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Video : उमर अब्दुल्ला के बयान से मची हलचल! ‘अगर 2019 में 370 नहीं हटती तो PoK में उठती भारत से जुड़ने की मांग’



श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के 2019 के फैसलों को लेकर बड़ा राजनीतिक बयान दिया। श्रीनगर में स्वतंत्रता दिवस समारोह को संबोधित करते हुए उमर अब्दुल्ला ने कहा कि अगर वर्ष 2019 में जम्मू-कश्मीर की संवैधानिक स्थिति में बदलाव नहीं किया गया होता और राज्य का दर्जा बरकरार रहता, तो पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर यानी PoK में रहने वाले लोग आज जम्मू-कश्मीर के साथ दोबारा जुड़ने की मांग कर रहे होते।

उमर अब्दुल्ला ने अपने संबोधन में नियंत्रण रेखा के उस पार के हालात का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि PoK में लोगों की स्थिति को देखकर उन्हें दुख और चिंता होती है। उनके मुताबिक, वहां लोग महंगाई, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर आवाज उठा रहे हैं।

हालांकि, उमर का यह बयान एक राजनीतिक आकलन है। PoK में जारी विरोध प्रदर्शनों को लेकर अलग-अलग मुद्दे और स्थानीय परिस्थितियां भी सामने आती रही हैं।

2019 के फैसलों को लेकर उमर ने साधा निशाना

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर अपने संबोधन में उमर अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर की संवैधानिक स्थिति में 2019 में हुए बदलाव को लेकर अपनी सरकार का रुख दोहराया।

उन्होंने कहा कि अगर उस समय जम्मू-कश्मीर की स्थिति में बदलाव नहीं किया गया होता तो आज परिस्थितियां अलग हो सकती थीं।

उमर ने दावा किया कि ऐसी स्थिति में PoK के लोग जम्मू-कश्मीर के साथ फिर से जुड़ने की मांग को लेकर आवाज उठा सकते थे।

उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के विभिन्न इलाकों में स्थानीय मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन की खबरें सामने आती रही हैं।

PoK के हालात पर जताई चिंता

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि नियंत्रण रेखा के दूसरी तरफ जम्मू-कश्मीर के हिस्से में रहने वाले लोगों की स्थिति उन्हें परेशान करती है।

उनके मुताबिक, वहां के लोग कई तरह की समस्याओं का सामना कर रहे हैं और अपनी बुनियादी जरूरतों को लेकर आवाज उठा रहे हैं।

PoK में महंगाई, रोजगार, बिजली, जरूरी सुविधाओं और प्रशासन से जुड़े मुद्दों को लेकर लोगों के बीच असंतोष की खबरें आती रही हैं।

उमर ने इन्हीं परिस्थितियों का जिक्र करते हुए कहा कि अगर 2019 के बाद जम्मू-कश्मीर में संवैधानिक बदलाव नहीं हुआ होता, तो PoK की स्थिति शायद अलग दिशा में जाती।

PoK में विरोध प्रदर्शनों का भी जिक्र

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के कई इलाकों में स्थानीय समस्याओं को लेकर विरोध प्रदर्शन होते रहे हैं।

इन प्रदर्शनों में महंगाई, बिजली की कीमत, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं जैसे मुद्दे प्रमुख रहे हैं।

उमर अब्दुल्ला ने अपने भाषण में इन्हीं घटनाओं का उल्लेख करते हुए PoK के लोगों की स्थिति पर चिंता जताई।

हालांकि, इन प्रदर्शनों को सीधे भारत के साथ विलय की मांग से जोड़ना एक राजनीतिक व्याख्या है। स्थानीय स्तर पर प्रदर्शनकारियों की मांगों में आर्थिक और प्रशासनिक मुद्दे भी प्रमुख रहे हैं।

‘PoK के लोग हमारे अपने’

उमर अब्दुल्ला ने अपने संबोधन में PoK को लेकर जम्मू-कश्मीर सरकार और भारत के आधिकारिक रुख को भी दोहराया।

उन्होंने कहा कि PoK जम्मू-कश्मीर का हिस्सा है और वहां रहने वाले लोगों को वह अपना मानते हैं।

उन्होंने जम्मू-कश्मीर विधानसभा में PoK के लिए आरक्षित सीटों का भी जिक्र किया।

उनके मुताबिक, इन सीटों को इस उम्मीद के साथ खाली रखा गया है कि भविष्य में PoK के लोग जम्मू-कश्मीर विधानसभा में आकर इनका प्रतिनिधित्व कर सकेंगे।

यह बयान जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक और संवैधानिक इतिहास से जुड़े बेहद संवेदनशील मुद्दे की ओर भी इशारा करता है।

राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग फिर दोहराई

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने अपने संबोधन में जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग भी दोहराई।

उन्होंने कहा कि उनकी सरकार जम्मू-कश्मीर के राज्य के दर्जे की बहाली के लिए प्रतिबद्ध है।

उमर के मुताबिक, उनकी सरकार जम्मू-कश्मीर के लोगों की आकांक्षाओं और अधिकारों के लिए काम करती रहेगी।

उन्होंने कहा कि राज्य का दर्जा वापस मिलना जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा है।

2019 में क्या हुआ था?

अगस्त 2019 में केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर से जुड़े संवैधानिक प्रावधानों में बड़ा बदलाव किया था।

अनुच्छेद 370 के अधिकांश प्रावधानों को निष्प्रभावी किया गया और तत्कालीन जम्मू-कश्मीर राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों—जम्मू-कश्मीर और लद्दाख—में पुनर्गठित किया गया।

इसके बाद से जम्मू-कश्मीर की विशेष संवैधानिक स्थिति, राज्य का दर्जा और अनुच्छेद 370 को लेकर राजनीतिक बहस जारी है।

उमर अब्दुल्ला और उनकी पार्टी लंबे समय से जम्मू-कश्मीर के राज्य के दर्जे की बहाली की मांग करती रही है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी जारी है राजनीतिक बहस

अनुच्छेद 370 को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था। सुप्रीम कोर्ट ने दिसंबर 2023 में केंद्र के 2019 के कदम को बरकरार रखा था और जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव कराने तथा राज्य का दर्जा बहाल करने की दिशा में कदम उठाने की बात कही थी।

इसके बाद जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव हुए और नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेतृत्व में सरकार बनी।

उमर अब्दुल्ला मुख्यमंत्री बने।

हालांकि, राज्य के दर्जे की बहाली का मुद्दा अभी भी उनकी सरकार के प्रमुख राजनीतिक एजेंडे में शामिल है।

स्वतंत्रता दिवस पर राजनीतिक संदेश

उमर अब्दुल्ला का यह भाषण केवल स्वतंत्रता दिवस समारोह तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें जम्मू-कश्मीर के भविष्य को लेकर उनकी सरकार की राजनीतिक सोच भी दिखाई दी।

उन्होंने PoK के लोगों, जम्मू-कश्मीर के राज्य के दर्जे और 2019 के संवैधानिक बदलावों को एक साथ जोड़ते हुए केंद्र सरकार पर अप्रत्यक्ष रूप से निशाना साधा।

उनका कहना था कि जम्मू-कश्मीर के भविष्य को लेकर उनकी सरकार अपने रुख पर कायम है।

‘हम उस भविष्य के लिए काम करेंगे’

मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार जम्मू-कश्मीर के लोगों के साथ खड़ी है और उस भविष्य के लिए काम करती रहेगी जिसकी कल्पना आजादी के लिए संघर्ष करने वाले लोगों ने की थी।

उन्होंने जम्मू-कश्मीर के विकास, शांति और लोगों की आकांक्षाओं को आगे बढ़ाने की बात कही।

साथ ही राज्य के दर्जे और संवैधानिक गारंटियों की बहाली के संकल्प को भी दोहराया।

बयान के बाद फिर तेज हो सकती है सियासी बहस

उमर अब्दुल्ला का PoK को लेकर यह बयान आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस को और तेज कर सकता है।

एक तरफ केंद्र सरकार 2019 के फैसलों को जम्मू-कश्मीर के एकीकरण और विकास से जोड़ती रही है, वहीं उमर अब्दुल्ला की सरकार राज्य का दर्जा बहाल करने और जम्मू-कश्मीर की पुरानी संवैधानिक स्थिति से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक रूप से उठाती रही है।

ऐसे में स्वतंत्रता दिवस के मंच से PoK को लेकर दिया गया उमर का बयान एक बार फिर जम्मू-कश्मीर की राजनीति के केंद्र में आ गया है।

उमर अब्दुल्ला ने एक तरफ PoK के हालात पर चिंता जताई, तो दूसरी तरफ दावा किया कि अगर 2019 में जम्मू-कश्मीर की स्थिति नहीं बदली होती तो PoK में भारत के साथ जुड़ने की मांग उठ सकती थी। अब उनके इस बयान को लेकर जम्मू-कश्मीर की सियासत में आने वाले दिनों में राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर तेज होने की संभावना है।

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