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असम से यूपी आई थी नौकरी करने, फिर मिली लाश… पुलिस ने जब खोला राज तो प्रेमी निकला आरोपी

 


अलीगढ़। उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के इगलास क्षेत्र में 11 अगस्त को गौशाला के पास मिली एक महिला की लाश के मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। पुलिस की जांच में मृतका की पहचान असम की रहने वाली 28 वर्षीय मनोवारा बेगम उर्फ मोना के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक, इस मामले में मथुरा के राया क्षेत्र के रहने वाले उसके प्रेमी विकास सिंह को हत्या के आरोप में हिरासत में लिया गया है। आरोप है कि प्रेम संबंध को लेकर हुए विवाद के बाद विकास ने मनोवारा के सिर पर ईंट से वार किया, जिससे उसकी मौत हो गई।

घटना के बाद महिला का शव इगलास क्षेत्र में गौशाला के पास मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई थी। शुरुआत में मृतका की पहचान नहीं हो सकी थी, जिसके कारण पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती शव की शिनाख्त और उसके परिवार तक पहुंचने की थी। जांच आगे बढ़ने के बाद पुलिस ने महिला की पहचान असम निवासी मनोवारा बेगम के तौर पर की। इसके बाद पुलिस ने उसके परिवार से संपर्क किया, लेकिन कहानी का सबसे भावुक पहलू तब सामने आया जब परिवार शव लेने के लिए अलीगढ़ नहीं पहुंच सका।

गौशाला के पास मिला था शव

11 अगस्त को इगलास क्षेत्र में गौशाला के पास महिला का शव मिलने की सूचना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची थी। सुनसान स्थान के पास शव मिलने से आसपास के लोगों में भी चर्चा शुरू हो गई। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा और महिला की पहचान कराने की कोशिश शुरू की।

मामले की जांच के दौरान पुलिस ने महिला की पहचान मनोवारा बेगम के रूप में की। बताया गया कि वह असम के नगांव जिले की रहने वाली थी और करीब 28 वर्ष की थी।

पहचान सामने आने के बाद पुलिस ने उसके परिवार से संपर्क किया। परिवार को बेटी की मौत की सूचना दी गई, लेकिन आर्थिक और अन्य परिस्थितियों के कारण परिवार अलीगढ़ पहुंचकर शव लेने में सक्षम नहीं हो सका।

प्रेमी पर लगा हत्या का आरोप

पुलिस की जांच में महिला के पुराने परिचित और प्रेमी विकास सिंह का नाम सामने आया। विकास सिंह मथुरा के राया इलाके का रहने वाला बताया गया है। पुलिस के मुताबिक, मनोवारा और विकास की पहचान उस समय हुई थी जब दोनों मथुरा के एक होटल में काम करते थे।

जांच में सामने आया कि दोनों के बीच लंबे समय से प्रेम संबंध थे। पुलिस के अनुसार, घटना के दौरान दोनों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हुआ और मामला इतना बढ़ गया कि विकास ने कथित तौर पर मनोवारा के सिर पर ईंट से वार कर दिया।

सिर में गंभीर चोट लगने के बाद मनोवारा की मौत हो गई। इसके बाद शव को इगलास क्षेत्र में गौशाला के पास छोड़ दिया गया। पुलिस ने मामले में विकास को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की है।

हालांकि हत्या के पीछे की पूरी वजह, घटना का सटीक क्रम और शव को इगलास तक लाने से जुड़े पहलुओं को लेकर पुलिस की जांच जारी है। इन तथ्यों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।

तीन साल पहले नौकरी की तलाश में आई थी मथुरा

मनोवारा की कहानी हत्या की घटना से काफी पहले शुरू होती है। पुलिस के अनुसार, वह करीब तीन वर्ष पहले असम के नगांव जिले से रोजगार की तलाश में मथुरा आई थी। उसे मथुरा के एक होटल में हाउसकीपिंग का काम मिला था।

इसी होटल में राया निवासी विकास सिंह भी काम करता था। एक ही जगह काम करने के दौरान दोनों के बीच बातचीत बढ़ी और धीरे-धीरे दोनों एक-दूसरे के करीब आ गए।

बताया जा रहा है कि काम के दौरान ही दोनों के बीच प्रेम संबंध बन गया था। दोनों के बीच संबंध करीब डेढ़ वर्ष तक चले। इस दौरान दोनों एक-दूसरे के संपर्क में रहे।

लेकिन इसके बाद परिस्थितियां बदल गईं।

होटल पर पुलिस की कार्रवाई के बाद चली गई नौकरी

करीब डेढ़ साल पहले पुलिस ने उस होटल में छापा मारा था, जिसके बाद होटल बंद हो गया। होटल बंद होने के कारण मनोवारा की नौकरी भी चली गई।

रोजगार खत्म होने के बाद उसके सामने नई नौकरी तलाशने की चुनौती थी। इसी दौरान वह अपनी बहन के साथ रहने के लिए लखनऊ चली गई। बताया गया कि वह आगे भी रोजगार की तलाश कर रही थी।

मनोवारा के जीवन में इसके बाद क्या-क्या हुआ और वह दोबारा मथुरा तथा विकास के संपर्क में कैसे आई, यह पुलिस जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है। जांचकर्ता उसके मोबाइल फोन, संपर्कों और पिछले कुछ दिनों की गतिविधियों से जुड़े विवरण भी खंगाल सकते हैं।

परिवार अलीगढ़ नहीं पहुंच सका

मामले का सबसे भावुक पहलू मृतका के परिवार से जुड़ा है। महिला की पहचान होने के बाद पुलिस ने उसके परिवार को सूचना दी। लेकिन परिवार अलीगढ़ आकर शव लेने की स्थिति में नहीं था।

बताया गया कि मनोवारा की मां और उसकी चार बहनें असम में हैं। परिवार के लोग अलीगढ़ नहीं पहुंच सके। ऐसे में अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी सामाजिक संस्था मानव उपकार संस्था ने संभाली।

अलीगढ़ में संस्था लंबे समय से ऐसे लोगों के अंतिम संस्कार में सहयोग करती रही है जिनके शवों को उनके परिजन लेने में असमर्थ होते हैं। संस्था से जुड़े लोगों के अनुसार, वह अलग-अलग परिस्थितियों में लावारिस या असहाय शवों के अंतिम संस्कार में मदद करती है।

वीडियो कॉल पर मां और बहनों ने निभाई रस्में

जब मनोवारा के परिवार के लोग अपनी बेटी का शव लेने अलीगढ़ नहीं आ सके तो परिवार ने दूर रहकर अंतिम संस्कार की प्रक्रिया में हिस्सा लिया।

बताया गया कि उसकी मां और चार बहनों ने वीडियो कॉल के माध्यम से अंतिम संस्कार और दफनाने की रस्में देखीं तथा उनमें शामिल हुईं।

यह दृश्य परिवार के लिए बेहद भावुक रहा होगा। एक मां और चार बहनों को अपनी बेटी और बहन को अंतिम विदाई देने के लिए हजारों किलोमीटर दूर से वीडियो कॉल का सहारा लेना पड़ा।

सोमवार को मानव उपकार संस्था की मदद से मनोवारा को अलीगढ़ के नुमाइश कब्रिस्तान में दफनाया गया।

एक सवाल जो अब भी बाकी है

मनोवारा की हत्या का मुख्य आरोपी पुलिस की हिरासत में है, लेकिन इस मामले में कई सवालों के जवाब जांच के बाद ही स्पष्ट होंगे। आखिर दोनों के बीच किस बात को लेकर विवाद हुआ? हत्या के बाद शव को गौशाला के पास ही क्यों छोड़ा गया? क्या हत्या अचानक हुए विवाद का परिणाम थी या इसके पीछे कोई और वजह थी?

पुलिस इन सभी पहलुओं की जांच कर रही है।

मृतका की पिछली जिंदगी, उसके परिवार से संपर्क, मथुरा और लखनऊ में रहने के दौरान उसके संबंध और घटना से पहले विकास के साथ उसकी बातचीत जांच में महत्वपूर्ण हो सकती है।

मोबाइल और संपर्कों से मिल सकती है अहम जानकारी

ऐसे मामलों में पुलिस के लिए मृतका और आरोपी के मोबाइल फोन की जांच महत्वपूर्ण होती है। फोन कॉल, चैट, लोकेशन और घटना से पहले दोनों के बीच हुई बातचीत से पुलिस को घटनाक्रम समझने में मदद मिल सकती है।

यदि दोनों घटना से पहले लगातार संपर्क में थे तो उनके बीच हुई बातचीत से विवाद की वजह सामने आ सकती है। वहीं घटना के बाद आरोपी की गतिविधियों से भी जांच को दिशा मिल सकती है।

हालांकि जांच के दौरान सामने आने वाली ऐसी जानकारियों की आधिकारिक पुष्टि पुलिस द्वारा किए जाने के बाद ही की जा सकेगी।

असम से यूपी तक की जिंदगी का दुखद अंत

मनोवारा रोजगार की तलाश में असम से उत्तर प्रदेश आई थी। उसने मथुरा के होटल में काम किया, जहां उसकी मुलाकात विकास से हुई और दोनों के बीच प्रेम संबंध बने। होटल बंद होने के बाद नौकरी चली गई तो वह लखनऊ चली गई।

एक बेहतर जिंदगी और रोजगार की तलाश में घर से दूर निकली 28 वर्षीय महिला की जिंदगी आखिरकार एक दर्दनाक घटना में खत्म हो गई।

सबसे दुखद स्थिति यह रही कि उसकी मौत के बाद भी परिवार उसके पास नहीं पहुंच सका। मां और चार बहनों को वीडियो कॉल के जरिए अंतिम विदाई देनी पड़ी।

पुलिस की जांच पर टिकी नजर

फिलहाल इस मामले में पुलिस ने विकास सिंह को हिरासत में लिया है और हत्या के आरोपों की जांच कर रही है। पुलिस के सामने अब हत्या की पूरी कहानी को जोड़ने, घटना की वजह पता लगाने और आरोपों से जुड़े सबूत जुटाने की चुनौती है।

मामले में आरोपी के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई जांच में जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर होगी। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास करेगी कि हत्या के समय वहां कौन मौजूद था और घटना के बाद शव को किस तरह गौशाला के पास पहुंचाया गया।

अलीगढ़ के इगलास में गौशाला के पास 11 अगस्त को मिली महिला की लाश की पहचान होने के बाद अब पुलिस को हत्या के मामले में एक अहम सुराग मिला है। मृतका की पहचान असम की 28 वर्षीय मनोवारा बेगम उर्फ मोना के रूप में हुई है और पुलिस ने उसके प्रेमी विकास सिंह को हत्या के आरोप में हिरासत में लिया है।

पुलिस के मुताबिक, विकास ने कथित तौर पर ईंट से मनोवारा के सिर पर वार किया, जिससे उसकी मौत हुई। हालांकि हत्या की पूरी वजह और घटनाक्रम की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

मनोवारा की जिंदगी की कहानी रोजगार की तलाश में असम से मथुरा आने से शुरू हुई थी। होटल में काम के दौरान उसे प्रेम हुआ, फिर नौकरी चली गई और वह लखनऊ चली गई। लेकिन अंत में उसकी जिंदगी का सफर बेहद दर्दनाक तरीके से खत्म हुआ।

परिवार की मजबूरी ने इस घटना को और मार्मिक बना दिया। मां और चार बहनें अपनी बेटी और बहन को आखिरी बार देखने के लिए अलीगढ़ नहीं पहुंच सकीं और वीडियो कॉल के जरिए उसकी दफन की रस्मों में शामिल हुईं। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि रोजगार और बेहतर भविष्य की तलाश में घर से दूर रहने वाले लोगों की सुरक्षा और उनके सामाजिक-संबंधों की निगरानी कितनी महत्वपूर्ण है।

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