सोने की कीमत पर आया चौंकाने वाला अनुमान! साल के अंत तक दिख सकता है बड़ा खेल
अगर आप सोना खरीदने या इसमें निवेश करने की योजना बना रहे हैं, तो आने वाले महीनों में बाजार पर नजर रखना बेहद जरूरी हो सकता है। सोने की कीमतों में इस साल जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। एक तरफ कीमती धातु ने रिकॉर्ड ऊंचाई का स्तर छुआ, तो दूसरी तरफ ब्याज दरों को लेकर अमेरिकी केंद्रीय बैंक की सख्ती की आशंका ने अचानक कीमतों पर दबाव डाल दिया।
इसी बीच वैश्विक ब्रोकरेज हाउस गोल्डमैन सैक्स के सोने के आउटलुक ने बाजार में नई चर्चा छेड़ दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों की लगातार सोने की खरीदारी और निवेशकों की संभावित बढ़ती मांग के कारण 2026 के अंत तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत करीब 4,900 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती है। भारतीय मुद्रा में इसे लगभग 1.50 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर के आसपास माना जा रहा है।
हालांकि, यह अनुमान अंतरराष्ट्रीय बाजार के लिए है। भारत में सोने की कीमत पर डॉलर-रुपया विनिमय दर, आयात शुल्क, स्थानीय मांग और अन्य बाजार कारकों का भी असर पड़ता है।
अचानक क्यों गिरा सोना?
सोने के लिए 2026 अब तक बेहद उतार-चढ़ाव वाला साल रहा है। हालिया कारोबारी सत्रों में भी बाजार ने निवेशकों को चौंकाया है। अमेरिकी मौद्रिक नीति को लेकर बदले संकेतों ने सोने की तेजी पर अचानक ब्रेक लगा दिया।
28 अगस्त को जैक्सन होल में अमेरिकी फेडरल रिजर्व से जुड़े संकेतों के बाद बाजार में महंगाई और ब्याज दरों को लेकर चिंता बढ़ी। निवेशकों को आशंका हुई कि यदि अमेरिकी केंद्रीय बैंक महंगाई को नियंत्रित करने के लिए अपेक्षाकृत सख्त रुख अपनाता है, तो ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रह सकती हैं।
इसका सीधा असर सोने पर पड़ सकता है, क्योंकि सोना आम तौर पर ब्याज नहीं देता। जब बॉन्ड और अन्य ब्याज देने वाले निवेश विकल्प आकर्षक होते हैं, तो कुछ निवेशक सोने से पैसा निकालकर उन परिसंपत्तियों की ओर रुख कर सकते हैं।
इसी वजह से सोने में तेज गिरावट देखने को मिली और कीमतों में एक कारोबारी सत्र में 3 प्रतिशत से ज्यादा की कमजोरी दर्ज की गई। अब बाजार की नजर इस बात पर है कि यह गिरावट महज एक अस्थायी करेक्शन है या सोने की बड़ी तेजी में फिलहाल ब्रेक लग गया है।
2026 में सोने ने दिखाए कई रंग
इस साल सोने की चाल को देखें तो यह किसी रोलर-कोस्टर राइड से कम नहीं रही। जनवरी के अंत में सोने ने करीब 5,600 डॉलर प्रति औंस का रिकॉर्ड स्तर छुआ था। उस समय बाजार में सोने को लेकर जबरदस्त तेजी थी और निवेशक इसे वैश्विक अनिश्चितता के बीच सुरक्षित निवेश के रूप में देख रहे थे।
लेकिन इसके बाद परिस्थितियां तेजी से बदलीं। जुलाई के मध्य तक कीमतों में भारी गिरावट आई और सोना 4,000 डॉलर प्रति औंस के नीचे तक पहुंच गया।
यानी कुछ ही महीनों में सोने ने रिकॉर्ड ऊंचाई से तेज गिरावट और फिर जोरदार वापसी—दोनों का अनुभव किया।
इसके बाद कीमतों में दोबारा तेजी आई और जुलाई के निचले स्तर से सोने में लगभग 15 प्रतिशत की रिकवरी देखने को मिली। यही वजह है कि बाजार विशेषज्ञ अब भी सोने के लंबे समय के आउटलुक को लेकर पूरी तरह निराश नहीं हैं।
केंद्रीय बैंकों की खरीदारी क्यों बन रही है सबसे बड़ी ताकत?
सोने की संभावित तेजी के पीछे सबसे महत्वपूर्ण कारणों में से एक दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों की खरीदारी है।
पिछले कुछ वर्षों में कई केंद्रीय बैंकों ने अपने विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी बढ़ाई है। इसके पीछे कई कारण हैं। इनमें भू-राजनीतिक तनाव, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और अमेरिकी डॉलर पर अत्यधिक निर्भरता को कम करने की कोशिश प्रमुख हैं।
रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में जोखिम को लेकर केंद्रीय बैंकों की सोच में भी बदलाव देखने को मिला। कई देशों के लिए सोना ऐसा रिजर्व एसेट है, जो किसी दूसरे देश की देनदारी नहीं होता और लंबे समय में मूल्य के संरक्षण के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
यही वजह है कि केंद्रीय बैंकों की सोने की खरीदारी हाल के वर्षों में बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण सपोर्ट बन गई है।
खरीदारी में आया बड़ा बदलाव
गोल्डमैन सैक्स के विश्लेषकों के मुताबिक केंद्रीय बैंकों द्वारा सोना जमा करने की प्रक्रिया कोई कुछ महीनों की कहानी नहीं है, बल्कि यह कई वर्षों तक चलने वाला ट्रेंड बन चुका है।
2022 से पहले केंद्रीय बैंकों की औसत मासिक सोने की खरीद लगभग 17 टन के आसपास बताई जाती थी। इसके मुकाबले 2026 में औसत मासिक खरीद करीब 50 टन रहने का अनुमान लगाया गया है।
इस ट्रेंड का सबसे दिलचस्प हिस्सा जून 2026 में देखने को मिला, जब केंद्रीय बैंकों की खरीद करीब 100 टन तक पहुंचने की बात सामने आई। इस खरीदारी में चीन के केंद्रीय बैंक की भूमिका विशेष रूप से महत्वपूर्ण रही।
अगर केंद्रीय बैंकों की यह खरीदारी आने वाले महीनों में भी जारी रहती है, तो इससे सोने की कीमतों को नीचे आने पर मजबूत सपोर्ट मिल सकता है।
क्या 4,900 डॉलर का लक्ष्य पार होगा?
यही वह सवाल है जिसने निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ा दी है।
गोल्डमैन सैक्स का अनुमान है कि 2026 के अंत तक सोना करीब 4,900 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकता है। लेकिन यह लक्ष्य किसी गारंटी की तरह नहीं देखा जाना चाहिए। सोने की कीमत कई ऐसे कारकों पर निर्भर करती है, जिनमें अमेरिकी ब्याज दरें, डॉलर की मजबूती, महंगाई, ETF में निवेश, भू-राजनीतिक तनाव और केंद्रीय बैंकों की खरीदारी शामिल हैं।
यदि अमेरिकी ब्याज दरें स्थिर रहती हैं और सोने से जुड़े ETF में निवेशकों की मांग फिर मजबूत होती है, तो सोने में नई तेजी देखने को मिल सकती है। ऐसे माहौल में 4,900 डॉलर का अनुमान हासिल होना संभव हो सकता है और कीमत इसके ऊपर भी जा सकती है।
लेकिन कहानी का दूसरा पहलू भी है।
फेड ने उठाया सख्त कदम तो बदल सकता है पूरा खेल
अगर अमेरिकी फेडरल रिजर्व महंगाई को लेकर ज्यादा चिंतित होता है और ब्याज दरों में बढ़ोतरी या लंबे समय तक ऊंची दरों का संकेत देता है, तो सोने पर दबाव बढ़ सकता है।
ऊंची ब्याज दरों के कारण अमेरिकी डॉलर और सरकारी बॉन्ड जैसे विकल्प निवेशकों के लिए ज्यादा आकर्षक हो सकते हैं। ऐसे समय में सोने की मांग कमजोर पड़ने का खतरा रहता है।
इस स्थिति में हालिया गिरावट केवल शुरुआत साबित हो सकती है और सोने में एक बड़ा करेक्शन देखने को मिल सकता है।
यही कारण है कि मौजूदा समय में सोने को लेकर तस्वीर एकतरफा नहीं है। लंबी अवधि में केंद्रीय बैंकों की खरीदारी तेजी का आधार दे रही है, जबकि छोटी अवधि में ब्याज दरों और डॉलर की चाल बड़ा जोखिम बनी हुई है।
निवेशकों के लिए क्या मायने रखता है?
सोने की कीमत में संभावित तेजी देखकर सिर्फ अनुमान के आधार पर तुरंत निवेश करने के बजाय बाजार के जोखिम को समझना जरूरी है। 4,900 डॉलर का लक्ष्य एक ब्रोकरेज अनुमान है, निश्चित भविष्यवाणी नहीं।
अगर केंद्रीय बैंकों की खरीदारी मजबूत रहती है, वैश्विक तनाव बना रहता है और ब्याज दरों का दबाव कम होता है, तो सोने के लिए माहौल सकारात्मक रह सकता है। दूसरी ओर, अमेरिकी ब्याज दरों में अप्रत्याशित बढ़ोतरी या डॉलर में मजबूती सोने की तेजी को रोक सकती है।
इसलिए आने वाले महीनों में सोने के बाजार के लिए फेड की ब्याज दर नीति, केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और ETF निवेशकों की मांग तीन सबसे अहम संकेतक रहेंगे।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या हालिया गिरावट सोने की बड़ी तेजी से पहले का आखिरी झटका है, या रिकॉर्ड ऊंचाई के बाद बाजार एक और बड़ी गिरावट की तैयारी कर रहा है? आने वाले हफ्तों की चाल इस सवाल का जवाब काफी हद तक तय कर सकती है।

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