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शहर भर में मिलीं प्लास्टिक की बोरियां... जब अंदर देखा तो पुलिस भी रह गई सन्न! 7 साल बाद भी नहीं मिला सबसे बड़ा राज



तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में सामने आया एक चर्चित हत्याकांड आज भी कई अनसुलझे सवाल छोड़ गया है। यह मामला केवल एक हत्या का नहीं था, बल्कि उसकी क्रूरता ने जांच एजेंसियों से लेकर आम लोगों तक सभी को स्तब्ध कर दिया था। शहर के अलग-अलग इलाकों से प्लास्टिक की बोरियों में मानव शरीर के टुकड़े मिलने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की। शुरुआती दिनों में सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि शव का सिर नहीं मिला था, जिससे मृतका की पहचान करना बेहद मुश्किल हो गया।

बाद में शरीर पर बने टैटू और डीएनए जांच की मदद से मृतका की पहचान तमिल अभिनेत्री संध्या के रूप में हुई। हालांकि जांच में कई अहम खुलासे हुए, लेकिन उनका सिर आज तक बरामद नहीं हो सका। यही कारण है कि यह मामला वर्षों बाद भी चर्चा का विषय बना हुआ है।

डंपयार्ड से शुरू हुई थी पूरी कहानी

मामले की शुरुआत उस समय हुई जब चेन्नई के पल्लीकरनाई डंपयार्ड में एक प्लास्टिक की बोरी मिली। जब उसे खोला गया तो उसके अंदर मानव शरीर का एक कटा हुआ अंग मिला। इसके बाद पुलिस ने आसपास के इलाकों में तलाशी अभियान चलाया।

कुछ ही समय में शहर के अलग-अलग हिस्सों से इसी तरह की कई प्लास्टिक बोरियां बरामद हुईं। फोरेंसिक विशेषज्ञों ने जांच के बाद बताया कि सभी अंग एक ही महिला के शरीर के थे।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, महिला की हत्या किसी धारदार हथियार से की गई थी और बाद में शव के कई टुकड़े किए गए थे। सबसे बड़ी परेशानी यह थी कि सिर गायब होने के कारण मृतका की पहचान तत्काल नहीं हो पा रही थी।

टैटू बने पहचान की सबसे बड़ी कड़ी

जांच के दौरान पुलिस की नजर मृतका के शरीर पर बने दो टैटू पर गई। इन्हीं टैटू को जांच की पहली महत्वपूर्ण कड़ी माना गया।

इसी बीच एक महिला ने अपनी बेटी की गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने पुलिस को बताया कि उनकी बेटी संध्या चेन्नई में अपने पति और दो बच्चों के साथ रहती थी, लेकिन काफी समय से उसका कोई पता नहीं चल रहा था।

जब पुलिस ने उन्हें बरामद शव से जुड़े टैटू और अन्य पहचान चिह्न दिखाए, तो उन्होंने एक टैटू और एक आभूषण को पहचान लिया। इसके बाद डीएनए जांच कराई गई, जिसने पुष्टि कर दी कि बरामद अवशेष अभिनेत्री संध्या के ही थे।

सिर गायब होने से उलझी रही जांच

पहचान होने के बाद भी जांच पूरी तरह आसान नहीं हुई। पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल यह था कि मृतका का सिर कहां गया।

रिपोर्टों के अनुसार, जांच टीम को आशंका थी कि शरीर के अन्य हिस्सों की तरह सिर भी कचरे में फेंका गया होगा। इसी संभावना के आधार पर बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चलाया गया।

11 हजार टन से अधिक कचरे की हुई तलाशी

जांच अधिकारियों ने डंपयार्ड में व्यापक सर्च ऑपरेशन चलाया। बताया जाता है कि लगभग 11,700 टन कचरे की छानबीन की गई।

इस अभियान के दौरान शरीर के कई अन्य हिस्से बरामद हुए, लेकिन एक पैर और सिर नहीं मिल सके। पुलिस की यह कोशिश कई दिनों तक जारी रही, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण साक्ष्य आज तक बरामद नहीं हो पाया।

पति के बयान पर हुआ शक

पहचान होने के बाद जांच का फोकस मृतका के पारिवारिक जीवन पर गया। पुलिस ने सबसे पहले उनके पति और फिल्म निर्माता बालकृष्णन से पूछताछ की।

जांच एजेंसियों के अनुसार, उनके शुरुआती बयान और उपलब्ध तथ्यों में कई विरोधाभास सामने आए। उन्होंने कथित तौर पर कहा कि संध्या अपने मायके चली गई थीं, जबकि परिवार का कहना था कि वह वहां कभी पहुंची ही नहीं।

पूछताछ आगे बढ़ने पर पुलिस को संदेह और गहरा होता गया।

घरेलू विवाद की जांच

जांच अधिकारियों के अनुसार, दंपति के बीच पहले भी विवाद हो चुके थे। मीडिया रिपोर्टों में उल्लेख किया गया कि वर्ष 2018 में भी संध्या ने घरेलू हिंसा को लेकर पुलिस से संपर्क किया था। बाद में दोनों के बीच समझौता हो गया था और वे साथ रहने लगे थे।

पुलिस ने इस पुराने विवाद को भी जांच का हिस्सा बनाया और पारिवारिक संबंधों की पूरी पड़ताल की।

जांच में सामने आए आरोप

पुलिस के अनुसार, जांच के दौरान यह आरोप सामने आया कि जनवरी 2019 में पति-पत्नी के बीच कथित रूप से तीखा विवाद हुआ था। जांच एजेंसियों का दावा था कि इसी दौरान संध्या की हत्या कर दी गई।

पुलिस का कहना था कि बाद में शव के टुकड़े कर उन्हें शहर के विभिन्न हिस्सों में फेंक दिया गया ताकि पहचान और जांच दोनों मुश्किल हो जाएं।

इन आरोपों का अंतिम परीक्षण न्यायिक प्रक्रिया और अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर ही किया जाता है।

सीसीटीवी फुटेज भी बना अहम साक्ष्य

जांच के दौरान पुलिस ने कई इलाकों के सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले। अधिकारियों के अनुसार, कुछ फुटेज में एक व्यक्ति को देर रात दोपहिया वाहन पर बोरियां ले जाते हुए देखा गया था।

पुलिस ने इन फुटेज को अन्य तकनीकी और फोरेंसिक साक्ष्यों के साथ जोड़कर मामले की जांच आगे बढ़ाई।

आज भी बरकरार है सबसे बड़ा सवाल

मामले में कई पहलुओं पर जांच आगे बढ़ी, लेकिन अभिनेत्री का सिर बरामद न होना आज भी सबसे बड़ा रहस्य बना हुआ है। जांच एजेंसियों के व्यापक प्रयासों के बावजूद यह अहम साक्ष्य नहीं मिल पाया।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह हिस्सा बरामद होता, तो फोरेंसिक जांच को और अधिक मजबूती मिल सकती थी।

घरेलू हिंसा और महिलाओं की सुरक्षा पर फिर उठे सवाल

इस चर्चित मामले ने घरेलू हिंसा, वैवाहिक विवाद और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर बहस छेड़ी। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि घरेलू हिंसा की शिकायतों को समय रहते गंभीरता से लिया जाए और पीड़ितों को पर्याप्त सहायता मिले, तो कई गंभीर अपराधों को रोका जा सकता है।

सामाजिक संगठनों का भी मानना है कि पारिवारिक विवादों में संवाद, कानूनी सहायता और समय पर हस्तक्षेप अत्यंत आवश्यक है।

चेन्नई का यह चर्चित हत्याकांड वर्षों बाद भी लोगों के जेहन में ताजा है। प्लास्टिक की बोरियों में मिले शरीर के टुकड़े, टैटू से हुई पहचान, डीएनए जांच और व्यापक पुलिस कार्रवाई ने मामले के कई पहलुओं से पर्दा उठाया, लेकिन मृतका का सिर आज तक बरामद नहीं हो सका। यही वजह है कि यह मामला अब भी कई अनुत्तरित सवालों के साथ भारत के चर्चित आपराधिक मामलों में गिना जाता है।

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