उल्लू के घोंसले में आखिर कौन छिपा था? वैज्ञानिकों ने देखा ऐसा नजारा, जानकर आप भी कहेंगे—सांप को यहां लाया कौन था?
तुर्किये में वैज्ञानिकों ने यूरेशियन स्कोप्स उल्लू के घोंसलों की जांच के दौरान प्रकृति का एक ऐसा हैरान करने वाला व्यवहार दर्ज किया है, जिसने पक्षियों और सांपों के बीच रिश्ते को लेकर कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं। शोधकर्ताओं को उल्लुओं के कई घोंसलों में जिंदा वर्म स्नेक मिले। चौंकाने वाली बात सिर्फ यह नहीं थी कि सांप घोंसले में मौजूद थे, बल्कि सबूत इस ओर इशारा करते हैं कि उल्लू इन छोटे सांपों को खुद जिंदा पकड़कर घोंसले तक लाते थे।
आमतौर पर शिकारी पक्षी अपने शिकार को भोजन के लिए पकड़ते हैं। लेकिन यहां कहानी बिल्कुल अलग दिखाई दी। उल्लू इन सांपों को खाने के बजाय अपने बच्चों वाले घोंसले में छोड़ रहे थे। वैज्ञानिकों के मुताबिक इसका संभावित कारण घोंसले में मौजूद चींटियों, मक्खियों के लार्वा और दूसरे छोटे कीड़ों को नियंत्रित करना हो सकता है।
उल्लू सांप को खाने के बजाय घोंसले में क्यों छोड़ता है?
यही इस पूरी रिसर्च का सबसे बड़ा रहस्य है।
यूरेशियन स्कोप्स उल्लू छोटे आकार का शिकारी पक्षी है। सामान्य तौर पर उसके लिए किसी छोटे जीव को पकड़ना और फिर उसे खा जाना कोई असामान्य व्यवहार नहीं है। लेकिन वर्म स्नेक के मामले में शोधकर्ताओं ने एक अलग पैटर्न देखा।
वैज्ञानिकों के अनुसार, इन सांपों को घोंसले में जिंदा लाया गया। वहां वे घोंसले के अंदर और घोंसले की सामग्री के बीच घूमते रहे। वर्म स्नेक मुख्य रूप से छोटे कीड़ों और उनके लार्वा को खाते हैं। इनमें चींटियां और मक्खियों के लार्वा भी शामिल हैं।
इससे वैज्ञानिकों के सामने एक दिलचस्प संभावना आई—क्या उल्लू जानबूझकर ऐसे सांपों को अपने बच्चों के पास लाते हैं ताकि वे घोंसले में मौजूद नुकसान पहुंचाने वाले छोटे जीवों को खा सकें?
अभी इसका पक्का जवाब नहीं मिला है। लेकिन शोध के आंकड़े इस संभावना को काफी दिलचस्प बना देते हैं।
109 घोंसलों की जांच में सामने आया बड़ा अंतर
वैज्ञानिकों ने छह प्रजनन मौसमों के दौरान कुल 109 घोंसला-बक्सों की निगरानी की। इनमें से करीब 44 प्रतिशत घोंसलों में वर्म स्नेक मौजूद थे।
सबसे अहम बात यह थी कि सांप खाली घोंसलों में नहीं मिले। वे उन घोंसलों में पाए गए जहां यूरेशियन स्कोप्स उल्लू अपने बच्चों के साथ मौजूद थे।
यानी सांपों की मौजूदगी और उल्लुओं के प्रजनन के बीच एक खास संबंध दिखाई दिया।
वैज्ञानिकों ने देखा कि जिन घोंसलों में सांप मौजूद थे, वहां उल्लू के बच्चों के सफलतापूर्वक घोंसला छोड़ने की दर ज्यादा थी।
सांपों वाले घोंसलों में करीब 61 प्रतिशत बच्चे उड़ने की उम्र तक पहुंच पाए, जबकि बिना सांप वाले घोंसलों में यह आंकड़ा करीब 29 प्रतिशत था।
यह अंतर वैज्ञानिकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
हालांकि शोधकर्ताओं ने सावधानी बरती है। वे यह नहीं कह रहे कि सांपों की मौजूदगी ही बच्चों के बचने की सीधी वजह साबित हो गई है। यह सिर्फ एक मजबूत संबंध है, जिसके पीछे वास्तविक कारण जानने के लिए आगे अध्ययन जरूरी है।
घोंसले के अंदर सांप कर रहे थे ‘सफाई’ का काम?
वर्म स्नेक का व्यवहार इस रहस्य को समझने में सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हो सकता है।
ये छोटे सांप मुख्य रूप से कीड़े खाते हैं। पक्षियों के घोंसले में उन्हें भोजन आसानी से मिल सकता है, क्योंकि वहां जैविक सामग्री के साथ कई छोटे जीव भी मौजूद रहते हैं।
घोंसले में चींटियां और मक्खियों के लार्वा जैसे जीव मौजूद हो सकते हैं। इनमें से कुछ जीव घोंसले में रहने वाले पक्षियों के लिए परेशानी पैदा कर सकते हैं।
वर्म स्नेक इन्हें खाकर घोंसले में मौजूद कीड़ों की संख्या कम कर सकते हैं।
इस तरह एक अजीब सा रिश्ता बनता दिखाई देता है।
उल्लू को घोंसले में एक ऐसा जीव मिल जाता है जो छोटे कीड़ों को खाता है, जबकि सांप को गर्म और भोजन से भरपूर जगह मिल जाती है।
यानी दोनों को अप्रत्यक्ष फायदा हो सकता है।
क्या उल्लू ने जानबूझकर यह तरीका सीखा है?
यह सवाल वैज्ञानिकों के लिए सबसे ज्यादा दिलचस्प है।
अगर उल्लू वास्तव में जानबूझकर सांपों को घोंसले में लाते हैं और उन्हें खाने के बजाय वहां छोड़ते हैं, तो यह व्यवहार पक्षियों की समझ और सीखने की क्षमता को लेकर भी नए सवाल पैदा करता है।
लंबे समय में अगर किसी ऐसे व्यवहार से बच्चों के बचने की संभावना बढ़ती है, तो वह व्यवहार आगे की पीढ़ियों में भी दिखाई दे सकता है।
लेकिन अभी यह साबित नहीं हुआ है कि हर उल्लू यह रणनीति समझकर अपनाता है।
यह भी संभव है कि कुछ सांपों को पकड़ने की प्रक्रिया में उल्लू का व्यवहार किसी दूसरे कारण से जुड़ा हो और सांपों का घोंसले में रहना बाद में उल्लुओं के लिए फायदेमंद साबित होता हो।
इसीलिए वैज्ञानिक इस रिश्ते को फिलहाल पूरी तरह स्थापित पारस्परिक लाभ वाला संबंध घोषित करने से बच रहे हैं।
सांपों को देखकर उल्लू हमला क्यों नहीं करते?
यह भी इस शोध का दिलचस्प हिस्सा है।
किसी शिकारी पक्षी के घोंसले में जिंदा सांप का मौजूद होना सामान्य स्थिति नहीं मानी जाएगी। लेकिन यहां पाए गए वर्म स्नेक छोटे, जमीन के अंदर रहने वाले और कीड़े खाने वाले सांप हैं।
ये सांप घोंसले की सामग्री के ऊपर और उसके अंदर दोनों जगह मौजूद हो सकते हैं। वहां वे छोटे कीड़ों को खाते हुए दिखाई दिए।
यानी उल्लू और सांप के बीच ऐसा व्यवहार देखा गया जिसमें उल्लू सांप को तुरंत शिकार बनाकर खाने के बजाय उसे घोंसले में रहने दे रहा था।
यह शिकारी और शिकार के पारंपरिक रिश्ते से बिल्कुल अलग तस्वीर पेश करता है।
बच्चों के बचने की दर ने वैज्ञानिकों को सबसे ज्यादा चौंकाया
रिसर्च का सबसे मजबूत आंकड़ा यही है कि सांपों वाले घोंसलों में करीब 61 प्रतिशत बच्चे सफलतापूर्वक उड़ सके, जबकि बिना सांप वाले घोंसलों में यह दर 29 प्रतिशत रही।
यह अंतर इतना बड़ा है कि वैज्ञानिकों ने इसे नजरअंदाज नहीं किया। हालांकि शोधकर्ताओं ने यह भी स्पष्ट किया कि सिर्फ इस आंकड़े के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि सांपों ने सीधे बच्चों को बचाया।
कई दूसरे पर्यावरणीय कारक भी इसके पीछे हो सकते हैं।
फिर भी अगर भविष्य की रिसर्च यह साबित कर देती है कि सांप वास्तव में घोंसले के कीड़ों को कम करके उल्लू के बच्चों के स्वास्थ्य और जीवित रहने की संभावना बढ़ाते हैं, तो यह पक्षियों और सरीसृपों के बीच एक बेहद अनोखे प्राकृतिक सहयोग का उदाहरण होगा।
क्या दूसरे पक्षी भी सांपों का इस्तेमाल करते हैं?
यह घटना पूरी तरह अकेली नहीं है।
दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में कुछ पक्षियों और छोटे, गैर-विषैले सांपों के बीच इसी तरह की गैर-खाने वाली अंतःक्रियाओं के उदाहरण सामने आए हैं।
इससे यह संभावना बढ़ती है कि कुछ पक्षी ऐसे सांपों को अपने घोंसलों में सहन कर सकते हैं या उनका इस्तेमाल अप्रत्यक्ष रूप से कर सकते हैं।
लेकिन तुर्किये में यूरेशियन स्कोप्स उल्लू और वर्म स्नेक के मामले में खास बात यह है कि शोधकर्ताओं ने व्यवस्थित रूप से 109 घोंसलों की निगरानी की और सांपों की मौजूदगी तथा बच्चों के सफलतापूर्वक उड़ने के बीच स्पष्ट अंतर देखा।
यही वजह है कि यह अध्ययन वैज्ञानिकों के लिए खास महत्व रखता है।
सांपों को भी मिलता है फायदा
अगर उल्लू वास्तव में इन सांपों को घोंसले तक पहुंचाते हैं, तो सांपों के लिए भी यह जगह काफी फायदेमंद हो सकती है।
घोंसले में उन्हें भोजन मिल सकता है और उन्हें अपेक्षाकृत सुरक्षित वातावरण भी मिल सकता है। इसके बदले में वे घोंसले में मौजूद छोटे कीड़ों को खा सकते हैं।
इस तरह प्रकृति में एक ऐसा रिश्ता बन सकता है जिसमें दोनों जीवों को अलग-अलग तरह से फायदा मिलता है।
हालांकि वैज्ञानिक अभी यह निर्धारित नहीं कर पाए हैं कि यह रिश्ता वास्तव में पारस्परिक लाभ वाला है या मुख्य रूप से उल्लुओं को ही फायदा होता है।
यह खोज क्यों महत्वपूर्ण है?
प्रकृति में शिकारी और शिकार का रिश्ता अक्सर सीधा माना जाता है—एक जीव दूसरे को पकड़ता है और खा जाता है। लेकिन यह अध्ययन दिखाता है कि प्रकृति में रिश्ते इससे कहीं ज्यादा जटिल हो सकते हैं।
एक उल्लू, जो खुद एक शिकारी है, दूसरे जीवित प्राणी को अपने बच्चों के पास लाता है और उसे खाने के बजाय घोंसले में रहने देता है।
बदले में वह छोटा सांप घोंसले में मौजूद कीड़ों को खाता है।
अगर यह प्रक्रिया वास्तव में उल्लू के बच्चों के लिए फायदेमंद साबित होती है, तो यह प्रकृति की उस अद्भुत रणनीति का उदाहरण होगी जिसमें अलग-अलग प्रजातियां एक-दूसरे से अप्रत्यक्ष लाभ हासिल करती हैं।
रहस्य अभी पूरी तरह सुलझा नहीं है
वैज्ञानिकों की यह खोज जितनी हैरान करने वाली है, उतने ही नए सवाल भी पैदा करती है।
क्या उल्लू वास्तव में समझते हैं कि सांप घोंसले से कीड़े हटाएंगे? क्या वे जानबूझकर ऐसे सांपों की तलाश करते हैं? क्या यह व्यवहार सभी यूरेशियन स्कोप्स उल्लुओं में पाया जाता है या सिर्फ तुर्किये की किसी खास आबादी में? और सबसे बड़ा सवाल—क्या सांपों की मौजूदगी वास्तव में बच्चों के जीवित रहने की वजह है?
इन सवालों के जवाब के लिए आगे और शोध की जरूरत है।
फिलहाल इतना जरूर साफ है कि तुर्किये के इन उल्लू घोंसलों ने वैज्ञानिकों को प्रकृति का ऐसा अनोखा रिश्ता दिखाया है, जिसमें शिकारी अपने बच्चों की सुरक्षा के लिए जिस जीव को आमतौर पर शिकार समझा जा सकता है, उसी को जिंदा घोंसले में लेकर आता दिखाई देता है।
और शायद प्रकृति का सबसे बड़ा रहस्य यही है—जिसे हम शिकार समझते हैं, वह कभी-कभी उसी शिकारी के बच्चों का अनदेखा रक्षक भी बन सकता है।

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