इतिहास रचने निकले थे... फिर बर्फ ने निगल लिया! ब्रॉड पीक पर मौत का तांडव
इस्लामाबाद: पाकिस्तान के कराकोरम पर्वत श्रृंखला में स्थित दुनिया की सबसे खतरनाक चोटियों में शामिल 8,047 मीटर ऊंची ब्रॉड पीक (Broad Peak) पर एक भीषण हिमस्खलन ने अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोहण समुदाय को झकझोर कर रख दिया है। इस दर्दनाक हादसे में अब तक चार पर्वतारोहियों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि छह अन्य पर्वतारोही अभी भी लापता हैं। लापता लोगों की तलाश के लिए पाकिस्तान के बचाव दल लगातार अभियान चला रहे हैं, लेकिन खराब मौसम और ऊंचाई के कारण राहत कार्य बेहद चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
इस अभियान की सबसे चर्चित बात यह है कि इसमें दुनिया के प्रसिद्ध पर्वतारोही निर्मल पुरजा 'निम्स दाई' भी शामिल थे। उनके लापता होने की खबर ने दुनियाभर के पर्वतारोहियों और उनके प्रशंसकों की चिंता बढ़ा दी है।
30 जुलाई को हुआ भीषण हिमस्खलन
जानकारी के अनुसार, 30 जुलाई को ब्रॉड पीक पर अचानक आए भारी हिमस्खलन ने पर्वतारोहियों के दल को अपनी चपेट में ले लिया। कुछ ही पलों में बर्फ का विशाल पहाड़ टीम पर टूट पड़ा, जिससे अभियान पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया। हादसे के तुरंत बाद स्थानीय प्रशासन और अल्पाइन क्लब ऑफ पाकिस्तान (ACP) ने बचाव अभियान शुरू किया।
ऊंचाई, खराब मौसम, तेज हवाओं और लगातार गिरती बर्फ के कारण राहत कार्य काफी धीमी गति से चल रहा है। बचाव दल हेलीकॉप्टर और विशेष पर्वतारोहण टीमों की मदद से लापता लोगों की तलाश कर रहे हैं।
चार पर्वतारोहियों की मौत की पुष्टि
अल्पाइन क्लब ऑफ पाकिस्तान (ACP) ने पुष्टि की है कि इस हादसे में अब तक चार पर्वतारोहियों की मौत हुई है।
मृतकों में शामिल हैं—
नेपाल के पुर बहादुर गुरंग 'युक्ता'
ओमान की नधिरा अहमद अब्दुल्ला अल हारथी
अन्य दो मृतकों की आधिकारिक पहचान संबंधित देशों से पुष्टि होने के बाद सार्वजनिक किए जाने की बात कही गई है।
अल्पाइन क्लब के अध्यक्ष इरफान अरशद खान ने बताया कि नधिरा अल हारथी का शव हेलीकॉप्टर के माध्यम से स्कर्दू लाया जा रहा है, जबकि पुर बहादुर गुरंग के शव को नीचे लाने की तैयारी की जा रही है।
छह पर्वतारोही अब भी लापता
इस हादसे में छह पर्वतारोहियों का अब तक कोई पता नहीं चल सका है। लापता लोगों में दुनिया के सबसे चर्चित पर्वतारोहियों में गिने जाने वाले निर्मल पुरजा (निम्स दाई) का नाम भी शामिल बताया जा रहा है।
उनके अलावा अभियान में शामिल अन्य पर्वतारोहियों में—
किली पेम्बा शेरपा "किलू"
निमा शेरपा
नावांग थिन्दु शेरपा
ग्यालु शेरपा
सोहेल साखी (पाकिस्तान)
वांग झोंग (चीन)
मैलोरी गेइस (अमेरिका)
जैसे अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोही भी शामिल थे।
बचाव दल लगातार इन सभी की तलाश में जुटा हुआ है।
नेपाल सरकार भी हुई सक्रिय
हादसे के बाद पाकिस्तान स्थित नेपाली दूतावास भी सक्रिय हो गया है। नेपाल की राजदूत रीता धीतल ने अल्पाइन क्लब ऑफ पाकिस्तान के अधिकारियों से मुलाकात कर बचाव अभियान तेज करने का अनुरोध किया।
नेपाल के विदेश मंत्रालय ने भी बयान जारी कर कहा कि इस्लामाबाद स्थित दूतावास लगातार पाकिस्तानी अधिकारियों और अल्पाइन क्लब के संपर्क में है ताकि प्रभावित नेपाली पर्वतारोहियों को जल्द से जल्द सुरक्षित निकाला जा सके।
नेपाल सरकार ने भरोसा जताया है कि पाकिस्तान प्रशासन उपलब्ध सभी संसाधनों का उपयोग कर राहत और बचाव अभियान चला रहा है।
कौन हैं निर्मल पुरजा 'निम्स दाई'?
निर्मल पुरजा आधुनिक पर्वतारोहण की दुनिया का एक बड़ा नाम हैं। नेपाल के धौलागिरी क्षेत्र में जन्मे और चितवन में पले-बढ़े पुरजा बाद में ब्रिटेन के नागरिक बने।
उन्होंने लगभग 16 वर्षों तक सेना में सेवा दी, जिसमें—
6 वर्ष ब्रिटिश गोरखा रेजिमेंट में
10 वर्ष ब्रिटेन की स्पेशल बोट सर्विस (SBS) में
शामिल रहे। उन्हें एसबीएस में शामिल होने वाले पहले गोरखा सैनिक के रूप में भी जाना जाता है।
2019 में रचा था इतिहास
निर्मल पुरजा ने 2012 में पेशेवर पर्वतारोहण की शुरुआत की थी, लेकिन बहुत कम समय में उन्होंने दुनिया भर में अपनी अलग पहचान बना ली।
उनकी प्रमुख उपलब्धियों में शामिल हैं—
2018: केवल 5 दिनों में एवरेस्ट, ल्होत्से और मकालू फतह कर विश्व रिकॉर्ड बनाया।
2019: "प्रोजेक्ट पॉसिबल" के तहत दुनिया की सभी 14 आठ हजार मीटर से ऊंची चोटियों को केवल 6 महीने में फतह कर इतिहास रच दिया।
इससे पहले यह रिकॉर्ड पूरा करने में पर्वतारोहियों को लगभग आठ वर्ष तक का समय लगा था।
निर्मल पुरजा को हाई-एल्टीट्यूड रेस्क्यू और बेहद कठिन परिस्थितियों में पर्वतारोहण के लिए दुनिया भर में सम्मान की नजर से देखा जाता है।
इतिहास रचने निकले थे
हादसे से कुछ दिन पहले यानी 27 जुलाई को निर्मल पुरजा ने सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट साझा की थी।
उन्होंने लिखा था कि ब्रॉड पीक उनके मूल अभियान का हिस्सा नहीं था, लेकिन यदि वह इस चोटी को बिना अतिरिक्त ऑक्सीजन के सफलतापूर्वक फतह कर लेते, तो वे दुनिया के पहले ऐसे व्यक्ति बन जाते जो 14 आठ हजार मीटर से ऊंची चोटियों को दूसरी बार भी बिना ऑक्सीजन के पूरा करने का रिकॉर्ड बनाते।
उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा था—
"मेरा मुकाबला किसी और से नहीं था। मेरा संघर्ष सिर्फ कल वाले खुद से था। हर दिन अपनी सीमाएं तोड़ने की कोशिश करता हूं।"
आज वही अभियान एक बड़े हादसे में बदल गया है।
क्यों खतरनाक मानी जाती है ब्रॉड पीक?
ब्रॉड पीक पाकिस्तान और चीन की सीमा के पास कराकोरम पर्वत श्रृंखला में स्थित है। इसकी ऊंचाई 8,047 मीटर है और इसे दुनिया की 12वीं सबसे ऊंची चोटी माना जाता है।
यह पर्वत बेहद कठिन मौसम, तेज हवाओं, गहरी बर्फ, हिमस्खलन और ऑक्सीजन की कमी के कारण दुनिया की सबसे चुनौतीपूर्ण चोटियों में गिना जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यहां मौसम कुछ ही मिनटों में पूरी तरह बदल सकता है, जिससे अनुभवी पर्वतारोहियों के लिए भी हालात बेहद खतरनाक हो जाते हैं।
बचाव अभियान जारी
पाकिस्तान के बचाव दल, सेना और पर्वतारोहण विशेषज्ञ लगातार लापता पर्वतारोहियों की तलाश में जुटे हुए हैं। अधिकारियों का कहना है कि मौसम अनुकूल होते ही खोज अभियान और तेज किया जाएगा।
दुनियाभर के पर्वतारोहण समुदाय की निगाहें अब इस रेस्क्यू ऑपरेशन पर टिकी हुई हैं। सभी को उम्मीद है कि लापता पर्वतारोहियों में से अधिक से अधिक लोगों को सुरक्षित खोज लिया जाएगा, हालांकि ऊंचाई और मौसम को देखते हुए यह अभियान बेहद कठिन माना जा रहा है।

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