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देश को दहलाने की थी साजिश? 12 गिरफ्तारियों के बाद जांच एजेंसियों के हाथ लगे बड़े सुराग

 


नई दिल्ली: स्वतंत्रता दिवस से पहले देश की सुरक्षा एजेंसियों ने एक बड़े संदिग्ध नेटवर्क का खुलासा करने का दावा किया है। पंजाब, पश्चिम बंगाल और दिल्ली से जुड़े अलग-अलग अभियानों में पिछले एक सप्ताह के दौरान 12 संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है। जांच एजेंसियों के अनुसार, यह नेटवर्क कथित तौर पर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) से जुड़े हैंडलर्स और आतंकी शहजाद भट्टी के नेटवर्क के संपर्क में काम कर रहा था।

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि दिल्ली, अमृतसर, तरनतारन और पश्चिम बंगाल के वर्धमान जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में गतिविधियां संचालित की जा रही थीं। हालांकि, जांच अभी जारी है और एजेंसियां पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं।

तीन राज्यों में एक साथ कार्रवाई

सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, तीन अलग-अलग राज्यों में सक्रिय मॉड्यूल को अलग-अलग जिम्मेदारियां दी गई थीं।

कहीं कथित रूप से हथियारों की सप्लाई और रेकी का काम किया जा रहा था, तो कहीं स्थानीय युवाओं से संपर्क, संवेदनशील जानकारियां जुटाने और प्रभावशाली लोगों तक पहुंच बनाने की कोशिश की जा रही थी।

अधिकारियों का कहना है कि यह नेटवर्क कई स्तरों पर काम कर रहा था और इसकी गतिविधियों की जांच राष्ट्रीय स्तर पर की जा रही है।

पश्चिम बंगाल मॉड्यूल में कई चौंकाने वाले दावे

जांच के अनुसार, 31 जुलाई 2026 को पश्चिम बंगाल के वर्धमान थाने में दर्ज एफआईआर के आधार पर कई अहम जानकारियां सामने आई हैं।

गिरफ्तार आरोपी मोहम्मद हमीम मंडल के मोबाइल फोन से कथित रूप से पाकिस्तान के +92 नंबरों के अलावा अमेरिका और ब्रिटेन के कुछ नंबर भी मिले हैं।

एफआईआर में "राणा", "C9Uzhair" और "Abid Jutt" जैसे नामों का भी उल्लेख किया गया है।

जांच एजेंसियों का दावा है कि आरोपी कथित रूप से पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स और प्रतिबंधित आतंकी संगठन से जुड़े लोगों के संपर्क में था।

हनी ट्रैप और स्थानीय भर्ती की जांच

एफआईआर के अनुसार, इस मॉड्यूल को स्थानीय युवाओं की भर्ती, हथियारों की व्यवस्था, वीआईपी और सरकारी प्रतिष्ठानों से जुड़ी जानकारी जुटाने जैसे कार्य सौंपे गए थे।

इसके अलावा जांच एजेंसियों ने यह भी दावा किया है कि हनी ट्रैप के जरिए प्रभावशाली लोगों तक पहुंच बनाने की भी योजना थी।

झारखंड की रहने वाली अर्पिता नामक महिला की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

जांच के दौरान उससे जुड़े कुछ गंभीर दावे सामने आए हैं, जिनकी फिलहाल एजेंसियां विस्तार से जांच कर रही हैं।

इन आरोपों की अंतिम पुष्टि अभी न्यायिक प्रक्रिया और विस्तृत जांच के बाद ही हो सकेगी।

अमृतसर मॉड्यूल से नौ गिरफ्तार

पंजाब पुलिस ने अमृतसर में कथित तौर पर आईएसआई समर्थित दो अलग-अलग मॉड्यूल का भंडाफोड़ करने का दावा किया है।

इस कार्रवाई में चार नाबालिगों सहित नौ लोगों को गिरफ्तार किया गया।

पुलिस के अनुसार, उनके कब्जे से तीन अवैध पिस्तौल, नौ कारतूस, चार पेट्रोल बम और चोरी की एक मोटरसाइकिल बरामद हुई है।

पूछताछ में कई अहम जानकारियां मिलने का दावा किया गया है।

जंतर-मंतर तक पहुंचने का दावा

पंजाब पुलिस के अनुसार, पूछताछ में कुछ आरोपियों ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि वे पहले दिल्ली के जंतर-मंतर तक पहुंच चुके थे।

जांच में यह भी दावा किया गया है कि उन्हें वहां स्थानीय स्तर पर कुछ सहायता और संसाधन उपलब्ध कराए गए थे।

हालांकि किसी कारणवश वे अपनी कथित योजना को पूरा नहीं कर सके और वापस पंजाब लौट गए।

इन दावों की जांच अभी जारी है।

रेलवे ट्रैक पर कैमरे लगाने का आरोप

जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपियों ने रेलवे ट्रैक और सुरक्षा प्रतिष्ठानों के आसपास निगरानी करने के लिए कैमरे लगाए थे।

बताया गया कि इन कैमरों की लाइव फुटेज कथित तौर पर विदेश में बैठे हैंडलर्स तक पहुंचाई जा रही थी।

पुलिस का दावा है कि इन गतिविधियों के लिए ऑनलाइन भुगतान भी किया गया था।

इस मामले में जेल में बंद दो अन्य आरोपियों की भूमिका सामने आने के बाद उन्हें भी प्रोडक्शन वारंट पर गिरफ्तार किया गया है।

तरनतारन में हथियारों की बरामदगी

तरनतारन पुलिस और सीमा सुरक्षा बल (BSF) के संयुक्त अभियान में मनजीत सिंह नामक आरोपी को गिरफ्तार किया गया।

पुलिस के अनुसार, उसके घर से सात विदेशी पिस्तौल, एक MP-9 गन, बड़ी मात्रा में कारतूस और मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं।

पूछताछ में आरोपी ने कथित तौर पर बताया कि हथियार पाकिस्तान से ड्रोन के माध्यम से भेजे गए थे।

पुलिस इन दावों की जांच कर रही है।

मोबाइल से मिले कई विदेशी संपर्क

जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपी के मोबाइल फोन से पाकिस्तान के 12 मोबाइल नंबर मिले हैं।

इनमें दो नंबर "चाचा" और "रहमान" नाम से सेव बताए गए हैं।

पुलिस का मानना है कि ये वास्तविक नाम नहीं बल्कि कोड नेम भी हो सकते हैं।

अब एजेंसियां इन नंबरों, बैंक खातों, ऑनलाइन लेन-देन और मनी ट्रेल की गहन जांच कर रही हैं।

15 अगस्त से पहले सुरक्षा बढ़ाई गई

स्वतंत्रता दिवस को देखते हुए देशभर में पहले से ही सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।

इन गिरफ्तारियों के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने संवेदनशील इलाकों, रेलवे स्टेशनों, सरकारी भवनों और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर निगरानी और बढ़ा दी है।

विशेष रूप से सीमा से लगे राज्यों और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है।

जांच अभी जारी

सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि अभी जांच शुरुआती चरण में है और पूरे नेटवर्क की सभी कड़ियों की जांच की जा रही है।

गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है और डिजिटल उपकरणों, मोबाइल डेटा, बैंकिंग रिकॉर्ड तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का विश्लेषण किया जा रहा है।

अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही पूरे नेटवर्क की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकेगी।

स्वतंत्रता दिवस से पहले पंजाब, पश्चिम बंगाल और दिल्ली से जुड़े अलग-अलग अभियानों में 12 संदिग्धों की गिरफ्तारी के बाद सुरक्षा एजेंसियां पूरे नेटवर्क की गहन जांच कर रही हैं। जांच में हथियारों की बरामदगी, विदेशी नंबरों से संपर्क, ड्रोन के जरिए हथियार पहुंचाने और संवेदनशील स्थानों की रेकी जैसे कई गंभीर दावे सामने आए हैं। हालांकि, इन सभी आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया और विस्तृत जांच पूरी होने के बाद ही होगी। फिलहाल एजेंसियां संभावित खतरे को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था और जांच दोनों को तेज कर चुकी हैं।

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