Viral Video: नागपंचमी पर 70 साल के बुजुर्ग में आता है ‘महिषासुर’! फिर जो करते हैं बुधिराम, देखने के लिए उमड़ती है भीड़
उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले के कोल्हुई थाना क्षेत्र के रुद्रपुर शिवनाथ गांव से जुड़ा एक अनोखा और हैरान करने वाला मामला लंबे समय से लोगों के बीच चर्चा का विषय रहा है। यहां करीब 70 वर्षीय बुधिराम को लेकर स्थानीय लोगों में एक खास धार्मिक मान्यता है। बताया जाता है कि नागपंचमी के अवसर पर वह कुछ समय के लिए पशुओं की तरह व्यवहार करने लगते हैं और जानवरों के लिए रखे नाद में रखा भूसा और चारा खाने लगते हैं।
इस दृश्य को देखने के लिए आसपास के ही नहीं, बल्कि दूर-दराज के इलाकों से भी लोग पहुंचते हैं। कुछ लोग इसे धार्मिक आस्था से जोड़कर देखते हैं और बुधिराम का आशीर्वाद लेते हैं। वहीं दूसरी ओर, कुछ लोग इसे अंधविश्वास का उदाहरण मानते हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि ‘महिषासुर’ या ‘भैंसासुर’ के उनके शरीर में आने की बात एक स्थानीय धार्मिक मान्यता और स्वयं बुधिराम के दावे के रूप में सामने आती है। इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है।
नागपंचमी पर बदल जाता है माहौल
रिपोर्टों के मुताबिक, रुद्रपुर शिवनाथ गांव के रहने वाले बुधिराम लंबे समय से नागपंचमी के मौके पर यह परंपरा निभाते आ रहे हैं। सामान्य दिनों में वह बिल्कुल सामान्य जीवन जीते हैं, लेकिन नागपंचमी के अवसर पर गांव में उनके आसपास श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगती है।
बताया जाता है कि गांव में माता के मंदिर के पास पशुओं के लिए रखे जाने वाले नाद में भूसा और चारा रखा जाता है। इसी दौरान बुधिराम नाद के पास बैठकर उसमें मुंह डालकर चारा खाने लगते हैं।
वायरल वीडियो में भी उन्हें इसी तरह भूसा खाते हुए देखा गया था। आसपास खड़े लोग इस पूरे दृश्य को मोबाइल फोन में रिकॉर्ड करते नजर आए। कुछ लोग धार्मिक जयकारे लगाते दिखाई दिए तो कुछ लोग उनके पास जाकर आशीर्वाद लेते हुए नजर आए।
40-45 साल से चली आ रही मान्यता
बुधिराम को लेकर सामने आई जानकारी के अनुसार, उनका कहना है कि करीब 40 से 45 वर्षों से नागपंचमी के दौरान उनके ऊपर ‘भैंसासुर की सवारी’ आती है।
उनके मुताबिक यह घटना हर साल नहीं होती, बल्कि एक खास अंतराल पर होती है। रिपोर्टों में बताया गया है कि यह परंपरा हर तीन साल में नागपंचमी के दिन देखने को मिलती है।
बाकी दिनों में बुधिराम सामान्य व्यक्ति की तरह अपना जीवन बिताते हैं। यही वजह है कि स्थानीय लोगों के बीच इस घटना को लेकर जिज्ञासा बनी रहती है।
लोगों के लिए सबसे हैरान करने वाली बात यह होती है कि एक सामान्य बुजुर्ग व्यक्ति अचानक पशुओं के नाद में जाकर भूसा खाने लगता है और वहां मौजूद लोग इसे धार्मिक घटना के तौर पर देखते हैं।
पहले रोडवेज कर्मचारी रह चुके हैं बुधिराम
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, बुधिराम रोडवेज के सेवानिवृत्त कर्मचारी हैं। सामान्य जीवन में उनका व्यवहार दूसरे लोगों की तरह ही बताया गया है।
यही कारण है कि नागपंचमी के अवसर पर होने वाला उनका यह व्यवहार स्थानीय लोगों के लिए और भी रहस्यमय लगता है। गांव के लोग इस घटना को वर्षों से देखते आ रहे हैं और इसी वजह से कई लोगों के बीच इसके प्रति धार्मिक विश्वास भी बना हुआ है।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि किसी व्यक्ति के व्यवहार को किसी देवी-देवता या धार्मिक शक्ति के प्रभाव के रूप में वैज्ञानिक रूप से साबित नहीं किया गया है। ऐसी घटनाओं को समझने के लिए मानसिक, सामाजिक और सांस्कृतिक पहलुओं को भी ध्यान में रखना जरूरी होता है।
ये जानवरों का चारा खाने वाले का नाम बुधिराम है, बताया जा रहा है इनके शरीर में नागपंचमी के दिन महिषासुर आते है।
— Ashish Paswan (@ashishpaswan0) August 19, 2026
शरीर में महिषासुर के आने के कारण ये जानवरों की तरह चारा खाने लगते है। 70 वर्षीय बुधिराम को देखने से दूर-दूर से लोग आते है। चढ़ावा चढ़ता है और लोग पूजा भी करते हैं।… pic.twitter.com/NFmEhgqdAS
चारा खाने के दौरान जुटती है भीड़
नागपंचमी के मौके पर बुधिराम के आसपास काफी संख्या में लोग जमा हो जाते हैं। कुछ श्रद्धालु फूल-मालाएं लेकर पहुंचते हैं और कुछ लोग उन्हें धार्मिक प्रतीक के रूप में देखते हुए सम्मान देते हैं।
वायरल वीडियो से जुड़े मीडिया रिपोर्टों में लोगों को उन्हें फल और घास खिलाते तथा आशीर्वाद लेते हुए भी दिखाया गया है। कुछ लोग इस दौरान ‘भैंसासुर महाराज’ के जयकारे लगाते हुए भी नजर आए थे।
यह पूरा दृश्य देखने वालों के लिए बेहद अलग होता है। एक तरफ धार्मिक माहौल रहता है तो दूसरी तरफ नाद में रखा चारा खाने वाले बुजुर्ग को देखकर कई लोग हैरान भी रह जाते हैं।
आस्था है या अंधविश्वास?
इस घटना को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि इसे आस्था माना जाए या अंधविश्वास।
धार्मिक मान्यता रखने वाले लोग इसे भैंसासुर से जुड़ी आस्था के तौर पर देखते हैं। उनका मानना है कि नागपंचमी के विशेष अवसर पर बुधिराम के शरीर में भैंसासुर का प्रभाव आता है और इसी वजह से वह पशुओं की तरह चारा खाने लगते हैं।
दूसरी ओर, वैज्ञानिक दृष्टिकोण से किसी व्यक्ति के शरीर में किसी पौराणिक पात्र या आत्मा के प्रवेश करने की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इसे प्रमाणित तथ्य के तौर पर पेश करना उचित नहीं होगा।
यही कारण है कि इस घटना को लेकर मीडिया रिपोर्टों में भी ‘आस्था या अंधविश्वास’ का सवाल उठाया गया है।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था वीडियो
इस मामले को देशभर में चर्चा तब मिली जब नागपंचमी के दौरान बुधिराम का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर वायरल हो गया।
वीडियो में वह पशुओं के नाद के पास बैठे दिखाई देते हैं। नाद में पानी और भूसा-चारा रखा हुआ है और वह उसमें मुंह डालकर चारा खाते नजर आते हैं।
वीडियो बनाने वाले लोग और आसपास मौजूद भीड़ इस दृश्य को देखकर प्रतिक्रिया देती दिखाई देती है। कुछ लोग इसे धार्मिक घटना बताते हैं तो कुछ इसे देखकर हैरान होते हैं।
वीडियो के सोशल मीडिया पर फैलने के बाद महराजगंज के इस गांव की चर्चा दूसरे इलाकों तक पहुंच गई।
नागपंचमी और स्थानीय परंपराओं का संबंध
भारत के अलग-अलग हिस्सों में नागपंचमी को लेकर अलग-अलग परंपराएं और मान्यताएं देखने को मिलती हैं। कहीं नाग देवता की पूजा होती है, कहीं मंदिरों में विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं और कई स्थानों पर स्थानीय देवी-देवताओं से जुड़ी परंपराएं भी निभाई जाती हैं।
रुद्रपुर शिवनाथ में बुधिराम से जुड़ी यह परंपरा भी स्थानीय धार्मिक-सांस्कृतिक मान्यता का हिस्सा बताई जाती है।
ऐसी स्थानीय परंपराएं कई बार पीढ़ियों तक चलती रहती हैं और समय के साथ उनसे जुड़े विश्वास भी मजबूत होते जाते हैं। लेकिन किसी भी धार्मिक मान्यता को वैज्ञानिक तथ्य के रूप में पेश करने से पहले उसके प्रमाण की जांच जरूरी होती है।
सामान्य दिनों में रहते हैं बिल्कुल सामान्य
इस मामले की सबसे दिलचस्प बात यह बताई जाती है कि नागपंचमी के अलावा बुधिराम सामान्य जीवन जीते हैं।
रिपोर्टों में उनके हवाले से कहा गया है कि यह घटना कुछ समय के लिए होती है और पूजा-पाठ के बाद वह सामान्य अवस्था में लौट आते हैं।
यही वजह है कि स्थानीय लोगों में उनके प्रति धार्मिक जिज्ञासा बनी हुई है और नागपंचमी के मौके पर बड़ी संख्या में लोग उन्हें देखने पहुंचते हैं।
विशेषज्ञों की नजर से भी समझना जरूरी
किसी व्यक्ति के व्यवहार में अचानक बदलाव को केवल धार्मिक या अलौकिक घटना मान लेना उचित नहीं है। ऐसे व्यवहार के पीछे कई मनोवैज्ञानिक, सामाजिक और सांस्कृतिक कारण हो सकते हैं।
यदि किसी व्यक्ति में बार-बार असामान्य व्यवहार दिखाई देता है तो परिवार और समाज को उसे तमाशे की तरह देखने के बजाय जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेने पर भी विचार करना चाहिए।
साथ ही, किसी भी धार्मिक परंपरा को निभाते समय व्यक्ति की सुरक्षा का ध्यान रखना भी जरूरी है। चारा या भूसा मनुष्य के सामान्य भोजन का हिस्सा नहीं है और इसे खाने से स्वास्थ्य संबंधी जोखिम हो सकते हैं। इसलिए ऐसी स्थिति में स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
गांव से निकली कहानी ने पूरे देश का ध्यान खींचा
महराजगंज के रुद्रपुर शिवनाथ गांव के बुधिराम से जुड़ा यह मामला इसलिए भी चर्चा में आया क्योंकि इसमें धार्मिक विश्वास, स्थानीय परंपरा और सोशल मीडिया—तीनों एक साथ दिखाई देते हैं।
एक ओर गांव के लोगों के लिए यह वर्षों पुरानी आस्था से जुड़ी घटना है, तो दूसरी ओर इंटरनेट पर वीडियो देखने वाले लोगों के लिए यह बेहद असामान्य दृश्य है।
बुधिराम का दावा है कि नागपंचमी के अवसर पर उनके ऊपर ‘भैंसासुर की सवारी’ आती है और इसी दौरान वह पशुओं की तरह चारा खाने लगते हैं। हालांकि, इस दावे की कोई वैज्ञानिक पुष्टि नहीं है।
फिलहाल यह घटना एक स्थानीय धार्मिक मान्यता के रूप में ही देखी जानी चाहिए। आस्था रखने वालों के लिए यह श्रद्धा का विषय हो सकता है, लेकिन इसे वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित घटना मानने से पहले पर्याप्त प्रमाण जरूरी हैं।

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