दूध की डेयरी में चल रहा था बड़ा खेल? जांच रिपोर्ट ने खोला ऐसा राज कि तुरंत बंद हुआ कारोबार
Milk Adulteration News: शहर में रोजाना बड़ी मात्रा में बिकने वाले दूध की गुणवत्ता को लेकर एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। इतवारा रोड स्थित नन्हे चाचा दूध डेयरी के मिक्स दूध के नमूने की प्रयोगशाला जांच में डिटर्जेंट की मौजूदगी सामने आने के बाद खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। विभाग ने डेयरी का खाद्य पंजीयन तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
बताया जा रहा है कि इस डेयरी से रोजाना करीब 200 से 300 लीटर दूध ग्राहकों को बेचा जाता था। ऐसे में दूध के नमूने में डिटर्जेंट मिलने की रिपोर्ट सामने आने के बाद खाद्य सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। खाद्य विश्लेषक ने जांच के बाद नमूने को ‘असुरक्षित’ घोषित किया है।
विभाग के मुताबिक, अब निलंबन अवधि के दौरान संबंधित प्रतिष्ठान से दूध, मिक्स दूध या किसी अन्य खाद्य पदार्थ का निर्माण, प्रसंस्करण, भंडारण, वितरण और बिक्री नहीं की जा सकेगी।
27 जुलाई को लिए गए थे दूध के नमूने
खाद्य सुरक्षा प्रशासन की टीम ने 27 जुलाई को इतवारा रोड स्थित नन्हे चाचा डेयरी से मिक्स दूध का नमूना लिया था। नमूने को निर्धारित प्रक्रिया के तहत खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला भेजा गया।
इसके बाद 4 अगस्त को प्रयोगशाला की जांच रिपोर्ट विभाग को प्राप्त हुई। रिपोर्ट में मिक्स दूध के नमूने में डिटर्जेंट की मौजूदगी दर्ज की गई।
रिपोर्ट सामने आने के बाद खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लिया और डेयरी के खिलाफ कार्रवाई शुरू की। जांच में नमूने को खाद्य सुरक्षा के लिहाज से असुरक्षित पाए जाने के बाद डेयरी का खाद्य पंजीयन निलंबित कर दिया गया।
यह कार्रवाई इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि दूध ऐसी खाद्य वस्तु है जिसका इस्तेमाल बड़ी संख्या में लोग रोजाना करते हैं। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, दूध और दूध से बने उत्पाद दैनिक आहार का हिस्सा होते हैं।
300 लीटर तक दूध की बिक्री का दावा
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, संबंधित डेयरी से रोजाना बड़ी मात्रा में दूध की बिक्री होती थी। बताया गया है कि डेयरी संचालक सीहोर जिले के श्यामपुर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से दूध मंगवाता था।
इसके बाद दूध को डेयरी के माध्यम से ग्राहकों तक पहुंचाया जाता था। रोजाना करीब 200 से 300 लीटर दूध की बिक्री होने की जानकारी सामने आई है।
यही वजह है कि मिक्स दूध के नमूने में डिटर्जेंट मिलने की रिपोर्ट ने खाद्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। अगर किसी खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता में गंभीर गड़बड़ी पाई जाती है और वह बड़ी मात्रा में बाजार में पहुंच रहा हो, तो उसका असर बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है।
हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि प्रयोगशाला रिपोर्ट में डिटर्जेंट की मौजूदगी की बात सामने आई है, लेकिन इससे जुड़े पूरे स्रोत और प्रक्रिया का निर्धारण आगे की जांच का विषय है।
दूध में डिटर्जेंट कैसे पहुंचा, बड़ा सवाल
जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि दूध के नमूने में डिटर्जेंट आखिर कैसे पहुंचा।
क्या दूध में किसी स्तर पर जानबूझकर कोई पदार्थ मिलाया गया था या किसी अन्य कारण से डिटर्जेंट की मौजूदगी हुई, इसकी पुष्टि विस्तृत जांच के बाद ही हो सकेगी।
खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के सामने अब यह पता लगाने की चुनौती है कि दूध की सप्लाई कहां से हुई थी और सप्लाई चेन के किस स्तर पर कथित गड़बड़ी हुई।
अगर दूध ग्रामीण क्षेत्र की डेयरियों से मंगाया जा रहा था तो वहां से लेकर डेयरी तक की पूरी सप्लाई प्रक्रिया की भी जांच की जा सकती है।
इसके अलावा डेयरी में दूध के भंडारण, प्रसंस्करण और वितरण की व्यवस्था की जांच भी महत्वपूर्ण होगी।
खाद्य विभाग ने क्यों निलंबित किया लाइसेंस?
खाद्य सुरक्षा विभाग ने अपने आदेश में माना कि दूध और दुग्ध उत्पाद सीधे मानव उपभोग में आते हैं। ऐसे में मिक्स दूध के नमूने में डिटर्जेंट की मौजूदगी को गंभीर खाद्य सुरक्षा अनियमितता माना गया।
विभाग का कहना है कि ऐसी स्थिति में प्रतिष्ठान को बिना आवश्यक सुधार और प्रभावी नियंत्रण व्यवस्था के कारोबार जारी रखने की अनुमति देना सार्वजनिक स्वास्थ्य के हित में उचित नहीं होगा।
इसी आधार पर खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 और संबंधित नियमों के तहत डेयरी का खाद्य पंजीयन निलंबित किया गया है।
निलंबन का अर्थ यह है कि आदेश प्रभावी रहने तक संबंधित प्रतिष्ठान से खाद्य पदार्थों का निर्माण, प्रसंस्करण, भंडारण, वितरण और बिक्री प्रतिबंधित रहेगी।
अधिकारी ने एफआईआर की कार्रवाई की बात कही
मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी शिवराज पावक के अनुसार, मामला आम लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि प्राथमिक तौर पर खाद्य लाइसेंस निलंबित किया गया है और आगे एफआईआर दर्ज कराने की कार्रवाई की जाएगी।
यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि विभाग की कार्रवाई अब केवल प्रशासनिक स्तर तक सीमित नहीं रहने की संभावना है।
यदि आगे की जांच में जानबूझकर मिलावट या खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
हालांकि, किसी व्यक्ति या प्रतिष्ठान को अंतिम रूप से दोषी अदालत की प्रक्रिया के बाद ही माना जा सकता है।
एक और जगह बड़ी कार्रवाई, 14 क्विंटल घी जब्त
दूध के नमूने में डिटर्जेंट मिलने की कार्रवाई के साथ ही खाद्य सुरक्षा विभाग ने शनिवार को एक अन्य मामले में भी बड़ी कार्रवाई की।
खाद्य सुरक्षा टीम ने मंगलवारा-जुमेराती क्षेत्र स्थित थोक कारोबारी शीतला पूजा भंडार पर छापामार कार्रवाई की।
इस दौरान टीम ने करीब 13 क्विंटल 94 किलो घी जब्त किया। जब्त किए गए घी की बाजार कीमत करीब 7 लाख रुपये बताई गई है।
अधिकारियों को घी की गुणवत्ता को लेकर संदेह था। इसलिए मौके से अलग-अलग ब्रांड के घी के नमूने लिए गए और उन्हें जांच के लिए राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला भेज दिया गया।
अब प्रयोगशाला रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि जब्त घी निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरा उतरता है या उसमें किसी तरह की मिलावट पाई जाती है।
दो ब्रांड के घी का स्टॉक जब्त
मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी शिवराज पावक के अनुसार, कार्रवाई के दौरान अरिहंत घी के 15 किलो वाले 33 टीन और मक्खनश्री घी के 60 टीन जब्त किए गए।
विभाग ने जब्त स्टॉक को फिलहाल सुरक्षित रख लिया है। साथ ही घी के नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं।
जब तक प्रयोगशाला रिपोर्ट नहीं आती, तब तक यह कहना सही नहीं होगा कि जब्त किया गया पूरा घी मिलावटी था। फिलहाल विभाग ने इसे गुणवत्ता संबंधी संदेह के आधार पर जब्त किया है।
रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय होगी।
दूध और घी की जांच से मचा हड़कंप
एक ही दिन में दूध और घी से जुड़े मामलों में खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई के बाद स्थानीय कारोबारियों में भी हलचल देखने को मिल रही है।
खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए समय-समय पर सैंपलिंग और निरीक्षण बेहद जरूरी है। खासकर दूध, घी, तेल, मसाले और अन्य रोजमर्रा की खाद्य वस्तुओं की गुणवत्ता का सीधा संबंध लोगों के स्वास्थ्य से होता है।
अगर किसी खाद्य पदार्थ में नियमों के विपरीत पदार्थ पाए जाते हैं तो संबंधित प्रतिष्ठान के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
उपभोक्ताओं के लिए भी बड़ा सवाल
दूध में डिटर्जेंट मिलने की रिपोर्ट ने आम उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। लोग रोजाना जिस दूध को भरोसे के साथ खरीदते हैं, उसकी गुणवत्ता को लेकर सवाल उठना निश्चित रूप से गंभीर विषय है।
उपभोक्ताओं को भी दूध और अन्य खाद्य उत्पाद खरीदते समय पैकेजिंग, लाइसेंस, एक्सपायरी डेट और ब्रांड की जानकारी पर ध्यान देना चाहिए।
खुले दूध के मामले में गुणवत्ता की जांच आम उपभोक्ता के लिए आसान नहीं होती। इसलिए प्रशासन की नियमित जांच और सैंपलिंग व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।
आगे क्या होगा?
नन्हे चाचा डेयरी के मामले में अब आगे की कार्रवाई जांच और कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगी। खाद्य विभाग द्वारा लिया गया नमूना प्रयोगशाला जांच में असुरक्षित पाए जाने के बाद लाइसेंस निलंबित किया जा चुका है।
अब विभाग यह पता लगाने की कोशिश कर सकता है कि कथित रूप से असुरक्षित दूध की सप्लाई कहां से हुई और इसके लिए जिम्मेदार कौन है।
दूसरी ओर, शीतला पूजा भंडार से जब्त करीब 14 क्विंटल घी की रिपोर्ट का भी इंतजार किया जा रहा है। अगर प्रयोगशाला जांच में मिलावट या गुणवत्ता मानकों का उल्लंघन सामने आता है तो संबंधित कारोबारी के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
फिलहाल दूध के नमूने में डिटर्जेंट की मौजूदगी की रिपोर्ट और बड़ी मात्रा में घी जब्त किए जाने की कार्रवाई ने खाद्य सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आने वाली जांच रिपोर्ट और विभाग की अगली कार्रवाई से यह साफ होगा कि इस पूरे मामले में मिलावट का स्रोत क्या था और इसके पीछे कौन जिम्मेदार है।

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