घर बुलाकर की ऐसी हरकत, सुबह युवती की हालत देख उड़ गए होश; सामने आया रात का खौफनाक राज
लंदन: ब्रिटेन में दुष्कर्म के एक मामले में दोषी ठहराए जा चुके एक व्यक्ति के दोबारा देश में प्रवेश करने का मामला सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार, 35 वर्षीय ब्लेरिम हज्दरमाताज को एसेक्स में गिरफ्तार किया गया है। उसे पहले ब्रिटेन से देश निकाला जा चुका था, लेकिन इसके बावजूद वह कथित तौर पर दोबारा UK पहुंच गया और पुलिस को अपनी वापसी तथा नए पते की जानकारी नहीं दी।
मामला करीब एक दशक पुरानी उस घटना से जुड़ा है, जिसमें चेम्सफोर्ड में 18 वर्षीय युवती के साथ दुष्कर्म का आरोप सामने आया था। आरोपी को बाद में अदालत ने दोषी ठहराया था। मुकदमे के दौरान उसके गायब होने के बाद उसे ब्रिटेन से बाहर ट्रेस किया गया और कानूनी प्रक्रिया के तहत वापस लाया गया था।
अब देश निकाले जाने के आदेश का उल्लंघन कर ब्रिटेन लौटने और यौन अपराधी के रूप में जरूरी जानकारी पुलिस को उपलब्ध नहीं कराने के मामले में उसे फिर से जेल भेजा गया है।
2014 में सामने आया था पूरा मामला
मामले की शुरुआत सितंबर 2014 में हुई थी। जानकारी के मुताबिक, हज्दरमाताज की मुलाकात चेम्सफोर्ड के एक बार में 18 वर्षीय युवती से हुई थी। इसके बाद आरोपी ने युवती को अपने घर आने के लिए कहा।
बताया गया कि युवती ने शुरुआत में उसके साथ जाने से इनकार किया था। हालांकि बाद में वह उसके घर पहुंची। अगले दिन जब उसकी आंख खुली तो उसने खुद को ऐसी स्थिति में पाया जिसे लेकर उसने गंभीर आरोप लगाए।
पीड़िता ने पुलिस को बताया था कि उसके शरीर पर चोट, खरोंच और काटने के निशान थे। उसे चक्कर आने और कमरे के घूमने जैसा महसूस हो रहा था। घटना के बाद वह किसी तरह घर से बाहर निकली और सड़क से गुजर रहे एक ड्राइवर से मदद मांगी।
रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी उस समय उसका पीछा कर रहा था।
आरोपी ने बदले थे नाम
मामले की जांच के दौरान आरोपी की पहचान को लेकर भी पुलिस के सामने चुनौती आई। बताया जाता है कि वह बेन मटका और रिनोर हज्दरमाताज जैसे दूसरे नामों का इस्तेमाल करता था।
2016 में जब उसके खिलाफ कोर्ट में मामला चल रहा था, तब वह गायब हो गया। इसके बाद उसे उसकी गैर-मौजूदगी में दोषी ठहराया गया।
पुलिस और जांच एजेंसियों ने उसकी तलाश जारी रखी और बाद में उसके अल्बानिया तथा कोसोवो से जुड़े ठिकानों का पता लगाया गया। इसके बाद यूरोपीय गिरफ्तारी वारंट के तहत उसे ब्रिटेन वापस लाया गया।
कोर्ट की कार्रवाई के दौरान फिर गायब हुआ आरोपी
आरोपी के इस व्यवहार ने मामले को और गंभीर बना दिया। अदालत की कार्रवाई के दौरान उसके देश से बाहर चले जाने के कारण पीड़िता और जांच एजेंसियों को लंबे समय तक कानूनी प्रक्रिया का सामना करना पड़ा।
2017 में पुलिस अधिकारी ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि आरोपी ने एक कमजोर महिला का बेहद गंभीर तरीके से फायदा उठाया था। अधिकारी के अनुसार, आरोपी की ओर से अपराध के बाद पछतावे के पर्याप्त संकेत नहीं दिखाई दिए।
पुलिस के मुताबिक, मुकदमे के दौरान उसका देश से भाग जाना पीड़िता के लिए स्थिति को और कठिन बनाने वाला था।
देश से निकालने के बाद फिर UK पहुंचा
अब इस पुराने मामले में एक नया मोड़ आया है।
देश से निकाले जाने के बाद आरोपी कथित तौर पर दोबारा ब्रिटेन पहुंच गया। वह एसेक्स में रह रहा था, जहां पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।
इस बार मामला मूल दुष्कर्म की घटना की दोबारा सुनवाई से ज्यादा उसके देश निकाला आदेश का उल्लंघन करने और पुलिस को आवश्यक जानकारी नहीं देने से जुड़ा है।
ब्रिटेन में यौन अपराधों के लिए दोषी ठहराए गए लोगों पर कुछ परिस्थितियों में विशेष निगरानी और सूचना संबंधी कानूनी जिम्मेदारियां लागू हो सकती हैं। आरोपी पर आरोप था कि उसने अपनी वापसी और नए पते की जानकारी पुलिस को नहीं दी।
कोर्ट में आरोपी ने अपराध स्वीकार किया
बुधवार को बैसिल्डन क्राउन कोर्ट में आरोपी ने अपने खिलाफ लगाए गए नए आरोपों को स्वीकार किया।
अदालत में उसने माना कि उसने जानबूझकर देश निकाले के आदेश का उल्लंघन करते हुए ब्रिटेन में प्रवेश किया। इसके अलावा उसने अपनी वापसी और नए पते की जानकारी पुलिस को नहीं दी।
मामले की सुनवाई कर रहे जज रिचर्ड कॉनली ने आरोपी को कुल मिलाकर जेल की सजा सुनाई।
रिपोर्ट के अनुसार, उसे पुलिस को आवश्यक जानकारी नहीं देने के मामले में 16 महीने की जेल की सजा दी गई। इसके साथ देश निकाले के आदेश का उल्लंघन करके ब्रिटेन लौटने के लिए 12 महीने की अतिरिक्त सजा भी सुनाई गई।
दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
अब फिर शुरू हो सकती है देश निकाले की प्रक्रिया
अदालत के फैसले के बाद आरोपी के खिलाफ दोबारा देश निकाले की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है।
रिपोर्ट के अनुसार, 12 महीने की सजा से उसके खिलाफ deportation की प्रक्रिया शुरू होने का रास्ता साफ होता है। हालांकि, ब्रिटेन के कानून के तहत कुछ परिस्थितियों में व्यक्ति मानवाधिकार या अन्य कानूनी आधारों पर इस फैसले के खिलाफ अपील कर सकता है।
इसका मतलब यह है कि अदालत की मौजूदा सजा के बाद भी आरोपी की कानूनी स्थिति पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। आगे की कार्रवाई संबंधित प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया के अनुसार होगी।
पीड़िता पर पड़ा था गहरा असर
इस मामले का सबसे गंभीर पहलू यह है कि घटना के समय पीड़िता केवल 18 वर्ष की थी।
दुष्कर्म के आरोप के बाद उसे न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक आघात से भी गुजरना पड़ा। इसके बाद आरोपी के मुकदमे के दौरान गायब होने से कानूनी प्रक्रिया भी लंबी हुई।
पुलिस अधिकारियों ने पहले भी कहा था कि आरोपी के भाग जाने से पीड़िता को अतिरिक्त डर और परेशानी का सामना करना पड़ा।
ऐसे मामलों में पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए लंबी कानूनी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है और आरोपी की पहचान, गिरफ्तारी तथा अदालत में उसकी मौजूदगी सुनिश्चित करना जांच एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण चुनौती बन जाता है।
पुराने मामले में फिर क्यों चर्चा में आया आरोपी?
लगभग एक दशक पुराने अपराध के बाद आरोपी का दोबारा ब्रिटेन पहुंचना इस मामले को फिर सुर्खियों में ले आया है।
इस बार पुलिस ने उसे किसी नए यौन अपराध के आरोप में नहीं, बल्कि देश निकाले के आदेश का कथित उल्लंघन करने और आवश्यक सूचना उपलब्ध नहीं कराने के मामले में गिरफ्तार किया है।
यही वजह है कि कोर्ट की मौजूदा कार्रवाई और 2014 के मूल अपराध को अलग-अलग समझना जरूरी है।
2014 की घटना के संबंध में आरोपी पहले ही दोषी ठहराया जा चुका था, जबकि वर्तमान मामला उसके बाद की कानूनी पाबंदियों से जुड़ा है।
पुलिस के लिए भी बड़ी चुनौती
देश निकाले गए किसी व्यक्ति का दोबारा अवैध या आदेश के विपरीत देश में प्रवेश करना सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर चुनौती माना जाता है।
खासकर ऐसे व्यक्ति के मामले में जिसे पहले किसी गंभीर यौन अपराध में दोषी ठहराया जा चुका हो, उसकी पहचान, गतिविधियों और पते की निगरानी महत्वपूर्ण हो जाती है।
इस मामले में भी आरोपी द्वारा कथित तौर पर अलग-अलग नामों का इस्तेमाल किए जाने की जानकारी जांच प्रक्रिया को जटिल बनाने वाली थी।
हालांकि पुलिस ने अंततः उसकी पहचान की और एसेक्स से उसे गिरफ्तार कर अदालत के सामने पेश किया।
आगे क्या होगा?
अब आरोपी को सुनाई गई जेल की सजा के साथ उसके खिलाफ देश निकाले की प्रक्रिया भी आगे बढ़ सकती है। यदि वह कानूनी अपील करता है तो मामला आगे अदालत या संबंधित प्रशासनिक प्रक्रिया में जा सकता है।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि किसी गंभीर अपराध में दोषी ठहराए गए और देश से निकाले गए व्यक्ति की दोबारा वापसी को रोकने तथा उसकी निगरानी सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा एजेंसियों की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है।
फिलहाल अदालत ने आरोपी को नए अपराधों से संबंधित आरोपों के बजाय देश निकाले के आदेश के उल्लंघन और आवश्यक सूचना नहीं देने के मामले में सजा सुनाई है।
एक दशक पुराने दुष्कर्म मामले से शुरू हुई यह कहानी अब आरोपी के दोबारा ब्रिटेन लौटने और फिर जेल पहुंचने के साथ एक नए कानूनी मोड़ पर आ गई है। आगे उसकी अपील और देश निकाले की प्रक्रिया क्या दिशा लेती है, इस पर सबकी नजर रहेगी।

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