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मां ने खुद भेजा था सामान लेने… कुछ देर बाद मिली बेटे की लाश! बारिश के पानी में छिपा था मौत का करंट, अस्पताल में मचा कोहराम



जिला अस्पताल में गुरुवार को उस समय माहौल बेहद गमगीन हो गया, जब 16 वर्षीय पुरुषोत्तम का शव पोस्टमार्टम के लिए पहुंचा। बेटे की मौत की खबर सुनकर अस्पताल पहुंचे परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। जैसे ही मां मायावती देवी की नजर अपने बेटे के शव पर पड़ी, वह खुद को संभाल नहीं सकीं। वह बेटे से लिपटकर बिलखने लगीं और बार-बार उसके चेहरे को सहलाते हुए उसे उठने के लिए कहती रहीं।

मां की आंखों के सामने कुछ घंटे पहले की वह तस्वीर घूम रही थी, जब उनका बेटा बारिश के बीच छाता लेकर सामान लेने घर से निकला था। किसी को अंदाजा नहीं था कि घर से निकला 16 वर्षीय पुरुषोत्तम अब कभी वापस नहीं आएगा। परिवार के लिए सबसे दर्दनाक बात यह रही कि जिस बेटे को मां ने खुद सामान लेने भेजा था, उसी की मौत की खबर कुछ देर बाद उनके सामने आ गई।

बेटे के शव से लिपटकर बिलखती रही मां

जिला अस्पताल में बेटे का शव देखते ही मायावती देवी की चीख निकल गई। वह शव से लिपटकर रोने लगीं। कभी बेटे का चेहरा सहलातीं तो कभी उसके सिर को अपनी गोद में रखकर उसे उठाने की कोशिश करतीं।

मां बार-बार खुद को दोष देती रहीं। उनकी जुबान पर यही बात थी कि बेटे को सामान लेने उन्होंने ही भेजा था। बारिश हो रही थी, इसलिए पुरुषोत्तम छाता लेकर घर से निकला था। लेकिन रास्ते में हुए हादसे ने कुछ ही पलों में परिवार की जिंदगी बदल दी।

मां का दर्द देखकर अस्पताल में मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं। वहां मौजूद रिश्तेदार और पड़ोसी उन्हें संभालने की कोशिश करते रहे, लेकिन बेटे को खोने का गम इतना बड़ा था कि किसी की सांत्वना उनके आंसुओं को रोक नहीं पा रही थी।

भाई की मौत की खबर सुनकर अस्पताल पहुंचे किशन और बहनें

पुरुषोत्तम परिवार का बड़ा बेटा बताया जा रहा है। उसकी मौत की खबर मिलते ही छोटा भाई किशन और बहनें प्रीती व प्रिया भी जिला अस्पताल पहुंचीं।

अस्पताल में भाई का शव देखते ही तीनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। बहनें भाई को पुकारकर चीखती रहीं। उनकी चीखों से अस्पताल का माहौल और भी गमगीन हो गया।

रिश्तेदार उन्हें संभालने की कोशिश करते रहे। कोई बहनों को पकड़कर बैठा रहा तो कोई परिवार के अन्य सदस्यों को ढांढस देता रहा। लेकिन जिस परिवार ने कुछ ही समय पहले अपने बड़े बेटे को घर से सामान्य तरीके से निकलते देखा था, उसके लिए अचानक आई मौत की खबर को स्वीकार करना बेहद मुश्किल था।

सामान लेने गया था पुरुषोत्तम

परिजनों के मुताबिक, पुरुषोत्तम दोपहर में स्कूल से घर लौटने के बाद सामान लेने के लिए निकला था। उस समय बारिश हो रही थी। बारिश से बचने के लिए वह छाता लेकर घर से निकला।

बताया गया कि घर से करीब 200 मीटर की दूरी पर जलभराव वाले रास्ते से गुजरते समय वह बिजली के पोल के संपर्क में आ गया। पानी में करंट उतरने के कारण वह इसकी चपेट में आ गया।

हादसे की जानकारी मिलते ही आसपास के लोगों में अफरा-तफरी मच गई। परिजनों को घटना की जानकारी दी गई और पुरुषोत्तम को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उसकी जान नहीं बचाई जा सकी।

जलभराव के बीच खड़ा था बिजली का पोल

परिवार के लोगों का आरोप है कि जिस स्थान पर हादसा हुआ, वहां जलभराव था और उसी के बीच बिजली का पोल मौजूद था। बारिश के कारण सड़क पर पानी जमा था।

जलभराव और बिजली के पोल के बीच संपर्क ने स्थिति को बेहद खतरनाक बना दिया। इसी रास्ते से लोगों का आना-जाना भी होता था। हादसे के बाद स्थानीय लोगों में बिजली व्यवस्था और जलभराव को लेकर चिंता और आक्रोश दिखाई दिया।

बारिश के मौसम में जलभराव वाले स्थानों पर खुले बिजली तार, पोल या बिजली से जुड़े उपकरण लोगों के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं। ऐसे में स्थानीय स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।

पिता को खबर मिली तो टूट गए

हादसे के समय पुरुषोत्तम के पिता पप्पू फलमंडी में थे। बेटे के साथ हुए हादसे की सूचना मिलते ही वह जिला अस्पताल पहुंचे।

अस्पताल में बेटे का शव देखते ही उनका धैर्य जवाब दे गया। वह फूट-फूटकर रोने लगे। पिता के लिए यह विश्वास करना मुश्किल था कि जिस बेटे को कुछ समय पहले तक वह स्वस्थ देख रहे थे, वह अब उनके सामने निर्जीव पड़ा है।

परिवार के अन्य सदस्यों और रिश्तेदारों ने उन्हें संभालने की कोशिश की। लेकिन बेटे को खोने का दर्द इतना गहरा था कि वह खुद को संभाल नहीं पा रहे थे।

अस्पताल में हर तरफ सुनाई दे रही थीं चीखें

पुरुषोत्तम के शव के अस्पताल पहुंचते ही परिवार और रिश्तेदारों की भीड़ जमा हो गई। मां, पिता, भाई और बहनों के रोने की आवाज से अस्पताल का माहौल बेहद भावुक हो गया।

कोई मायावती देवी को संभालने की कोशिश कर रहा था तो कोई पुरुषोत्तम के भाई और बहनों को ढांढस बंधा रहा था। रिश्तेदार परिवार के सदस्यों को लगातार समझाने की कोशिश कर रहे थे कि उन्हें हिम्मत रखनी होगी।

लेकिन मां के लिए बेटे की मौत को स्वीकार करना सबसे मुश्किल था। वह बार-बार बेटे के चेहरे को देख रही थीं और उसे पुकार रही थीं।

उनकी हालत देखकर वहां मौजूद लोग भी भावुक हो गए।

राजीव नगर मोहल्ले में छाया मातम

पुरुषोत्तम की मौत की खबर जैसे ही राजीव नगर मोहल्ले में पहुंची, वहां भी शोक की लहर दौड़ गई। परिवार का सबसे बड़ा बेटा इतनी कम उम्र में दुनिया से चला गया, इस खबर ने आसपास के लोगों को भी झकझोर दिया।

लोग परिवार के घर और अस्पताल पहुंचकर परिजनों को सांत्वना देने लगे। मोहल्ले के लोगों में घटना को लेकर दुख के साथ आक्रोश भी देखने को मिला।

स्थानीय लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि आखिर जलभराव वाले रास्ते में बिजली का पोल होने के बावजूद ऐसी स्थिति क्यों बनी रही। बारिश के दौरान बिजली और पानी का संपर्क कितना खतरनाक हो सकता है, यह हादसा उसकी दर्दनाक तस्वीर सामने लाता है।

मां की एक बात ने सभी को कर दिया भावुक

अस्पताल में बेटे के शव से लिपटी मां बार-बार खुद को दोष देती रही। वह कहती रहीं कि सामान लेने उन्होंने ही बेटे को भेजा था।

एक मां के लिए इससे बड़ा सदमा और क्या हो सकता है कि वह अपने बच्चे को घर से खुद किसी काम के लिए भेजे और कुछ देर बाद उसकी मौत की खबर सामने आ जाए।

मायावती देवी को शायद इस बात का अंदाजा भी नहीं था कि बारिश के बीच छाता लेकर घर से निकला उनका बेटा जिंदगी में आखिरी बार घर से बाहर जा रहा है।

उनका बार-बार बेटे को उठाने की कोशिश करना और उसके चेहरे को सहलाना वहां मौजूद हर व्यक्ति को भावुक कर रहा था।

हादसे के बाद उठे सुरक्षा को लेकर सवाल

इस घटना ने बारिश के मौसम में जलभराव वाले इलाकों में बिजली व्यवस्था की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पानी और बिजली का संपर्क बेहद खतरनाक हो सकता है। ऐसे स्थानों पर लोगों की सुरक्षा के लिए समय रहते सावधानी बरतना जरूरी है।

परिवार ने अपने 16 वर्षीय बेटे को खो दिया। एक ऐसा बेटा, जो स्कूल से लौटकर सामान्य दिन की तरह घर आया था और मां के कहने पर सामान लेने निकला था। कुछ ही दूरी पर हुआ हादसा पूरे परिवार की जिंदगी में ऐसा खालीपन छोड़ गया, जिसे भर पाना शायद कभी संभव नहीं होगा।

एक परिवार की दुनिया उजड़ गई

पुरुषोत्तम की मौत सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि एक परिवार के लिए जिंदगी भर का दर्द बन गई है। मां की आंखों के सामने बेटे की आखिरी तस्वीर, पिता की टूटती हुई हिम्मत, भाई की खामोशी और बहनों की चीखें इस घटना की भयावहता को बयां कर रही थीं।

जिस रास्ते से पुरुषोत्तम सामान लेने गया था, वही रास्ता उसके परिवार के लिए हमेशा एक दर्दनाक याद बनकर रह जाएगा।

राजीव नगर मोहल्ले में अब शोक के साथ यह सवाल भी उठ रहा है कि अगर जलभराव और बिजली के पोल की स्थिति को लेकर पहले से पर्याप्त सावधानी बरती जाती, तो शायद इस तरह के हादसे को टाला जा सकता था।

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