हॉस्टल से पैदल कलेक्टर के पास पहुंचीं 15 छात्राएं, खोला ऐसा राज कि सुनकर अधिकारी भी रह गए हैरान!
प्रतापगढ़। जिले के एक छात्रावास से जुड़ा मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक व्यवस्था और छात्राओं की सुरक्षा एवं सुविधाओं को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। हॉस्टल में रहने वाली करीब 15 छात्राएं अपनी शिकायत लेकर पैदल ही कलेक्टर कार्यालय पहुंच गईं। छात्राओं ने वहां पहुंचकर हॉस्टल में मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता, साफ-सफाई और वार्डन के व्यवहार सहित कई गंभीर आरोप लगाए। छात्राओं का कहना है कि हॉस्टल में उन्हें बेहतर भोजन और पढ़ाई का माहौल मिलना चाहिए, लेकिन उन्हें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
छात्राओं ने अधिकारियों के सामने अपनी समस्याएं रखते हुए कहा कि हॉस्टल में खाना अच्छा नहीं दिया जाता। उनके मुताबिक कई बार रोटियां ऐसी मिलती हैं जो एक तरफ से कच्ची और दूसरी तरफ से पकी होती हैं। छात्राओं का आरोप है कि भोजन की गुणवत्ता को लेकर शिकायत करने के बावजूद उनकी समस्याओं का उचित समाधान नहीं किया गया। उनका कहना है कि हॉस्टल में रहने वाली छात्राओं के लिए भोजन बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि उन्हें लंबे समय तक इसी व्यवस्था पर निर्भर रहना पड़ता है।
पैदल कलेक्टर कार्यालय पहुंचीं छात्राएं
मामला तब सामने आया जब हॉस्टल में रहने वाली करीब 15 छात्राएं एक साथ अपनी शिकायत लेकर पैदल कलेक्टर कार्यालय पहुंचीं। छात्राओं के अचानक कार्यालय पहुंचने से अधिकारियों का ध्यान उनकी समस्याओं की ओर गया। छात्राओं ने अपनी बात अधिकारियों के सामने रखी और हॉस्टल में कथित अव्यवस्थाओं की जांच कराने की मांग की।
छात्राओं का कहना था कि वे कई दिनों से परेशानियों का सामना कर रही हैं। उनका आरोप है कि हॉस्टल में रहने और पढ़ाई करने के लिए आने वाली छात्राओं को ऐसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उनकी पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। छात्राओं ने प्रशासन से मांग की कि उनकी शिकायतों को गंभीरता से लिया जाए और हॉस्टल की व्यवस्थाओं की जांच कराई जाए।
‘खाना अच्छा नहीं दिया जाता’
छात्राओं ने हॉस्टल में मिलने वाले खाने को लेकर सबसे ज्यादा शिकायत की। उनका कहना था कि भोजन की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं है। छात्राओं के मुताबिक उन्हें कई बार ऐसी रोटियां दी जाती हैं, जो एक तरफ से कच्ची और दूसरी तरफ से पकी हुई होती हैं।
छात्राओं का कहना है कि भोजन सिर्फ पेट भरने का साधन नहीं है, बल्कि हॉस्टल में रहने वाले बच्चों के स्वास्थ्य और पढ़ाई से भी इसका सीधा संबंध है। यदि उन्हें पौष्टिक और सही तरीके से तैयार भोजन नहीं मिलेगा तो इसका असर उनके स्वास्थ्य पर पड़ सकता है। छात्राओं ने प्रशासन से भोजन की गुणवत्ता की जांच कराने और खाने की व्यवस्था को बेहतर बनाने की मांग की।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भोजन की स्थिति को लेकर हॉस्टल में रहने वाली छात्राओं की शिकायतों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता। छात्राओं के अनुसार कई बार उन्हें मजबूरी में वही भोजन खाना पड़ता है, क्योंकि हॉस्टल में उनके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं होता।
‘वार्डन हमसे काम करवाती हैं’
छात्राओं ने हॉस्टल की वार्डन को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि वार्डन उनसे हॉस्टल के कई काम करवाती हैं। छात्राओं के अनुसार उनसे पोछा लगवाया जाता है और बाथरूम की सफाई तक कराई जाती है।
छात्राएं बोली -हमारे स्कूल में खाना अच्छा नहीं दिया जाता है.."रोटियां एक तरफ से कच्ची एक तरफ से पकी दी जाती है" -
— Rahul Saini (@JtrahulSaini) September 10, 2026
वार्डन हमसे काम करवाती है.. पोछा लगवाती है बाथरूम साफ करवाती है..!
प्रतापगढ़ जिले के एक हॉस्टल की 15 छात्राएं अनियमिताओं अथवा स्टाफ के खिलाफ पैदल चलकर कलेक्टर से… pic.twitter.com/uHzHbcnjJR
छात्राओं ने अधिकारियों के सामने अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि वे हॉस्टल में पढ़ाई करने और रहने के लिए आती हैं। ऐसे में उनसे नियमित रूप से सफाई जैसे काम कराया जाना उनके लिए परेशानी का कारण बन रहा है। छात्राओं ने आरोप लगाया कि उन्हें हॉस्टल के दूसरे कामों में भी लगाया जाता है।
यदि छात्राओं के आरोप सही पाए जाते हैं तो यह हॉस्टल की व्यवस्था और छात्राओं के अधिकारों से जुड़ा गंभीर विषय हो सकता है। हॉस्टल में रहने वाली छात्राओं के लिए सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराना संबंधित प्रशासन और प्रबंधन की जिम्मेदारी है।
छात्राओं ने अधिकारियों को सुनाई अपनी परेशानी
कलेक्टर कार्यालय पहुंची छात्राओं ने अपनी शिकायत अधिकारियों के सामने रखी। छात्राओं ने कथित अव्यवस्थाओं की जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि उनकी शिकायतों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
छात्राओं के अनुसार वे काफी समय से हॉस्टल की व्यवस्थाओं को लेकर परेशान थीं। जब उन्हें अपनी समस्याओं का उचित समाधान नहीं मिला तो उन्होंने सामूहिक रूप से प्रशासन तक अपनी बात पहुंचाने का फैसला किया। इसके बाद करीब 15 छात्राएं पैदल कलेक्टर कार्यालय पहुंचीं।
छात्राओं का इस तरह सामूहिक रूप से शिकायत लेकर पहुंचना यह भी बताता है कि वे अपनी समस्याओं को लेकर गंभीर हैं। हालांकि उनके सभी आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। प्रशासनिक स्तर पर जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि हॉस्टल में भोजन और सफाई की व्यवस्था वास्तव में किस स्थिति में है और छात्राओं द्वारा लगाए गए आरोप कितने सही हैं।
हॉस्टल की व्यवस्थाओं पर उठे सवाल
इस पूरे मामले के सामने आने के बाद हॉस्टल में छात्राओं को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं पर सवाल खड़े हो गए हैं। छात्रावासों में रहने वाली छात्राओं के लिए भोजन, स्वच्छता, सुरक्षा और पढ़ाई का वातावरण बेहद महत्वपूर्ण होता है। यदि इनमें किसी तरह की लापरवाही होती है तो उसका सीधा असर छात्राओं पर पड़ सकता है।
छात्राओं ने जिस तरह भोजन और सफाई व्यवस्था को लेकर शिकायत की है, उससे हॉस्टल के नियमित निरीक्षण की जरूरत भी सामने आती है। छात्राओं का कहना है कि उन्हें बेहतर व्यवस्था मिलनी चाहिए और उनकी शिकायतों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी छात्रावास में भोजन की गुणवत्ता की नियमित निगरानी, रसोई की साफ-सफाई, खाद्य सामग्री की गुणवत्ता और तैयार भोजन की स्थिति की जांच जरूरी होती है। इसी तरह हॉस्टल में साफ-सफाई के लिए निर्धारित व्यवस्था होनी चाहिए ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो।
जांच के बाद सामने आएगी पूरी सच्चाई
फिलहाल इस मामले में छात्राओं द्वारा लगाए गए आरोपों को लेकर प्रशासनिक जांच महत्वपूर्ण होगी। जांच में हॉस्टल की रसोई, भोजन की गुणवत्ता, सफाई व्यवस्था और स्टाफ के व्यवहार से संबंधित शिकायतों की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।
छात्राओं की शिकायत के बाद प्रशासन यदि हॉस्टल का निरीक्षण कराता है तो वहां की व्यवस्थाओं की जमीनी स्थिति भी स्पष्ट हो सकेगी। साथ ही छात्राओं से अलग-अलग बातचीत करके यह पता लगाया जा सकता है कि उनकी शिकायतें किसी एक घटना तक सीमित हैं या लंबे समय से ऐसी समस्याएं सामने आती रही हैं।
सबसे अहम बात यह है कि शिकायत लेकर कलेक्टर कार्यालय पहुंची छात्राओं की बात को गंभीरता से सुना जाए और जांच निष्पक्ष तरीके से की जाए। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार लोगों पर नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए और हॉस्टल की व्यवस्थाओं में सुधार किया जाना चाहिए।
फिलहाल प्रतापगढ़ के इस हॉस्टल से सामने आई शिकायत ने छात्रावासों में रहने वाली छात्राओं को मिलने वाली सुविधाओं और उनकी शिकायतों के निस्तारण की व्यवस्था पर चर्चा तेज कर दी है। छात्राओं ने जिस उम्मीद के साथ पैदल कलेक्टर कार्यालय तक पहुंचकर अपनी आवाज उठाई है, अब उनकी शिकायतों पर प्रशासन क्या कदम उठाता है, यह देखने वाली बात होगी।

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