बच्चों ने कैमरे में कैद कर लिया स्कूल का सबसे बड़ा राज! बोरियों में भरकर कबाड़ में बेची जा रही थीं सरकारी किताबें?
बिहार के गया जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में दावा किया जा रहा है कि कोच प्रखंड के छतीहर जमालपुर विद्यालय में बच्चों को वितरित की जाने वाली सरकारी किताबों को कबाड़ में बेचा जा रहा था। सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि इस पूरे मामले का खुलासा खुद स्कूल के छात्रों ने किया।
बताया जा रहा है कि जिन किताबों का इंतजार छात्र लंबे समय से कर रहे थे, वही किताबें बोरियों में भरकर कबाड़ी के टेंपो में लादी जा रही थीं। यह दृश्य देखकर छात्रों ने चुप रहने के बजाय अपने मोबाइल फोन से वीडियो बना लिया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
छात्रों ने ऐसे खोली स्कूल प्रशासन की पोल
वायरल वीडियो के अनुसार, कुछ छात्रों ने स्कूल परिसर में किताबों से भरी बोरियां देखीं। जब उन्होंने ध्यान से देखा तो कथित तौर पर उन बोरियों को एक कबाड़ी के टेंपो में लादा जा रहा था।
छात्रों को शक हुआ कि ये वही सरकारी किताबें हैं, जिन्हें बच्चों में बांटा जाना था। इसके बाद उन्होंने मौके का वीडियो रिकॉर्ड कर लिया।
वीडियो सामने आने के बाद पूरे इलाके में इस मामले को लेकर चर्चा शुरू हो गई।
किताबों के बिना पढ़ाई करने का आरोप
छात्रों का आरोप है कि स्कूल में कई बच्चों को समय पर सरकारी किताबें नहीं मिली थीं। उनका कहना है कि वे लंबे समय से किताबों के अभाव में पढ़ाई करने को मजबूर थे।
बच्चों ने खोली स्कूल प्रशासन की पोल।।।कबाड़ में बेची जा रही थीं सरकारी किताबें ।।।
— Sudhanshu Yadav (@SocialistSpirit) August 6, 2026
गया जी (बिहार) से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहाँ कोच प्रखंड के छतीहर जमालपुर विद्यालय के बच्चों ने हिम्मत दिखाकर स्कूल प्रशासन की पोल खोल दी है।।।
छात्रों का आरोप है कि जहाँ एक… pic.twitter.com/jAw1ZcQawj
इसी बीच जब उन्होंने बड़ी संख्या में नई किताबों को कथित तौर पर कबाड़ में भेजे जाते देखा तो उन्हें यह बात बेहद गलत लगी और उन्होंने पूरे घटनाक्रम का वीडियो बना लिया।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो
छात्रों द्वारा बनाया गया वीडियो अब सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म पर तेजी से शेयर किया जा रहा है। वीडियो को लेकर लोग अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।
कई लोग छात्रों की हिम्मत की सराहना कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि बच्चे साहस नहीं दिखाते तो मामला शायद कभी सामने नहीं आता।
लोगों ने उठाई निष्पक्ष जांच की मांग
वीडियो वायरल होने के बाद स्थानीय लोगों और सोशल मीडिया यूजर्स ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि बच्चों के लिए भेजी गई सरकारी किताबों को वास्तव में कबाड़ में बेचा गया है, तो यह बेहद गंभीर मामला है और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
प्रशासनिक जांच का इंतजार
फिलहाल वायरल वीडियो में किए जा रहे दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। संबंधित अधिकारियों की ओर से जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि वीडियो में दिखाई गई किताबें किन परिस्थितियों में वहां मौजूद थीं और क्या वास्तव में बच्चों के लिए आई सरकारी पुस्तकों को बेचने का प्रयास किया गया था।
जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति सामने आएगी।
शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह केवल एक स्कूल का मामला नहीं होगा बल्कि सरकारी शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करेगा।
सरकारी योजनाओं के तहत हर वर्ष लाखों विद्यार्थियों को निःशुल्क पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध कराई जाती हैं ताकि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चे भी बेहतर शिक्षा प्राप्त कर सकें। ऐसे में यदि इन पुस्तकों के दुरुपयोग की पुष्टि होती है, तो यह बच्चों के अधिकारों के साथ सीधा खिलवाड़ माना जाएगा।
गया के इस कथित मामले ने पूरे क्षेत्र में हलचल मचा दी है। वायरल वीडियो में सरकारी किताबों को कबाड़ में ले जाए जाने का दावा किया जा रहा है, जबकि छात्रों का आरोप है कि उन्हें समय पर किताबें नहीं मिली थीं। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक जांच अभी बाकी है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि वायरल वीडियो में किए जा रहे दावे कितने सही हैं और मामले में किसकी जिम्मेदारी तय होती है।

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