चेहरे पर हजारों मधुमक्खियां और 5 घंटे 3 मिनट तक नहीं हिले शख्स! तमिलनाडु के एस. इसक्की मुथु ने बनाया अनोखा रिकॉर्ड
तिरुनेलवेली, तमिलनाडु: आमतौर पर मधुमक्खी का नाम सुनते ही लोग उनसे दूरी बनाने लगते हैं। एक-दो मधुमक्खियां भी आसपास मंडराने लगें तो लोग खुद को बचाने की कोशिश करते हैं। लेकिन तमिलनाडु के तिरुनेलवेली जिले के वल्लियोर में रहने वाले एस. इसक्की मुथु ने ऐसा कारनामा किया, जिसे देखकर कोई भी हैरान रह जाए। उन्होंने भारतीय मधुमक्खियों को लगातार अपने चेहरे पर बैठाए रखते हुए 5 घंटे 3 मिनट तक एक अनोखा रिकॉर्ड बनाया। इस उपलब्धि को चोलान बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज किया गया है।
यह असाधारण प्रदर्शन 20 फरवरी 2026 को तमिलनाडु के तिरुनेलवेली जिले के वल्लियोर स्थित मारिया आर्ट्स एंड साइंस कॉलेज में किया गया था। रिकॉर्ड संस्था के अनुसार, यह प्रदर्शन आधिकारिक निर्णायकों और गवाहों की मौजूदगी में हुआ।
इस उपलब्धि का मकसद केवल रिकॉर्ड बनाना नहीं था। इसके पीछे मधुमक्खी पालन और उससे जुड़े रोजगार के अवसरों के प्रति किसानों और आम लोगों में जागरूकता पैदा करने का उद्देश्य भी बताया गया है।
चेहरे को मधुमक्खियों से ढककर बनाया रिकॉर्ड
चोलान बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स की जानकारी के अनुसार, एस. इसक्की मुथु ने अपने चेहरे को भारतीय मधुमक्खियों से लगातार 5 घंटे 3 मिनट तक ढककर यह रिकॉर्ड बनाया।
यह कोई सामान्य प्रदर्शन नहीं था। मधुमक्खियां बेहद संवेदनशील जीव होती हैं और उनके आसपास अचानक हलचल या खतरे की स्थिति में वे प्रतिक्रिया कर सकती हैं। ऐसे में लंबे समय तक बिना घबराए और बिना अचानक हरकत किए इस प्रदर्शन को पूरा करना चुनौतीपूर्ण रहा होगा।
रिकॉर्ड संस्था ने इस उपलब्धि को साहस, एकाग्रता, शारीरिक सहनशक्ति और मानसिक दृढ़ता से जुड़ा असाधारण प्रदर्शन बताया है।
20 फरवरी को हुआ था अनोखा प्रदर्शन
यह रिकॉर्ड 20 फरवरी 2026 को बनाया गया था। कार्यक्रम का आयोजन तिरुनेलवेली जिले के वल्लियोर स्थित मारिया आर्ट्स एंड साइंस कॉलेज में हुआ।
आयोजकों के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान आधिकारिक निर्णायक और गवाह मौजूद थे। रिकॉर्ड को निर्धारित नियमों के तहत दर्ज किया गया।
इस अनोखे कारनामे के बाद स्थानीय स्तर पर भी इसकी चर्चा होने लगी। लोगों ने इस उपलब्धि को लेकर एस. इसक्की मुथु को बधाई दी और उनके साहस की सराहना की।
मधुमक्खियों से दोस्ती ने बनाया रिकॉर्ड
मधुमक्खियों के साथ इतने लंबे समय तक काम करना केवल साहस का मामला नहीं है। मधुमक्खी पालन करने वाले लोगों को इन जीवों के व्यवहार, उनके झुंड की गतिविधियों और उनके साथ सुरक्षित तरीके से काम करने की समझ भी विकसित करनी पड़ती है।
इस प्रदर्शन के पीछे भी मधुमक्खियों के प्रति जागरूकता बढ़ाने का उद्देश्य बताया गया है। रिकॉर्ड के जरिए युवा पीढ़ी और किसानों को मधुमक्खी पालन के क्षेत्र की संभावनाओं के बारे में प्रेरित करने की कोशिश की गई।
मधुमक्खी पालन को कृषि से जुड़ी अतिरिक्त आय का माध्यम माना जाता है। शहद के अलावा मधुमक्खियों से जुड़े कई अन्य उत्पाद भी बाजार में उपयोग किए जाते हैं।
किसानों के लिए रोजगार का अवसर
भारत में बड़ी संख्या में किसान खेती के साथ अतिरिक्त आय के साधन तलाशते हैं। ऐसे में मधुमक्खी पालन एक ऐसा क्षेत्र हो सकता है, जिसे कृषि गतिविधियों के साथ जोड़ा जा सकता है।
मधुमक्खियों से शहद प्राप्त करने के अलावा मोम और अन्य मधुमक्खी उत्पाद भी आर्थिक गतिविधियों का हिस्सा हैं। यही वजह है कि इस रिकॉर्ड को केवल व्यक्तिगत उपलब्धि के तौर पर नहीं, बल्कि मधुमक्खी पालन के प्रति जागरूकता फैलाने के प्रयास के रूप में भी देखा जा रहा है।
मधुमक्खी पालन शुरू करने से पहले प्रशिक्षण लेना, उचित उपकरणों का इस्तेमाल करना और मधुमक्खियों के व्यवहार को समझना जरूरी होता है।
रिकॉर्ड के पीछे छिपी है कड़ी तैयारी
चेहरे पर मधुमक्खियों को लंबे समय तक बनाए रखना किसी सामान्य व्यक्ति के लिए आसान काम नहीं हो सकता। इतने लंबे समय तक स्थिर रहने के लिए मानसिक एकाग्रता और धैर्य की जरूरत होती है।
इस तरह के प्रदर्शन में व्यक्ति को अपने शरीर की गतिविधियों पर काफी नियंत्रण रखना पड़ता है। चेहरे और सिर की अचानक हलचल मधुमक्खियों को परेशान कर सकती है।
आइये आज मिलते है एक अनोखे आदमी से जिन्होंने अपने नाम अनोखा विश्व रिकॉर्ड बना रखा है
— Shyam pal Singh (@Shyampa92199113) August 19, 2026
तमिलनाडु तरुनेलवेली जिले के बिल्लीयूर मे मुर्गान ने भारतीय मधुमखियो से अपने चेहरे क़ो लगातार 5 घंटे 3 मिनट तक ढक कर अनोखा रिकॉर्ड बनाया है
यह उपलब्धि फरबरी 2026 मरिया आर्ट्स एंड साइंस कालेज मे… pic.twitter.com/0JD01Oruti
हालांकि, इस उपलब्धि को देखकर आम लोगों को इसे खुद दोहराने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। मधुमक्खियों के साथ बिना प्रशिक्षण और सुरक्षा उपायों के प्रयोग करना खतरनाक हो सकता है।
मधुमक्खी के डंक से हो सकता है खतरा
मधुमक्खियों के डंक से दर्द और सूजन तो हो ही सकती है, कुछ लोगों को गंभीर एलर्जी भी हो सकती है। ऐसी एलर्जी की स्थिति में सांस लेने में परेशानी और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
इसलिए किसी भी व्यक्ति को सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो या रिकॉर्ड देखकर चेहरे पर मधुमक्खियों का झुंड बैठाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।
मधुमक्खी पालन के लिए भी विशेषज्ञों से प्रशिक्षण और उचित सुरक्षा उपकरण जरूरी होते हैं।
मधुमक्खियां सिर्फ शहद के लिए नहीं
मधुमक्खियों की भूमिका केवल शहद उत्पादन तक सीमित नहीं है। वे प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र और कृषि के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण हैं।
फूलों से रस और पराग एकत्र करते समय मधुमक्खियां परागण में मदद करती हैं। इससे कई फसलों और पौधों के प्रजनन में महत्वपूर्ण योगदान मिलता है।
यही वजह है कि मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने का मतलब केवल शहद का उत्पादन बढ़ाना नहीं है, बल्कि कृषि और पर्यावरण दोनों के लिए उपयोगी गतिविधि को बढ़ावा देना भी है।
सिर्फ शहद तक सीमित नहीं है कारोबार
मधुमक्खी पालन के क्षेत्र में केवल शहद ही आय का साधन नहीं है। मधुमक्खी मोम और अन्य उत्पाद भी विभिन्न उद्योगों में इस्तेमाल होते हैं।
मधुमक्खी पालक स्थानीय स्तर पर शहद का उत्पादन और बिक्री कर सकते हैं। इसके साथ मधुमक्खी कॉलोनी बढ़ाने और परागण सेवाओं जैसी गतिविधियों से भी आय के अवसर पैदा हो सकते हैं।
हालांकि, इसके लिए सही मधुमक्खी प्रजाति, मौसम की जानकारी, छत्तों की देखभाल और बाजार की समझ होना जरूरी है।
युवाओं को दिया अलग संदेश
इस रिकॉर्ड का एक महत्वपूर्ण पहलू युवाओं से भी जुड़ा है। मधुमक्खी पालन जैसे व्यवसाय ग्रामीण युवाओं के लिए स्वरोजगार का विकल्प बन सकते हैं।
आज खेती के साथ कई युवा छोटे स्तर पर कृषि आधारित व्यवसाय शुरू कर रहे हैं। मधुमक्खी पालन भी कम जमीन में शुरू किए जा सकने वाले विकल्पों में शामिल है, हालांकि इसमें शुरुआती प्रशिक्षण और निवेश की आवश्यकता होती है।
एस. इसक्की मुथु का प्रदर्शन इसी क्षेत्र की ओर लोगों का ध्यान खींचने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
रिकॉर्ड के बाद बढ़ी चर्चा
एस. इसक्की मुथु की उपलब्धि के बाद स्थानीय स्तर पर उनकी चर्चा होने लगी। जिस काम से आम इंसान घबराता है, उसे उन्होंने घंटों तक करने का दावा किया और इसी वजह से उनका नाम रिकॉर्ड में दर्ज हुआ।
चेहरे पर मधुमक्खियों का झुंड और करीब पांच घंटे तक लगातार प्रदर्शन करना निश्चित रूप से लोगों के लिए बेहद असामान्य दृश्य रहा होगा।
उनकी उपलब्धि को लेकर स्थानीय लोगों और परिचितों की ओर से बधाई और शुभकामनाएं दिए जाने की बात भी सामने आई है।
साहस के साथ सुरक्षा भी जरूरी
इस रिकॉर्ड को देखकर सबसे महत्वपूर्ण संदेश सुरक्षा से जुड़ा है। मधुमक्खियों के साथ काम करने वाले प्रशिक्षित लोग भी सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल करते हैं।
किसी भी व्यक्ति को रिकॉर्ड की नकल करने या बिना प्रशिक्षण के मधुमक्खियों को चेहरे पर बैठाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।
मधुमक्खियों के साथ काम करने के दौरान सुरक्षा जाल, उचित कपड़े और अन्य उपकरणों का इस्तेमाल किया जाता है। किसी भी असामान्य प्रतिक्रिया की स्थिति में तुरंत विशेषज्ञ सहायता लेना जरूरी है।
उपलब्धि ने खींचा लोगों का ध्यान
इस अनोखे रिकॉर्ड ने लोगों का ध्यान मधुमक्खी पालन की तरफ भी खींचा है। जहां एक तरफ लोग इस कारनामे को देखकर हैरान हैं, वहीं दूसरी तरफ मधुमक्खी पालन को रोजगार के संभावित साधन के रूप में देखने की चर्चा भी हो रही है।
कृषि से जुड़े लोगों के लिए यह एक ऐसा क्षेत्र है जिसमें शहद उत्पादन के साथ-साथ परागण और अन्य मधुमक्खी उत्पादों से भी आर्थिक अवसर पैदा हो सकते हैं।
तमिलनाडु के तिरुनेलवेली जिले के वल्लियोर से सामने आई यह कहानी इसलिए खास है क्योंकि यहां एक व्यक्ति ने मधुमक्खियों के साथ ऐसा असाधारण प्रदर्शन किया, जिसे रिकॉर्ड के रूप में दर्ज किया गया।
एस. इसक्की मुथु ने 20 फरवरी 2026 को मारिया आर्ट्स एंड साइंस कॉलेज में भारतीय मधुमक्खियों से अपना चेहरा लगातार 5 घंटे 3 मिनट तक ढककर रखा। इस उपलब्धि को चोलान बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज किया गया।
उनकी उपलब्धि का उद्देश्य केवल रिकॉर्ड बनाना नहीं बल्कि मधुमक्खी पालन के प्रति किसानों और आम लोगों में जागरूकता बढ़ाना भी बताया गया है। मधुमक्खी पालन ग्रामीण क्षेत्रों में अतिरिक्त आय और रोजगार का माध्यम बन सकता है, लेकिन इसके लिए प्रशिक्षण और सुरक्षा का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।
चेहरे पर मधुमक्खियों का झुंड और करीब पांच घंटे तक बिना विचलित हुए प्रदर्शन—यह कारनामा निश्चित रूप से बेहद अनोखा है। साथ ही इस घटना ने यह भी दिखाया कि मधुमक्खी पालन को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ाने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाए जा सकते हैं।
नोट: इस तरह के प्रदर्शन को देखकर पाठक इसे घर पर दोहराने की कोशिश न करें। मधुमक्खियों के साथ काम करने के लिए उचित प्रशिक्षण और सुरक्षा उपकरण जरूरी हैं।

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