254 मौतों के बाद भी नहीं थमा धरती का कहर! 7.4 के महाभूकंप से कोलंबिया तबाह, हजारों लापता… अब किस बड़े खतरे का इंतजार?
बोगोटा। लैटिन अमेरिकी देश कोलंबिया में सोमवार को आए 7.4 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। मंगलवार तक मृतकों की संख्या बढ़कर कम से कम 254 पहुंच गई है। राहत और बचाव अभियान अभी भी जारी है और अधिकारियों को आशंका है कि मलबे के नीचे फंसे लोगों की संख्या बढ़ने के साथ मृतकों का आंकड़ा भी आगे बढ़ सकता है।
भूकंप का सबसे ज्यादा असर पश्चिमी कोलंबिया के इलाकों में देखने को मिला। कई मकान और इमारतें क्षतिग्रस्त हुई हैं, जबकि कुछ स्थानों पर सड़क और संचार व्यवस्था भी प्रभावित हुई है। दूरदराज और पहाड़ी इलाकों तक राहत दलों की पहुंच मुश्किल बनी हुई है।
7.4 की तीव्रता ने मचाई भारी तबाही
सोमवार को आए भूकंप ने पश्चिमी कोलंबिया के बड़े हिस्से को हिला दिया। भूकंप के झटके कई शहरों और आसपास के इलाकों में महसूस किए गए। तेज कंपन के बाद लोग घबराकर अपने घरों और इमारतों से बाहर निकल आए।
कई स्थानों पर इमारतों के गिरने से मलबा सड़कों तक फैल गया। सबसे गंभीर स्थिति उन इलाकों में बनी जहां पुराने और कमजोर भवन बड़ी संख्या में मौजूद थे।
254 मौतों की पुष्टि, आंकड़ा और बढ़ने की आशंका
मंगलवार तक सामने आई जानकारी के मुताबिक भूकंप में कम से कम 254 लोगों की मौत हो चुकी है और 600 से ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं।
बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं। कई लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका है। ऐसे में बचाव अभियान आगे बढ़ने के साथ मृतकों और घायलों की संख्या में बदलाव हो सकता है।
बचाव दल लगातार ढही हुई इमारतों के मलबे को हटाकर लोगों की तलाश कर रहे हैं।
करीब 1,600 इमारतें प्रभावित
भूकंप के कारण देशभर में करीब 1,600 भवनों के ध्वस्त या बुरी तरह क्षतिग्रस्त होने की जानकारी सामने आई है।
काली, पेरेइरा, चोको और मनिजालेस जैसे शहरों में भूकंप का प्रभाव काफी गंभीर बताया जा रहा है।
20 लाख से ज्यादा आबादी वाले काली शहर में करीब 100 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है, जबकि पेरेइरा में मृतकों की संख्या 101 तक पहुंचने की बात कही जा रही है।
काली और पेरेइरा में तबाही
काली में करीब 40 इमारतों के ध्वस्त होने की जानकारी है, जबकि पेरेइरा में 58 भवनों के मलबे में तब्दील होने की बात सामने आई है।
इन इमारतों में रहने वाले कई लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका जताई जा रही है। राहत दल भारी मशीनों की मदद से मलबा हटाने में जुटे हैं।
कई जगह स्थानीय लोग भी बचावकर्मियों के साथ हाथों से मलबा हटाकर अपनों की तलाश कर रहे हैं।
अल काइरो कस्बे में भारी तबाही
करीब सात हजार की आबादी वाले अल काइरो कस्बे में भी भूकंप ने भारी तबाही मचाई है।
जानकारी के अनुसार कस्बे के करीब 80 प्रतिशत निर्माण बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। कई इमारतें पूरी तरह ढह गई हैं और बड़ी संख्या में लोगों के मलबे में फंसे होने की आशंका है।
सड़कें और पुल टूटने के कारण बचाव दलों को इस इलाके तक पहुंचने में परेशानी हो रही है।
सड़कें और पुल टूटने से बचाव अभियान प्रभावित
भूकंप के बाद राहत और बचाव अभियान के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित इलाकों तक पहुंचना है।
कई जगह सड़कें टूट गई हैं और पुल-पुलिया क्षतिग्रस्त हो गई हैं। इसके कारण भारी बचाव उपकरणों को प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचाने में परेशानी हो रही है।
दूरदराज के इलाकों में स्थानीय लोग अपने हाथों से मलबा हटाकर लोगों को खोजने की कोशिश कर रहे हैं।
राष्ट्रपति ने संभाली राहत की कमान
कोलंबिया के राष्ट्रपति एबेलार्डो डी ला एस्प्रिएला सोमवार रात भूकंप प्रभावित चोको राज्य की राजधानी पहुंचे।
उन्होंने राहत और बचाव अभियान का निरीक्षण किया। राष्ट्रपति ने कहा कि आपदा से निपटने के लिए सेना और पुलिस के जवानों को राहत कार्य में लगाया गया है।
सरकार का पूरा तंत्र राहत और बचाव अभियान में जुटा हुआ है।
राष्ट्रपति के लिए यह प्राकृतिक आपदा इसलिए भी बड़ी चुनौती है क्योंकि उन्होंने हाल ही में राष्ट्रपति पद की जिम्मेदारी संभाली है।
मलबे में जिंदगी तलाश रहे बचावकर्मी
भूकंप के बाद सबसे दर्दनाक तस्वीरें उन इलाकों से सामने आ रही हैं जहां लोग अपने परिवार के सदस्यों की तलाश में मलबे के आसपास जमा हैं।
बचावकर्मी मलबे के अंदर से किसी आवाज या हलचल का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं। कई जगहों पर विशेष उपकरणों की मदद से संभावित जीवित लोगों की तलाश की जा रही है।
बचाव दलों के लिए हर मिनट बेहद महत्वपूर्ण है।
हजारों लोग हुए बेघर
भूकंप में बड़ी संख्या में घर क्षतिग्रस्त होने के कारण हजारों लोग बेघर हो गए हैं।
जिन परिवारों के मकान पूरी तरह नष्ट हो गए हैं, उनके सामने भोजन, पानी और सुरक्षित रहने की समस्या खड़ी हो गई है।
सरकार और राहत एजेंसियां प्रभावित लोगों के लिए अस्थायी शिविर बनाने और जरूरी सामान पहुंचाने में जुटी हैं।
अमेरिका ने सहायता का ऐलान किया
कोलंबिया में राहत अभियान के लिए अंतरराष्ट्रीय मदद भी सामने आने लगी है। अमेरिका ने अस्थायी आवास, खाद्य सामग्री और दवाओं सहित राहत कार्यों के लिए 1.55 करोड़ डॉलर की सहायता का ऐलान किया है।
इस सहायता से प्रभावित परिवारों के लिए जरूरी सामान उपलब्ध कराने और राहत अभियानों को मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
भारत ने भी जताया दुख
भारत की ओर से भी कोलंबिया में आए विनाशकारी भूकंप पर दुख जताया गया है।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कोलंबिया के विदेश मंत्री को संदेश भेजकर भूकंप से हुई जनहानि पर गहरी संवेदना व्यक्त की और भारत की ओर से हर संभव सहायता का आश्वासन दिया।
भारत की ओर से दी गई संवेदना और सहायता की पेशकश दोनों देशों के बीच मानवीय सहयोग को दर्शाती है।
आफ्टरशॉक्स ने बढ़ाई चिंता
मुख्य भूकंप के बाद आफ्टरशॉक्स का खतरा भी बना हुआ है। इससे पहले से क्षतिग्रस्त इमारतों के और कमजोर होने की आशंका रहती है।
ऐसे में बचावकर्मियों के लिए मलबे में प्रवेश करना भी जोखिम भरा हो सकता है। प्रशासन प्रभावित भवनों की स्थिति का आकलन कर रहा है ताकि राहतकर्मियों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा सके।
अस्पतालों पर बढ़ा दबाव
बड़ी संख्या में घायलों के अस्पताल पहुंचने के कारण स्थानीय स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी दबाव बढ़ गया है।
अस्पतालों में घायलों का उपचार किया जा रहा है और गंभीर मरीजों को प्राथमिकता दी जा रही है। दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की जरूरत भी बढ़ गई है।
स्वास्थ्यकर्मी लगातार घायलों की स्थिति पर नजर रख रहे हैं।
आपदा के बीच एकजुट हुए लोग
भूकंप की भयावहता के बीच स्थानीय लोगों की एकजुटता भी देखने को मिल रही है। कई लोग राहत कार्यों में स्वयंसेवक के तौर पर शामिल हो गए हैं।
कुछ लोग भोजन और पानी उपलब्ध करा रहे हैं, जबकि कई लोग मलबा हटाने में बचावकर्मियों की मदद कर रहे हैं।
अपने घर और परिवार खो चुके लोग भी दूसरों की मदद में जुटे हुए हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल—मलबे के नीचे कितने लोग?
भूकंप के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि अभी कितने लोग मलबे के नीचे फंसे हुए हैं और उनमें से कितनों को जिंदा बचाया जा सकता है।
दूरदराज इलाकों से पूरी जानकारी जुटाना मुश्किल हो रहा है। कई स्थानों पर संचार व्यवस्था प्रभावित होने के कारण सही आंकड़े सामने आने में समय लग रहा है।
इसी वजह से मृतकों और घायलों की संख्या लगातार बदल सकती है।
254 मौतों के बाद भी खत्म नहीं हुआ खतरा
कोलंबिया में 7.4 तीव्रता वाले भूकंप ने बड़ी मानवीय त्रासदी पैदा कर दी है। कम से कम 254 लोगों की मौत और 600 से ज्यादा लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं और उनके मलबे में फंसे होने की आशंका है।
सड़क और पुलों को हुए नुकसान ने राहत अभियान को मुश्किल बना दिया है। इसके बावजूद सेना, पुलिस, दमकलकर्मी, मेडिकल टीमें और स्थानीय लोग लगातार बचाव अभियान में जुटे हैं।
फिलहाल सबसे बड़ी उम्मीद उन लोगों को बचाने की है जो अब भी मलबे के नीचे जिंदगी की जंग लड़ रहे हो सकते हैं। आने वाले घंटे इस भीषण आपदा में फंसे लोगों के लिए बेहद निर्णायक साबित हो सकते हैं।

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