पति अचानक गायब… 21 अप्रैल को पत्नी ने रिपोर्ट भी वापस ले ली, फिर खुला दिल दहला देने वाला राज!
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उत्तर प्रदेश के मथुरा से एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने रिश्तों और भरोसे की नींव को हिलाकर रख दिया है। यहां एक 42 वर्षीय व्यक्ति के अचानक लापता होने के मामले की जांच के दौरान ऐसा खुलासा हुआ, जिसे सुनकर पुलिस अधिकारी भी हैरान रह गए। आरोप है कि व्यक्ति की पत्नी ने अपनी नाबालिग बेटी और बेटी के 22 वर्षीय प्रेमी के साथ मिलकर उसकी हत्या की साजिश रची और वारदात को अंजाम देने के बाद शव को ठिकाने लगाने की कोशिश की।
पुलिस ने इस मामले में मृतक की पत्नी नैना, उसकी नाबालिग बेटी और बेटी के प्रेमी विमल चौधरी को गिरफ्तार कर लिया है। हालांकि पुलिस के सामने अभी सबसे बड़ी चुनौती मृतक के शव या उसके अवशेषों को बरामद करना है। आरोपियों की निशानदेही पर तलाश की जा रही है, लेकिन लगातार बारिश और यमुना नदी का बढ़ता जलस्तर जांच अभियान में मुश्किलें पैदा कर रहा है।
मामले की सबसे चौंकाने वाली बात यह बताई जा रही है कि इस पूरे कथित षड्यंत्र के पीछे परिवार के भीतर बेटी के प्रेम संबंध को लेकर चल रहा विवाद था।
18 अप्रैल को अचानक गायब हो गए मनोज
मथुरा के गोविंदा नगर थाना क्षेत्र स्थित गणेश धाम कॉलोनी, जैसिहपुरा में रहने वाले 42 वर्षीय मनोज सोनी 18 अप्रैल को अचानक लापता हो गए थे। उनके अचानक गायब होने के बाद परिवार और परिचितों के बीच चिंता बढ़ने लगी।
शुरुआत में मामला सामान्य गुमशुदगी का लग रहा था। परिवार की ओर से पुलिस को जानकारी दी गई और मनोज की तलाश शुरू की गई। लेकिन जैसे-जैसे दिन बीतते गए, उनका कोई सुराग नहीं मिला।
मामले में उस समय नया मोड़ आया जब मनोज की पत्नी नैना ने 21 अप्रैल को थाने में उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। हालांकि, कथित तौर पर अगले ही दिन उसने बिना स्पष्ट कारण बताए रिपोर्ट वापस ले ली।
यही बात बाद में पुलिस और परिवार के लिए संदेह का कारण बनी।
बेटी के प्रेम संबंध को लेकर घर में होता था विवाद
पुलिस की पूछताछ में सामने आई जानकारी के अनुसार, मनोज को अपनी नाबालिग बेटी और विमल चौधरी के बीच चल रहे कथित प्रेम संबंध की जानकारी हो गई थी। वह इस रिश्ते के विरोध में थे।
विमल चौधरी की उम्र 22 वर्ष बताई जा रही है और वह पेशे से डिलीवरी बॉय है। पुलिस के अनुसार, मनोज अपनी बेटी के इस रिश्ते को स्वीकार नहीं कर रहे थे। इसी बात को लेकर घर में अक्सर विवाद होता था।
परिवार से मिली जानकारी के मुताबिक, पति-पत्नी के बीच भी इस मुद्दे को लेकर तनाव रहता था। पुलिस का दावा है कि इसी विवाद ने धीरे-धीरे एक गंभीर साजिश का रूप ले लिया।
आरोप है कि नैना ने अपनी बेटी और उसके प्रेमी के साथ मिलकर मनोज को रास्ते से हटाने की योजना बनाई।
दूध में नशीला पदार्थ मिलाने का आरोप
पुलिस के अनुसार, कथित साजिश को 18 अप्रैल की रात अंजाम दिया गया। आरोप है कि नैना ने मनोज को दूध में नशीला पदार्थ मिलाकर पिला दिया।
नशीला पदार्थ लेने के बाद जब मनोज गहरी नींद में चले गए, तब कथित तौर पर तीनों आरोपियों ने उन पर हमला किया। पुलिस के मुताबिक, भारी वस्तु और लोहे की मूसली जैसे सामान से वार किए गए।
पुलिस का दावा है कि हमले में मनोज की मौत हो गई। इसके बाद आरोपियों ने कथित तौर पर शव को कंबल में लपेटा और उसे स्कूटर के जरिए यमुना नदी के किनारे अक्रूर गांव के पास जंगल की ओर ले गए।
यहां शव को ठिकाने लगाने की कोशिश की गई। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने शव को जलाने का प्रयास किया और बाद में उसके अवशेषों को जमीन में दबाने की बात सामने आई है।
हालांकि शव अभी तक बरामद नहीं हुआ है, इसलिए पुलिस के लिए मामले की जांच का यह सबसे अहम हिस्सा बना हुआ है।
सबूत मिटाने की भी कोशिश का आरोप
पुलिस की जांच में यह भी सामने आया है कि कथित वारदात के बाद सबूत मिटाने की कोशिश की गई। आरोप है कि मनोज के कुछ कपड़े और दस्तावेज घर के बाहर जलाए गए।
किसी व्यक्ति के अचानक लापता होने के बाद यदि उसके कपड़े और दस्तावेज जलाए जाएं तो यह जांच के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण सुराग बन जाता है। पुलिस ने ऐसी जली हुई वस्तुओं को भी जांच के लिए अपने कब्जे में लिया है।
इसके अलावा कथित तौर पर शव को ले जाने में इस्तेमाल किए गए स्कूटर और कंबल को भी पुलिस ने बरामद कर लिया है।
अब जांच एजेंसियां इन सभी चीजों को मामले की कड़ियों से जोड़ने की कोशिश कर रही हैं।
मायके पहुंचने के बाद खुलने लगी कहानी
मनोज के लापता होने के बाद नैना अपनी बेटी के साथ हाथरस स्थित अपने मायके चली गई थी। वहां पहुंचने के बाद परिवार के लोगों को भी पूरे मामले को लेकर शक होने लगा।
मनोज के बड़े भाई रामबाबू लगातार अपने भाई की तलाश को लेकर चिंतित थे। जब काफी समय तक मनोज का कोई पता नहीं चला तो परिवार के स्तर पर भी पूछताछ शुरू हुई।
इसी दौरान नैना के पिता ब्रजमोहन ने कथित तौर पर अपनी बेटी से सख्ती से पूछताछ की। पुलिस के अनुसार, पूछताछ के दौरान नैना ने पूरे मामले से जुड़ी जानकारी अपने पिता को बता दी।
इसके बाद ब्रजमोहन ने कथित घटना की जानकारी मनोज के बड़े भाई रामबाबू और पुलिस को दी।
इस जानकारी के सामने आने के बाद मामला सामान्य गुमशुदगी से निकलकर गंभीर आपराधिक जांच में बदल गया।
मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी लगाई गई गुहार
मनोज के भाई रामबाबू ने पुलिस से कार्रवाई की मांग की। मामले को लेकर मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी शिकायत की गई।
इसके बाद पुलिस ने जांच तेज की और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की। जांच के दौरान पुलिस ने नैना, उसकी नाबालिग बेटी और विमल चौधरी को गिरफ्तार कर लिया।
तीनों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने पूछताछ की और कथित तौर पर शव को ठिकाने लगाने वाली जगह के बारे में जानकारी हासिल करने की कोशिश की।
अदालत ने नैना को भेजा न्यायिक हिरासत में
पुलिस कार्रवाई के बाद नैना को अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। नाबालिग बेटी को बाल सुधार गृह भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।
वहीं, मामले में गिरफ्तार विमल चौधरी से भी पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित वारदात में किसकी क्या भूमिका थी और घटना के बाद सबूत मिटाने की प्रक्रिया कैसे पूरी की गई।
नाबालिग आरोपी के मामले में कानून के अनुसार अलग प्रक्रिया अपनाई जा रही है।
शव बरामद करना पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती
इस पूरे मामले में पुलिस के सामने फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती मनोज सोनी के शव या उसके अवशेषों को बरामद करना है।
आरोपियों से पूछताछ के बाद जिस जगह पर शव दबाए जाने की बात सामने आई है, वहां पुलिस तलाश अभियान चला रही है। लेकिन बारिश ने इस अभियान को मुश्किल बना दिया है।
यमुना नदी का जलस्तर बढ़ने और आसपास के जंगल में लगातार बारिश होने के कारण जमीन की खुदाई और संभावित स्थानों की पहचान करना आसान नहीं है।
पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि शव वास्तव में किस स्थान पर दबाया गया था। यदि आरोपियों द्वारा बताई गई जगह गलत या अधूरी है, तो तलाश का दायरा और बढ़ सकता है।
शव मिलने के बाद और साफ होगी तस्वीर
पुलिस के लिए शव की बरामदगी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे मामले के कई अहम पहलुओं की पुष्टि हो सकती है। शव या अवशेष मिलने के बाद फोरेंसिक जांच के जरिए मौत की वजह और घटना से जुड़े अन्य तथ्यों की जांच की जा सकेगी।
फिलहाल उपलब्ध परिस्थितियों और आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस आगे की कार्रवाई कर रही है।
जांच में बरामद स्कूटर, कंबल और जली हुई वस्तुओं को भी अहम साक्ष्य माना जा रहा है। इन चीजों की फोरेंसिक जांच के बाद पुलिस को कथित घटना की कड़ियों को जोड़ने में मदद मिल सकती है।
गुमशुदगी से हत्या की साजिश तक पहुंचा मामला
मनोज सोनी के मामले की शुरुआत एक सामान्य गुमशुदगी से हुई थी। परिवार को उम्मीद थी कि पुलिस उन्हें जल्द तलाश कर लेगी। लेकिन कई दिनों तक कोई जानकारी न मिलने के बाद मामला धीरे-धीरे रहस्य बनता गया।
फिर पत्नी द्वारा गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराने और अगले ही दिन वापस लेने की बात सामने आई। इसके बाद महिला का मायके चले जाना, परिवार की पूछताछ और कथित स्वीकारोक्ति ने पूरे मामले की दिशा बदल दी।
अब पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि कथित हत्या की पूरी योजना कब बनाई गई, उसमें किसकी क्या भूमिका थी और वारदात के बाद सबूत मिटाने के लिए क्या-क्या कदम उठाए गए।
मथुरा का यह मामला फिलहाल जांच के दौर में है। पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर रही है और शव या अवशेषों की तलाश जारी है। अंतिम सच जांच और फोरेंसिक साक्ष्यों के सामने आने के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगा।
एक पिता का अपनी बेटी के कथित प्रेम संबंध का विरोध, उसके बाद परिवार के भीतर बढ़ता विवाद और फिर उसी व्यक्ति के अचानक गायब होने से खुलती हत्या की आशंका ने पूरे मामले को बेहद गंभीर बना दिया है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि मनोज सोनी के अवशेष आखिर कहां हैं और पुलिस को इस मामले की पूरी सच्चाई कब तक मिल पाती है।

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