100 KM की रफ्तार से 4 तूफानों का तांडव! अगले 72 घंटे बेहद खतरनाक, दहशत में रद्द हुईं 92 फ्लाइट्स
एशिया-प्रशांत क्षेत्र में इस समय मौसम का मिजाज बेहद खतरनाक बना हुआ है। पश्चिमी प्रशांत महासागर और दक्षिण चीन सागर के आसपास अगस्त के आखिरी दिनों में एक साथ कई उष्णकटिबंधीय सिस्टम सक्रिय हुए हैं। इनमें टाइफून नारा, टाइफून साउदेल, गाएनारी और अतसानी शामिल रहे। हालांकि सभी सिस्टम एक जैसी ताकत के नहीं हैं और कुछ कमजोर भी पड़ चुके हैं, लेकिन इनकी वजह से चीन, जापान, ताइवान और आसपास के इलाकों में भारी बारिश, तेज हवाओं, बाढ़ और समुद्री लहरों का खतरा बढ़ गया है।
सबसे ज्यादा चिंता इस समय चीन के दक्षिणी हिस्सों में नारा से हुई भारी बारिश और बाढ़ को लेकर है, जबकि साउदेल अब चीन के पूर्वी तट की ओर बढ़ रहा है। मौसम विभागों के पूर्वानुमान के मुताबिक 27 और 28 अगस्त के दौरान साउदेल का असर चीन के पूर्वी तटीय इलाकों में गंभीर हो सकता है।
हैनान में नारा ने बदला पूरा नजारा
टाइफून नारा ने चीन के दक्षिणी द्वीपीय प्रांत हैनान में दस्तक दी और इसके बाद भारी बारिश ने आसपास के इलाकों में मुश्किलें बढ़ा दीं। नारा के प्रभाव से हैनान के अलावा गुआंग्शी और गुआंगदोंग में भी भारी बारिश हुई। कई इलाकों में पानी भर गया और निचले क्षेत्रों में बाढ़ की स्थिति पैदा हो गई।
नारा के चीन पहुंचने से पहले ही गुआंग्शी के कई हिस्से लगातार बारिश से जूझ रहे थे। चोंगजुओ इलाके में बाढ़ का पानी बेहद खतरनाक स्तर तक पहुंच गया। रिपोर्टों के मुताबिक वहां पानी का स्तर 2008 में दर्ज किए गए रिकॉर्ड से भी ऊपर चला गया, जिसके बाद बड़े पैमाने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना पड़ा।
रिपोर्टों के अनुसार गुआंग्शी में करीब 54,000 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया गया, जबकि चोंगजुओ में अकेले 15,000 से अधिक लोगों को निकाला गया। यह आंकड़ा बताता है कि हालात कितने गंभीर हो चुके थे।
नदियों का बढ़ा जलस्तर, बाढ़ का खतरा
नारा के साथ आई भारी बारिश का सबसे बड़ा असर नदियों और निचले इलाकों पर देखने को मिला। गुआंग्शी के कई हिस्सों में नदियों का पानी चेतावनी स्तर से ऊपर पहुंच गया। कुछ जगहों पर बाढ़ का पानी घरों और दुकानों में घुस गया।
भारी बारिश की वजह से सिर्फ शहरी बाढ़ का खतरा नहीं बढ़ा, बल्कि पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन की आशंका भी बढ़ गई। दक्षिणी चीन के कई इलाकों में प्रशासन को हाई अलर्ट पर रखा गया और संवेदनशील क्षेत्रों में लोगों की आवाजाही को सीमित किया गया।
स्थानीय प्रशासन ने कई व्यवसायों और पर्यटन गतिविधियों को बंद करने के निर्देश दिए। इसका मकसद लोगों को बाढ़ और तेज हवाओं के बीच अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से रोकना था। हैनान और गुआंग्शी जैसे पर्यटन वाले क्षेत्रों में मौसम की मार का असर सामान्य जनजीवन और कारोबार पर भी पड़ा।
नारा के बाद अब साउदेल की बारी
दक्षिणी चीन में नारा से पैदा हुई स्थिति पूरी तरह सामान्य भी नहीं हुई थी कि टाइफून साउदेल ने चिंता बढ़ा दी। साउदेल पहले जापान के दक्षिण-पश्चिमी द्वीपों की तरफ बढ़ा और फिर पश्चिम की दिशा में मुड़ते हुए पूर्वी चीन सागर की ओर आया।
हांगकांग ऑब्जर्वेटरी के पूर्वानुमान के मुताबिक 27 अगस्त को साउदेल के केंद्र के आसपास हवा की अधिकतम रफ्तार करीब 145 किलोमीटर प्रति घंटे और 28 अगस्त को करीब 140 किलोमीटर प्रति घंटे रहने का अनुमान था। इसके बाद सिस्टम के कमजोर होकर आगे बढ़ने की संभावना जताई गई थी।
चीन के राष्ट्रीय मौसम विज्ञान केंद्र से जुड़े पूर्वानुमानों के अनुसार साउदेल के झेजियांग और फुजियान के बीच तट से टकराने की संभावना जताई गई थी। इसी वजह से पूर्वी चीन के तटीय इलाकों में प्रशासन ने पहले से तैयारियां शुरू कर दी थीं।
जापान में भी तूफान का असर
साउदेल का असर चीन तक पहुंचने से पहले ही जापान के दक्षिण-पश्चिमी द्वीपों पर दिखाई दिया। ओकिनावा और अमामी द्वीप समूह में तेज हवाओं और भारी बारिश के कारण जनजीवन प्रभावित हुआ।
रिपोर्टों के मुताबिक साउदेल के कारण जापान के कागोशिमा प्रांत में करीब 35,000 घरों की बिजली चली गई, जबकि ओकिनावा के नाहा एयरपोर्ट से आने-जाने वाली करीब 150 उड़ानें रद्द की गईं। तेज हवाओं और खराब मौसम के कारण समुद्री और हवाई यातायात पर भी असर पड़ा।
जापान की एयरलाइन एएनए ने भी 27 अगस्त को ओकिनावा के नाहा, मियाको और इशिगाकी के लिए कुछ उड़ानों के रद्द होने की जानकारी दी थी। यात्रियों को उड़ान की स्थिति पहले से जांचने की सलाह दी गई।
एक साथ चार सिस्टम क्यों बना चिंता का कारण?
अगस्त के इस मौसम में पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में एक साथ कई उष्णकटिबंधीय सिस्टम का सक्रिय होना मौसम विशेषज्ञों के लिए खास स्थिति है। 26 अगस्त की रिपोर्टों के मुताबिक नारा के साथ साउदेल, गाएनारी और अतसानी भी क्षेत्र में सिस्टम के रूप में मौजूद रहे। हालांकि उनकी ताकत और स्थिति अलग-अलग थी।
यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है कि चारों सिस्टम को एक ही समय में चार शक्तिशाली टाइफून कहना सही नहीं होगा। गाएनारी पहले ही कमजोर होकर खत्म हो चुका था, जबकि अतसानी भी 25 अगस्त तक कमजोर पड़कर उष्णकटिबंधीय चक्रवात के रूप में समाप्त होने की स्थिति में पहुंच गया था।
इसलिए मौजूदा खतरे का मुख्य केंद्र नारा से हुई भारी बारिश और साउदेल का पूर्वी चीन की ओर बढ़ना है।
अगले 24 से 72 घंटे क्यों महत्वपूर्ण?
मौसम की स्थिति को देखते हुए 27 से 29 अगस्त का समय चीन के कई हिस्सों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नारा के कारण दक्षिणी चीन में पहले से जमीन में नमी बहुत अधिक है। ऐसे में अगर दोबारा भारी बारिश होती है तो नदियों का जलस्तर और बढ़ सकता है तथा निचले इलाकों में बाढ़ की स्थिति गंभीर हो सकती है।
दूसरी तरफ साउदेल का प्रभाव पूर्वी चीन के तटीय क्षेत्रों में तेज हवाओं और भारी बारिश के रूप में दिखाई दे सकता है। चीन के तटीय प्रशासन ने बंदरगाहों, मछली पकड़ने वाली नौकाओं और पर्यटन क्षेत्रों को लेकर सावधानी बढ़ाई है।
यानी खतरा केवल समुद्र तक सीमित नहीं है। समुद्र में तूफान कमजोर भी पड़ जाए तो उसके साथ आने वाली भारी बारिश जमीन पर बाढ़ और भूस्खलन का खतरा पैदा कर सकती है।
पर्यटन और कारोबार पर भी बड़ा असर
तूफानों के कारण दक्षिणी और पूर्वी चीन के पर्यटन उद्योग को भी झटका लगा है। समुद्र तट, द्वीप और वाटर स्पोर्ट्स जैसी गतिविधियों को रोकना पड़ा है। कुछ संवेदनशील क्षेत्रों में व्यवसायों को अस्थायी रूप से बंद करने के निर्देश दिए गए हैं।
झेजियांग प्रांत में भी तटीय पर्यटन क्षेत्रों को बंद किया गया और हजारों पर्यटकों को सुरक्षित स्थानों से हटाया गया। यह कदम इसलिए उठाया गया ताकि समुद्र में अचानक मौसम खराब होने पर पर्यटकों की जान खतरे में न पड़े।
चीन के लिए सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
इस समय चीन के सामने सबसे बड़ी चुनौती एक के बाद एक आने वाले मौसम प्रणालियों का सामना करना है। दक्षिणी हिस्सों में नारा पहले ही भारी बारिश और बाढ़ का असर छोड़ चुका है। जमीन में पानी भर जाने के बाद अगर फिर से भारी बारिश होती है तो हालात तेजी से बिगड़ सकते हैं।
दूसरी ओर साउदेल पूर्वी तट की ओर बढ़ रहा है। ऐसे में राहत और बचाव एजेंसियों को एक साथ कई मोर्चों पर काम करना पड़ सकता है।
हालांकि मौसम की दिशा और तूफान की ताकत में लगातार बदलाव संभव है। इसलिए किसी भी इलाके के लिए अंतिम खतरे का आकलन स्थानीय मौसम विभाग की ताजा चेतावनी के आधार पर ही किया जाना चाहिए।
एशिया के लिए मौसम की बड़ी चेतावनी
पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में इस समय जो स्थिति बनी है, वह एक बड़ी याद दिलाती है कि उष्णकटिबंधीय तूफानों का असर केवल उस जगह तक सीमित नहीं रहता जहां वे समुद्र से जमीन पर पहुंचते हैं। तेज हवाओं के अलावा भारी बारिश, बाढ़, भूस्खलन, बिजली कटौती, उड़ानों का रद्द होना और समुद्री यातायात में बाधा कई देशों को प्रभावित कर सकती है।
नारा ने दक्षिणी चीन में इसका उदाहरण पहले ही दिखा दिया है। वहीं साउदेल ने जापान में बिजली और हवाई यातायात को प्रभावित किया है और अब चीन के पूर्वी तट की ओर बढ़ रहा है।
फिलहाल विशेषज्ञों की नजर साउदेल की आगे की दिशा और उसकी ताकत पर टिकी है। आने वाले दिनों में इसके कमजोर होने या दिशा में बदलाव से खतरे का स्तर बदल सकता है। लेकिन दक्षिणी चीन में नारा के बाद पहले से मौजूद बाढ़ के हालात को देखते हुए अगले कुछ दिन बेहद सावधानी वाले हैं।
यानी कुदरत का यह खेल अभी खत्म नहीं हुआ है—दक्षिणी चीन नारा के घाव से उबर ही रहा है और पूर्वी चीन की ओर साउदेल की दस्तक ने एक नई चुनौती खड़ी कर दी है।

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