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103-104° बुखार से दहशत! अस्पतालों में बढ़े मरीज… कहीं ये H1N1 का नया खतरा तो नहीं?



देश में इन दिनों फ्लू जैसे लक्षणों को लेकर लोगों की चिंता बढ़ रही है। खासकर दिल्ली में इन्फ्लुएंजा-A और H1N1 के मामलों में तेजी के बाद स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। 23 अगस्त तक दिल्ली में 1,777 से अधिक H1N1 मामले सामने आने की रिपोर्ट है। केंद्र सरकार भी स्थिति की निगरानी कर रही है और अस्पतालों की तैयारियों की समीक्षा की गई है।

हालांकि, भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ने स्पष्ट किया है कि देश में H1N1 का कोई नया स्ट्रेन सामने नहीं आया है। विशेषज्ञों के मुताबिक मौजूदा स्थिति को मौसमी इन्फ्लुएंजा की गतिविधि से जोड़कर देखा जा रहा है और इसे लेकर घबराने की जरूरत नहीं है।

तेज बुखार, खांसी और बदन दर्द को न करें नजरअंदाज

फ्लू की शुरुआत कई बार अचानक तेज बुखार, खांसी, गले में खराश, सिरदर्द, मांसपेशियों और शरीर में दर्द तथा अत्यधिक थकान से हो सकती है। कुछ मरीजों में बुखार काफी तेज हो सकता है। हालांकि केवल बुखार की ऊंचाई देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि संक्रमण H1N1 है या कोई दूसरा वायरल संक्रमण।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार इन्फ्लुएंजा आमतौर पर अचानक बुखार और सांस से जुड़े लक्षणों के साथ शुरू होता है। ज्यादातर लोग लगभग एक सप्ताह में ठीक हो जाते हैं, लेकिन कुछ हाई-रिस्क मरीजों में संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है।

यही वजह है कि लगातार तेज बुखार, सांस लेने में परेशानी या तेजी से बिगड़ती हालत को सामान्य वायरल समझकर घर पर लंबे समय तक इलाज करना जोखिम भरा हो सकता है।

H1N1 को क्यों कहा जाता है स्वाइन फ्लू?

H1N1 इन्फ्लुएंजा-A वायरस का एक सबटाइप है। इसे आम बोलचाल में स्वाइन फ्लू कहा जाता है, लेकिन यह नाम पूरी तरह सटीक नहीं माना जाता। WHO के अनुसार मौजूदा मानव इन्फ्लुएंजा-A वायरस में H1N1 और H3N2 प्रमुख सबटाइप हैं। H1N1 को A(H1N1)pdm09 के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि इसी वायरस ने 2009 में महामारी का रूप लिया था।

इन्फ्लुएंजा वायरस लगातार बदलते रहते हैं। इसी वजह से दुनिया भर में वायरस की निगरानी की जाती है और वैक्सीन की संरचना को समय-समय पर अपडेट किया जाता है, ताकि फैल रहे वायरस के अनुरूप बेहतर सुरक्षा दी जा सके।

इन लोगों के लिए खतरा ज्यादा

फ्लू हर उम्र के व्यक्ति को प्रभावित कर सकता है, लेकिन कुछ लोगों में गंभीर बीमारी और जटिलताओं का खतरा अपेक्षाकृत ज्यादा होता है। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं—

  • 5 साल से कम उम्र के बच्चे

  • 65 साल या उससे अधिक उम्र के बुजुर्ग

  • गर्भवती महिलाएं

  • कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोग

  • अंग प्रत्यारोपण करा चुके मरीज

  • इम्यूनोसप्रेसेंट दवाएं लेने वाले लोग

  • डायबिटीज जैसे लंबे समय से चल रहे रोगों वाले मरीज

  • क्रॉनिक फेफड़ों की बीमारी से जूझ रहे लोग

  • किडनी और अन्य गंभीर बीमारियों वाले मरीज

  • अन्य गंभीर या लंबे समय से चल रही बीमारियों वाले लोग

WHO भी बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पुरानी बीमारियों या कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों को इन्फ्लुएंजा की जटिलताओं के लिहाज से हाई-रिस्क समूह में रखता है।

कोविड और H1N1 में अंतर करना क्यों मुश्किल?

बुखार, खांसी, गले में खराश, नाक बहना या बंद होना, सिरदर्द, थकान और शरीर में दर्द जैसे लक्षण कोविड और इन्फ्लुएंजा दोनों में दिखाई दे सकते हैं। इसलिए सिर्फ लक्षण देखकर यह निश्चित करना हमेशा संभव नहीं होता कि मरीज को फ्लू है या कोविड।

स्वाद और गंध चले जाना कोविड से जुड़ा एक चर्चित लक्षण रहा है, लेकिन इसके न होने का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति को कोविड नहीं हो सकता। इसी तरह केवल तेज बुखार को H1N1 का पक्का संकेत मानना भी सही नहीं है।

WHO के अनुसार कई अन्य श्वसन वायरस भी फ्लू जैसे लक्षण पैदा कर सकते हैं, इसलिए कुछ परिस्थितियों में प्रयोगशाला जांच के जरिए संक्रमण की पुष्टि करनी पड़ सकती है।

भीड़ में मास्क और दूरी बनाना हो सकता है मददगार

इन्फ्लुएंजा संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने से निकलने वाली बूंदों और सांस संबंधी कणों के जरिए फैल सकता है। भीड़भाड़ वाली जगहों, स्कूलों, सार्वजनिक परिवहन, बाजारों और कम वेंटिलेशन वाले स्थानों में संक्रमण फैलने की संभावना बढ़ सकती है।

ऐसे में जरूरत के अनुसार अच्छी तरह फिट होने वाला मास्क पहनना, बीमार व्यक्ति से दूरी रखना और हाथों की स्वच्छता बनाए रखना उपयोगी सावधानियां हैं। WHO भी खांसते या छींकते समय मुंह-नाक ढकने, हाथ धोने और बीमार होने पर दूसरों से दूरी रखने की सलाह देता है।

बीमार हैं तो स्कूल और ऑफिस जाने से बचें

अगर किसी व्यक्ति को बुखार, खांसी, गले में दर्द या फ्लू जैसे दूसरे लक्षण हैं तो उसे दूसरों के संपर्क को कम करना चाहिए। बीमार हालत में स्कूल, ऑफिस या भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से संक्रमण दूसरे लोगों तक पहुंच सकता है।

घर पर रहते हुए पर्याप्त आराम करें और परिवार के बुजुर्गों, छोटे बच्चों तथा पहले से बीमार लोगों से अनावश्यक नजदीकी से बचें।

बंद कमरे में वेंटिलेशन का रखें ध्यान

कम वेंटिलेशन वाले बंद कमरों में लंबे समय तक भीड़ के बीच रहने से श्वसन संक्रमण के प्रसार का जोखिम बढ़ सकता है। इसलिए घर, ऑफिस और स्कूल में जहां संभव हो, हवा के पर्याप्त आवागमन का ध्यान रखना चाहिए।

अगर कमरे में कोई व्यक्ति लगातार खांस या छींक रहा है तो उससे उचित दूरी बनाए रखना भी बेहतर है।

पानी पिएं, आराम करें और खुद से दवा न लें

फ्लू या वायरल संक्रमण के दौरान पर्याप्त आराम और तरल पदार्थ लेना महत्वपूर्ण है। पानी, सूप और अन्य उपयुक्त तरल पदार्थ शरीर में पानी की कमी से बचाने में मदद कर सकते हैं।

लेकिन तेज बुखार होने पर खुद से एंटीबायोटिक शुरू करना सही नहीं है। इन्फ्लुएंजा वायरल संक्रमण है और हर मरीज को एंटीबायोटिक की जरूरत नहीं होती। हाई-रिस्क मरीजों या गंभीर लक्षण वाले लोगों में डॉक्टर जरूरत के अनुसार एंटीवायरल उपचार समेत आगे की चिकित्सा तय कर सकते हैं। WHO के अनुसार हाई-रिस्क या गंभीर मरीजों में एंटीवायरल दवाओं का इस्तेमाल जल्द शुरू करना महत्वपूर्ण हो सकता है।

सांस फूलने लगे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें

अगर तेज बुखार बना हुआ है, मरीज की हालत लगातार बिगड़ रही है या सामान्य देखभाल के बावजूद सुधार नहीं हो रहा है तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

खास तौर पर सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द, अत्यधिक कमजोरी, भ्रम की स्थिति, शरीर में पानी की कमी या तेजी से बिगड़ते लक्षण दिखाई देने पर तत्काल चिकित्सकीय मदद लेना जरूरी है।

हाई-रिस्क समूह के लोगों में फ्लू को हल्के में नहीं लेना चाहिए। समय पर चिकित्सकीय सलाह, उचित जांच, आराम और संक्रमण से बचाव की सावधानियां गंभीर जटिलताओं के जोखिम को कम करने में मदद कर सकती हैं।

घबराने की नहीं, सावधानी की जरूरत

फिलहाल उपलब्ध ताजा जानकारी के मुताबिक भारत में H1N1 के किसी नए स्ट्रेन के उभरने की पुष्टि नहीं हुई है। ICMR ने मौजूदा बढ़ोतरी को मौसमी फ्लू गतिविधि से जोड़ा है। वहीं केंद्र और दिल्ली के स्वास्थ्य अधिकारियों ने निगरानी और अस्पतालों की तैयारी पर जोर दिया है।

इसलिए लोगों को अफवाहों से बचते हुए सावधानी बरतनी चाहिए। खासकर छोटे बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों में फ्लू जैसे लक्षण दिखाई दें तो डॉक्टर की सलाह लेने में देरी नहीं करनी चाहिए।

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