Viral Video: बीमार बच्चे को लेकर पानी में उतरी मां, BHU अस्पताल के बाहर का मंजर देख उठे बड़े सवाल! आखिर किसकी है ये जिम्मेदारी?
वाराणसी: काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के अस्पताल में इलाज कराने पहुंचे मरीजों और उनके परिजनों के सामने मंगलवार को बारिश के बाद ऐसा संकट खड़ा हो गया, जिसने शहर की जलनिकासी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। बीएचयू अस्पताल परिसर और वहां पहुंचने वाले रास्तों पर भारी जलभराव के चलते मरीजों और तीमारदारों को पानी के बीच से गुजरना पड़ा। सबसे ज्यादा परेशानी छोटे बच्चों, बुजुर्गों और गंभीर मरीजों के साथ आए परिवारों को हुई। एक मां का बीमार बच्चे को लेकर पानी के बीच अस्पताल पहुंचने का दृश्य सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है।
सोशल मीडिया पर सामने आई तस्वीरों और वीडियो को लेकर लोग अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। इन्हीं प्रतिक्रियाओं में कुछ लोगों ने शहर की जलनिकासी व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए इसे लंबे समय से चली आ रही प्रशासनिक समस्या बताया है। हालांकि वायरल पोस्ट में किए गए सभी राजनीतिक और कर संबंधी दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इतना जरूर है कि मंगलवार को बीएचयू परिसर में भारी जलभराव की स्थिति की स्थानीय रिपोर्टों ने पुष्टि की है।
बारिश के बाद अस्पताल बना तालाब
वाराणसी में सोमवार रात से शुरू हुई बारिश मंगलवार को भी जारी रही। लगातार बारिश के कारण शहर के कई हिस्सों में जलभराव हुआ। बीएचयू परिसर भी इससे अछूता नहीं रहा। स्थानीय रिपोर्ट के मुताबिक अस्पताल के आसपास और ओपीडी से लेकर इमरजेंसी तक जाने वाले रास्तों पर एक फीट से ज्यादा पानी जमा हो गया था। कुछ स्थानों पर पानी कमर तक पहुंचने की स्थिति में था।
स्थिति इतनी खराब रही कि अस्पताल परिसर में स्ट्रेचर और व्हीलचेयर तक आसानी से नहीं पहुंच पा रहे थे। ऐसे में कई लोगों को अपने मरीजों को गोद में उठाकर या कंधे के सहारे अस्पताल तक ले जाना पड़ा। बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह परेशानी और ज्यादा गंभीर थी।
अस्पताल में इलाज के लिए हर दिन बड़ी संख्या में मरीज आते हैं। स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार बीएचयू अस्पताल में रोजाना करीब 6,000 मरीज इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं। ऐसे अस्पताल में बारिश के बाद रास्तों का इस तरह पानी में डूब जाना स्वास्थ्य सेवाओं तक मरीजों की पहुंच को सीधे प्रभावित करता है।
बीमार बच्चे को लेकर पानी के बीच पहुंची मां
वायरल तस्वीरों में सबसे ज्यादा चर्चा एक मां की हो रही है, जो अपने बीमार बच्चे को लेकर अस्पताल पहुंचने की कोशिश करती नजर आ रही है। पानी से भरे रास्ते पर बच्चे को सुरक्षित रखते हुए अस्पताल तक पहुंचना किसी चुनौती से कम नहीं था।
एक तरफ बच्चे को तत्काल डॉक्टर को दिखाने की जरूरत थी, दूसरी तरफ अस्पताल तक पहुंचने वाला रास्ता ही पानी में डूबा हुआ था। ऐसी स्थिति में परिजनों के सामने दोहरी परेशानी खड़ी हो जाती है। उन्हें मरीज को भी संभालना होता है और पानी के बीच सुरक्षित रास्ता भी तलाशना पड़ता है।
बीएचयू अस्पताल में बीमार बच्चें को लेकर माँ डूबते हुए डॉक्टर को दिखाने ले जा रही। सोचिए कि टोल टैक्स, रोड टैक्स, पेट्रोल डीजल पर टैक्स, घरेलू सामान, दवा यहां तक कि कफ़न तक पर GST वसूलने के बाद बीजेपी की ट्रिपल इंजन केंद्र , राज्य और नगर निगम की सरकार हमें इस तरह का ड्रेनेज सिस्टम… pic.twitter.com/onqr1lVRYF
— Justice Morcha (@justicemorcha) August 25, 2026
यह तस्वीर सिर्फ एक परिवार की परेशानी नहीं दिखाती, बल्कि बारिश के दौरान अस्पतालों तक पहुंचने वाली बुनियादी सुविधाओं की अहमियत भी सामने लाती है। अगर किसी गंभीर मरीज को समय पर अस्पताल पहुंचाना हो तो रास्ते में जलभराव भी इलाज की प्रक्रिया में बड़ी बाधा बन सकता है।
बच्चों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी
बीएचयू अस्पताल में जलभराव का असर अलग-अलग विभागों में आने वाले मरीजों पर पड़ा। स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार बाल रोग विभाग में छोटे बच्चों को लेकर पहुंचे अभिभावकों को काफी परेशानी हुई। पानी के बीच बच्चों को लेकर चलना परिवारों के लिए जोखिम भरा रहा।
इसी तरह नेत्र और ईएनटी विभाग में बुजुर्ग मरीजों की संख्या अधिक रहती है। पानी में फिसलने या गिरने का खतरा ऐसे मरीजों के लिए ज्यादा होता है। सामान्य व्यक्ति के लिए जहां पानी से होकर निकलना सिर्फ असुविधा हो सकता है, वहीं बुजुर्ग, छोटे बच्चे और कमजोर मरीजों के लिए यही स्थिति दुर्घटना का कारण बन सकती है।
मरीज बिना डॉक्टर को दिखाए लौटने को मजबूर
जलभराव का असर सिर्फ आने-जाने तक सीमित नहीं रहा। रिपोर्ट के मुताबिक कई मरीज और उनके तीमारदार अस्पताल की स्थिति देखकर बिना डॉक्टर को दिखाए वापस लौटने के लिए मजबूर हुए।
यह स्थिति स्वास्थ्य व्यवस्था के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। अस्पताल में डॉक्टर, दवा, जांच और इलाज की सुविधाएं मौजूद होने के बावजूद यदि मरीज वहां तक सुरक्षित पहुंच ही न सके तो पूरी चिकित्सा व्यवस्था प्रभावित हो जाती है।
विशेष रूप से दूरदराज के जिलों से बीएचयू आने वाले मरीजों के लिए समस्या और बड़ी हो सकती है। बीएचयू केवल वाराणसी ही नहीं बल्कि पूर्वांचल और आसपास के कई क्षेत्रों के मरीजों के लिए प्रमुख चिकित्सा केंद्र है। इसलिए परिसर के अंदर और अस्पताल तक पहुंचने वाले रास्तों की जलनिकासी व्यवस्था का महत्व सामान्य सड़क से कहीं ज्यादा है।
हर साल बारिश में क्यों दोहराती है समस्या?
स्थानीय रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि बारिश के मौसम में बीएचयू अस्पताल में इस तरह का जलभराव पहली बार नहीं हुआ है। हर साल बारिश के दौरान अस्पताल परिसर में पानी जमा होने की समस्या सामने आती रही है।
यही बात अब सबसे बड़ा सवाल बनकर सामने आ रही है—अगर समस्या बार-बार सामने आती है तो इसका स्थायी समाधान क्यों नहीं हो पा रहा?
बारिश के पानी की निकासी के लिए पर्याप्त क्षमता वाली नालियां, नियमित सफाई, जलनिकासी मार्गों की निगरानी और जरूरत के मुताबिक पंपिंग व्यवस्था जैसे उपाय किसी बड़े अस्पताल परिसर के लिए जरूरी माने जाते हैं। खासकर ऐसे अस्पताल में जहां गंभीर मरीज लगातार आते-जाते हैं, वहां जलभराव को सिर्फ बारिश से पैदा हुई सामान्य परेशानी मानकर छोड़ना पर्याप्त नहीं हो सकता।
सोशल मीडिया पर सरकार और नगर निगम पर सवाल
बीएचयू में जलभराव की तस्वीरें सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई। कुछ लोगों ने इसे वाराणसी की स्थानीय शासन व्यवस्था और जलनिकासी से जोड़कर सरकार पर सवाल उठाए।
वायरल पोस्ट में केंद्र, राज्य और नगर निगम की सरकारों को लेकर तीखी राजनीतिक टिप्पणी की गई है। पोस्ट में लंबे समय से भाजपा के शासन का उल्लेख करते हुए पूछा गया है कि इतने वर्षों के शासन के बावजूद शहर की ड्रेनेज व्यवस्था ऐसी स्थिति में क्यों पहुंचती है।
हालांकि इन राजनीतिक दावों को खबर में तथ्य के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा। किसी सरकार या राजनीतिक दल की जिम्मेदारी तय करने के लिए संबंधित विभागों की आधिकारिक जानकारी, बजट, परियोजनाओं, जलनिकासी कार्यों और उनके क्रियान्वयन की स्वतंत्र जांच जरूरी होगी।
लेकिन इतना जरूर है कि सार्वजनिक अस्पताल में मरीजों को कमरभर पानी के बीच पहुंचना पड़ना प्रशासन के सामने बुनियादी सुविधाओं से जुड़ा गंभीर सवाल जरूर खड़ा करता है।
टैक्स और सुविधाओं का सवाल क्यों उठा?
वायरल टिप्पणी में सड़क कर, टोल टैक्स, पेट्रोल-डीजल पर लगने वाले कर और जीएसटी का उल्लेख करते हुए यह सवाल उठाया गया है कि नागरिकों से अलग-अलग माध्यमों से राजस्व लेने के बाद उन्हें बदले में बेहतर सार्वजनिक सुविधाएं क्यों नहीं मिलतीं।
यह सवाल राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है। हालांकि कर व्यवस्था को लेकर सोशल मीडिया पोस्ट में किए गए सभी दावों को एक साथ सही मानना उचित नहीं है। अलग-अलग वस्तुओं और सेवाओं पर जीएसटी की दर और कर व्यवस्था अलग होती है, जबकि सड़क कर और टोल की प्रकृति भी अलग होती है।
इसलिए असली मुद्दा टैक्स की पूरी सूची से ज्यादा यह है कि नागरिकों को उनके शहर में बुनियादी सार्वजनिक सुविधाएं कितनी प्रभावी तरीके से मिल रही हैं।
नगर निगम के सामने बड़ी चुनौती
वाराणसी नगर निगम ने मंगलवार को शहर में जलभराव वाले कई इलाकों में कार्रवाई भी की। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार प्रमुख मार्गों से पानी निकालने और गिरे हुए पेड़ों को हटाने के लिए कार्रवाई की गई।
लेकिन बीएचयू जैसे संवेदनशील परिसर में समस्या का स्थायी समाधान केवल बारिश के बाद पानी निकालने तक सीमित नहीं रह सकता। यहां जरूरत इस बात की है कि बारिश से पहले ड्रेनेज सिस्टम की क्षमता की जांच की जाए, नालियों की सफाई हो और पानी के प्राकृतिक बहाव में आने वाली बाधाओं को दूर किया जाए।
अस्पताल के लिए जलनिकासी क्यों है जरूरी?
किसी भी अस्पताल की व्यवस्था केवल डॉक्टरों और दवाओं से पूरी नहीं होती। मरीजों के लिए अस्पताल तक पहुंचना भी स्वास्थ्य सेवा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
कल्पना कीजिए कि किसी बच्चे को तेज बुखार है, किसी बुजुर्ग को सांस लेने में परेशानी है या किसी मरीज को तत्काल इमरजेंसी में पहुंचाना है और अस्पताल के प्रवेश मार्ग पर पानी भरा हुआ है। ऐसी स्थिति में कुछ मिनटों की देरी भी परिवार के लिए बेहद तनावपूर्ण हो सकती है।
बीएचयू जैसे बड़े चिकित्सा संस्थान के मामले में यह चुनौती और गंभीर हो जाती है, क्योंकि यहां स्थानीय लोगों के साथ-साथ दूसरे जिलों और राज्यों से भी मरीज पहुंचते हैं।
अब सवाल स्थायी समाधान का
बारिश रुकने के बाद पानी कम हो सकता है और रास्ते सामान्य हो सकते हैं, लेकिन तस्वीरों ने जो सवाल खड़ा किया है वह इससे आगे का है। सवाल यह है कि अगली भारी बारिश में क्या फिर वही स्थिति बनेगी?
अगर हर साल अस्पताल परिसर में जलभराव होता है तो प्रशासन को समस्या के मूल कारण की पहचान करनी होगी। सिर्फ पंप लगाकर पानी निकालना तत्काल राहत दे सकता है, लेकिन लंबे समय के लिए ड्रेनेज नेटवर्क की क्षमता, नालियों की सफाई और जल निकासी की पूरी व्यवस्था की समीक्षा जरूरी होगी।
बीएचयू अस्पताल की हालिया तस्वीरों ने इसी बुनियादी सवाल को सामने ला दिया है—जब कोई मां अपने बीमार बच्चे को डॉक्टर तक पहुंचाने के लिए पानी के बीच से गुजरने को मजबूर हो, तो विकास और सार्वजनिक सुविधाओं की असली कसौटी क्या होनी चाहिए?
वाराणसी में बारिश के बाद हुआ यह जलभराव अब केवल मौसम की समस्या नहीं, बल्कि अस्पताल तक सुरक्षित पहुंच, शहर की जलनिकासी व्यवस्था और प्रशासनिक तैयारी पर बहस का कारण बन गया है। आने वाले समय में सबसे अहम यह देखना होगा कि संबंधित एजेंसियां इस घटना से सबक लेकर स्थायी समाधान की दिशा में क्या कदम उठाती हैं।

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