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“मोदी-योगी को गाली देना छोड़ो… BJP को हराने का ठेका सिर्फ मुसलमानों ने नहीं लिया!” मौलाना रजवी के बयान से मचा सियासी हड़कंप

 


बरेली: ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी ने मुसलमानों से राजनीतिक विरोध के तरीके में बदलाव लाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक नेता के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल करने के बजाय समाज को अपने भविष्य, शिक्षा, रोजगार और विकास जैसे मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लेकर नकारात्मक भाषा से बचने की सलाह दी।

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने अपने बयान में कहा कि लंबे समय से मुस्लिम समाज में राजनीतिक चर्चा का एक बड़ा हिस्सा भाजपा के विरोध के आसपास केंद्रित रहा है। उनके मुताबिक अब समय आ गया है कि समाज केवल विरोध की राजनीति तक सीमित न रहे, बल्कि सकारात्मक सोच के साथ अपने सामाजिक और आर्थिक विकास की दिशा में आगे बढ़े।

उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा का विरोध करना किसी एक समुदाय की जिम्मेदारी नहीं होनी चाहिए। उनके मुताबिक मुसलमानों को किसी राजनीतिक दल के प्रति केवल विरोध की भावना के आधार पर अपना राजनीतिक नजरिया तय करने के बजाय अपने हितों और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को ध्यान में रखना चाहिए।

'मोदी-योगी को गाली देना बंद करें'

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने मुसलमानों से खास तौर पर अपील की कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल न किया जाए। उन्होंने कहा कि राजनीतिक असहमति अपनी जगह हो सकती है, लेकिन किसी नेता या राजनीतिक विचारधारा का विरोध करते समय भाषा की मर्यादा बनाए रखना जरूरी है।

उनका कहना है कि नकारात्मक चर्चाओं में समय और ऊर्जा लगाने के बजाय समाज को शिक्षा, रोजगार, कारोबार, कौशल विकास और बच्चों के बेहतर भविष्य जैसे मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए।

उन्होंने मुस्लिम समाज से यह भी अपील की कि राजनीतिक बहस को व्यक्तिगत दुश्मनी में बदलने से बचा जाए। उनके अनुसार किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में विचारों का विरोध किया जा सकता है, लेकिन असहमति व्यक्त करने का तरीका संयमित और सकारात्मक होना चाहिए।

'भाजपा को हराने का ठेका सिर्फ मुसलमानों ने नहीं लिया'

अपने बयान में मौलाना ने कहा कि किसी राजनीतिक दल को हराने की जिम्मेदारी केवल मुसलमानों की नहीं है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि अगर कोई राजनीतिक दल मुसलमानों से समर्थन मांगता है तो समुदाय को भी यह देखना चाहिए कि उसके अपने सामाजिक और आर्थिक हितों के लिए क्या किया जा रहा है।

उन्होंने मुसलमानों से अपील की कि वे चुनावी राजनीति में किसी पार्टी के पीछे केवल भावनात्मक आधार पर लामबंद होने के बजाय अपने मुद्दों पर विचार करें।

मौलाना के मुताबिक राजनीतिक दलों को समर्थन देने या उनका विरोध करने का फैसला समाज को अपने विवेक और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर करना चाहिए।

सपा और दूसरी पार्टियों पर लगाए आरोप

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने समाजवादी पार्टी और दूसरी खुद को धर्मनिरपेक्ष कहने वाली पार्टियों पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि लंबे समय से इन दलों ने मुस्लिम समाज के बीच भाजपा विरोध की राजनीति को बढ़ावा दिया और इसका राजनीतिक फायदा उठाया।

उनका दावा है कि चुनावी दौर में मुस्लिम मतदाताओं को किसी खास दल के पक्ष में एकजुट करने के लिए राजनीतिक बयानबाजी की जाती रही है। इसके कारण समुदाय के वास्तविक मुद्दे पीछे छूट जाते हैं।

उन्होंने कहा कि अब मुस्लिम समाज को यह समझने की जरूरत है कि चुनाव के समय किए जाने वाले राजनीतिक वादों और वास्तविक विकास के बीच अंतर क्या है।

'राजनीति से ज्यादा जरूरी है नई पीढ़ी का भविष्य'

मौलाना ने अपने बयान में मुस्लिम समाज की नई पीढ़ी पर विशेष ध्यान देने की बात कही। उन्होंने कहा कि समाज के सामने शिक्षा और रोजगार सबसे महत्वपूर्ण चुनौतियों में शामिल हैं।

उनके अनुसार बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने, युवाओं को रोजगार के अवसर दिलाने और कारोबार को बढ़ावा देने के लिए समुदाय को गंभीरता से काम करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि अगर राजनीतिक बहस लगातार केवल विरोध और आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रही तो इससे समाज की अगली पीढ़ी के सामने मौजूद वास्तविक समस्याओं का समाधान नहीं होगा।

मौलाना ने लोगों से अपील की कि वे अपने बच्चों की शिक्षा पर निवेश करें और युवाओं को नए कौशल सीखने के लिए प्रोत्साहित करें।

'राजनीतिक विरोध ने समाज को पीछे किया'

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने कहा कि उनके विचार में पिछले कई वर्षों की लगातार नकारात्मक राजनीतिक सोच ने मुस्लिम समाज के विकास को प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि किसी भी समुदाय के लिए केवल विरोध की राजनीति लंबे समय तक फायदेमंद नहीं हो सकती।

उन्होंने लोगों से कहा कि वे राजनीतिक दलों के नेताओं के बयानों और रणनीतियों को समझें तथा अपने हितों को प्राथमिकता दें।

उनके मुताबिक मुस्लिम समाज को राजनीतिक दलों से सवाल पूछने चाहिए कि शिक्षा, रोजगार, कारोबार, स्वास्थ्य और सामाजिक विकास के क्षेत्र में उनके पास क्या ठोस योजना है।

'सिर्फ चुनाव के समय न हो राजनीतिक जागरूकता'

मौलाना ने राजनीतिक जागरूकता को केवल चुनावी समय तक सीमित न रखने की बात कही। उन्होंने कहा कि समाज को लगातार अपने अधिकारों, जिम्मेदारियों और लोकतांत्रिक व्यवस्था की जानकारी हासिल करनी चाहिए।

उनके अनुसार किसी भी राजनीतिक दल को समर्थन देने से पहले उसके घोषणापत्र, नीतियों और स्थानीय स्तर पर किए गए कामों को देखना चाहिए।

उन्होंने कहा कि मतदाताओं को भावनात्मक मुद्दों के बजाय अपने क्षेत्र की वास्तविक समस्याओं को प्राथमिकता देनी चाहिए। इसमें सड़क, शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य, सुरक्षा और स्थानीय विकास जैसे मुद्दे शामिल हो सकते हैं।

नेताओं से सवाल पूछना भी जरूरी

मौलाना के बयान में एक महत्वपूर्ण बात यह भी रही कि उन्होंने मुस्लिम समाज से राजनीतिक दलों के नेताओं से सवाल पूछने की अपील की। उनका कहना है कि जनता को यह जानने का अधिकार है कि चुनाव के दौरान किए गए वादों पर कितना काम हुआ।

उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल का समर्थन स्थायी नहीं होना चाहिए। अगर कोई पार्टी जनता की अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतरती है तो मतदाताओं को लोकतांत्रिक तरीके से अपना फैसला बदलने का अधिकार है।

उनके अनुसार राजनीतिक दलों के साथ संबंध मुद्दों और नीतियों के आधार पर होने चाहिए, न कि केवल भावनात्मक नारों के आधार पर।

'समाज को खुद तय करना होगा अपना रास्ता'

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने अपने संदेश में मुस्लिम समाज से आत्ममंथन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि समाज को यह तय करना होगा कि वह आने वाले वर्षों में किस दिशा में आगे बढ़ना चाहता है।

उनके मुताबिक अगर समाज शिक्षा, कौशल, रोजगार और आर्थिक मजबूती को प्राथमिकता देता है तो आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर अवसर तैयार किए जा सकते हैं।

उन्होंने कहा कि राजनीतिक दल आते-जाते रहते हैं, लेकिन समाज की वास्तविक जरूरतें लंबे समय तक बनी रहती हैं। इसलिए किसी पार्टी के पक्ष या विरोध से आगे बढ़कर इन जरूरतों पर ध्यान देना जरूरी है।

बयान के बाद राजनीतिक चर्चा तेज

मौलाना के इस बयान के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में इसे लेकर चर्चा होना स्वाभाविक है। खासकर ऐसे समय में जब राज्य में राजनीतिक दल विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों को लेकर अपनी रणनीतियां तैयार कर रहे हैं।

मौलाना की अपील का मुख्य संदेश यह है कि मुस्लिम समाज को किसी भी राजनीतिक दल के प्रति अंध समर्थन या अंध विरोध से बचना चाहिए और अपने सामाजिक-आर्थिक हितों को प्राथमिकता देनी चाहिए।

हालांकि उनके बयान पर विभिन्न राजनीतिक दलों और नेताओं की प्रतिक्रिया क्या होगी, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।

सकारात्मक राजनीति पर जोर

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने अपने बयान में बार-बार सकारात्मक सोच की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक असहमति लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन विरोध के दौरान अपमानजनक भाषा और व्यक्तिगत हमलों से समाज को बचना चाहिए।

उनके मुताबिक राजनीतिक विचारधारा से असहमति होने के बावजूद समाज को संवाद और लोकतांत्रिक तरीके अपनाने चाहिए।

उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को बेहतर भविष्य देने के लिए समाज को शिक्षा, रोजगार और आर्थिक विकास पर अधिक ध्यान देना होगा।

ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी ने अपने बयान के जरिए मुस्लिम समाज से राजनीतिक सोच में बदलाव की अपील की है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल न करने की बात कही और लोगों से सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने का आग्रह किया।

उन्होंने समाजवादी पार्टी समेत अन्य राजनीतिक दलों पर मुस्लिम समाज को राजनीतिक रूप से इस्तेमाल करने का आरोप भी लगाया। हालांकि ये उनके राजनीतिक आरोप और विचार हैं, जिन पर संबंधित दलों की प्रतिक्रिया अलग हो सकती है।

मौलाना का कहना है कि अब मुस्लिम समाज को केवल राजनीतिक विरोध तक सीमित रहने के बजाय शिक्षा, रोजगार, कारोबार, सामाजिक विकास और नई पीढ़ी के बेहतर भविष्य को प्राथमिकता देनी चाहिए।

उनके मुताबिक लोकतंत्र में राजनीतिक पसंद और असहमति दोनों का अधिकार है, लेकिन समाज के लिए सबसे जरूरी यह है कि वह अपने भविष्य को ध्यान में रखकर सोच-समझकर राजनीतिक निर्णय ले।

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