इश्क का सबसे दर्दनाक अंजाम! प्रेमिका की कब्र पर पहुंचा और फिर कभी लौटकर नहीं आया
इज़राइल में एक ऐसी दर्दनाक घटना सामने आई है जिसने पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया। करीब ढाई से तीन साल पहले हुए नोवा म्यूज़िक फेस्टिवल नरसंहार में अपनी प्रेमिका को खो चुके एक युवक ने आखिरकार उसी कब्र के पास अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली, जहां वह अक्सर उससे मिलने जाया करता था। यह घटना एक बार फिर इस बात की याद दिलाती है कि युद्ध और आतंकवाद केवल उस दिन जान नहीं लेते, बल्कि कई लोगों की जिंदगी वर्षों तक बर्बाद कर देते हैं।
प्रेमिका की मौत का सदमा नहीं सह पाया युवक
मृतक की पहचान 30 वर्षीय बार अशरफ के रूप में हुई है। बताया गया कि उसकी प्रेमिका लिरोन बरदा की 7 अक्टूबर 2023 को हुए हमास के हमले में नोवा म्यूज़िक फेस्टिवल के दौरान हत्या कर दी गई थी। उस घटना के बाद से अशरफ गहरे मानसिक आघात में था और अक्सर अपनी प्रेमिका की कब्र पर जाकर घंटों बैठा करता था।
शनिवार, 1 अगस्त 2026 को उसने वही कदम उठा लिया जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। वह वेस्ट बैंक स्थित एल्काना कब्रिस्तान पहुंचा और लिरोन बरदा की कब्र के पास खुद को गोली मार ली। जब तक परिजन और आपातकालीन सेवाएं वहां पहुंचीं, तब तक उसकी मौत हो चुकी थी।
भाई की शादी छोड़कर अचानक चला गया
अशरफ की बहन लेही ने मीडिया से बातचीत में उस भयावह दिन का पूरा घटनाक्रम बताया। उसने कहा कि परिवार में खुशी का माहौल था क्योंकि उसके दूसरे भाई की शादी हो रही थी। सभी लोग शादी समारोह में शामिल थे, लेकिन कुछ समय बाद अशरफ वहां से चुपचाप निकल गया।
परिवार वालों ने शुरुआत में सोचा कि वह अकेले समय बिताने गया होगा क्योंकि वह अक्सर ऐसा करता था। लेकिन काफी देर तक वापस नहीं लौटने पर चिंता बढ़ गई।
लेही ने बताया कि पहले उन्होंने उन सभी जगहों पर उसे तलाशा जहां उसके मिलने की संभावना थी। जब कहीं पता नहीं चला तो अचानक ख्याल आया कि शायद वह लिरोन बरदा की कब्र पर गया होगा, क्योंकि वह अक्सर वहीं जाकर उससे बातें करता था।
कब्र के पास मिला खून से लथपथ शव
जब परिवार कब्रिस्तान पहुंचा तो वहां का दृश्य देखकर सभी स्तब्ध रह गए। अशरफ लिरोन बरदा की कब्र के पास पड़ा हुआ था। शुरुआत में लगा कि वह बेहोश है, लेकिन पास जाकर देखा तो उसकी छाती से खून बह रहा था।
उसकी बहन ने बताया कि उसने भाई को उठाने की कोशिश की और आवाज लगाई, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। तभी उसका पैर पास में पड़ी बंदूक से टकराया और उसे पूरी घटना का एहसास हुआ।
उसने बताया कि उस पल ऐसा लगा जैसे पूरी दुनिया खत्म हो गई हो। परिवार के सामने यह विश्वास करना भी मुश्किल था कि अशरफ अब इस दुनिया में नहीं रहा।
छाती में मारी थी गोली
प्राथमिक जानकारी के अनुसार, अशरफ ने अपनी छाती में गोली मारी थी। घटनास्थल पर पहुंची आपातकालीन मेडिकल टीम ने उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन गंभीर चोटों के कारण उसे मृत घोषित कर दिया गया।
जांच एजेंसियों ने मामले की जांच शुरू कर दी है, हालांकि शुरुआती जानकारी इसे आत्महत्या का मामला मान रही है।
कौन थीं लिरोन बरदा?
लिरोन बरदा नोवा म्यूज़िक फेस्टिवल में बार मैनेजर के रूप में काम कर रही थीं। 7 अक्टूबर 2023 को जब हमास के आतंकियों ने अचानक हमला किया, तब वहां अफरा-तफरी मच गई थी।
बताया जाता है कि उनके दोस्तों और परिवार ने उन्हें वहां से भाग जाने के लिए कहा था, लेकिन उन्होंने घायल लोगों की मदद करने का फैसला किया। इसी दौरान आतंकियों के हमले में उनकी मौत हो गई।
उनकी बहादुरी को आज भी कई लोग याद करते हैं, क्योंकि उन्होंने अपनी जान बचाने के बजाय दूसरों की मदद करना चुना।
तीन साल तक नहीं भर पाया जख्म
परिजनों के मुताबिक, लिरोन की मौत के बाद अशरफ पहले जैसा कभी नहीं रहा। वह अक्सर अकेला रहने लगा था और अपनी प्रेमिका को याद करते हुए घंटों उसकी कब्र पर बैठा रहता था।
करीबी लोगों का कहना है कि उसने सामान्य जीवन में लौटने की कोशिश जरूर की, लेकिन वह उस दर्द से बाहर नहीं निकल पाया। समय बीतने के बावजूद उसकी मानसिक स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हो सकी।
रविवार को हुआ अंतिम संस्कार
घटना के अगले दिन यानी रविवार को अशरफ का अंतिम संस्कार किया गया। उसे नए नहल रब्बा कब्रिस्तान में दफनाया गया। अंतिम विदाई के दौरान बड़ी संख्या में परिवार, दोस्त और परिचित मौजूद रहे।
हर किसी की आंखें नम थीं और लोग यही कह रहे थे कि अगर समय रहते उसे पर्याप्त मानसिक सहयोग मिल जाता, तो शायद उसकी जान बचाई जा सकती थी।
नोवा हमले के बाद मानसिक संकट लगातार बना हुआ है
7 अक्टूबर 2023 को हुए नोवा म्यूज़िक फेस्टिवल हमले ने हजारों लोगों की जिंदगी बदल दी। इस हमले में बड़ी संख्या में लोग मारे गए, जबकि कई लोग गंभीर मानसिक आघात के साथ आज भी जीवन जी रहे हैं।
पहले भी ऐसी रिपोर्टें सामने आ चुकी हैं कि हमले के बाद कई जीवित बचे लोग लंबे समय तक अवसाद, भय और मानसिक तनाव से जूझते रहे। अप्रैल 2024 में आई रिपोर्टों में बताया गया था कि हमले के बाद के छह महीनों के भीतर नोवा फेस्टिवल से जुड़े कई लोगों ने आत्महत्या कर ली थी।
इसके बाद भी समय-समय पर ऐसे मामले सामने आते रहे हैं। पिछले वर्ष रोई शालेव नामक एक व्यक्ति की भी दर्दनाक मौत की खबर सामने आई थी। बताया गया कि उसने अपनी प्रेमिका की हत्या अपनी आंखों के सामने देखी थी और बाद में मानसिक आघात से उबर नहीं पाया।
युद्ध के घाव वर्षों तक रहते हैं
विशेषज्ञों का मानना है कि युद्ध, आतंकवादी हमले और सामूहिक हिंसा केवल तत्काल जान-माल का नुकसान नहीं पहुंचाते, बल्कि इससे बचे लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी गहरा प्रभाव पड़ता है। पोस्ट ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (PTSD), अवसाद और गहरे भावनात्मक आघात जैसी समस्याएं वर्षों तक बनी रह सकती हैं।
बार अशरफ की कहानी भी इसी दर्दनाक सच्चाई को सामने लाती है कि किसी प्रियजन को हिंसक घटना में खो देने का दर्द कई बार इंसान के लिए असहनीय हो जाता है। यह घटना केवल एक प्रेम कहानी का दुखद अंत नहीं, बल्कि युद्ध और आतंकवाद के उन अदृश्य जख्मों की भी याद दिलाती है जो समय बीतने के बाद भी पूरी तरह नहीं भरते।

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