84 साल की उम्र में खत्म हुआ ‘बोस्निया के कसाई’ का सफर, लेकिन पीछे छोड़ गया खौफनाक इतिहास; स्रेब्रेनिका से साराजेवो तक खून की वो कहानी
दुनिया के सबसे कुख्यात युद्ध अपराधियों में गिने जाने वाले पूर्व बोस्नियाई सर्ब सैन्य कमांडर रात्को म्लादिच की 84 साल की उम्र में मौत हो गई। 27 अगस्त 2026 को हेग स्थित संयुक्त राष्ट्र की हिरासत सुविधा में उसने आखिरी सांस ली। वह 1990 के दशक के बोस्निया युद्ध के दौरान हुए नरसंहार, युद्ध अपराधों और मानवता के खिलाफ अपराधों के लिए उम्रकैद की सजा काट रहा था। संयुक्त राष्ट्र की ओर से भी उसकी मौत की पुष्टि की गई।
म्लादिच को दुनिया ‘Butcher of Bosnia’ यानी ‘बोस्निया का कसाई’ के नाम से जानती है। उसका नाम खास तौर पर 1995 के स्रेब्रेनिका नरसंहार से जुड़ा है, जिसमें 8,000 से ज्यादा बोस्नियाक मुस्लिम पुरुषों और लड़कों की हत्या की गई थी। अंतरराष्ट्रीय न्यायाधिकरण ने इस घटना को नरसंहार माना और म्लादिच को इसकी जिम्मेदारी के लिए दोषी ठहराया।
जिस नाम से कभी सैनिक कांपते थे, आखिर जेल में खत्म हुआ सफर
म्लादिच की कहानी सिर्फ एक सैन्य अधिकारी की कहानी नहीं है। यह उस दौर की कहानी है जब पूर्व यूगोस्लाविया टूट रहा था और जातीय तथा धार्मिक तनाव ने पूरे क्षेत्र को हिंसा की आग में झोंक दिया था।
1992 से 1995 के बीच चले बोस्निया युद्ध में म्लादिच बोस्नियाई सर्ब सेना का सबसे प्रभावशाली सैन्य चेहरा बनकर उभरा। उसके नेतृत्व में सेना ने साराजेवो की लंबी घेराबंदी की और बोस्नियाक आबादी के खिलाफ बड़े पैमाने पर हिंसा की।
स्रेब्रेनिका में जुलाई 1995 में जो हुआ, उसने यूरोप के आधुनिक इतिहास पर गहरा दाग छोड़ दिया। संयुक्त राष्ट्र द्वारा सुरक्षित क्षेत्र घोषित किए गए इस इलाके में हजारों लोगों ने शरण ली थी। लेकिन कुछ ही दिनों में हजारों पुरुषों और लड़कों को अलग कर उनकी हत्या कर दी गई। शवों को सामूहिक कब्रों में दफनाया गया और बाद में कई शवों को दूसरी जगहों पर ले जाया गया ताकि अपराध के सबूत छिपाए जा सकें।
साराजेवो की 1,400 दिनों से ज्यादा चली घेराबंदी
म्लादिच की सबसे भयावह सैन्य कार्रवाइयों में साराजेवो की घेराबंदी भी शामिल थी। बोस्निया की राजधानी को सर्ब बलों ने चारों ओर से घेर लिया था।
करीब चार साल तक शहर के लोग गोलाबारी और स्नाइपर हमलों के साए में जीते रहे। इमारतें तबाह होती रहीं, आम नागरिक मारे जाते रहे और शहर का जीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ।
म्लादिच की सेना के पास पहाड़ियों पर मजबूत सैन्य स्थिति थी, जिससे शहर पर लगातार हमला करना संभव था। बाद में अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप बढ़ा और 1995 में नाटो ने बोस्नियाई सर्ब ठिकानों पर हवाई हमले शुरू किए।
स्रेब्रेनिका: पांच दिनों में बदल गया सब कुछ
जुलाई 1995 में स्रेब्रेनिका में हजारों बोस्नियाक नागरिकों ने संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा पर भरोसा किया था। लेकिन बोस्नियाई सर्ब सेना ने इलाके पर कब्जा कर लिया।
म्लादिच कैमरों के सामने शहर में पहुंचा। उस समय की तस्वीरों और फुटेज में वह सैनिकों के बीच आत्मविश्वास से दिखाई देता है। लेकिन उसके बाद जो हुआ, उसने स्रेब्रेनिका को इतिहास के सबसे भयावह नरसंहारों में शामिल कर दिया।
हजारों पुरुषों और लड़कों को उनके परिवारों से अलग किया गया। उन्हें अलग-अलग स्थानों पर ले जाकर मार दिया गया। बाद में उनके शवों को सामूहिक कब्रों में दफनाया गया। कुछ शवों को दोबारा दूसरी जगह स्थानांतरित किया गया, जिसे अंतरराष्ट्रीय जांचकर्ताओं ने अपराध के सबूत छिपाने की कोशिश के रूप में दर्ज किया।
युद्ध खत्म हुआ, लेकिन म्लादिच गायब हो गया
1995 में युद्ध खत्म होने के बाद म्लादिच पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मुकदमा चलाने की तैयारी शुरू हुई। लेकिन वह करीब 16 साल तक गिरफ्तारी से बचता रहा।
इस दौरान उसे सर्बिया में प्रभावशाली लोगों और समर्थकों से मदद मिलने की खबरें सामने आती रहीं। वह लंबे समय तक कानून की पहुंच से बाहर रहा।
उसके खिलाफ गिरफ्तारी का अंतरराष्ट्रीय दबाव लगातार बढ़ता गया। आखिरकार मई 2011 में सर्बिया के एक गांव से उसे गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी के बाद उसे हेग लाया गया, जहां संयुक्त राष्ट्र के युद्ध अपराध न्यायाधिकरण में उसके खिलाफ मुकदमा शुरू हुआ।
2017 में सुनाई गई उम्रकैद की सजा
म्लादिच के खिलाफ मुकदमा वर्षों तक चला। अदालत में उसके खिलाफ हजारों दस्तावेज, गवाहियां और युद्ध से जुड़े सबूत पेश किए गए।
22 नवंबर 2017 को अंतरराष्ट्रीय न्यायाधिकरण ने उसे नरसंहार, मानवता के खिलाफ अपराध और युद्ध अपराधों का दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।
हालांकि, अदालत ने बोस्निया के छह अन्य नगरपालिकाओं में कथित नरसंहार के आरोप में उसे दोषी नहीं पाया। 2021 में अपील के बाद भी उसकी उम्रकैद की सजा बरकरार रखी गई और फैसला अंतिम हो गया।
म्लादिच ने अदालत में अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों को स्वीकार नहीं किया। फैसले के दौरान भी उसने अपना विरोध जताया और दोष स्वीकार करने से इनकार किया।
बेटी की मौत ने भी छोड़ा गहरा निशान
म्लादिच की निजी जिंदगी भी त्रासदी से अछूती नहीं रही। उसकी बेटी एना की 1994 में मौत ने उसके परिवार को झकझोर दिया था।
एना ने अपने पिता की भूमिका और युद्ध से जुड़े विवादों के बीच मानसिक संघर्ष का सामना किया। उसकी मौत के बाद म्लादिच ने लंबे समय तक इस घटना को स्वीकार करने में कठिनाई दिखाई और इसके लिए अलग-अलग लोगों को जिम्मेदार ठहराया।
यह घटना उसके जीवन के सबसे दर्दनाक निजी अध्यायों में से एक बन गई।
16 साल तक दुनिया से छिपा रहा
गिरफ्तारी से पहले म्लादिच कई वर्षों तक फरार रहा। कभी वह सुरक्षित ठिकानों पर रहा तो कभी समर्थकों के नेटवर्क की मदद से अधिकारियों की नजरों से बचता रहा।
लेकिन 2011 में उसका भाग्य बदल गया। सर्बिया में पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। उस समय वह काफी उम्रदराज और स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहा था।
गिरफ्तारी के बाद उसका जीवन जेल और अदालत के बीच सिमट गया।
आखिरी वक्त में भी घर लौटने की इच्छा
मौत से पहले म्लादिच की तबीयत लगातार खराब हो रही थी। उसकी ओर से मानवीय आधार पर रिहाई या सर्बिया भेजे जाने की मांग की गई थी।
सर्बिया के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुचिच ने भी उसके अंतिम समय को सर्बिया में बिताने की अनुमति देने की अपील की थी। लेकिन हेग स्थित न्यायिक तंत्र ने उसकी मांग स्वीकार नहीं की। उसकी हालत गंभीर थी, लेकिन अदालत ने केवल आसन्न मौत की संभावना को रिहाई के लिए पर्याप्त आधार नहीं माना।
आखिरकार 27 अगस्त को हेग की संयुक्त राष्ट्र हिरासत सुविधा में उसकी मौत हो गई। वह 84 साल का था और अपनी उम्रकैद की सजा काट रहा था।
एक मौत, लेकिन इतिहास का सवाल अभी बाकी
म्लादिच की मौत के साथ एक युद्ध अपराधी का जीवन जरूर समाप्त हो गया, लेकिन बोस्निया की त्रासदी का अध्याय खत्म नहीं हुआ।
आज भी स्रेब्रेनिका के पीड़ितों के परिवार अपने प्रियजनों की याद में कब्रों तक जाते हैं। कई परिवारों को वर्षों बाद भी अपने रिश्तेदारों के अवशेष मिले। वहीं, सर्बिया और बोस्निया के कुछ हिस्सों में म्लादिच को लेकर आज भी अलग-अलग नजरिए मौजूद हैं। कुछ लोग उसे सैन्य नेता या नायक के रूप में देखते रहे, जबकि पीड़ितों और अंतरराष्ट्रीय न्याय व्यवस्था के लिए वह नरसंहार और युद्ध अपराधों का दोषी था।
उसकी मौत के बाद संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की ओर से फिर यह बात सामने आई है कि उसके अपराधों की गंभीरता को भुलाया नहीं जाना चाहिए।
म्लादिच की कहानी इस बात की याद दिलाती है कि युद्ध सिर्फ मैदान में नहीं लड़े जाते। उनकी कीमत आम नागरिक चुकाते हैं—उन परिवारों के रूप में, जिनके लोग वापस नहीं लौटते, उन शहरों के रूप में जो खंडहर बन जाते हैं और उन पीढ़ियों के रूप में जो दशकों तक उस हिंसा की याद अपने भीतर लेकर जीती हैं।
स्रेब्रेनिका की सामूहिक कब्रों से लेकर हेग की जेल तक म्लादिच का सफर भले खत्म हो गया हो, लेकिन उसके अपराधों की याद इतिहास में लंबे समय तक जिंदा रहेगी।

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