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आधी रात 2 बजे दरवाजा पीटा... महिला को जबरन ले गए सिपाही? सुबह खुला ऐसा राज कि मच गया हड़कंप!



उत्तर प्रदेश में पुलिस की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। कुशीनगर जिले के कसया थाना क्षेत्र से सामने आए एक गंभीर मामले ने पूरे पुलिस महकमे को झकझोर दिया है। एक ब्यूटी पार्लर संचालिका ने आरोप लगाया है कि थाने में तैनात दो सिपाही आधी रात उसके किराए के मकान पर पहुंचे, जबरन घर में घुस गए और उसे अपनी गाड़ी में बैठाकर गोरखपुर ले गए। महिला का आरोप है कि रास्ते में और ढाबे पर उसके साथ अभद्र व्यवहार किया गया तथा बाद में किसी से शिकायत न करने की धमकी देकर उसे वापस कसया छोड़ दिया गया।

मामले की शिकायत सीधे पुलिस अधीक्षक (एसपी) से किए जाने के बाद तत्काल कार्रवाई हुई। दोनों सिपाहियों को निलंबित कर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया और बाद में उन्हें गिरफ्तार भी कर लिया गया। वहीं पूरे मामले की जांच सीओ सदर को सौंप दी गई है।

पीड़िता ने सुनाई आधी रात की पूरी घटना

पीड़ित महिला, जो कसया में ब्यूटी पार्लर संचालित करती हैं, ने एसपी के जनता दर्शन कार्यक्रम में पहुंचकर अपनी आपबीती सुनाई। शिकायत के अनुसार सोमवार देर रात करीब दो बजे कसया थाने में तैनात सिपाही उमाशंकर यादव और महेंद्र उसके किराए के मकान पर पहुंचे।

महिला का आरोप है कि दोनों सिपाहियों ने पहले दरवाजा जोर-जोर से पीटा। जब उसने दरवाजा खोला तो दोनों जबरन अंदर घुस गए। इसके बाद बिना किसी वैध कारण के उसे अपने साथ चलने के लिए मजबूर किया और गोरखपुर की ओर ले गए।

महिला ने आरोप लगाया कि रास्ते में उसके साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया और गोरखपुर पहुंचने के बाद एक ढाबे पर भी उसके साथ अनुचित व्यवहार किया गया। भोर होने पर उसे वापस कसया लाकर छोड़ दिया गया और किसी से घटना का जिक्र न करने की धमकी दी गई।

ढाबे पर पहले भी हुआ था विवाद

शिकायत में महिला ने यह भी बताया कि दोनों सिपाही उसी दिन एक किशोर को बाल सुरक्षा गृह छोड़ने के लिए गोरखपुर गए थे। वहां से लौटते समय गोरखपुर के एम्स थाना क्षेत्र स्थित माड़ापार के एक ढाबे पर उनका ढाबा संचालक से विवाद हो गया था।

बताया गया कि विवाद शराब की मांग को लेकर हुआ था। महिला के अनुसार ढाबा संचालक पहले कसया में एक होटल चलाता था, जिसे फिलहाल प्रशासन ने सील कर रखा है।

महिला का आरोप है कि विवाद के बाद दोनों सिपाही कसया लौटे और फिर उसे अपने साथ उसी ढाबे पर लेकर पहुंचे। वहां भी उसके साथ अभद्रता की गई। इसके बाद सुबह होने से पहले उसे वापस कसया छोड़ दिया गया।

शिकायत मिलते ही हरकत में आया पुलिस प्रशासन

मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी केशव कुमार ने तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। प्रथम दृष्टया आरोपों को गंभीर मानते हुए दोनों सिपाहियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।

इसके साथ ही दोनों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया और देर रात पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार भी कर लिया। अधिकारियों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और यदि जांच में अन्य तथ्य सामने आते हैं तो उसके अनुसार आगे की कार्रवाई भी की जाएगी।

सीओ सदर करेंगे पूरे मामले की जांच

एसपी ने इस संवेदनशील प्रकरण की विस्तृत जांच सीओ सदर को सौंप दी है। जांच के दौरान पीड़िता के बयान, घटनास्थल से जुड़े साक्ष्य, सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल लोकेशन और अन्य तकनीकी पहलुओं की भी जांच की जाएगी।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि किसी भी पुलिसकर्मी को कानून से ऊपर नहीं माना जा सकता और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो सख्त विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस की छवि पर उठे सवाल

इस घटना के सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि यदि किसी महिला को आधी रात उसके घर से जबरन ले जाने जैसे आरोप पुलिसकर्मियों पर लगते हैं, तो यह बेहद गंभीर विषय है।

सामाजिक संगठनों का भी मानना है कि महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना पुलिस की जिम्मेदारी है। ऐसे में यदि पुलिसकर्मी ही आरोपों के घेरे में आ जाएं तो जनता का विश्वास प्रभावित होता है। इसलिए मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई आवश्यक है।

उन्नाव में भी रिश्वत मांगने के आरोप में सिपाही निलंबित

इधर उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले से भी पुलिस विभाग से जुड़ा एक और मामला सामने आया है। यहां बांगरमऊ थाने में तैनात एक सिपाही पर महिला से रिश्वत मांगने का आरोप लगा, जिसके बाद उसे भी निलंबित कर दिया गया।

जानकारी के अनुसार मारपीट के एक मामले में न्याय की उम्मीद लेकर एक महिला थाने पहुंची थी। आरोप है कि वहां मौजूद सिपाही मनीष कुमार ने कार्रवाई कराने के बदले उससे खर्चा-पानी की मांग की। महिला से कथित रूप से कहा गया कि "साहब को भी देना पड़ता है।"

इस पूरे घटनाक्रम का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। हालांकि वायरल वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन मामला पुलिस अधिकारियों के संज्ञान में आने के बाद जांच शुरू कर दी गई।

जांच में सही पाए गए आरोप

उन्नाव के पुलिस अधीक्षक जयप्रकाश सिंह ने मामले की जांच सर्कल सीओ को सौंपी। जांच के दौरान महिला से पूछताछ की गई और उपलब्ध तथ्यों का परीक्षण किया गया।

सीओ की रिपोर्ट में आरोपों की पुष्टि होने के बाद एसपी ने संबंधित सिपाही को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। अधिकारियों का कहना है कि वायरल वीडियो पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, लेकिन उपलब्ध तथ्यों और महिला के बयान के आधार पर कार्रवाई की गई है।

लगातार सामने आ रहे मामलों से बढ़ी चिंता

कुशीनगर और उन्नाव की घटनाएं एक ही दिन में सामने आने से पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर नई बहस शुरू हो गई है। एक ओर कुशीनगर में महिला के साथ कथित अभद्रता और जबरन ले जाने का मामला है, तो दूसरी ओर उन्नाव में रिश्वत मांगने के आरोप ने पुलिस व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं।

हालांकि दोनों मामलों में संबंधित पुलिस अधीक्षकों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपित पुलिसकर्मियों को निलंबित किया है और कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। इससे यह संकेत भी मिलता है कि शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए विभाग दोषी पाए जाने वाले कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई करने के पक्ष में है।

कुशीनगर की घटना बेहद संवेदनशील है और इसकी निष्पक्ष जांच से ही सच्चाई सामने आएगी। वहीं उन्नाव का मामला भी पुलिस व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता को रेखांकित करता है। दोनों मामलों में प्रशासन ने प्रारंभिक स्तर पर सख्त कदम उठाए हैं, लेकिन अब सबकी नजर जांच रिपोर्ट और न्यायिक प्रक्रिया पर टिकी रहेगी। यदि आरोप सिद्ध होते हैं तो संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई न केवल पीड़ितों को न्याय दिलाएगी बल्कि कानून व्यवस्था में जनता के विश्वास को भी मजबूत करेगी।

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