आधी रात को जागे अफसर, सुबह तक मच गया हड़कंप! 14 राज्यों में फैले आतंकी नेटवर्क पर बड़ा वार
नई दिल्ली: स्वतंत्रता दिवस से ठीक पहले देश में कथित आतंकी साजिश के खिलाफ सुरक्षा एजेंसियों की एक बड़ी कार्रवाई सामने आई है। 14 राज्यों में एक साथ चलाए गए अभियान में शहजाद भट्टी नेटवर्क से जुड़े बताए जा रहे 253 संदिग्धों को हिरासत में लिया गया। जांच एजेंसियों के अनुसार इस कार्रवाई के बाद 80 से अधिक एफआईआर दर्ज की गईं और 200 से ज्यादा लोगों की गिरफ्तारी की बात सामने आई है। अभियान के दौरान हथियार, विस्फोटक, पाकिस्तान ऑर्डनेंस फैक्ट्री के निशान वाले ग्रेनेड और जासूसी के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले उपकरण बरामद होने का भी दावा किया गया है।
यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई जब देश 15 अगस्त के स्वतंत्रता दिवस समारोह की तैयारियों में जुटा था। सुरक्षा एजेंसियों को कथित तौर पर इनपुट मिले थे कि पाकिस्तान स्थित नेटवर्क सोशल मीडिया के जरिए भारतीय युवाओं तक पहुंच बनाने, उन्हें अपने संपर्क में लाने और संवेदनशील स्थानों की रेकी कराने की कोशिश कर रहा है। इससे पहले भी अलग-अलग राज्यों की पुलिस और एंटी-टेरर एजेंसियां शहजाद भट्टी से जुड़े नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई करती रही हैं।
14 राज्यों में एक साथ कार्रवाई से मचा हड़कंप
रिपोर्टों के मुताबिक ताजा कार्रवाई का दायरा काफी बड़ा था। सुरक्षा एजेंसियों ने अलग-अलग राज्यों में एक साथ संदिग्ध ठिकानों पर कार्रवाई की। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उत्तर प्रदेश में 62, हरियाणा में 52, दिल्ली में 51 और पंजाब में 44 संदिग्धों को पकड़ा गया। राजस्थान से 15, महाराष्ट्र से 8 और उत्तराखंड से 5 संदिग्धों के पकड़े जाने की जानकारी सामने आई है।
इसके अलावा कर्नाटक, गुजरात और बिहार से तीन-तीन तथा तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और केरल से दो-दो संदिग्धों को हिरासत में लिए जाने की बात रिपोर्टों में कही गई है। कुल संख्या 253 बताई जा रही है।
इस कार्रवाई का सबसे महत्वपूर्ण पहलू एजेंसियों के बीच समन्वय बताया जा रहा है। अलग-अलग राज्यों में मौजूद संदिग्धों और उनके डिजिटल संपर्कों से संबंधित सूचनाओं को जोड़कर नेटवर्क की कड़ियों को समझने की कोशिश की गई। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इनमें से कितने लोग सीधे तौर पर आतंकी गतिविधियों में शामिल थे और कितने लोग केवल सोशल मीडिया या दूसरे माध्यमों से नेटवर्क के संपर्क में आए थे।
सोशल मीडिया से शुरू होता था संपर्क
शहजाद भट्टी नेटवर्क की जांच में सोशल मीडिया की भूमिका लगातार सामने आती रही है। इससे पहले उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और दिल्ली में हुई जांच में एजेंसियों ने आरोप लगाया था कि पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स सोशल मीडिया के माध्यम से भारतीय युवाओं को अपने संपर्क में लाने की कोशिश कर रहे थे।
महाराष्ट्र एटीएस ने जुलाई में दावा किया था कि पाकिस्तान स्थित कुछ गैंगस्टर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए भारतीय युवाओं को निशाना बना रहे थे। जांच में बड़ी संख्या में ऐसे लोगों की पहचान किए जाने की बात कही गई थी, जिन्होंने संबंधित सोशल मीडिया अकाउंट्स पर प्रतिक्रिया दी थी या उनसे संपर्क किया था।
उत्तर प्रदेश में भी जांच एजेंसियों ने आरोप लगाया था कि सोशल मीडिया और वीडियो कॉल के जरिए युवाओं को पाकिस्तानी हैंडलर्स से जोड़ा जा रहा था। मई में सहारनपुर से गिरफ्तार किए गए चार संदिग्धों के बारे में पुलिस ने कहा था कि वे संवेदनशील स्थानों की निगरानी, युवाओं की भर्ती और कथित आतंकी गतिविधियों की साजिश से जुड़े थे।
जांच का यह पहलू इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि आज आतंकवादी नेटवर्क पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल कर रहे हैं। पहले किसी संगठन तक पहुंचने के लिए भौतिक संपर्क जरूरी होता था, लेकिन सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड संचार के कारण दूरी काफी कम हो गई है।
रेकी से लेकर हथियारों तक की जांच
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार शहजाद भट्टी से जुड़े कथित नेटवर्क में सिर्फ ऑनलाइन संपर्क ही नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर रेकी और हथियारों की आवाजाही जैसे गंभीर आरोप भी सामने आए हैं।
दिल्ली पुलिस की जांच में आरोप लगाया गया था कि नेटवर्क से जुड़े लोग संभावित ठिकानों की रेकी करते थे और वहां की तस्वीरें तथा वीडियो पाकिस्तान में मौजूद हैंडलर्स तक भेजते थे। जांच में हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी तथा डिजिटल संचार के इस्तेमाल का भी उल्लेख किया गया था।
यही वजह है कि ताजा कार्रवाई में बरामदगी पर भी सुरक्षा एजेंसियों की नजर है। रिपोर्टों में आईईडी, ग्रेनेड, पिस्तौल, कारतूस और सीसीटीवी कैमरों जैसे सामान की बरामदगी का दावा किया गया है। कुछ ग्रेनेड पर पाकिस्तान ऑर्डनेंस फैक्ट्री के निशान होने की बात भी सामने आई है।
हालांकि बरामदगी से जुड़े प्रत्येक दावे की कानूनी पुष्टि संबंधित जांच और अदालत की कार्यवाही के दौरान होगी। हिरासत में लिए गए हर व्यक्ति को आतंकी गतिविधियों में शामिल मान लेना भी उचित नहीं होगा। जांच एजेंसियों को प्रत्येक संदिग्ध की भूमिका अलग-अलग स्थापित करनी होगी।
अमित शाह ने बताया ऑपरेशन को जीरो टॉलरेंस नीति का हिस्सा
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस कार्रवाई को आतंकवाद के खिलाफ सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का उदाहरण बताया। उनके मुताबिक स्वतंत्रता दिवस से पहले कथित आईएसआई समर्थित शहजाद भट्टी नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई कर 200 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया और संभावित बड़ी साजिश को नाकाम किया गया। रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने 14 राज्यों में एक साथ चलाए गए अभियान को सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय का उदाहरण बताया।
इस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हुई है। जहां सरकार और उसके समर्थक इसे राष्ट्रीय सुरक्षा की बड़ी उपलब्धि के तौर पर देख रहे हैं, वहीं विपक्ष की ओर से सुरक्षा और कानून-व्यवस्था से जुड़े सवाल भी उठाए जाते रहे हैं। ऐसे माहौल में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य जांच एजेंसियों की जांच और अदालत में सामने आने वाले सबूत होंगे।
पाकिस्तान ने आरोपों को किया खारिज
भारत की ओर से शहजाद भट्टी नेटवर्क को पाकिस्तान की आईएसआई से जोड़कर लगाए गए आरोपों को पाकिस्तान ने खारिज कर दिया है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने भारतीय गृह मंत्री के आरोपों को निराधार बताया और कहा कि भारत घरेलू सुरक्षा चुनौतियों से ध्यान हटाने के लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराने की कोशिश कर रहा है।
भारत की ओर से विदेश मंत्रालय ने इसके जवाब में आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई जारी रखने का रुख दोहराया। इस घटनाक्रम से एक बार फिर भारत और पाकिस्तान के बीच आतंकवाद को लेकर आरोप-प्रत्यारोप सामने आए हैं।
कौन है शहजाद भट्टी?
शहजाद भट्टी का नाम वर्ष 2026 में भारत में सामने आए कई कथित आतंकी और आपराधिक नेटवर्क की जांच में आया है। सुरक्षा एजेंसियों का आरोप है कि पाकिस्तान में मौजूद भट्टी सोशल मीडिया के जरिए भारतीय युवाओं को प्रभावित करने और नेटवर्क में शामिल करने की कोशिश कर रहा था।
जून में उत्तर प्रदेश एटीएस ने आरोप लगाया था कि भट्टी से जुड़े नेटवर्क के माध्यम से युवाओं को पैसे और सोशल मीडिया संपर्कों के जरिए प्रभावित किया जा रहा था। एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया था कि नेटवर्क का इस्तेमाल संवेदनशील स्थानों की रेकी और संभावित हिंसक गतिविधियों के लिए किया जा सकता था।
दिल्ली पुलिस की जांच में भी भट्टी से जुड़े कथित मॉड्यूल का खुलासा हुआ था। मई में दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल ने उसके नेटवर्क से जुड़े लोगों को गिरफ्तार करने की जानकारी दी थी।
इससे साफ है कि 14 राज्यों की कार्रवाई अचानक शुरू हुई कोई अलग घटना नहीं थी। इसके पीछे पिछले कई महीनों से अलग-अलग राज्यों की पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों द्वारा जुटाई जा रही सूचनाओं की भूमिका बताई जा रही है।
असली चुनौती अब शुरू होगी
253 लोगों को हिरासत में लेना या 200 से ज्यादा गिरफ्तारियां करना अपने आप में बड़ा ऑपरेशन जरूर है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों के लिए असली चुनौती अब शुरू होती है। उन्हें यह पता लगाना होगा कि इस नेटवर्क की वास्तविक संरचना क्या थी, इसके पीछे कौन लोग थे, पैसा कहां से आ रहा था, हथियारों की सप्लाई कैसे होती थी और सोशल मीडिया के जरिए कितने युवाओं को संपर्क में लाया गया।
इसके साथ ही एजेंसियों को उन लोगों की भी पहचान करनी होगी जो अभी तक जांच के दायरे से बाहर हैं। डिजिटल डिवाइस, मोबाइल फोन, चैट, बैंकिंग लेनदेन और सोशल मीडिया गतिविधियों की फॉरेंसिक जांच इस मामले में अहम भूमिका निभा सकती है।
स्वतंत्रता दिवस से पहले हुई यह कार्रवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि राष्ट्रीय समारोहों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था पहले से ही बेहद कड़ी रहती है। ऐसे समय में किसी संभावित आतंकी नेटवर्क की पहचान कर उसे रोकना सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी जिम्मेदारी होती है।
फिलहाल शहजाद भट्टी नेटवर्क को लेकर जांच जारी है। 14 राज्यों में हुई कार्रवाई से सामने आई कड़ियों के आधार पर एजेंसियां आगे की गिरफ्तारियों और पूछताछ की तैयारी कर रही हैं। आने वाले दिनों में जांच से यह स्पष्ट हो सकता है कि नेटवर्क का वास्तविक विस्तार कितना था, उसके कितने सदस्य सक्रिय थे और स्वतंत्रता दिवस को लेकर कथित साजिश की अंतिम योजना क्या थी।
इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह सवाल सामने ला दिया है कि आतंकवाद का खतरा अब केवल सीमा या हथियारों तक सीमित नहीं है। सोशल मीडिया, डिजिटल संपर्क, ऑनलाइन भर्ती और जमीनी रेकी के जरिए बनाए जा रहे नेटवर्क सुरक्षा एजेंसियों के लिए नई चुनौती बन चुके हैं। ऐसे में 14 राज्यों में की गई संयुक्त कार्रवाई को केवल एक गिरफ्तारी अभियान के तौर पर नहीं, बल्कि डिजिटल और जमीनी स्तर पर फैल रहे कथित आतंकी नेटवर्क को समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण जांच के रूप में भी देखा जा रहा है।

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