CIA चीफ के मॉस्को पहुंचते ही अमेरिका के आसमान में उड़ने लगे 5 ‘डूम्सडे प्लेन’! आखिर क्या होने वाला है?
वॉशिंगटन/मॉस्को: अमेरिका के आसमान में मंगलवार, 25 अगस्त 2026 को हुई एक असामान्य सैन्य विमान गतिविधि ने लोगों का ध्यान खींच लिया। फ्लाइट-ट्रैकिंग पर नजर रखने वाले लोगों ने अमेरिका के पश्चिमी और मध्य हिस्सों में कम से कम पांच E-6B Mercury विमानों को उड़ते हुए देखा। इन विमानों को आम बोलचाल में 'Doomsday Planes' कहा जाता है, क्योंकि इनका इस्तेमाल ऐसे बेहद गंभीर हालात में अमेरिकी परमाणु कमान और नियंत्रण व्यवस्था को चालू रखने के लिए किया जाता है, जब जमीन पर मौजूद संचार या कमांड सेंटर काम न कर पाएं।
इन विमानों की उड़ान इसलिए भी चर्चा में आ गई क्योंकि इससे कुछ घंटे पहले ही अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA के प्रमुख जॉन रैटक्लिफ की मॉस्को की अचानक और सार्वजनिक रूप से घोषित नहीं की गई यात्रा की खबर सामने आई थी। रैटक्लिफ मंगलवार को एक अमेरिकी C-17A Globemaster III सैन्य परिवहन विमान से मॉस्को पहुंचे थे। उनके दौरे का उद्देश्य और रूसी अधिकारियों के साथ उनकी संभावित बैठकों का विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर इन दोनों घटनाओं को सीधे तौर पर जोड़ना जल्दबाजी होगी। विशेषज्ञों और सैन्य विमानन से जुड़ी रिपोर्टों के अनुसार E-6B विमानों की उड़ानें प्रशिक्षण और नियमित ऑपरेशनल गतिविधियों का हिस्सा भी हो सकती हैं। अमेरिकी अधिकारियों ने इन विमानों की मंगलवार की उड़ानों को किसी परमाणु आपातकाल या युद्ध की घोषणा से नहीं जोड़ा है।
आखिर क्या है 'डूम्सडे प्लेन'?
E-6B Mercury कोई सामान्य सैन्य विमान नहीं है। अमेरिकी नौसेना के अनुसार यह एक communications relay और strategic airborne command post aircraft है। इसका मुख्य काम अमेरिका की राष्ट्रीय कमान को उसके रणनीतिक परमाणु बलों से सुरक्षित और लगातार संपर्क में बनाए रखना है।
इन विमानों का संबंध अमेरिकी परमाणु त्रिकोण यानी nuclear triad से है। इसमें जमीन पर मौजूद अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलें (ICBM), परमाणु हथियार ले जाने वाली रणनीतिक पनडुब्बियां और रणनीतिक बमवर्षक शामिल हैं।
E-6B का काम खासतौर पर यह सुनिश्चित करना है कि संकट की स्थिति में अमेरिकी राष्ट्रपति, रक्षा सचिव और Strategic Command जैसी शीर्ष सैन्य कमान समुद्र में मौजूद बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियों और दूसरे रणनीतिक बलों से संपर्क बनाए रख सकें।
यही वजह है कि इन्हें कई बार मीडिया में 'Doomsday Plane' कहा जाता है। इसका अर्थ यह नहीं है कि इनका उड़ना अपने आप में परमाणु युद्ध शुरू होने का संकेत है। बल्कि इनका डिजाइन ही ऐसी परिस्थितियों में कमांड और संचार को बनाए रखने के लिए किया गया है, जब सामान्य सैन्य संचार नेटवर्क बाधित हो जाएं।
मंगलवार को एक साथ इतने विमान क्यों दिखे?
मंगलवार को सार्वजनिक फ्लाइट-ट्रैकिंग सेवाओं पर कई E-6B विमानों की गतिविधि दिखाई दी। रिपोर्टों के अनुसार कुछ विमानों की पहचान सीमित या अस्पष्ट थी और कई उड़ानों के सामान्य कॉल साइन सार्वजनिक ट्रैकिंग में स्पष्ट नहीं दिखे। इस वजह से सोशल मीडिया और सैन्य विमानन पर नजर रखने वाले लोगों के बीच सवाल उठने लगे।
एक विमान को कोलोराडो और वायोमिंग के ऊपर करीब 24,000 फीट की ऊंचाई पर देखा गया। दूसरे की गतिविधि कंसास और ओक्लाहोमा के ऊपर करीब 30,000 फीट पर बताई गई। एक अन्य E-6B मिसौरी और अर्कांसस के ऊपर लगभग 35,000 फीट की ऊंचाई पर नजर आया। चौथे विमान की गतिविधि टेक्सास-ओक्लाहोमा सीमा के आसपास कम ऊंचाई पर देखे जाने की रिपोर्ट सामने आई।
इन गतिविधियों ने इसलिए ज्यादा ध्यान खींचा क्योंकि एक ही दिन में कई ऐसे विमानों की उड़ान दिखाई दी, जिनका मिशन अमेरिका की रणनीतिक परमाणु कमान और संचार व्यवस्था से जुड़ा है।
लेकिन यहां एक अहम बात है—किसी विमान की फ्लाइट-ट्रैकिंग पर दिखाई देना अपने आप में उसके मिशन की पुष्टि नहीं करता। सैन्य विमान प्रशिक्षण, readiness exercises, repositioning या दूसरे ऑपरेशनल कारणों से भी उड़ान भर सकते हैं।
CIA चीफ जॉन रैटक्लिफ का मॉस्को दौरा क्यों अहम?
E-6B विमानों की गतिविधि से पहले CIA निदेशक जॉन रैटक्लिफ के मॉस्को पहुंचने की खबर सामने आई थी। यह यात्रा इसलिए असामान्य मानी जा रही है क्योंकि यह सार्वजनिक रूप से पहले घोषित नहीं की गई थी और इसका उद्देश्य भी तत्काल स्पष्ट नहीं किया गया।
अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार रैटक्लिफ एक Boeing C-17A Globemaster III से मॉस्को पहुंचे। विमान ने पहले लातविया के रीगा से उड़ान भरी और फिर मॉस्को के Vnukovo Airport पहुंचा। फ्लाइट-ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक विमान Joint Base Andrews से अपनी यात्रा शुरू कर चुका था।
रॉयटर्स के मुताबिक रैटक्लिफ की मॉस्को यात्रा के दौरान उनकी रूसी अधिकारियों के साथ बैठकों की जानकारी सामने आई है, लेकिन न तो CIA और न ही क्रेमलिन ने बैठक के उद्देश्य या प्रतिभागियों की आधिकारिक पुष्टि की है।
यह यात्रा ऐसे समय हुई है जब रूस-यूक्रेन युद्ध जारी है और अमेरिका-रूस संबंधों के साथ-साथ ईरान को लेकर भी अमेरिका और रूस के बीच रणनीतिक तनाव मौजूद है।
क्या E-6B की उड़ान का मतलब परमाणु खतरा है?
फिलहाल ऐसा कहने के लिए कोई ठोस सार्वजनिक प्रमाण नहीं है।
E-6B Mercury अमेरिकी परमाणु कमान और नियंत्रण प्रणाली का स्थायी हिस्सा है। अमेरिकी नौसेना खुद बताती है कि ये विमान अपने TACAMO मिशन के तहत रणनीतिक बलों के साथ संचार बनाए रखने के लिए नियमित रूप से काम करते हैं।
TACAMO का पूरा नाम Take Charge and Move Out है। इसका उद्देश्य ऐसी स्थिति में भी अमेरिकी राष्ट्रीय कमान और रणनीतिक परमाणु बलों के बीच संचार बनाए रखना है, जब जमीन आधारित संचार व्यवस्था उपलब्ध न हो।
इसलिए मंगलवार को पांच E-6B विमानों का उड़ना अपने आप में परमाणु हमले की तैयारी का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
इन विमानों में ऐसा क्या खास है?
E-6B को Boeing 707 के आधार पर विकसित किया गया है। अमेरिकी नौसेना के अनुसार यह करीब 150 फीट लंबा विमान है और इसका अधिकतम टेकऑफ वजन लगभग 342,000 पाउंड है। इसमें करीब 22 लोगों का क्रू हो सकता है।
विमान की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में इसकी Very Low Frequency यानी VLF communication system शामिल है। इसके जरिए यह समुद्र में मौजूद बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियों से संचार बनाए रखने में मदद करता है। इसके लिए विमान में विशेष trailing-wire antenna system का इस्तेमाल किया जाता है।
E-6B की भूमिका सिर्फ संचार रिले तक सीमित नहीं है। यह एक airborne command post के रूप में भी काम कर सकता है। अमेरिकी नौसेना के अनुसार इसका Looking Glass मिशन जमीन आधारित ICBM के airborne launch control system से भी जुड़ा है।
परमाणु हमले के बाद भी कमांड क्यों जरूरी?
परमाणु युद्ध की स्थिति में सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक होगी—संचार व्यवस्था को जिंदा रखना।
यदि जमीन पर मौजूद कमांड सेंटर या संचार नेटवर्क किसी बड़े हमले में प्रभावित हो जाएं, तो सैन्य नेतृत्व को अपने रणनीतिक बलों से संपर्क बनाए रखने की जरूरत होगी। E-6B इसी तरह की परिस्थितियों के लिए एक survivable airborne communications capability प्रदान करता है।
अमेरिकी नौसेना इसे राष्ट्रपति, रक्षा सचिव और Strategic Command के लिए survivable, reliable और endurable nuclear command, control and communications capability बताती है।
यानी ये विमान किसी एक संभावित हमले के जवाब में अचानक तैयार किए गए सिस्टम नहीं हैं। वे अमेरिकी रणनीतिक परमाणु कमान ढांचे का पहले से मौजूद हिस्सा हैं।
क्या पांच विमानों की उड़ान असामान्य है?
एक साथ कई E-6B विमानों की सार्वजनिक ट्रैकिंग निश्चित तौर पर लोगों का ध्यान आकर्षित कर सकती है, लेकिन इससे अपने आप किसी बड़े संकट का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
इन विमानों के ऑपरेटरों को लगातार प्रशिक्षण और readiness बनाए रखनी होती है। अमेरिकी नौसेना की TACAMO इकाइयां नियमित प्रशिक्षण करती हैं और E-6B बेड़े को लंबे समय से रणनीतिक संचार मिशनों के लिए संचालित किया जा रहा है।
इसलिए किसी भी असामान्य उड़ान पैटर्न को समझने के लिए उसके साथ आधिकारिक सैन्य बयान, अभ्यास की जानकारी और दूसरे विश्वसनीय संकेतों को देखना जरूरी होता है।
अमेरिका पहले ही E-6B के उत्तराधिकारी पर काम कर रहा है
E-6B Mercury अब तीन दशक से ज्यादा पुराना प्लेटफॉर्म है। अमेरिकी नौसेना ने इसके भविष्य के उत्तराधिकारी के तौर पर E-130J विकसित करने की योजना बनाई है।
2025 में अमेरिकी नौसेना ने Northrop Grumman को E-130J के मिशन सिस्टम इंटीग्रेशन के लिए करीब 3.5 अरब डॉलर का अनुबंध दिया था। नया विमान E-6B के TACAMO मिशन को आगे बढ़ाने के लिए तैयार किया जा रहा है।
इससे यह भी साफ होता है कि अमेरिका अपनी airborne nuclear command-and-control capability को लंबे समय तक बनाए रखने की तैयारी कर रहा है।
सबसे बड़ा सवाल अभी भी बना हुआ है
मंगलवार की घटनाओं में दो चीजें एक साथ सामने आईं—एक तरफ CIA प्रमुख जॉन रैटक्लिफ की अचानक मॉस्को यात्रा और दूसरी तरफ अमेरिका के ऊपर कई E-6B Mercury विमानों की गतिविधि।
लेकिन अभी तक उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी इन दोनों घटनाओं के बीच किसी प्रत्यक्ष संबंध की पुष्टि नहीं करती।
रैटक्लिफ मॉस्को क्यों गए, उन्होंने किन अधिकारियों से मुलाकात की और क्या बातचीत हुई—इन सवालों का जवाब अभी पूरी तरह सामने नहीं आया है। इसी तरह पांच E-6B विमानों की एक साथ गतिविधि के पीछे भी कोई विशेष आपातकालीन कारण आधिकारिक तौर पर घोषित नहीं किया गया है।
यही वजह है कि 'डूम्सडे प्लेन' की तस्वीरें और फ्लाइट-ट्रैकिंग डेटा सोशल मीडिया पर भले ही बड़े खतरे की अटकलें पैदा कर रहे हों, लेकिन फिलहाल इन्हें परमाणु युद्ध के पक्के संकेत के तौर पर देखना सही नहीं होगा।
फिर भी घटनाक्रम पर नजर इसलिए बनी रहेगी क्योंकि E-6B Mercury अमेरिकी परमाणु कमान और नियंत्रण ढांचे का बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है और CIA प्रमुख की मॉस्को यात्रा ऐसे समय हुई है जब रूस-यूक्रेन युद्ध और व्यापक भू-राजनीतिक तनाव जारी है।
अब सबसे बड़ा रहस्य यही है—रैटक्लिफ मॉस्को में आखिर किससे और किस मुद्दे पर मिले, और उसी दिन अमेरिका के आसमान में इतने 'डूम्सडे प्लेन' क्यों सक्रिय दिखाई दिए? फिलहाल इन दोनों सवालों का आधिकारिक जवाब सामने नहीं आया है।

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