रीगा से उड़कर अचानक मॉस्को में उतरा अमेरिका का C-17! क्रेमलिन भी बोला- हमें नहीं पता... आखिर विमान में क्या था?
नई दिल्ली: अमेरिका और रूस के बीच रिश्तों में जारी तनाव के बीच एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खासा ध्यान खींचा है। अमेरिकी वायुसेना का C-17 Globemaster III सैन्य परिवहन विमान मॉस्को के वनुकोवो एयरपोर्ट पर उतरा। विमान ने लातविया की राजधानी रीगा से उड़ान भरी थी और कुछ ही समय बाद रूसी राजधानी पहुंच गया। सबसे हैरानी की बात यह है कि फिलहाल अमेरिका या रूस की ओर से इस उड़ान के उद्देश्य को लेकर कोई स्पष्ट आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
फ्लाइट-ट्रैकिंग से जुड़े उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार विमान RCH4555 कॉलसाइन के साथ उड़ान भर रहा था। विमान ने 25 अगस्त की सुबह रीगा से उड़ान भरी और मॉस्को के वनुकोवो एयरपोर्ट पर पहुंचा। इस असामान्य उड़ान के बाद सोशल मीडिया से लेकर रक्षा विशेषज्ञों तक में सवाल उठने लगे कि आखिर अमेरिकी सैन्य परिवहन विमान को मॉस्को भेजने की जरूरत क्यों पड़ी।
रीगा से मॉस्को पहुंचा अमेरिकी सैन्य विमान
उपलब्ध फ्लाइट-ट्रैकिंग रिकॉर्ड इस घटना को और दिलचस्प बनाते हैं। रिपोर्टों के अनुसार यही C-17 विमान 23 अगस्त को अमेरिका के मैरीलैंड स्थित कैंप स्प्रिंग्स से रीगा पहुंचा था। कैंप स्प्रिंग्स क्षेत्र में ज्वाइंट बेस एंड्रयूज स्थित है, जो अमेरिकी सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों और विशेष हवाई अभियानों के लिए महत्वपूर्ण सैन्य अड्डा है।
इसके दो दिन बाद विमान ने रीगा से मॉस्को के लिए उड़ान भरी। यानी विमान की यात्रा को मोटे तौर पर अमेरिका से रीगा और फिर मॉस्को तक के मार्ग के रूप में देखा जा रहा है।
यही वजह है कि इस उड़ान ने सामान्य सैन्य परिवहन मिशन की तुलना में कहीं ज्यादा ध्यान आकर्षित किया है।
क्रेमलिन ने कहा- हमारे पास जानकारी नहीं
विमान के मॉस्को पहुंचने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही था कि क्या यह किसी उच्चस्तरीय बैठक या कूटनीतिक मिशन से जुड़ा है।
जब रूस के राष्ट्रपति कार्यालय यानी क्रेमलिन से इस बारे में सवाल पूछा गया तो प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने कहा कि उनके पास अमेरिकी विमान के मॉस्को पहुंचने की जानकारी नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि इस सप्ताह क्रेमलिन में अमेरिकी प्रशासन के प्रतिनिधियों के साथ कोई बैठक निर्धारित नहीं है।
क्रेमलिन की ओर से इस तरह की प्रतिक्रिया ने मामले को और रहस्यमयी बना दिया है। क्योंकि विमान वास्तव में मॉस्को पहुंच चुका था, लेकिन राष्ट्रपति कार्यालय को उसके मिशन की जानकारी नहीं होने की बात सामने आई।
आखिर C-17 विमान इतना खास क्यों है?
C-17 Globemaster III अमेरिका का भारी सैन्य परिवहन विमान है। इसका इस्तेमाल सैनिकों, भारी उपकरणों और अन्य महत्वपूर्ण सैन्य या सरकारी सामान को लंबी दूरी तक पहुंचाने के लिए किया जाता है।
यह विमान सिर्फ युद्ध सामग्री पहुंचाने तक सीमित नहीं है। इसकी क्षमता और लंबी दूरी की उड़ान की वजह से इसका इस्तेमाल विशेष सरकारी मिशनों, महत्वपूर्ण कर्मियों की आवाजाही और चिकित्सा निकासी जैसे कार्यों में भी किया जा सकता है।
यही कारण है कि जब ऐसा विमान रूस की राजधानी में उतरता है तो उसकी सामान्य कार्गो उड़ान मानकर उसे नजरअंदाज करना आसान नहीं होता।
विशेष रूप से अमेरिका और रूस के बीच मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव को देखते हुए यह उड़ान अपने आप में असामान्य दिखाई देती है।
ज्वाइंट बेस एंड्रयूज से कनेक्शन ने बढ़ाया सस्पेंस
इस घटना का एक और महत्वपूर्ण पहलू ज्वाइंट बेस एंड्रयूज से जुड़ा है। फ्लाइट-ट्रैकिंग रिकॉर्ड के मुताबिक विमान रीगा पहुंचने से पहले अमेरिका के कैंप स्प्रिंग्स क्षेत्र से आया था। ज्वाइंट बेस एंड्रयूज अमेरिकी राष्ट्रपति और वरिष्ठ अधिकारियों से जुड़े विशेष हवाई अभियानों के लिए जाना जाता है।
इसका मतलब यह जरूरी नहीं है कि विमान में कोई वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी मौजूद था। लेकिन विमान की पिछली यात्रा को देखते हुए इस संभावना पर सवाल उठना स्वाभाविक है कि मिशन सामान्य सैन्य लॉजिस्टिक्स से अलग किसी विशेष उद्देश्य से जुड़ा हो सकता है।
हालांकि, किसी अधिकारी के विमान में सवार होने या किसी गुप्त मिशन का हिस्सा होने की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
क्या यह किसी कूटनीतिक मिशन का हिस्सा है?
अमेरिका और रूस के बीच यूक्रेन युद्ध को लेकर कई दौर की बातचीत पहले भी हो चुकी है। दोनों देशों के बीच संबंध बेहद तनावपूर्ण होने के बावजूद संपर्क के कुछ राजनयिक चैनल खुले रहे हैं।
ऐसे में एक संभावना यह भी हो सकती है कि विमान किसी विशेष सरकारी या कूटनीतिक मिशन से जुड़ा हो। लेकिन फिलहाल उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी से यह निष्कर्ष निकालना संभव नहीं है कि विमान में कौन था या उसका वास्तविक उद्देश्य क्या था।
कुछ मीडिया रिपोर्टों और सोशल मीडिया पोस्ट में अमेरिकी अधिकारियों या खुफिया अधिकारियों के मॉस्को दौरे को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। लेकिन इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इन्हें फिलहाल अप्रमाणित दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
क्या कैदियों की अदला-बदली हो सकती है वजह?
अमेरिका और रूस के बीच अतीत में बंदियों या कैदियों की अदला-बदली के मामले सामने आते रहे हैं। इसलिए इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर यह अनुमान भी लगाया जा रहा है कि विमान किसी संभावित कैदी हस्तांतरण या उससे जुड़े मिशन के लिए आया हो सकता है।
लेकिन फिलहाल इस संभावना की भी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
ऐसे संवेदनशील मिशनों में सैन्य परिवहन विमान का इस्तेमाल संभव जरूर है, लेकिन केवल विमान के मॉस्को पहुंचने के आधार पर यह कहना कि कैदी अदला-बदली होने वाली है, सही नहीं होगा।
क्या विमान में कोई खास सामान था?
एक और सवाल यह है कि C-17 अपने साथ क्या लेकर मॉस्को पहुंचा।
विमान का इस्तेमाल भारी सामान, उपकरण और सरकारी लॉजिस्टिक सामग्री ले जाने के लिए किया जा सकता है। ऐसे में यह संभव है कि उड़ान किसी लॉजिस्टिक जरूरत से जुड़ी हो।
लेकिन विमान के कार्गो या यात्रियों की जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। यही जानकारी की कमी इस पूरे घटनाक्रम को रहस्यमयी बना रही है।
रूस में अमेरिकी विमान का उतरना इतना असामान्य क्यों?
यूक्रेन युद्ध और उसके बाद अमेरिका तथा रूस के बीच बढ़े तनाव ने दोनों देशों के बीच सामान्य संपर्क को काफी सीमित कर दिया है। ऐसे माहौल में अमेरिकी वायुसेना के विमान का सीधे मॉस्को पहुंचना निश्चित रूप से असाधारण घटना है।
यही कारण है कि रक्षा विशेषज्ञ और ओपन-सोर्स इंटेलिजेंस से जुड़े लोग विमान की आगे की गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं।
क्या यह अमेरिका-रूस संबंधों में किसी बदलाव का संकेत है?
यह सबसे बड़ा सवाल है।
एक संभावना यह है कि यह केवल एक विशेष लॉजिस्टिक या प्रशासनिक मिशन हो और इसका दोनों देशों के राजनीतिक रिश्तों से कोई सीधा संबंध न हो।
दूसरी संभावना यह है कि यह किसी ऐसे कूटनीतिक संपर्क का हिस्सा हो, जिसकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
अमेरिका और रूस के बीच यूक्रेन को लेकर बातचीत की कोशिशें पहले भी होती रही हैं। इसलिए किसी विशेष प्रतिनिधि, सुरक्षा अधिकारी या राजनयिक मिशन की यात्रा को पूरी तरह खारिज भी नहीं किया जा सकता।
लेकिन अभी तक उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी इतनी नहीं है कि यह कहा जा सके कि विमान का मॉस्को पहुंचना किसी बड़े समझौते या गुप्त बैठक का संकेत है।
अब आगे क्या होगा?
अब सबसे ज्यादा नजर इस बात पर है कि C-17 विमान मॉस्को से कब और कहां के लिए उड़ान भरता है। उसके अगले गंतव्य, वापसी के मार्ग और रूस में उसके ठहराव की अवधि से मिशन को समझने में कुछ संकेत मिल सकते हैं।
इसके अलावा अमेरिका के रक्षा विभाग, विदेश मंत्रालय या अन्य संबंधित एजेंसियों की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने आता है तो स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।
फिलहाल इतना जरूर स्पष्ट है कि रीगा से मॉस्को पहुंचा अमेरिकी C-17 कोई सामान्य घटना नहीं है। विमान की यात्रा का रिकॉर्ड सार्वजनिक है, लेकिन उसके मिशन का उद्देश्य अभी भी स्पष्ट नहीं है।
क्रेमलिन का यह कहना कि उसे विमान के आने की जानकारी नहीं है, इस पूरे घटनाक्रम को और ज्यादा दिलचस्प बना देता है। हालांकि, जब तक अमेरिका या रूस की ओर से आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आती, तब तक किसी गुप्त बैठक, कैदी अदला-बदली या खुफिया मिशन को लेकर किए जा रहे दावों को सिर्फ अटकल के तौर पर ही देखना होगा।
एक बात तय है—मॉस्को में अमेरिकी C-17 की लैंडिंग ने अमेरिका-रूस संबंधों के बीच एक नया सवाल जरूर खड़ा कर दिया है: आखिर यह विमान वहां क्यों पहुंचा था?

कोई टिप्पणी नहीं