100 फीट ऊंचे पेड़ पर 3 घंटे तक लटका रहा 'मौत का कैदी', फिर जो हुआ उसने सबको हैरान कर दिया!
मुरादाबाद: उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जनपद से इंसानियत और संवेदनशीलता की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने हर किसी का दिल जीत लिया। मुगलपुरा कोतवाली क्षेत्र के काली माता मंदिर (लालबाग) चौकी के पास लगभग 100 फीट ऊंचे विशालकाय पीपल के पेड़ पर एक चील पतंग के घातक मांझे में उलझकर जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रही थी। पक्षी की दर्दनाक हालत देखकर स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद पुलिस, फायर ब्रिगेड और स्थानीय नागरिकों ने करीब तीन घंटे तक लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर चील को सुरक्षित बाहर निकाला।
यह घटना न केवल पुलिस की तत्परता बल्कि समाज में मौजूद मानवीय संवेदनाओं की भी एक प्रेरणादायक मिसाल बन गई। रेस्क्यू के दौरान मौजूद लोगों ने पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम का तालियों से स्वागत किया और उनके इस प्रयास की जमकर सराहना की।
एक सतर्क युवक की सूचना से शुरू हुआ पूरा रेस्क्यू ऑपरेशन
जानकारी के अनुसार, स्थानीय निवासी आयुष कौशिक, पुत्र प्रमोद कौशिक, जब काली माता मंदिर क्षेत्र से गुजर रहे थे, तभी उनकी नजर पीपल के ऊंचे पेड़ पर फंसी एक चील पर पड़ी। चील नायलॉन के मांझे या किसी तार में इस तरह उलझ गई थी कि वह न तो उड़ पा रही थी और न ही खुद को छुड़ा पा रही थी।
पक्षी लगातार फड़फड़ा रहा था और उसकी हालत देखकर साफ लग रहा था कि यदि समय रहते मदद नहीं मिली तो उसकी जान जा सकती है। आयुष ने बिना देर किए तुरंत डायल 112 पर सूचना दी और पूरे मामले से पुलिस को अवगत कराया।
112 टीम ने दिखाई तत्परता, चौकी प्रभारी ने तुरंत संभाली कमान
सूचना मिलते ही पीआरबी 112 की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। पेड़ की ऊंचाई और पक्षी की स्थिति को देखते हुए टीम ने तुरंत लालबाग चौकी प्रभारी उपनिरीक्षक (SI) ओम शुक्ला को सूचना दी।
चौकी प्रभारी ओम शुक्ला भी तत्काल पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने देखा कि पेड़ की ऊंचाई करीब 100 फीट होने के कारण सामान्य तरीके से चील को बचाना लगभग असंभव था। ऐसे में उन्होंने बिना समय गंवाए फायर ब्रिगेड मुरादाबाद के कंट्रोल रूम से संपर्क कर विशेष सहायता मांगी।
फायर ब्रिगेड पहुंची तो शुरू हुआ चुनौतीपूर्ण अभियान
कुछ ही देर में फायर ब्रिगेड की टीम आवश्यक उपकरणों के साथ मौके पर पहुंच गई। टीम अपने साथ लंबी सीढ़ियां, बांस और अन्य रेस्क्यू उपकरण लेकर आई।
लेकिन सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि घटना स्थल तंग गलियों के बीच स्थित था, जहां भारी वाहन और उपकरणों को पहुंचाना आसान नहीं था। इसके बावजूद पुलिस और दमकल विभाग ने हिम्मत नहीं हारी।
मौके पर मौजूद सभी अधिकारियों ने रणनीति बनाई और तय किया कि संयुक्त प्रयास से ही इस मुश्किल रेस्क्यू को सफल बनाया जा सकता है।
करीब 30 लोगों ने मिलकर किया तीन घंटे तक संघर्ष
रेस्क्यू ऑपरेशन में लगभग 15 पुलिसकर्मी और 15 स्थानीय नागरिक शामिल हुए। सभी ने बिना किसी स्वार्थ के एकजुट होकर बेजुबान पक्षी की जान बचाने का संकल्प लिया।
फायर ब्रिगेड के चालक रूपेंद्र कुमार, दरोगा अतुल कुमार, राजू सिंह और स्थानीय निवासी दानिश, सालिम तथा मुदस्सिर सहित अन्य लोगों ने मिलकर लंबी सीढ़ियों और बांसों को जोड़कर एक विशेष व्यवस्था तैयार की।
लगभग तीन घंटे तक लगातार चले इस अभियान में हर कदम बेहद जोखिम भरा था। पेड़ की ऊंचाई, तेज हवा और मांझे में बुरी तरह फंसी चील को सुरक्षित निकालना आसान नहीं था, लेकिन टीम ने धैर्य और सावधानी के साथ पूरा ऑपरेशन जारी रखा।
आखिरकार मिली सफलता, सुरक्षित निकाली गई चील
करीब तीन घंटे की कठिन मेहनत के बाद रेस्क्यू टीम को सफलता मिली। सभी के सामूहिक प्रयास से चील को बिना किसी गंभीर चोट के सुरक्षित नीचे उतार लिया गया।
नीचे लाने के बाद उसकी प्राथमिक जांच की गई। राहत की बात यह रही कि चील पूरी तरह स्वस्थ थी और उसे कोई गंभीर चोट नहीं लगी थी।
जांच पूरी होने के बाद चील को खुले आसमान में छोड़ दिया गया। जैसे ही वह दोबारा अपने पंख फैलाकर आसमान की ओर उड़ान भरने लगी, वहां मौजूद लोगों के चेहरों पर खुशी साफ दिखाई देने लगी।
ओम शुक्ला ने की भावुक अपील
रेस्क्यू ऑपरेशन के सफल होने के बाद लालबाग चौकी प्रभारी एसआई ओम शुक्ला ने लोगों से भावुक अपील की।
उन्होंने कहा कि बेजुबान जानवर और पक्षी भी इस धरती के महत्वपूर्ण जीव हैं और उनकी रक्षा करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। उन्होंने लोगों से विशेष रूप से नायलॉन और चाइनीज मांझे का उपयोग पूरी तरह बंद करने की अपील की।
उन्होंने कहा कि ऐसे मांझे न केवल पक्षियों के लिए जानलेवा साबित होते हैं, बल्कि कई बार इंसानों के लिए भी गंभीर दुर्घटनाओं का कारण बनते हैं।
चाइनीज मांझा बन रहा है बड़ी समस्या
विशेषज्ञों के अनुसार नायलॉन और चाइनीज मांझा बेहद मजबूत और धारदार होता है। पतंगबाजी के दौरान यह पेड़ों, बिजली के तारों और अन्य स्थानों पर फंस जाता है, जिससे पक्षी उड़ते समय इसकी चपेट में आ जाते हैं।
हर साल बड़ी संख्या में चील, कबूतर, तोते और अन्य पक्षी इसी तरह घायल हो जाते हैं। कई मामलों में समय पर इलाज या रेस्क्यू न मिलने के कारण उनकी मौत भी हो जाती है।
इसी वजह से कई राज्यों में प्रशासन समय-समय पर चाइनीज मांझे के उपयोग और बिक्री पर प्रतिबंध लगाने के लिए अभियान चलाता रहता है।
पुलिस और जनता की साझेदारी बनी मिसाल
इस पूरे अभियान की सबसे खास बात यह रही कि इसमें केवल सरकारी विभाग ही नहीं, बल्कि आम नागरिकों ने भी पूरी जिम्मेदारी के साथ हिस्सा लिया।
स्थानीय लोगों ने बिना किसी झिझक के पुलिस और फायर ब्रिगेड का सहयोग किया। सभी ने मिलकर यह साबित कर दिया कि जब समाज और प्रशासन एक साथ खड़े होते हैं तो किसी भी चुनौती का सामना किया जा सकता है।
रेस्क्यू पूरा होने के बाद मौके पर मौजूद लोगों ने पुलिस, फायर ब्रिगेड और स्थानीय मददगारों के सम्मान में जोरदार तालियां बजाईं। लोगों ने इस अभियान को इंसानियत की एक शानदार मिसाल बताया।
मानवीय संवेदनाओं ने जीता लोगों का दिल
आज के समय में जहां अक्सर नकारात्मक खबरें सुर्खियां बनती हैं, वहीं मुरादाबाद की यह घटना समाज को एक सकारात्मक संदेश देती है। एक बेजुबान पक्षी की जान बचाने के लिए पुलिस, फायर ब्रिगेड और आम नागरिकों का तीन घंटे तक लगातार प्रयास यह दर्शाता है कि मानवता आज भी जीवित है।
यह रेस्क्यू केवल एक पक्षी को बचाने की कहानी नहीं, बल्कि यह संदेश भी है कि हर जीवन अनमोल है। यदि हर नागरिक इसी तरह सतर्कता और संवेदनशीलता दिखाए तो न जाने कितने बेजुबान जीवों की जान बचाई जा सकती है।
मुरादाबाद का यह मानवीय अभियान अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग पुलिस, दमकल विभाग तथा सहयोग करने वाले स्थानीय नागरिकों की खुले दिल से प्रशंसा कर रहे हैं।

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