिन सिस्टम के कमजोर होने का मतलब यह नहीं है कि बारिश तुरंत खत्म हो जाएगी। इसके आगे बढ़ने के कारण मध्य भारत और उत्तर भारत के कई हिस्सों में बारिश का प्रभाव देखने को मिल सकता है। IMD के 25 सितंबर के बुलेटिन में पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए भी अलग-अलग दिनों में अत्यंत भारी और बहुत भारी बारिश की चेतावनी दर्ज की गई थी।

उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा नजर

उत्तर प्रदेश के लिए मौसम विभाग की चेतावनी खास तौर पर महत्वपूर्ण है। 25 सितंबर को पूर्वी उत्तर प्रदेश में अत्यंत भारी बारिश का खतरा बताया गया था, जबकि 26 सितंबर को भी पूर्वी उत्तर प्रदेश के लिए अत्यंत भारी बारिश और गरज-चमक की चेतावनी जारी रही।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 26 सितंबर को अत्यंत भारी बारिश और 27 सितंबर को बहुत भारी बारिश की संभावना जताई गई। इसके साथ ही गरज-चमक और तेज हवाओं की स्थिति भी बन सकती है।

इसका असर उन इलाकों में ज्यादा देखने को मिल सकता है जहां पहले से जमीन में नमी अधिक है या निचले क्षेत्रों में पानी जमा होने की समस्या रहती है। लगातार बारिश के कारण सड़कों पर जलभराव, यातायात प्रभावित होने और स्थानीय स्तर पर बिजली आपूर्ति में परेशानी जैसी परिस्थितियां पैदा हो सकती हैं।

दिल्ली-एनसीआर से सटे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों में रहने वाले लोगों के लिए भी मौसम में अचानक बदलाव महत्वपूर्ण हो सकता है।

छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में बारिश का जोर

मौसम का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र मध्य भारत बना हुआ है। डिप्रेशन के प्रभाव के कारण छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में भारी बारिश की संभावना जताई गई।

25 सितंबर को छत्तीसगढ़ में अत्यंत भारी बारिश की संभावना थी। वहीं 26 सितंबर को भी पूर्वी मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में बहुत भारी बारिश का अनुमान लगाया गया।

पश्चिमी मध्य प्रदेश में भी 25 और 26 सितंबर को बहुत भारी बारिश तथा 27 सितंबर को भारी बारिश होने की संभावना बताई गई। विदर्भ क्षेत्र में भी 25 सितंबर को भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई थी।

छत्तीसगढ़ में बारिश के साथ तेज हवाओं का खतरा भी बताया गया था। कुछ इलाकों में हवाओं की रफ्तार 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। ऐसे में खुले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत हो सकती है।

उत्तराखंड और हिमाचल में भी बदलेगा मौसम

पहाड़ी राज्यों में भी बारिश का दौर बढ़ने की संभावना है। उत्तराखंड में 26 और 27 सितंबर को बहुत तेज बारिश का अनुमान जताया गया था। इसके अलावा 25 और 28 सितंबर को भी भारी बारिश की संभावना बनी हुई थी।

हिमाचल प्रदेश में 26 और 28 सितंबर को भारी बारिश तथा 27 सितंबर को बहुत भारी बारिश की चेतावनी बताई गई थी।

पहाड़ी क्षेत्रों में भारी बारिश का असर केवल सामान्य जनजीवन पर नहीं बल्कि सड़क यातायात पर भी पड़ सकता है। लगातार बारिश के दौरान पहाड़ी सड़कों पर फिसलन बढ़ने और कुछ संवेदनशील स्थानों पर भूस्खलन का खतरा बढ़ सकता है।

ऐसे मौसम में पहाड़ी क्षेत्रों की यात्रा करने वाले लोगों के लिए स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग के अपडेट पर नजर रखना जरूरी है।

दिल्ली, पंजाब और हरियाणा में आंधी-बारिश

उत्तर-पश्चिम भारत में भी मौसम बदलने वाला है। हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली और पंजाब में 26 से 27 सितंबर के बीच कई स्थानों पर मध्यम से भारी बारिश होने की संभावना बताई गई।

इस दौरान तेज हवाएं चलने की भी संभावना है। कुछ स्थानों पर हवाओं की रफ्तार 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है और झोंकों के दौरान यह 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक जा सकती है।

बारिश के साथ बिजली चमकने और गरजने की स्थिति भी बन सकती है।

दिल्ली-एनसीआर में इस तरह के मौसम का असर यातायात पर पड़ सकता है। अचानक तेज बारिश होने पर सड़कों पर पानी जमा होने, दृश्यता कम होने और ट्रैफिक की रफ्तार घटने जैसी स्थिति देखने को मिल सकती है।

पूर्वी भारत में भी तेज बारिश और तूफानी हवाएं

बिहार, झारखंड और ओडिशा में भी मौसम विभाग ने बारिश के साथ तेज हवाओं और गरज-चमक की चेतावनी दी थी।

25 सितंबर को झारखंड और ओडिशा में कुछ स्थानों पर 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना बताई गई थी। झोंकों के दौरान हवा की गति 70 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है।

बिहार, झारखंड और ओडिशा में 25 सितंबर को भारी से बहुत भारी बारिश का अनुमान था और 26 सितंबर को भी कई क्षेत्रों में बारिश जारी रहने की संभावना थी।

गांगेय पश्चिम बंगाल में भी भारी बारिश की चेतावनी दी गई थी। वहीं उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में भी अत्यंत भारी बारिश की संभावना मौसम विभाग ने जताई थी।

दक्षिण भारत में भी बारिश का दौर

दक्षिण भारत के कई राज्यों में भी मौसम पूरी तरह शांत नहीं रहेगा। केरल और माहे तथा लक्षद्वीप में 25 और 26 सितंबर को व्यापक बारिश की संभावना बताई गई।

तटीय आंध्र प्रदेश में 25 सितंबर को कई स्थानों पर बारिश का अनुमान था। रायलसीमा और तेलंगाना में भी कुछ क्षेत्रों में तेज हवाओं के साथ बारिश की स्थिति बन सकती थी।

केरल, कर्नाटक और तेलंगाना में भारी बारिश की चेतावनी भी जारी की गई थी।

तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों और मछुआरों के लिए मौसम की स्थिति पर नजर रखना विशेष रूप से जरूरी है, क्योंकि बारिश के साथ तेज हवाएं समुद्री परिस्थितियों को भी प्रभावित कर सकती हैं।

गुजरात और महाराष्ट्र में भी असर

पश्चिम भारत में गुजरात और मराठवाड़ा के कुछ हिस्सों में भी तेज सतही हवाएं चलने की संभावना बताई गई।

25 सितंबर को कुछ क्षेत्रों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से तेज हवाएं चल सकती थीं। बारिश के साथ ऐसी हवाएं चलने पर पेड़ों की शाखाएं टूटने, बिजली के तारों पर असर पड़ने और खुले में रखी वस्तुओं के उड़ने जैसी स्थानीय समस्याएं सामने आ सकती हैं।

पूर्वोत्तर राज्यों में 29 सितंबर तक नजर

असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में भी 25 से 29 सितंबर के बीच अलग-अलग दिनों में भारी बारिश और बिजली चमकने की संभावना जताई गई है।

पूर्वोत्तर के कई हिस्सों में पहले से ही बारिश का मौसम सक्रिय रहने के कारण अतिरिक्त बारिश से स्थानीय स्तर पर जलभराव और यातायात संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं।

पिछले 24 घंटे में भी कई जगह भारी बारिश

मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक इस सिस्टम के प्रभाव से पहले ही देश के कई हिस्सों में भारी बारिश दर्ज की गई थी। उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम, छत्तीसगढ़ और ओडिशा में कुछ स्थानों पर अत्यधिक भारी वर्षा दर्ज की गई।

तटीय आंध्र प्रदेश में भी बहुत भारी बारिश देखने को मिली। इसके अलावा पूर्वी मध्य प्रदेश, केरल और माहे, कर्नाटक, तेलंगाना, गांगेय पश्चिम बंगाल, झारखंड, बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश और विदर्भ के कुछ हिस्सों में भारी बारिश दर्ज की गई।

इससे साफ है कि मौसम का यह सिस्टम कई राज्यों में पहले ही अपना प्रभाव दिखा चुका है।

लोगों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए?

भारी बारिश और तेज हवाओं के दौरान लोगों को खुले स्थानों पर जाने से बचना चाहिए। बिजली चमकने के दौरान पेड़, बिजली के खंभे और खुले मैदान सुरक्षित स्थान नहीं माने जाते।

तेज बारिश की स्थिति में वाहन चलाते समय गति कम रखना और जलभराव वाले रास्तों से बचना जरूरी है। पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा करने वाले लोगों को स्थानीय प्रशासन की सलाह का पालन करना चाहिए।

किसानों के लिए भी मौसम की जानकारी महत्वपूर्ण है, क्योंकि लगातार बारिश फसलों को प्रभावित कर सकती है। खेतों में जलनिकासी की व्यवस्था और मौसम के अनुसार कृषि गतिविधियों की योजना बनाना उपयोगी हो सकता है।

फिलहाल मौसम का सबसे बड़ा संदेश यही है कि सितंबर के आखिरी दिनों में देश के कई हिस्सों में बारिश का दौर फिर तेज हो सकता है। डिप्रेशन के कमजोर होने के बावजूद इसके अवशेष और अन्य मौसमी प्रणालियां अलग-अलग क्षेत्रों में बारिश को प्रभावित कर सकती हैं।

उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, बिहार, झारखंड, ओडिशा, दिल्ली-एनसीआर और पूर्वोत्तर के लोगों को अगले कुछ दिनों तक स्थानीय मौसम अपडेट पर नजर रखनी चाहिए। मौसम विभाग की चेतावनी में बदलाव होने पर स्थिति भी बदल सकती है, इसलिए यात्रा और बाहरी गतिविधियों की योजना ताजा स्थानीय पूर्वानुमान देखकर बनाना ज्यादा सुरक्षित रहेगा।

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