7.4 की धरती फटी और मच गई तबाही! मलबे के नीचे दबे सैकड़ों लोग, 130 मौतों के बाद अब सामने आया सबसे बड़ा डर
बोगोटा: दक्षिण अमेरिकी देश कोलंबिया में सोमवार को आए बेहद शक्तिशाली भूकंप ने भारी तबाही मचा दी। पश्चिमी कोलंबिया में महसूस किए गए 7.4 तीव्रता के इस भूकंप के बाद मरने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। अलग-अलग समय पर जारी रिपोर्टों में मृतकों का आंकड़ा 111 से बढ़कर 130 से अधिक तक पहुंचने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा सैकड़ों लोग घायल बताए जा रहे हैं। राहत और बचाव दल लगातार मलबे में फंसे लोगों की तलाश कर रहे हैं, ऐसे में मृतकों और घायलों की संख्या आगे भी बदल सकती है।
यह भूकंप सोमवार सुबह करीब 7:34 बजे स्थानीय समय पर आया। इसका केंद्र चोको प्रांत के सैन जोस डेल पाल्मार इलाके के पास बताया गया है। भूकंप की गहराई करीब 100 से 107 किलोमीटर के बीच दर्ज की गई। इतनी शक्तिशाली कंपन के कारण पश्चिमी कोलंबिया के कई शहरों में इमारतें हिलने लगीं और कई जगहों पर घरों, चर्चों, होटलों तथा दूसरी इमारतों को नुकसान पहुंचा।
कुछ ही सेकंड में बदल गया पूरा मंजर
भूकंप के झटके इतने तेज थे कि कई इलाकों में लोग घबराकर अपने घरों और इमारतों से बाहर निकल आए। कई जगहों पर लोगों ने बताया कि उन्हें काफी देर तक जमीन हिलती महसूस हुई। ऊंची इमारतों में रहने वाले लोगों के बीच सबसे ज्यादा दहशत देखने को मिली। कई स्थानों पर सामान गिरने, दीवारों में दरारें पड़ने और इमारतों के हिस्से टूटने की खबरें सामने आईं।
प्रशासन की सबसे बड़ी चिंता उन लोगों को लेकर है जो क्षतिग्रस्त या ढही हुई इमारतों के मलबे में फंसे हो सकते हैं। बचावकर्मी भारी मशीनों, खोजी उपकरणों और प्रशिक्षित टीमों की मदद से मलबे की जांच कर रहे हैं। कुछ इलाकों में संचार व्यवस्था प्रभावित होने के कारण नुकसान का सही आकलन करने में भी मुश्किल आ रही है।
रिपोर्टों के मुताबिक 1,600 से ज्यादा इमारतों को किसी न किसी स्तर पर नुकसान पहुंचा है, जबकि दर्जनों इमारतें पूरी तरह ढह गई हैं। सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में पेरेइरा, काली, मनिजालेस, क्विब्दो और चोको के इलाके शामिल हैं।
राष्ट्रपति ने घोषित की राष्ट्रीय आपात स्थिति
भूकंप की गंभीरता को देखते हुए कोलंबिया सरकार ने आपातकालीन प्रतिक्रिया तेज कर दी है। राष्ट्रपति एबेलार्डो डी ला एस्प्रीला ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव के लिए सरकारी संसाधनों को तेजी से उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। राष्ट्रपति स्वयं संकट प्रबंधन से जुड़ी गतिविधियों की निगरानी कर रहे हैं।
सरकार की प्राथमिकता फिलहाल मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना, घायलों को अस्पताल पहुंचाना और प्रभावित परिवारों को अस्थायी आश्रय उपलब्ध कराना है। प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था भी मजबूत की है, क्योंकि बड़ी संख्या में लोग अपने घरों से बाहर खुले स्थानों पर रहने को मजबूर हैं।
सरकारी एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि वे क्षतिग्रस्त इमारतों में लोगों को वापस जाने से रोकें। विशेषज्ञों को आशंका है कि कमजोर हो चुकी इमारतें बाद के झटकों में और ज्यादा नुकसान पहुंचा सकती हैं।
चोको से लेकर काली तक दिखा भूकंप का असर
भूकंप का केंद्र अपेक्षाकृत दूर-दराज इलाके में होने के बावजूद इसके झटके पश्चिमी कोलंबिया के बड़े हिस्से में महसूस किए गए। काली जैसे बड़े शहरों में भी इमारतों को नुकसान पहुंचा और लोगों के बीच अफरा-तफरी मच गई। पेरेइरा और आसपास के क्षेत्रों में भी बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए।
चोको का भौगोलिक इलाका सरकार और राहत टीमों के लिए विशेष चुनौती बना हुआ है। यहां कई स्थान घने जंगलों, पहाड़ी भूभाग और सीमित सड़क संपर्क वाले हैं। ऐसे में भारी राहत सामग्री और बचाव उपकरणों को प्रभावित गांवों तक पहुंचाना आसान नहीं है।
यही वजह है कि प्रशासन को आशंका है कि दूरदराज के इलाकों में नुकसान का वास्तविक आंकड़ा शुरुआती रिपोर्टों से कहीं अधिक हो सकता है। कई गांवों से संपर्क बहाल करने और वहां नुकसान का आकलन करने के लिए टीमें भेजी जा रही हैं।
पड़ोसी देशों तक पहुंचे भूकंप के झटके
7.4 तीव्रता के इस शक्तिशाली भूकंप का असर केवल कोलंबिया तक सीमित नहीं रहा। पड़ोसी देशों के कुछ हिस्सों में भी इसके झटके महसूस किए गए। इक्वाडोर, वेनेजुएला और पनामा में लोगों ने कंपन महसूस होने की जानकारी दी। हालांकि, कोलंबिया के बाहर इस भूकंप से बड़े पैमाने पर नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है।
भूकंप की गहराई अधिक होने के कारण कंपन काफी बड़े क्षेत्र में महसूस किए जाने की संभावना थी। वैज्ञानिकों के लिए भी यह भूकंप महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसका केंद्र पश्चिमी कोलंबिया के सक्रिय भूकंपीय क्षेत्र में था।
आफ्टरशॉक ने बढ़ाई लोगों की चिंता
मुख्य भूकंप के बाद छोटे और मध्यम तीव्रता के कई झटके दर्ज किए गए। शुरुआती रिपोर्टों में 2.8 और 4.8 तीव्रता के झटकों की जानकारी सामने आई थी। बाद की निगरानी में भी कई आफ्टरशॉक दर्ज किए गए हैं।
आफ्टरशॉक के कारण पहले से कमजोर हो चुकी इमारतों को लेकर खतरा बढ़ गया है। प्रशासन लोगों से अपील कर रहा है कि वे क्षतिग्रस्त मकानों में वापस जाने से बचें और स्थानीय अधिकारियों के निर्देशों का पालन करें।
भूकंप विशेषज्ञों के अनुसार बड़े भूकंप के बाद कुछ समय तक छोटे-बड़े झटके आना सामान्य प्रक्रिया हो सकती है। हालांकि, किसी विशेष आफ्टरशॉक की तीव्रता और समय की सटीक भविष्यवाणी पहले से नहीं की जा सकती। इसलिए प्रभावित क्षेत्रों में आपातकालीन टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं।
अस्पतालों पर बढ़ा दबाव
भूकंप के बाद घायलों की बड़ी संख्या अस्पतालों में पहुंची है। कई अस्पतालों में अचानक मरीजों की संख्या बढ़ने से स्वास्थ्य व्यवस्था पर दबाव पड़ा। गंभीर रूप से घायल लोगों को प्राथमिकता के आधार पर इलाज दिया जा रहा है।
सरकार ने चिकित्सा दलों को प्रभावित इलाकों में भेजने और जरूरी दवाओं तथा चिकित्सा सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। जिन लोगों के घर रहने लायक नहीं बचे हैं, उनके लिए अस्थायी राहत केंद्र बनाए जा रहे हैं।
राहत अभियान के सामने सबसे बड़ी चुनौती
राहत और बचाव अभियान की सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित इलाकों तक तेजी से पहुंचना है। चोको जैसे क्षेत्रों में सड़कें और परिवहन व्यवस्था पहले से सीमित हैं। भूकंप के बाद रास्तों में मलबा आने और कुछ स्थानों पर संपर्क टूटने से बचाव कार्य और कठिन हो गया है।
इसके अलावा लगातार आफ्टरशॉक आने की आशंका के कारण बचाव दलों को भी बेहद सावधानी से काम करना पड़ रहा है। किसी भी क्षतिग्रस्त इमारत में प्रवेश करने से पहले उसकी संरचनात्मक स्थिति की जांच की जा रही है।
कोलंबिया के लिए बड़ी आपदा
कोलंबिया में भूकंप कोई असामान्य घटना नहीं है, लेकिन 7.4 तीव्रता का यह भूकंप बेहद गंभीर माना जा रहा है। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार यह हाल के वर्षों में देश में दर्ज सबसे शक्तिशाली भूकंपीय घटनाओं में से एक है।
इस आपदा ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि भूकंप संभावित क्षेत्रों में इमारतों की मजबूती, आपातकालीन तैयारी और दूरदराज के इलाकों तक राहत पहुंचाने की व्यवस्था कितनी मजबूत है।
फिलहाल पूरे देश की नजर बचाव अभियान पर टिकी हुई है। मलबे के नीचे किसी के जिंदा होने की संभावना को देखते हुए राहतकर्मी लगातार अभियान चला रहे हैं। प्रशासन लोगों से संयम बनाए रखने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील कर रहा है।
जैसे-जैसे बचाव दल प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंच रहे हैं, नुकसान की तस्वीर और स्पष्ट होती जा रही है। मृतकों का आंकड़ा अभी अंतिम नहीं माना जा रहा है। आने वाले घंटों में मलबे की तलाशी, अस्पतालों से मिलने वाली जानकारी और दूरदराज के इलाकों की रिपोर्ट के बाद इस प्राकृतिक आपदा का वास्तविक मानवीय नुकसान सामने आने की उम्मीद है।

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