विदेशों में अचानक बढ़ी भारतीय इन चीजों की मांग, आम से फ्रेंच फ्राइज तक… क्या बदलने वाला है किसानों का खेल?
नई दिल्ली। भारत के कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के निर्यात को लेकर एक सकारात्मक तस्वीर सामने आई है। भारतीय उत्पाद अब सिर्फ पारंपरिक विदेशी बाजारों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि नए देशों और नए उत्पाद वर्गों में भी अपनी जगह बना रहे हैं। हाल के महीनों में भारतीय आम, प्रीमियम चेरी और फ्रोजन फ्रेंच फ्राइज जैसे उत्पादों को विदेशी बाजारों में पहुंच मिली है। इससे कृषि क्षेत्र, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग और निर्यात कारोबार के लिए नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
भारत दुनिया के सबसे बड़े कृषि उत्पादक देशों में शामिल है। देश में फल, सब्जियां, अनाज, मसाले और अन्य कृषि उत्पाद बड़े पैमाने पर पैदा होते हैं। इसके बावजूद लंबे समय से एक चुनौती यह रही है कि भारतीय किसानों को वैश्विक बाजार से किस तरह जोड़ा जाए और कृषि उत्पादों को बेहतर कीमत दिलाई जाए। निर्यात बाजार का विस्तार इस चुनौती का एक संभावित समाधान माना जा रहा है।
आम से लेकर फ्रेंच फ्राइज तक बढ़ा दायरा
भारतीय कृषि निर्यात की सबसे खास बात यह है कि अब निर्यात सिर्फ पारंपरिक उत्पादों तक सीमित नहीं रह गया है। आम और अन्य ताजे फलों के साथ-साथ प्रोसेस्ड फूड की मांग भी बढ़ रही है।
भारतीय आम की विदेशी बाजारों में पहले से पहचान रही है। अल्फांसो, केसर और दशहरी जैसे आमों की मांग कई देशों में देखी जाती है। लेकिन अब निर्यातकों का ध्यान नए बाजारों और प्रीमियम ग्राहकों पर भी है।
इसी तरह प्रीमियम चेरी जैसे उत्पादों की विदेशी बाजारों में पहुंच भारतीय बागवानी क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। वहीं फ्रोजन फ्रेंच फ्राइज जैसे प्रोसेस्ड फूड उत्पाद बताते हैं कि भारतीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
इस बदलाव का मतलब है कि भारत अब केवल कच्चे कृषि उत्पाद बेचने के बजाय वैल्यू एडेड और प्रोसेस्ड उत्पादों के निर्यात पर भी जोर दे रहा है।
किसानों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है निर्यात?
किसानों के लिए निर्यात बाजार इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि घरेलू बाजार के मुकाबले अंतरराष्ट्रीय बाजार में कुछ विशेष उत्पादों के लिए बेहतर कीमत मिलने की संभावना होती है।
मान लीजिए किसी विशेष किस्म के आम की घरेलू बाजार में मांग सीमित है। यदि उसी उत्पाद को अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रीमियम कीमत मिलती है तो किसान और निर्यातक दोनों को फायदा हो सकता है।
हालांकि, किसान से सीधे विदेशी ग्राहक तक उत्पाद पहुंचाना आसान नहीं है। इसके लिए गुणवत्ता, पैकेजिंग, ग्रेडिंग, प्रमाणन, कोल्ड स्टोरेज और परिवहन जैसी कई व्यवस्थाओं की जरूरत होती है।
यदि ये सुविधाएं गांव और उत्पादन केंद्रों के आसपास बेहतर होती हैं तो किसानों को निर्यात श्रृंखला से जोड़ना आसान हो सकता है।
कोल्ड चेन की भूमिका सबसे अहम
ताजे फल और सब्जियों के निर्यात में सबसे बड़ी चुनौती उनकी शेल्फ लाइफ होती है। आम, चेरी और अन्य फल लंबे समय तक सामान्य तापमान पर सुरक्षित नहीं रह सकते।
इसलिए निर्यात के लिए कोल्ड चेन बेहद महत्वपूर्ण है। इसमें खेत से लेकर पैकिंग सेंटर, कोल्ड स्टोरेज, ट्रांसपोर्ट और एयरपोर्ट या बंदरगाह तक नियंत्रित तापमान बनाए रखना पड़ता है।
अगर इस पूरी प्रक्रिया में कहीं भी देरी या तापमान में बड़ा बदलाव होता है तो उत्पाद की गुणवत्ता खराब हो सकती है।
इसी कारण भारत में कृषि निर्यात बढ़ाने के साथ-साथ लॉजिस्टिक्स और कोल्ड स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना भी जरूरी है।
प्रोसेस्ड फूड में भारत के लिए बड़ा अवसर
फ्रोजन फ्रेंच फ्राइज जैसे उत्पादों का निर्यात एक अलग तरह का अवसर दिखाता है। ताजे फल के मुकाबले प्रोसेस्ड और फ्रोजन फूड को लंबी दूरी तक भेजना अपेक्षाकृत आसान होता है।
आलू से बने फ्रोजन उत्पादों की वैश्विक मांग काफी बड़ी है। फास्ट फूड चेन, होटल, रेस्टोरेंट और फूड सर्विस कंपनियां बड़े पैमाने पर ऐसे उत्पादों का इस्तेमाल करती हैं।
भारत में आलू का उत्पादन बड़े स्तर पर होता है। यदि घरेलू कंपनियां अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों के अनुरूप प्रोसेसिंग क्षमता बढ़ाती हैं तो भारत इस क्षेत्र में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा सकता है।
इससे सिर्फ निर्यात कंपनियों को ही फायदा नहीं होगा, बल्कि किसानों से लेकर प्रोसेसिंग यूनिट, पैकेजिंग, कोल्ड स्टोरेज और ट्रांसपोर्ट सेक्टर तक रोजगार और कारोबार के अवसर बढ़ सकते हैं।
विदेशी बाजारों में गुणवत्ता सबसे बड़ी चुनौती
भारतीय कृषि उत्पादों के लिए विदेशी बाजार में जगह बनाना जितना महत्वपूर्ण है, उसे बनाए रखना उतना ही मुश्किल है।
अंतरराष्ट्रीय खरीदार उत्पाद की गुणवत्ता, आकार, रंग, स्वाद, पैकेजिंग और सुरक्षा मानकों पर काफी ध्यान देते हैं। फलों और सब्जियों में कीटनाशक अवशेष की निर्धारित सीमा भी महत्वपूर्ण होती है।
यदि किसी निर्यात खेप में गुणवत्ता मानक पूरे नहीं होते तो पूरी खेप वापस हो सकती है। इससे निर्यातक को आर्थिक नुकसान होने के साथ देश की छवि पर भी असर पड़ सकता है।
इसलिए किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजार की जरूरतों के अनुसार उत्पादन करने के लिए प्रशिक्षण देना जरूरी है।
किसानों से सीधे जुड़ सकता है फायदा
कृषि निर्यात के विस्तार का सबसे बड़ा लाभ तभी होगा जब इसका फायदा उत्पादन करने वाले किसानों तक पहुंचे।
इसके लिए किसान उत्पादक संगठन यानी FPO महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। छोटे किसान मिलकर बड़ी मात्रा में समान गुणवत्ता का उत्पाद उपलब्ध करा सकते हैं। इससे निर्यातकों के लिए खरीद प्रक्रिया आसान होती है।
FPO किसानों को ग्रेडिंग, पैकेजिंग और गुणवत्ता नियंत्रण की जानकारी भी दे सकते हैं। सामूहिक रूप से काम करने पर किसानों की सौदेबाजी की क्षमता बढ़ सकती है।
यदि निर्यात कंपनियां सीधे किसान समूहों के साथ लंबे समय के अनुबंध विकसित करती हैं तो कृषि क्षेत्र में बाजार की अनिश्चितता को कुछ हद तक कम किया जा सकता है।
विदेशी मुद्रा कमाने का भी जरिया
कृषि और प्रोसेस्ड फूड निर्यात सिर्फ किसानों की आय से जुड़ा विषय नहीं है। इससे देश को विदेशी मुद्रा भी प्राप्त होती है।
भारत का निर्यात जितना विविध होगा, विदेशी बाजारों पर किसी एक उत्पाद या सेक्टर की निर्भरता उतनी कम हो सकती है।
कृषि निर्यात में विविधता आने से भारत को अलग-अलग देशों और बाजारों में अपनी उपस्थिति मजबूत करने का अवसर मिलता है।
साथ ही, यदि घरेलू कृषि उत्पादों को प्रोसेस करके निर्यात किया जाता है तो प्रति यूनिट उत्पाद का मूल्य भी बढ़ाया जा सकता है।
छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ सकते हैं रोजगार
कृषि निर्यात के विस्तार का असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। किसी क्षेत्र में यदि किसी खास फल या सब्जी का उत्पादन और निर्यात बढ़ता है तो वहां पैकिंग सेंटर, वेयरहाउस, कोल्ड स्टोरेज, परिवहन और प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित होने की संभावना बढ़ सकती है।
इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
उदाहरण के लिए किसी फल उत्पादन वाले क्षेत्र में यदि निर्यात योग्य आम की मांग बढ़ती है तो केवल किसान ही नहीं, बल्कि पैकिंग, छंटाई, परिवहन और भंडारण से जुड़े लोगों की आय भी बढ़ सकती है।
भारतीय कंपनियों के लिए नया बाजार
निर्यात के बढ़ते अवसर भारतीय खाद्य कंपनियों को भी अपने कारोबार का विस्तार करने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।
कंपनियां अब केवल घरेलू बाजार पर निर्भर रहने के बजाय अंतरराष्ट्रीय बाजारों के लिए अलग उत्पाद तैयार कर सकती हैं। इससे पैकेजिंग, फूड प्रोसेसिंग और ब्रांडिंग में निवेश बढ़ सकता है।
विशेष रूप से भारतीय मसाले, फल, सब्जियां, रेडी-टू-ईट उत्पाद और फ्रोजन फूड वैश्विक बाजार में भारतीय कंपनियों के लिए बड़े अवसर पैदा कर सकते हैं।
आगे क्या है चुनौती?
भारतीय कृषि निर्यात के सामने अभी भी कई चुनौतियां हैं। अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उतार-चढ़ाव, शिपिंग लागत, मुद्रा विनिमय दर, गुणवत्ता मानक और अलग-अलग देशों की आयात नीतियां निर्यात कारोबार को प्रभावित कर सकती हैं।
इसके अलावा ताजा कृषि उत्पादों के लिए समय पर परिवहन सबसे महत्वपूर्ण है।
अगर किसी उत्पाद को विदेशी बाजार तक पहुंचने में ज्यादा समय लगता है तो उसकी गुणवत्ता और कीमत दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
इसलिए निर्यात बढ़ाने के लिए सिर्फ उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा। भारत को गुणवत्ता, प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, कोल्ड चेन और लॉजिस्टिक्स पर एक साथ काम करना होगा।
क्या भारतीय कृषि निर्यात बदल रहा है?
भारतीय आम और चेरी जैसे ताजे उत्पादों के साथ फ्रोजन फ्रेंच फ्राइज जैसे प्रोसेस्ड फूड का विदेशी बाजारों में पहुंचना इस बात का संकेत है कि भारतीय कृषि निर्यात का स्वरूप धीरे-धीरे बदल रहा है।
अब लक्ष्य केवल अधिक मात्रा में कृषि उत्पाद विदेश भेजना नहीं, बल्कि बेहतर गुणवत्ता और अधिक मूल्य वाले उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाना भी है।
यदि यह प्रक्रिया मजबूत होती है तो इसका फायदा किसानों, खाद्य प्रसंस्करण कंपनियों, निर्यातकों और ग्रामीण रोजगार को मिल सकता है।भारतीय कृषि और खाद्य उत्पादों की विदेशी बाजारों में बढ़ती पहुंच देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत है। आम और प्रीमियम चेरी जैसे ताजे उत्पादों से लेकर फ्रोजन फ्रेंच फ्राइज जैसे प्रोसेस्ड फूड तक निर्यात का दायरा बढ़ना बताता है कि भारतीय कंपनियां वैश्विक बाजार में नए अवसर तलाश रही हैं।
लेकिन इस सफलता को लंबे समय तक बनाए रखने के लिए गुणवत्ता नियंत्रण, कोल्ड चेन, आधुनिक पैकेजिंग और बेहतर लॉजिस्टिक्स पर लगातार निवेश करना होगा।
अगर किसानों को सीधे निर्यात श्रृंखला से जोड़ा जाता है और उन्हें अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता के अनुसार उत्पादन के लिए जरूरी तकनीक और बाजार उपलब्ध कराया जाता है, तो विदेशी बाजारों में भारतीय कृषि उत्पादों की बढ़ती मांग ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा बदलाव ला सकती है।

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