PM मोदी की जैकेट की जेब में ऐसा क्या था कि मच गया सियासी बवाल? कांग्रेस ने आयरलैंड से जोड़कर साधा निशाना!
नई दिल्ली: भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर अपने पारंपरिक और रंग-बिरंगे पहनावे को लेकर चर्चा में रहे। लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करने पहुंचे पीएम मोदी सफेद कुर्ता-पायजामा, चॉकलेट ब्राउन रंग की बिना आस्तीन वाली जैकेट और पारंपरिक लाल बांधनी पगड़ी में नजर आए। हर साल की तरह इस बार भी उनकी पगड़ी और पहनावे ने लोगों का ध्यान खींचा।
लेकिन इस बार चर्चा केवल उनके पारंपरिक लुक तक सीमित नहीं रही। उनकी जैकेट की जेब में लगे तीन रंगों वाले सजावटी कपड़े को लेकर कांग्रेस नेताओं ने प्रधानमंत्री पर निशाना साध दिया। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने इसके रंगों के क्रम को लेकर तंज कसा और इसकी तुलना आयरलैंड के झंडे से कर दी। इसके बाद कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने भी इसी मुद्दे पर प्रधानमंत्री को घेरा।
हालांकि, सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं भी देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने इसे राजनीतिक विवाद बताया, जबकि कुछ लोगों ने कहा कि यह केवल तिरंगे के तीन रंगों से प्रेरित एक सजावटी पॉकेट स्क्वायर था।
जैकेट की जेब के तीन रंगों ने खींचा ध्यान
स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की जैकेट की जेब में एक छोटा सजावटी कपड़ा दिखाई दे रहा था। इसमें हरा, सफेद और केसरिया रंग नजर आ रहे थे।
कांग्रेस ने इसी रंग संयोजन के क्रम को मुद्दा बनाया। कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री के पहनावे का वीडियो साझा करते हुए कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि प्रधानमंत्री ने “उर्दू में तिरंगा” पहना है या फिर भारत की जगह आयरलैंड का स्वतंत्रता दिवस मना रहे हैं।
पवन खेड़ा का निशाना मुख्य रूप से जैकेट की जेब में दिखाई दे रहे रंगों के क्रम पर था। उनका तर्क था कि भारतीय राष्ट्रीय ध्वज में केसरिया, सफेद और हरा रंग ऊपर से नीचे होता है, जबकि तस्वीर में दिखाई दे रहे पॉकेट स्क्वायर में रंगों का क्रम अलग नजर आ रहा था।
इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर इस छोटे से फैशन एलिमेंट को लेकर राजनीतिक बहस शुरू हो गई।
आयरलैंड से क्यों की गई तुलना?
कांग्रेस नेताओं की ओर से आयरलैंड का संदर्भ इसलिए दिया गया क्योंकि आयरलैंड के राष्ट्रीय ध्वज में हरा, सफेद और नारंगी रंग क्रमशः दिखाई देते हैं। भारतीय तिरंगे में केसरिया, सफेद और हरा रंग होता है।
दोनों झंडों में तीन रंगों की मौजूदगी है, लेकिन उनका क्रम और डिजाइन अलग है। भारतीय तिरंगे के बीच में अशोक चक्र भी होता है।
प्रधानमंत्री की जैकेट में लगे कपड़े में अशोक चक्र नहीं था और वह राष्ट्रीय ध्वज के रूप में इस्तेमाल किया गया झंडा नहीं था। वह एक सजावटी पॉकेट स्क्वायर था। फिर भी उसके रंगों के क्रम को लेकर कांग्रेस ने इसे राजनीतिक मुद्दा बना दिया।
यही वजह है कि स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय मौके पर प्रधानमंत्री के पहनावे का यह छोटा सा हिस्सा सोशल मीडिया और राजनीतिक बहस का विषय बन गया।
कैसा था प्रधानमंत्री मोदी का पूरा पहनावा?
इस पूरे विवाद से अलग अगर प्रधानमंत्री के पूरे पहनावे की बात करें तो उनका लुक काफी पारंपरिक नजर आया।
उन्होंने सफेद कुर्ता-पायजामा के साथ चॉकलेट ब्राउन रंग की बिना आस्तीन वाली जैकेट पहनी थी। इसके साथ लाल रंग की बांधनी शैली की पगड़ी थी, जिस पर सफेद और पीले रंग के छोटे-छोटे पैटर्न दिखाई दे रहे थे।
पगड़ी का लंबा हिस्सा पीछे की तरफ कंधे तक जाता हुआ नजर आया। पारंपरिक राजस्थानी और गुजराती शैली से प्रभावित इस साफे ने स्वतंत्रता दिवस समारोह में प्रधानमंत्री के लुक को अलग पहचान दी।
फैशन और सांस्कृतिक विशेषज्ञों के मुताबिक, प्रधानमंत्री का राष्ट्रीय अवसरों पर पारंपरिक पगड़ी पहनना भारत की अलग-अलग क्षेत्रीय परंपराओं और हस्तशिल्प को सामने लाने का एक तरीका भी रहा है।
2014 से लगातार बदलती रही पगड़ी
प्रधानमंत्री मोदी के स्वतंत्रता दिवस के पहनावे की सबसे खास पहचान उनकी पगड़ी रही है। 2014 में पहली बार लाल किले से स्वतंत्रता दिवस पर संबोधन के दौरान उन्होंने चमकीले लाल रंग की बांधेज पगड़ी पहनी थी।
इसके बाद लगभग हर साल उनकी पगड़ी का रंग, डिजाइन और शैली बदलती रही। कभी केसरिया रंग प्रमुख रहा, कभी पीला, लाल या हरा रंग नजर आया तो कभी कई रंगों का संयोजन देखने को मिला।
कई मौकों पर उनकी पगड़ी में राजस्थान और गुजरात की पारंपरिक बांधनी और अन्य क्षेत्रीय शैलियों की झलक दिखाई दी। यही वजह है कि स्वतंत्रता दिवस के दिन प्रधानमंत्री के भाषण से पहले उनकी पगड़ी भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बन जाती है।
2026 की पगड़ी ने 2014 की याद दिलाई
इस साल प्रधानमंत्री की लाल बांधनी पगड़ी को देखकर कई लोगों को उनके 2014 के पहले स्वतंत्रता दिवस लुक की याद आई।
2014 की पगड़ी भी लाल रंग की बांधेज शैली में थी और उसमें एक लंबा हिस्सा पीछे की ओर दिखाई देता था। 2026 में भी प्रधानमंत्री ने लाल रंग की बांधनी शैली को चुना, हालांकि डिजाइन और रंग संयोजन अलग था।
इस तरह 2026 का लुक उनके प्रधानमंत्री बनने के शुरुआती दौर की याद भी दिलाता नजर आया।
हर साल पगड़ी क्यों रहती है चर्चा में?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस के पहनावे में पगड़ी एक तरह की परंपरा बन चुकी है। अलग-अलग वर्षों में उनकी पगड़ी में भारत के अलग-अलग हिस्सों की पारंपरिक शैलियों और रंगों का इस्तेमाल देखने को मिला है।
इसका एक कारण यह भी माना जाता है कि प्रधानमंत्री राष्ट्रीय मंच से भारत की विविध सांस्कृतिक परंपराओं को प्रदर्शित करना चाहते हैं। राजस्थान की बांधनी, गुजरात की पारंपरिक शैली और अलग-अलग रंगों का इस्तेमाल इसी सांस्कृतिक विविधता की ओर संकेत करता है।
2026 में भी उनकी पगड़ी ने यही भूमिका निभाई। लेकिन इस बार पगड़ी से ज्यादा चर्चा उनकी जैकेट की जेब में लगे छोटे से कपड़े ने बटोर ली।
सुप्रिया श्रीनेत ने भी साधा निशाना
पवन खेड़ा के बयान के बाद कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने भी प्रधानमंत्री के पहनावे को लेकर प्रतिक्रिया दी। इससे मामला केवल एक नेता की टिप्पणी तक सीमित नहीं रहा और पार्टी के दूसरे नेताओं ने भी इसे राजनीतिक बहस का हिस्सा बना दिया।
कांग्रेस नेताओं की टिप्पणियों का केंद्र वही रंगों का क्रम रहा, जिसे उन्होंने आयरलैंड के राष्ट्रीय ध्वज से जोड़कर देखा।
वहीं, प्रधानमंत्री के समर्थकों और कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने इस आलोचना को अनावश्यक बताया। उनका कहना था कि तिरंगे के रंगों से प्रेरित कपड़े का इस्तेमाल राष्ट्रीय अवसरों पर आम बात है और इसे किसी विदेशी झंडे से जोड़ना केवल राजनीतिक कटाक्ष है।
सोशल मीडिया पर भी छिड़ी बहस
जैसे ही प्रधानमंत्री की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए, लोगों ने उनके पहनावे के छोटे से हिस्से पर ध्यान देना शुरू कर दिया।
कुछ यूजर्स ने कांग्रेस के बयान का समर्थन किया, जबकि दूसरे यूजर्स ने कहा कि तस्वीर या कैमरा एंगल के कारण रंगों का क्रम अलग दिखाई दे सकता है। कुछ लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि क्या केवल तीन रंगों के क्रम के आधार पर किसी पॉकेट स्क्वायर को किसी दूसरे देश के झंडे से जोड़ना उचित है।
इस तरह एक फैशन एक्सेसरी देखते ही देखते राजनीतिक बहस में बदल गई।
तिरंगा और पॉकेट स्क्वायर में अंतर समझना जरूरी
यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। भारतीय राष्ट्रीय ध्वज एक निर्धारित डिजाइन और नियमों वाला राष्ट्रीय प्रतीक है। उसमें केसरिया, सफेद और हरे रंग के साथ बीच में अशोक चक्र होता है।
प्रधानमंत्री की जैकेट में दिखाई देने वाला कपड़ा एक पॉकेट स्क्वायर या सजावटी कपड़ा था। इसे राष्ट्रीय ध्वज कहना सही नहीं होगा।
इसलिए विवाद मुख्य रूप से उसके रंगों के क्रम को लेकर राजनीतिक टिप्पणी तक सीमित रहा। इस घटना को राष्ट्रीय ध्वज के अपमान के रूप में पेश करना उपलब्ध जानकारी के आधार पर उचित नहीं होगा।
आखिर क्यों महत्वपूर्ण है यह विवाद?
पहली नजर में यह मामला केवल कपड़ों और रंगों से जुड़ा दिखाई देता है। लेकिन स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय अवसर पर प्रधानमंत्री के हर प्रतीक और हर सार्वजनिक दृश्य पर राजनीतिक नजर रहती है।
यही वजह है कि जैकेट की जेब में लगा एक छोटा सा कपड़ा भी राजनीतिक बयानबाजी का मुद्दा बन गया।
एक तरफ प्रधानमंत्री का पहनावा भारत की पारंपरिक संस्कृति और क्षेत्रीय हस्तशिल्प को प्रदर्शित कर रहा था, तो दूसरी तरफ उसी पहनावे के एक छोटे हिस्से ने कांग्रेस को सरकार पर निशाना साधने का मौका दे दिया।
विवाद के बीच प्रधानमंत्री का पूरा संदेश रहा केंद्र में
हालांकि पहनावे को लेकर राजनीतिक बहस जरूर हुई, लेकिन स्वतंत्रता दिवस समारोह का मुख्य केंद्र प्रधानमंत्री का लाल किले से दिया गया भाषण और उसमें की गई घोषणाएं रहीं।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में युवाओं, AI, प्रतियोगी परीक्षाओं, सेमीकंडक्टर, आत्मनिर्भरता और देश के विकास से जुड़े कई मुद्दों पर जोर दिया।
इसलिए दिन के अंत में प्रधानमंत्री के पहनावे को लेकर यह विवाद सोशल मीडिया और राजनीतिक बयानबाजी का हिस्सा जरूर बना, लेकिन स्वतंत्रता दिवस का व्यापक संदेश इससे कहीं बड़ा रहा।
फिलहाल, एक छोटे से पॉकेट स्क्वायर ने 15 अगस्त 2026 के समारोह में ऐसा रंग भर दिया कि भाषण के साथ-साथ प्रधानमंत्री की जेब भी राजनीतिक चर्चा का केंद्र बन गई। कांग्रेस ने इसे आयरलैंड से जोड़कर हमला किया, जबकि दूसरी ओर इसे महज तिरंगे से प्रेरित सजावटी डिजाइन बताया गया।

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