खदान के अंदर आखिर क्या हुआ? एक झटके में धंसी जमीन और मलबे में दफन हो गईं 100 से ज्यादा जिंदगियां!
कैमरून/मध्य अफ्रीकी गणराज्य: मध्य अफ्रीकी गणराज्य यानी सीएआर में सोने की एक खदान के अचानक ढह जाने से बड़ा हादसा हो गया। कैमरून की सीमा के पास स्थित जाम्बोये गांव के आसपास हुई इस दुर्घटना में 100 से ज्यादा लोगों के मारे जाने की खबर सामने आई है। स्थानीय रिपोर्टों में मलबे से अब तक 107 शव निकाले जाने का दावा किया गया है, जबकि मध्य अफ्रीकी गणराज्य के खान एवं भूविज्ञान मंत्री ने कम से कम 49 मौतों की आधिकारिक पुष्टि की है। बचाव अभियान जारी होने के कारण मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
यह हादसा ऐसे समय सामने आया है, जब अफ्रीका के कई देशों में छोटे और अनियमित सोने के खनन स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। हादसे ने एक बार फिर यह चिंता बढ़ा दी है कि रोजी-रोटी की तलाश में जोखिम भरी खदानों में उतरने वाले मजदूरों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त इंतजाम आखिर क्यों नहीं किए जा रहे हैं।
दोपहर में अचानक धंस गई खदान
बताया जा रहा है कि हादसा मंगलवार दोपहर करीब दो बजे जाम्बोये गांव के पास हुआ। यह इलाका कैमरून की सीमा के करीब है, जबकि जिस खदान में हादसा हुआ वह मध्य अफ्रीकी गणराज्य की सीमा के भीतर बताई जा रही है।
खदान में उस समय बड़ी संख्या में मजदूर और सोने की तलाश में पहुंचे लोग मौजूद थे। अचानक जमीन और खदान का एक हिस्सा भरभराकर नीचे आ गिरा। देखते ही देखते कई मजदूर मलबे के नीचे दब गए।
हादसे के बाद घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई। आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत बचाव कार्य शुरू किया। इसके बाद स्थानीय प्रशासन और बचाव दल भी मौके पर पहुंचे और मलबे में दबे लोगों को बाहर निकालने का अभियान शुरू किया गया।
हालांकि, जमीन के अस्थिर होने और खदान के भीतर मलबे की बड़ी मात्रा होने के कारण बचावकर्मियों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
मृतकों की संख्या को लेकर अलग-अलग आंकड़े
हादसे के बाद सबसे ज्यादा चिंता मृतकों की बढ़ती संख्या को लेकर है। स्थानीय मीडिया में मलबे से 107 शव निकाले जाने की जानकारी सामने आई है। इस आंकड़े ने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी है।
हालांकि, मध्य अफ्रीकी गणराज्य के खान एवं भूविज्ञान मंत्री रूफिन बेनाम-बेलटूंगू ने घटनास्थल का दौरा करने के बाद कम से कम 49 लोगों की मौत की पुष्टि की।
बताया गया कि मृतकों में मध्य अफ्रीकी गणराज्य के नागरिकों के साथ-साथ कैमरून और चाड के नागरिक भी शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि राहत और बचाव अभियान अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। इसलिए अंतिम मृतक संख्या सामने आने में समय लग सकता है।
मलबे के नीचे अभी भी कुछ लोगों के फंसे होने की आशंका जताई जा रही है। ऐसे में आने वाले समय में मृतकों की संख्या और बढ़ सकती है।
कई देशों से आते हैं लोग
कैमरून की सीमा के करीब होने के कारण इस इलाके में केवल स्थानीय लोग ही नहीं बल्कि पड़ोसी देशों से भी लोग सोने की तलाश में पहुंचते हैं।
सोने का खनन यहां बड़ी संख्या में लोगों के लिए रोजगार और आय का साधन है। गरीबी और बेरोजगारी के कारण कई लोग अपनी जान जोखिम में डालकर जमीन के अंदर बनी छोटी-छोटी सुरंगों में काम करते हैं।
हादसे में मध्य अफ्रीकी गणराज्य के अलावा कैमरून और चाड के नागरिकों के मारे जाने की जानकारी सामने आने से यह भी स्पष्ट होता है कि इस खनन क्षेत्र में अलग-अलग देशों से लोग काम करने पहुंचते थे।
बचाव अभियान में आ रही मुश्किलें
खदान के ढहने के बाद बचाव दल के सामने सबसे बड़ी चुनौती मलबे में फंसे लोगों तक पहुंचना है। जमीन का कुछ हिस्सा अभी भी अस्थिर बताया जा रहा है। ऐसे में बचावकर्मियों के लिए अंदर जाना बेहद जोखिम भरा है।
मलबे को हटाने के दौरान अगर जमीन का दूसरा हिस्सा धंस गया तो बचावकर्मी भी इसकी चपेट में आ सकते हैं। इसी वजह से राहत दल काफी सावधानी से काम कर रहे हैं।
स्थानीय लोग भी बचाव अभियान में मदद कर रहे हैं। परिवार अपने लापता परिजनों की जानकारी के लिए घटनास्थल के आसपास जमा हैं और लगातार यह उम्मीद लगाए बैठे हैं कि शायद उनके अपने लोग मलबे से सुरक्षित बाहर निकल आएं।
खदान को बंद करने का आदेश
घटना की गंभीरता को देखते हुए मध्य अफ्रीकी गणराज्य सरकार ने संबंधित खदान को बंद करने का आदेश दिया है।
खनन मंत्री ने घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद खनन गतिविधियों को रोकने की बात कही। अधिकारियों की ओर से अब इस बात की जांच की जा रही है कि खदान में सुरक्षा नियमों का पालन किया जा रहा था या नहीं।
जांच में यह भी पता लगाया जाएगा कि खदान में एक समय पर कितने लोग काम कर रहे थे और क्या खदान संचालकों ने मजदूरों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त व्यवस्था की थी।
आखिर क्यों ढहती हैं ऐसी खदानें?
अफ्रीका के कई हिस्सों में छोटे स्तर पर होने वाला सोने का खनन अक्सर सीमित संसाधनों के साथ किया जाता है। कई खदानों में आधुनिक मशीनें, मजबूत सुरक्षा ढांचा और प्रशिक्षित कर्मचारी उपलब्ध नहीं होते।
जमीन के भीतर सुरंगों का निर्माण कई बार बिना पर्याप्त तकनीकी जांच के किया जाता है। इसके अलावा भारी बारिश, जमीन की नमी, मिट्टी की कमजोरी और लगातार खुदाई जैसी वजहें भी जमीन के धंसने का खतरा बढ़ा सकती हैं।
हालांकि, जाम्बोये में हुए हादसे की वास्तविक वजह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी। फिलहाल प्रशासन सभी संभावित कारणों की जांच कर रहा है।
अफ्रीका में पहले भी हो चुके हैं ऐसे हादसे
यह पहली बार नहीं है जब अफ्रीका में सोने की खदान ने मजदूरों की जान ली हो। अलग-अलग देशों में पिछले कई वर्षों से खदानों के ढहने की घटनाएं सामने आती रही हैं।
केन्या समेत कई अफ्रीकी देशों में छोटे पैमाने पर होने वाले खनन के दौरान मजदूरों की मौत हो चुकी है। इन घटनाओं के बाद सुरक्षा मानकों को मजबूत करने की मांग लगातार उठती रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक छोटे खनन क्षेत्रों को बेहतर तकनीक, नियमित निरीक्षण और सुरक्षा उपकरणों से नहीं जोड़ा जाएगा, तब तक ऐसे हादसों का खतरा बना रहेगा।
परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़
इस हादसे का सबसे दर्दनाक असर उन परिवारों पर पड़ा है, जिनके सदस्य रोजी-रोटी कमाने के लिए खदान में गए थे।
कई परिवारों को अब अपने प्रियजनों के शव मिलने का इंतजार है। कुछ लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। घटनास्थल के आसपास परिजनों की भीड़ जमा है और हर कोई अपने रिश्तेदार की तलाश में है।
सोने की तलाश में खदान के अंदर गए मजदूरों को शायद अंदाजा भी नहीं रहा होगा कि कुछ ही देर बाद वही जगह उनके लिए मौत का मलबा बन जाएगी।
सुरक्षा व्यवस्था पर फिर उठे सवाल
जाम्बोये की यह घटना केवल एक खदान दुर्घटना नहीं है, बल्कि अफ्रीका में असुरक्षित और अनियमित खनन की गंभीर समस्या को सामने लाती है।
सोने की कीमत बढ़ने और रोजगार के सीमित अवसरों के कारण बड़ी संख्या में लोग खनन के इस जोखिम भरे काम से जुड़े हुए हैं। लेकिन मजदूरों की सुरक्षा के लिए जरूरी तकनीकी व्यवस्था कई जगहों पर अब भी बेहद कमजोर है।
जानकारों के मुताबिक ऐसे हादसों को रोकने के लिए खदानों का नियमित निरीक्षण, सुरंगों की तकनीकी जांच, सुरक्षा उपकरण, प्रशिक्षित कर्मचारियों की तैनाती और आपातकालीन बचाव व्यवस्था बेहद जरूरी है।
फिलहाल जाम्बोये की खदान में राहत और बचाव अभियान जारी है। प्रशासन मलबे को हटाकर यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि कितने लोग अंदर फंसे हैं। साथ ही हादसे की वास्तविक वजह की जांच भी की जा रही है।
मृतकों की संख्या को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आने के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि मलबे के नीचे और कितनी जिंदगियां दबी हैं। अंतिम आंकड़ा सामने आने के बाद ही इस भयावह हादसे की पूरी तस्वीर साफ हो सकेगी।

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