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शरीर का ये छोटा सा बदलाव बता सकता है डायबिटीज का खतरा! ज्यादातर लोग करते हैं नजरअंदाज



चेहरे की खूबसूरती पर लगभग हर कोई ध्यान देता है। लोग महंगे फेसवॉश, सीरम और क्रीम का इस्तेमाल करते हैं ताकि चेहरा साफ और चमकदार बना रहे। लेकिन शरीर के कुछ हिस्से ऐसे भी हैं जिन्हें अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। हाथों की उंगलियों के जोड़ (नकल्स), कोहनी और घुटनों पर जमा कालापन न केवल देखने में खराब लगता है, बल्कि कई बार यह शरीर के अंदर छिपी किसी स्वास्थ्य समस्या का संकेत भी हो सकता है।

अधिकांश लोग यह मान लेते हैं कि इन हिस्सों का काला पड़ना केवल गंदगी या साफ-सफाई की कमी के कारण होता है। इसलिए वे बार-बार स्क्रब करते हैं या तरह-तरह की क्रीम लगाते हैं। लेकिन यदि काफी प्रयासों के बाद भी कालापन कम नहीं हो रहा है, तो इसकी वजह केवल बाहरी नहीं बल्कि शरीर के अंदर भी हो सकती है।

क्यों काले पड़ जाते हैं उंगलियों के जोड़, कोहनी और घुटने?

त्वचा विशेषज्ञों के अनुसार शरीर के इन हिस्सों की त्वचा अन्य भागों की तुलना में अधिक मोटी होती है। इसका कारण यह है कि इन स्थानों पर लगातार दबाव और घर्षण पड़ता रहता है।

जब हम बार-बार घुटनों के बल बैठते हैं, कोहनी का सहारा लेते हैं या हाथों से लगातार काम करते हैं, तो त्वचा अपनी सुरक्षा के लिए मोटी होने लगती है। इस प्रक्रिया में केराटिन (Keratin) नामक प्रोटीन की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे त्वचा की ऊपरी परत मोटी और गहरे रंग की दिखाई देने लगती है।

यही वजह है कि कई लोगों के हाथों के जोड़ और कोहनी हमेशा चेहरे की तुलना में अधिक काले नजर आते हैं।

मेलेनिन बढ़ने से भी बदल सकता है त्वचा का रंग

हमारी त्वचा का रंग मेलेनिन (Melanin) नामक प्राकृतिक पिगमेंट तय करता है। जब शरीर को किसी हिस्से में लगातार दबाव, रगड़ या हल्की चोट महसूस होती है, तो वह सुरक्षा के लिए उस जगह पर अधिक मेलेनिन बनाना शुरू कर देता है।

इस अतिरिक्त मेलेनिन के कारण त्वचा का रंग गहरा हो जाता है। इसलिए यदि आप दिनभर किसी ऐसी गतिविधि में रहते हैं जिसमें हाथों, घुटनों या कोहनी पर अधिक दबाव पड़ता है, तो इन हिस्सों का काला होना सामान्य हो सकता है।

अगर अचानक बढ़ने लगे कालापन, तो हो जाएं सावधान

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि उंगलियों के जोड़, कोहनी या घुटनों का कालापन अचानक बढ़ने लगे या बहुत तेजी से फैलने लगे, तो इसे केवल कॉस्मेटिक समस्या मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

ऐसी स्थिति कई बार शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव या मेटाबॉलिक समस्याओं की ओर संकेत कर सकती है।

इंसुलिन रेजिस्टेंस भी हो सकती है वजह

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि कुछ मामलों में इन हिस्सों का कालापन इंसुलिन रेजिस्टेंस से जुड़ा हो सकता है।

इंसुलिन रेजिस्टेंस वह स्थिति है जिसमें शरीर इंसुलिन का सही तरीके से उपयोग नहीं कर पाता। परिणामस्वरूप खून में इंसुलिन का स्तर बढ़ जाता है, जिसका प्रभाव त्वचा की कोशिकाओं पर भी पड़ सकता है।

ऐसे लोगों में गर्दन, बगल, हाथों के जोड़ और शरीर के अन्य हिस्सों पर त्वचा गहरी होने लगती है। यह भविष्य में टाइप-2 डायबिटीज का जोखिम बढ़ने का संकेत भी हो सकता है।

विटामिन बी12 की कमी भी बन सकती है कारण

यदि आपके हाथों की उंगलियों के जोड़ सामान्य से अधिक काले दिखाई देने लगे हैं, तो इसकी वजह शरीर में विटामिन बी12 की कमी भी हो सकती है।

विटामिन बी12 की कमी केवल त्वचा ही नहीं बल्कि पूरे शरीर को प्रभावित करती है। इसके साथ कमजोरी, थकान, चक्कर आना, हाथ-पैरों में झुनझुनी और याददाश्त से जुड़ी समस्याएं भी हो सकती हैं।

ऐसी स्थिति में केवल घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर की सलाह लेकर आवश्यक जांच कराना बेहतर होता है।

इन बीमारियों में भी दिखाई दे सकता है त्वचा का कालापन

विशेषज्ञ बताते हैं कि कुछ अन्य स्वास्थ्य समस्याओं में भी त्वचा के रंग में बदलाव देखने को मिलता है।

इनमें शामिल हैं—

  • थायरॉइड संबंधी विकार

  • एडिसन डिजीज

  • कुछ हार्मोनल असंतुलन

  • पोषण की कमी

  • लंबे समय तक चलने वाली कुछ बीमारियां

यदि कालापन लंबे समय से बना हुआ है और इसके साथ वजन कम होना, अत्यधिक कमजोरी, भूख में बदलाव या अन्य लक्षण भी दिखाई दे रहे हैं, तो डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है।

क्या घरेलू उपाय मदद कर सकते हैं?

अगर कालापन किसी गंभीर बीमारी के कारण नहीं है और केवल त्वचा की मोटाई, रूखेपन या सामान्य घर्षण की वजह से है, तो कुछ घरेलू उपाय त्वचा की देखभाल में मदद कर सकते हैं।

हालांकि इन उपायों का असर व्यक्ति की त्वचा के प्रकार और कारण पर निर्भर करता है।

1. दही और हल्दी का मिश्रण

दही में मौजूद लैक्टिक एसिड मृत त्वचा कोशिकाओं को हटाने में मदद करता है।

वहीं हल्दी में पाया जाने वाला करक्यूमिन एंटीऑक्सीडेंट और सूजन कम करने वाले गुणों के लिए जाना जाता है।

दो चम्मच दही में एक चुटकी हल्दी मिलाकर प्रभावित हिस्से पर 15 से 20 मिनट तक लगाएं और फिर साफ पानी से धो लें।

2. आलू और नींबू का उपयोग

आलू में मौजूद कुछ प्राकृतिक एंजाइम त्वचा की रंगत को समान बनाने में सहायक माने जाते हैं।

नींबू में पाया जाने वाला साइट्रिक एसिड मृत त्वचा कोशिकाओं को हटाने में मदद कर सकता है।

यदि आपकी त्वचा संवेदनशील है या कटे-फटे हिस्से हैं, तो नींबू लगाने से पहले सावधानी बरतें क्योंकि इससे जलन हो सकती है।

3. बादाम और मलाई का मिश्रण

बादाम में मौजूद विटामिन ई त्वचा को पोषण देने में मदद करता है।

वहीं मलाई त्वचा को मुलायम रखने और नमी बनाए रखने में सहायक होती है।

इन दोनों का मिश्रण नियमित रूप से लगाने से त्वचा का रूखापन कम हो सकता है।

4. बेसन और एलोवेरा

बेसन लंबे समय से प्राकृतिक क्लेंजर के रूप में इस्तेमाल किया जाता रहा है।

एलोवेरा त्वचा को हाइड्रेट रखने और उसे शांत करने में मदद करता है।

दोनों का मिश्रण त्वचा की सफाई और नमी बनाए रखने में उपयोगी हो सकता है।

इन बातों का भी रखें ध्यान

केवल घरेलू उपाय अपनाना ही पर्याप्त नहीं है। कुछ आदतों में बदलाव करके भी इन हिस्सों के कालेपन को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

  • त्वचा को नियमित रूप से मॉइस्चराइज करें।

  • जरूरत से ज्यादा स्क्रब करने से बचें।

  • पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं।

  • संतुलित और पौष्टिक आहार लें।

  • विटामिन और मिनरल्स की कमी न होने दें।

  • लंबे समय तक लगातार घर्षण पैदा करने वाली गतिविधियों में सावधानी रखें।

  • धूप में निकलने पर शरीर के खुले हिस्सों पर सनस्क्रीन का उपयोग करें।

डॉक्टर से कब मिलना चाहिए?

यदि हाथों के जोड़, कोहनी या घुटनों का कालापन अचानक बढ़ जाए, घरेलू उपायों के बावजूद लंबे समय तक बना रहे, या इसके साथ शरीर में कमजोरी, वजन में बदलाव, अत्यधिक प्यास, बार-बार पेशाब आना, थकान या अन्य असामान्य लक्षण दिखाई दें, तो त्वचा विशेषज्ञ या फिजिशियन से जांच कराना जरूरी है।

उंगलियों के जोड़, कोहनी और घुटनों का कालापन हमेशा केवल सौंदर्य से जुड़ी समस्या नहीं होता। कई बार यह सामान्य घर्षण का परिणाम होता है, लेकिन कुछ मामलों में यह इंसुलिन रेजिस्टेंस, विटामिन बी12 की कमी, थायरॉइड विकार या अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का शुरुआती संकेत भी हो सकता है। इसलिए केवल क्रीम या घरेलू नुस्खों पर निर्भर रहने के बजाय कारण को समझना अधिक जरूरी है। सही त्वचा देखभाल, संतुलित आहार और समय पर चिकित्सकीय सलाह न केवल त्वचा की रंगत सुधार सकती है बल्कि किसी गंभीर बीमारी की समय रहते पहचान करने में भी मददगार साबित हो सकती है।

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