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नेपाल में बाढ़ का ऐसा खौफनाक मंजर! कुछ ही मिनटों में सब कुछ हुआ तबाह, आखिर पानी के सैलाब के पीछे छिपा है कौन सा राज?



काठमांडू: नेपाल में बुधवार सुबह आई अचानक भीषण बाढ़ ने ऐसी तबाही मचाई कि उसके वीडियो देखकर हर कोई हैरान रह गया। तिब्बत की ओर से भोटेकोशी नदी में अचानक आया तेज पानी रसुवा जिले के टिमुरे और स्याफ्रुबेसी समेत कई इलाकों में घुस गया। पानी की रफ्तार इतनी ज्यादा थी कि देखते ही देखते सड़कें, पुल, वाहन और कई संरचनाएं इसकी चपेट में आ गईं। सामने आए वीडियो में नदी का पानी बेहद खतरनाक रफ्तार से बहता दिखाई दे रहा है और कई जगहों पर मलबा अपने साथ बहाता नजर आ रहा है।

इस आपदा की सबसे डरावनी बात यह है कि शुरुआती घंटों में नुकसान और लापता लोगों की सही संख्या का अंदाजा लगाना भी मुश्किल रहा। कई इलाकों का सड़क संपर्क टूट गया है और राहत दलों को प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने में परेशानी हो रही है। अधिकारियों के अनुसार कम से कम आठ लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कई लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। वहीं बड़ी संख्या में सुरक्षा कर्मियों के भी संपर्क से बाहर होने की जानकारी सामने आई है।

अचानक आया सैलाब, लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला

बताया जा रहा है कि बुधवार सुबह करीब 9 बजे भोटेकोशी नदी में अचानक पानी का स्तर बेहद तेजी से बढ़ गया। कुछ ही समय में नदी ने विकराल रूप ले लिया।

टिमुरे और स्याफ्रुबेसी के आसपास रहने वाले लोगों ने जब पानी का तेज बहाव देखा तो वहां अफरा-तफरी मच गई। लोगों ने सुरक्षित स्थानों की तरफ भागकर अपनी जान बचाने की कोशिश की।

वीडियो में कई जगहों पर पानी के साथ बड़ी मात्रा में मलबा बहता दिखाई दे रहा है। नदी के आसपास मौजूद वाहन और दूसरी चीजें पानी की तेज धारा में बहती नजर आईं।

स्थानीय लोगों के मुताबिक तबाही इतनी तेजी से हुई कि कई लोगों को अपने घरों और दुकानों से जरूरी सामान निकालने तक का मौका नहीं मिला।

पुल और सड़कें भी पानी में समा गईं

बाढ़ की सबसे भयावह तस्वीरों में से एक पुलों और सड़कों के बहने की है। तेज बहाव के कारण कई जगहों पर सड़कें क्षतिग्रस्त हो गईं।

एक पुल पानी की ताकत के सामने ज्यादा देर टिक नहीं पाया और बह गया। इसके बाद आसपास के इलाकों का संपर्क प्रभावित हो गया।

सड़क और पुल टूटने का सीधा असर राहत और बचाव अभियान पर भी पड़ा है। जिन रास्तों से सामान्य स्थिति में राहत दल कुछ ही समय में प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंच सकते थे, वहां अब मलबा और तेज पानी बड़ी बाधा बन गया है।

टिमुरे बाजार में भारी तबाही

रसुवा जिले का टिमुरे बाजार बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में शामिल है। यह क्षेत्र नेपाल और चीन के बीच व्यापारिक गतिविधियों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है।

बाढ़ के कारण बाजार क्षेत्र, सीमा नाका और आसपास मौजूद कई संरचनाओं को भारी नुकसान पहुंचा है। कई वाहन और सामान भी पानी में बह गए।

सीमा क्षेत्र में बाढ़ आने से व्यापार और यातायात पर भी असर पड़ा है। सड़क संपर्क बाधित होने के कारण सामान्य आवाजाही प्रभावित हुई है।

स्थानीय प्रशासन अब नुकसान का आकलन करने और प्रभावित लोगों की जानकारी जुटाने में लगा हुआ है।

कितने लोगों की मौत हुई, कितने लापता?

बाढ़ के बाद शुरुआती जानकारी में मृतकों की संख्या लगातार बदलती रही। बुधवार को कम से कम आठ शव बरामद होने की जानकारी सामने आई।

इसके अलावा कई लोगों के लापता होने की खबर है। सबसे ज्यादा चिंता उन लोगों को लेकर है जिनसे बाढ़ के बाद संपर्क नहीं हो पाया है।

सुरक्षा बलों के कई जवान भी संपर्क से बाहर बताए गए हैं। रसुवा जिले में तैनात 26 पुलिसकर्मियों के लापता होने की जानकारी सामने आई है।

अधिकारियों का कहना है कि बचाव अभियान आगे बढ़ने के साथ ही लापता लोगों और नुकसान की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।

25 लोगों को सुरक्षित निकाला गया

नेपाल सेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने राहत एवं बचाव अभियान शुरू कर दिया है। अब तक कम से कम 25 लोगों को सुरक्षित निकाले जाने की जानकारी सामने आई है।

बाढ़ प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

कई इलाकों में सड़क मार्ग से पहुंचना मुश्किल होने के कारण हवाई राहत अभियान बेहद महत्वपूर्ण हो गया है।

सेना और निजी क्षेत्र के कई हेलीकॉप्टरों को खोज, बचाव और राहत कार्य में लगाया गया है। घायलों के उपचार के लिए मेडिकल टीमों को भी प्रभावित इलाकों के नजदीक भेजा गया है।

कई जलविद्युत परियोजनाओं को नुकसान

नेपाल में आई इस बाढ़ ने सिर्फ बस्तियों और सड़कों को ही प्रभावित नहीं किया, बल्कि जलविद्युत परियोजनाओं को भी भारी नुकसान पहुंचाया है।

भोटेकोशी और आसपास की नदियों के किनारे कई हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट मौजूद हैं। बाढ़ के कारण बिजली उत्पादन और ट्रांसमिशन से जुड़ी कई महत्वपूर्ण सुविधाएं प्रभावित हुई हैं।

प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक करीब 430 मेगावाट बिजली क्षमता प्रभावित हुई है। यह नेपाल की कुल जलविद्युत क्षमता का एक बड़ा हिस्सा है।

अगर प्रभावित परियोजनाओं को जल्द बहाल नहीं किया गया तो इसका असर बिजली आपूर्ति पर भी पड़ सकता है।

बाढ़ का कारण अभी पूरी तरह साफ नहीं

इस आपदा का सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इतनी अचानक इतनी बड़ी मात्रा में पानी नदी में आया कैसे?

शुरुआती जानकारी के मुताबिक रसुवा में उस समय भारी बारिश नहीं हो रही थी। मौसम अधिकारियों ने भी संकेत दिया है कि स्थानीय भारी बारिश इस बाढ़ का मुख्य कारण नहीं लगती।

अब आशंका जताई जा रही है कि तिब्बत की तरफ किसी ग्लेशियल झील, बर्फीले भूस्खलन या नदी के अचानक अवरुद्ध होने के बाद पानी का दबाव टूटने से यह सैलाब आया हो सकता है।

हालांकि, यह अभी शुरुआती आकलन है। आधिकारिक जांच के बाद ही बाढ़ के वास्तविक कारण की पुष्टि हो पाएगी।

पिछले साल भी मची थी ऐसी तबाही

भोटेकोशी नदी क्षेत्र में अचानक आने वाली बाढ़ का खतरा पहले भी सामने आ चुका है। पिछले साल भी इसी नदी में भीषण बाढ़ आई थी।

उस समय भी कई लोगों की मौत हुई थी और बड़ी संख्या में लोग लापता हुए थे। पुलों और सड़कों को नुकसान पहुंचने से नेपाल और चीन के बीच संपर्क तथा व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हुई थीं।

एक साल बाद उसी क्षेत्र में फिर इतनी बड़ी आपदा आने से लोगों की चिंता और बढ़ गई है।

निचले इलाकों में भी बढ़ा खतरा

भोटेकोशी नदी का पानी आगे बढ़ते हुए त्रिशूली नदी से जुड़ता है। इसलिए प्रशासन ने निचले इलाकों में भी अलर्ट जारी किया है।

रसुवा के अलावा नुवाकोट, धादिंग, गोरखा और चितवन जैसे इलाकों में नदी किनारे रहने वाले लोगों को सावधान रहने और सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है।

प्रशासन ने लोगों से नदी, पुल और निचले इलाकों के पास जाने से बचने को कहा है।

खास तौर पर लोगों से अपील की गई है कि बाढ़ के पानी को पार करने की कोशिश न करें, क्योंकि तेज बहाव में कुछ सेकंड के भीतर स्थिति जानलेवा हो सकती है।

सड़क और यातायात व्यवस्था पर भी असर

बाढ़ के कारण कई महत्वपूर्ण सड़कों पर यातायात प्रभावित हुआ है। कुछ मार्गों पर वाहनों की आवाजाही रोक दी गई है।

काठमांडू से रसुवा, नुवाकोट, धादिंग और चितवन की ओर जाने वाले यात्रियों को भी सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

कई जगहों पर सड़क के क्षतिग्रस्त होने और पानी बढ़ने के कारण यात्रा करना खतरनाक हो गया है।

प्रशासन का कहना है कि जब तक स्थिति सामान्य नहीं होती, तब तक लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचना चाहिए।

पर्यटकों पर भी पड़ा असर

नेपाल का यह क्षेत्र पर्यटन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। बाढ़ के कारण कई पर्यटकों और ट्रेकिंग रूट पर मौजूद यात्रियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी है।

प्रारंभिक सूची में सैकड़ों यात्रियों के संपर्क में नहीं होने की जानकारी सामने आई है, हालांकि इन आंकड़ों का सत्यापन जारी है।

प्रशासन और पर्यटन से जुड़े अधिकारी लगातार यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि प्रभावित क्षेत्र में मौजूद पर्यटक सुरक्षित हैं या नहीं।

प्रधानमंत्री ने बुलाई आपात बैठक

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने बाढ़ की स्थिति को देखते हुए आपात बैठक बुलाई है।

सरकार की प्राथमिकता फिलहाल प्रभावित लोगों को सुरक्षित निकालना, लापता लोगों की तलाश करना और जरूरी राहत सामग्री पहुंचाना है।

सुरक्षा बलों को अधिक से अधिक संसाधनों के साथ बचाव अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं।

चिकित्सा टीमों को भी तैयार रखा गया है ताकि घायल लोगों को तत्काल इलाज मिल सके।

तबाही का पूरा आंकड़ा अभी सामने नहीं आया

बाढ़ के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि कुल नुकसान कितना हुआ?

अभी इसका कोई अंतिम आंकड़ा सामने नहीं आया है। कई प्रभावित इलाकों में राहत दलों की पहुंच पूरी तरह नहीं हो पाई है। कुछ स्थानों पर सड़कें और पुल टूट गए हैं, जबकि संचार व्यवस्था भी प्रभावित हुई है।

ऐसे में फिलहाल जो तस्वीर सामने आई है, वह शुरुआती जानकारी पर आधारित है।

घर, दुकानें, वाहन, सड़कें, पुल और बिजली परियोजनाओं को हुए नुकसान का विस्तृत आकलन आने वाले दिनों में ही हो सकेगा।

वीडियो ने दिखाया तबाही का डरावना चेहरा

सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो ने इस आपदा की भयावहता को दुनिया के सामने ला दिया है।

वीडियो में कहीं पानी के बीच वाहन बहते दिखाई देते हैं तो कहीं सड़क और पुल के आसपास तेज धारा अपना रास्ता बनाती नजर आती है।

कुछ फुटेज में नदी का पानी इतना उफनता दिखाई देता है कि आसपास मौजूद मजबूत संरचनाएं भी बेहद छोटी नजर आती हैं।

इन तस्वीरों को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि मौके पर मौजूद लोगों ने किस तरह के डर का सामना किया होगा।

आगे क्या होगा?

अब नेपाल प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती लापता लोगों को ढूंढना और प्रभावित इलाकों तक राहत पहुंचाना है।

इसके साथ ही नदी के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना भी जरूरी है, क्योंकि बाढ़ का पानी नीचे की ओर बढ़ सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की अचानक आने वाली बाढ़ के लिए बेहतर चेतावनी प्रणाली बेहद जरूरी है। अगर ऊपरी क्षेत्रों में नदी या ग्लेशियल झील से जुड़े बदलावों की समय रहते जानकारी मिल जाए तो निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को समय पर सुरक्षित स्थानों पर भेजा जा सकता है।

नेपाल में आई यह अचानक बाढ़ सिर्फ एक प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि एक बड़ी चेतावनी भी है। कुछ ही मिनटों में पानी ने सड़क, पुल, वाहन और बस्तियों को अपनी चपेट में ले लिया।

कम से कम आठ लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, कई लोग लापता हैं और सुरक्षा बलों के जवान भी संपर्क से बाहर हैं। सैकड़ों लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए राहत और बचाव अभियान जारी है।

सबसे डरावनी बात यह है कि तबाही की पूरी तस्वीर अभी सामने नहीं आई है। जैसे-जैसे राहत दल उन इलाकों तक पहुंचेंगे जहां फिलहाल पहुंचना मुश्किल है, नुकसान और लापता लोगों की वास्तविक संख्या सामने आने की उम्मीद है।

फिलहाल प्रशासन ने नदी किनारे रहने वाले लोगों से सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है। नेपाल की इन डरावनी तस्वीरों ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि पहाड़ी इलाकों में अचानक आने वाली बाढ़ कितनी तेजी से पूरे इलाके की तस्वीर बदल सकती है।

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