कानपुर में चने के नाम पर बड़ा खेल! खाने वाले चने में मिला चमड़ा रंगने वाला रंग, 36.58 टन माल हुआ नष्ट
कानपुर: बाहर से देखने पर भुना हुआ चना बिल्कुल सामान्य दिखाई देता है। उसका रंग, आकार और पैकिंग देखकर आम ग्राहक शायद ही अंदाजा लगा पाए कि उसमें कोई ऐसा रसायन मौजूद हो सकता है, जिसका इस्तेमाल खाने के लिए नहीं बल्कि चमड़े और कपड़े को रंगने में किया जाता है। कानपुर में खाद्य विभाग की कार्रवाई के बाद ऐसा ही हैरान करने वाला मामला सामने आया है। जांच में गोदाम में रखे भुने चने में औरामिन डाई की मौजूदगी पाई गई। इसके बाद बड़ी मात्रा में जब्त चने को न्यायालय के आदेश पर नष्ट करा दिया गया।
मामला कानपुर के बिनगवां इलाके का है, जहां बाबा बैजनाथ ट्रेडर्स के गोदाम में खाद्य विभाग की टीम ने छापेमारी कर बड़ी मात्रा में भुना चना जब्त किया था। प्रयोगशाला जांच में नमूने में औरामिन डाई मिलने की पुष्टि हुई। इसके बाद पूरे स्टॉक को मानव उपभोग के लिए असुरक्षित घोषित कर दिया गया। विभाग ने न्यायालय की अनुमति के बाद 36,580 किलोग्राम भुने चने का निस्तारण कराया। इस स्टॉक की अनुमानित कीमत करीब 33.48 लाख रुपये बताई गई है। दिसंबर 2025 में हुई शुरुआती कार्रवाई की पुष्टि समकालीन रिपोर्टों में भी हुई थी, जिसमें करीब 372 क्विंटल भुना चना जब्त किए जाने की जानकारी दी गई थी।
चने की जांच में सामने आया चौंकाने वाला सच
बताया गया है कि खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की टीम ने 17 दिसंबर 2025 को बिनगवां स्थित बाबा बैजनाथ ट्रेडर्स के गोदाम पर कार्रवाई की थी। टीम को वहां बड़ी मात्रा में भुना चना मिला। मौके पर मौजूद स्टॉक को देखते हुए खाद्य अधिकारियों ने उसके नमूने लिए और प्रयोगशाला जांच के लिए भेज दिए।
शुरुआती कार्रवाई के दौरान करीब 1,240 बोरी भुना चना जब्त किए जाने की जानकारी सामने आई थी। उस समय इसका वजन लगभग 372 क्विंटल और अनुमानित कीमत 33.48 लाख रुपये बताई गई थी।
खाद्य विभाग के लिए सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह था कि चने को किस तरह तैयार किया गया था और उसमें कोई प्रतिबंधित पदार्थ तो नहीं मिलाया गया। प्रयोगशाला से रिपोर्ट आने के बाद मामला और गंभीर हो गया।
रिपोर्ट में औरामिन डाई की मौजूदगी पाई गई।
क्या है औरामिन डाई?
औरामिन एक कृत्रिम पीला रंग है। इसका इस्तेमाल औद्योगिक स्तर पर रंगाई जैसे कामों में किया जाता है। खाद्य पदार्थों में इसका इस्तेमाल स्वीकार्य नहीं माना जाता। यही वजह है कि चने के नमूने में इसकी मौजूदगी सामने आने के बाद खाद्य विभाग ने पूरे स्टॉक को असुरक्षित घोषित कर दिया।
आम उपभोक्ता के लिए सबसे चिंताजनक बात यह है कि किसी खाद्य पदार्थ में मिलाया गया रंग हमेशा आंखों से पहचान में नहीं आता। भुने हुए चने का रंग देखकर ग्राहक यह पता नहीं लगा सकता कि उसमें किस तरह का रंग इस्तेमाल किया गया है।
यही कारण है कि खाद्य पदार्थों में मिलावट रोकने के लिए प्रयोगशाला जांच और खाद्य सुरक्षा विभाग की निगरानी महत्वपूर्ण मानी जाती है।
चमड़ा और कपड़ा रंगने में इस्तेमाल होने वाला रंग खाने में मिला
खाद्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार औरामिन डाई का उपयोग औद्योगिक रंगाई में किया जाता है। इसका इस्तेमाल चमड़े और कपड़े को रंगने के लिए किया जा सकता है।
खाने की चीज में ऐसे रसायन का पाया जाना इसलिए गंभीर मामला है क्योंकि उपभोक्ता किसी खाद्य उत्पाद को इस भरोसे के साथ खरीदता है कि वह मानव सेवन के लिए सुरक्षित है।
इस मामले में चना देखने में सामान्य था, लेकिन प्रयोगशाला जांच ने उसके अंदर छिपी मिलावट का पता लगा दिया। यही वजह है कि अधिकारियों ने पूरे स्टॉक को बाजार में पहुंचने से रोक दिया।
36,580 किलो चना क्यों नष्ट कराया गया?
प्रयोगशाला रिपोर्ट में नमूना असुरक्षित पाए जाने के बाद खाद्य विभाग ने जब्त स्टॉक को नष्ट करने की प्रक्रिया शुरू की। मामला न्यायालय तक पहुंचा और वहां से सीज सामग्री के निस्तारण की अनुमति मिलने के बाद कार्रवाई आगे बढ़ी।
रिपोर्ट के अनुसार 14 जुलाई 2026 को एमएम न्यायालय प्रथम की ओर से संबंधित मामलों में सीज सामग्री के निस्तारण के आदेश जारी किए गए। इसके बाद खाद्य विभाग और नगर निगम की टीम ने संयुक्त रूप से कार्रवाई की।
सोमवार को मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी धर्मेंद्र कुमार द्विवेदी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति ने नगर निगम के भौंती स्थित डंपिंग यार्ड में जब्त चने को नष्ट कराया।
इस काम के लिए नगर निगम से अनुबंधित फर्म मेसर्स एनवायरमेंटल टेक्नो, आगरा की मदद ली गई। इस तरह बड़ी मात्रा में संदिग्ध खाद्य सामग्री को दोबारा बाजार में पहुंचने से रोक दिया गया।
33.48 लाख रुपये का माल हुआ बर्बाद
जिस भुने चने को नष्ट कराया गया, उसकी अनुमानित कीमत करीब 33.48 लाख रुपये बताई गई है। इतनी बड़ी मात्रा में खाद्य सामग्री का नष्ट होना अपने आप में इस मामले की गंभीरता को दिखाता है।
कारोबारियों के लिए भी यह घटना एक बड़ा संदेश है कि खाद्य उत्पादों में किसी भी तरह की प्रतिबंधित सामग्री का इस्तेमाल भारी पड़ सकता है। वहीं उपभोक्ताओं के लिए यह मामला इस बात की याद दिलाता है कि केवल खाद्य पदार्थ का रंग और रूप देखकर उसकी गुणवत्ता का अंदाजा लगाना मुश्किल है।
खाने से क्या हो सकता है नुकसान?
जीएसवीएम के प्रोफेसर जेएस कुशवाहा के अनुसार, औरामिन के सेवन से स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उनके मुताबिक इसके सेवन से उल्टी, दस्त और पेट में तेज दर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं। लंबे समय तक सेवन की स्थिति में लिवर और किडनी पर भी गंभीर असर पड़ने की आशंका बताई गई है।
इसके अलावा शुरुआती स्तर पर एलर्जी और आंखों में जलन जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।
हालांकि किसी व्यक्ति पर स्वास्थ्य प्रभाव उसकी मात्रा, सेवन की अवधि और व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर कर सकते हैं। इसलिए संदिग्ध या असुरक्षित खाद्य पदार्थ का सेवन नहीं करना चाहिए।
सिर्फ रंग देखकर न करें भरोसा
भुने चने जैसे खाद्य पदार्थ आमतौर पर रोजमर्रा के स्नैक्स का हिस्सा होते हैं। लोग इन्हें बाजार से खरीदकर सीधे खाते हैं। ऐसे में खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता को लेकर सावधानी रखना जरूरी है।
किसी खाद्य पदार्थ का असामान्य रूप से चमकीला या एक जैसा रंग दिखाई देने पर उपभोक्ताओं को सावधान रहना चाहिए। हालांकि सिर्फ देखकर मिलावट की पुष्टि नहीं की जा सकती। किसी पदार्थ में प्रतिबंधित रंग या अन्य रसायन की मौजूदगी की सही पुष्टि प्रयोगशाला जांच से ही हो सकती है।
इसलिए पैक्ड खाद्य पदार्थ खरीदते समय लेबल, पैकिंग, निर्माण तिथि और वैधता अवधि जैसी जानकारियों पर ध्यान देना जरूरी है।
कानपुर में मिलावट के खिलाफ कार्रवाई जारी
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब कानपुर और आसपास के इलाकों में खाद्य विभाग मिलावट के खिलाफ लगातार अभियान चला रहा है। हाल के दिनों में भी खाद्य सुरक्षा टीमों ने संदिग्ध खाद्य पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई की है। उदाहरण के तौर पर कानपुर में हानिकारक सिंथेटिक कलर मिलने के बाद करीब 398 किलो हल्दी के मामले में भी विभाग ने कार्रवाई की थी।
वहीं अगस्त 2026 में कानपुर देहात में भी खाद्य विभाग की टीम ने मिलावटी खाद्य सामग्री के खिलाफ अभियान चलाया और कई नमूने जांच के लिए भेजे।
इससे साफ है कि खाद्य पदार्थों में मिलावट को लेकर विभाग की निगरानी लगातार जारी है।
उपभोक्ताओं के लिए क्या है सबसे बड़ा संदेश?
भुने चने के इस मामले में सबसे अहम बात यही है कि मिलावट हमेशा दिखाई नहीं देती। जो खाद्य पदार्थ बाहर से बिल्कुल सामान्य नजर आता है, उसमें भी प्रतिबंधित रसायन मौजूद हो सकता है। इसलिए केवल रंग, स्वाद या दिखावट के आधार पर किसी खाद्य पदार्थ को सुरक्षित मान लेना सही नहीं है।
कानपुर में पकड़े गए चने के मामले में प्रयोगशाला जांच के बाद सच्चाई सामने आई और अदालत के आदेश के बाद हजारों किलो सामग्री नष्ट कराई गई। अगर यही स्टॉक बाजार में पहुंच जाता और लोग इसे खरीदकर खाते, तो उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो सकते थे।
फिलहाल 36,580 किलो भुना चना नष्ट कराया जा चुका है, लेकिन यह घटना खाद्य सुरक्षा को लेकर एक बड़ा सवाल जरूर छोड़ती है—अगर प्रयोगशाला जांच में यह मिलावट सामने नहीं आती, तो आखिर कितने लोगों की थाली तक यह खाद्य सामग्री पहुंच सकती थी? यही वजह है कि खाद्य पदार्थों में मिलावट की रोकथाम के लिए नियमित जांच, सख्त कार्रवाई और उपभोक्ताओं में जागरूकता तीनों बेहद जरूरी हैं।

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