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Monster ने मजाक को बना दिया मुकदमे की वजह! छोटे ब्रांड को भेजा नोटिस, फिर मांगी वकीलों की फीस—जवाब सुनकर रह जाएंगे हैरान!

 


नई दिल्ली: दुनिया की बड़ी एनर्जी ड्रिंक कंपनियों में शामिल Monster Energy एक बार फिर अपने ट्रेडमार्क को लेकर चर्चा में है। सोशल मीडिया पर सामने आए दावों के मुताबिक, एक छोटी कंपनी को उसके एक मजाकिया और बेहद लोकप्रिय फ्लेवर को लेकर Monster की ओर से Cease-and-Desist यानी कानूनी नोटिस मिला। मामला यहीं खत्म नहीं हुआ। दावा है कि छोटी कंपनी से कथित तौर पर इस विवाद से जुड़े कानूनी खर्चों की भरपाई करने की मांग भी की गई।

छोटी कंपनी ने कथित तौर पर इस मांग को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। यही वजह है कि मामला सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि, इस खास मामले में संबंधित कंपनियों की ओर से सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं है, इसलिए इसे फिलहाल रिपोर्ट किए गए दावे के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

मजाक से शुरू हुआ मामला इतना बड़ा कैसे हो गया?

कहानी एक ऐसे फ्लेवर से जुड़ी बताई जा रही है जिसे शुरुआत में मजाक या इंटरनेट जोक के तौर पर देखा गया था। लेकिन लोगों की दिलचस्पी इतनी बढ़ी कि यह कथित तौर पर एक वास्तविक प्रोडक्ट में बदल गया और देखते ही देखते इसकी बिक्री भी तेज हो गई।

बताया जा रहा है कि यह प्रोडक्ट Sold Out तक हो गया। यानी जिस चीज को शुरुआत में शायद सिर्फ एक मजेदार आइडिया समझा जा रहा था, उसने बाजार में वास्तविक मांग पैदा कर दी।

यहीं से ट्रेडमार्क और ब्रांड अधिकारों का सवाल सामने आया।

Monster Energy अपने ब्रांड नाम, लोगो और उससे जुड़े ट्रेडमार्क की सुरक्षा को लेकर काफी सक्रिय रही है। कंपनी की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक Monster का लोगो उसका ट्रेडमार्क है और उसकी अनुमति के बिना उसका इस्तेमाल या पुनरुत्पादन नहीं किया जा सकता।

छोटी कंपनी के सामने बड़ी चुनौती

किसी छोटी कंपनी के लिए किसी बड़े कॉरपोरेट ब्रांड के साथ कानूनी विवाद में जाना आसान नहीं होता। मुकदमे की स्थिति में वकीलों की फीस, दस्तावेजी प्रक्रिया और लंबे समय तक चलने वाली कानूनी लड़ाई का खर्च काफी ज्यादा हो सकता है।

इसी वजह से ऐसे मामलों में कई छोटे कारोबारी समझौता करना या अपने प्रोडक्ट का नाम बदलना पसंद करते हैं।

हाल के एक मामले में न्यू ऑरलियन्स के एक छोटे कॉफी शॉप को Monster की ओर से कई Cease-and-Desist पत्र मिलने के बाद अपने लोकप्रिय मौसमी लैटे का नाम बदलना पड़ा था। रिपोर्ट के मुताबिक, दुकान के मालिक ने संभावित कानूनी खर्च को लगभग 10,000 डॉलर तक बताया था। बाद में ड्रिंक का नाम बदलकर “Bayou Beast” कर दिया गया।

यानी Monster और छोटे कारोबारियों के बीच ट्रेडमार्क विवाद कोई बिल्कुल नया विषय नहीं है।

Monster पर पहले भी लगे हैं ऐसे आरोप

Monster Energy का ट्रेडमार्क को लेकर आक्रामक रुख पहले भी सामने आता रहा है। पुराने मामलों में कंपनी ने अलग-अलग कारोबारों और वेबसाइटों के नाम या लोगो को लेकर आपत्ति जताई है।

एक पुराने उदाहरण में Monster ने MonsterFishKeepers नाम की वेबसाइट से जुड़े ट्रेडमार्क और लोगो को लेकर आपत्ति की थी। रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी ने कुछ ट्रेडमार्क छोड़ने और भविष्य में “Monster” तथा अन्य ब्रांड-संबंधित तत्वों के इस्तेमाल से बचने के साथ कानूनी फीस की मांग भी की थी।

एक अन्य पुराने विवाद में Vermont की छोटी Rock Art Brewery को “VERMONSTER” नाम वाले बीयर ब्रांड को लेकर Monster की ओर से Cease-and-Desist नोटिस मिला था। बाद में यह मामला ट्रेडमार्क अधिकारों और छोटे कारोबारों पर बड़े ब्रांडों के दबाव की बहस का उदाहरण बन गया।

क्या हर ‘Monster’ नाम पर कंपनी कार्रवाई करती है?

ऐसा कहना सही नहीं होगा कि Monster हर उस कारोबार के खिलाफ कार्रवाई करती है जिसके नाम में “Monster” शब्द मौजूद हो।

ट्रेडमार्क विवाद आमतौर पर कई बातों पर निर्भर करते हैं—नाम कितना मिलता-जुलता है, लोगो कैसा है, प्रोडक्ट किस श्रेणी में है, ग्राहक भ्रमित हो सकते हैं या नहीं और इस्तेमाल से ब्रांड की पहचान पर क्या असर पड़ सकता है।

Monster के पास अपने नाम, लोगो और ट्रेड ड्रेस से जुड़े कई अधिकार हैं। अदालत के रिकॉर्ड में भी कंपनी के MONSTER और MONSTER ENERGY ट्रेडमार्क तथा उसके विशिष्ट “claw” लोगो से जुड़े अधिकारों का उल्लेख मिलता है।

सोशल मीडिया ने मामले को और दिलचस्प बना दिया

इस विवाद का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि सोशल मीडिया पर लोग इसे सिर्फ कानूनी लड़ाई के तौर पर नहीं देख रहे हैं। कई यूजर्स इसे एक बड़े ब्रांड और छोटे कारोबारी के बीच ताकत के असमान मुकाबले के रूप में देख रहे हैं।

एक तरफ अरबों डॉलर के कारोबार वाली कंपनी है, जिसके पास बड़ा कानूनी और वित्तीय ढांचा है। दूसरी तरफ छोटी कंपनी है, जिसके लिए एक कानूनी नोटिस भी बड़ा आर्थिक दबाव बन सकता है।

ऐसे मामलों में इंटरनेट पर “David vs Goliath” जैसी तुलना तेजी से लोकप्रिय हो जाती है।

Monster Energy कितनी बड़ी कंपनी है?

Monster Beverage Corporation एनर्जी ड्रिंक उद्योग की प्रमुख कंपनियों में से एक है। कंपनी की Monster Energy ब्रांड लाइन दुनिया के कई बाजारों में मौजूद है।

हालांकि सोशल मीडिया पर Monster की वैल्यू को करीब 90 अरब डॉलर बताया जा रहा है, लेकिन कंपनी की वास्तविक बाजार पूंजीकरण या वैल्यूएशन समय के साथ शेयर बाजार में बदलती रहती है। इसलिए किसी एक वायरल आंकड़े को स्थायी कंपनी वैल्यू मानना सही नहीं होगा।

कंपनी का कारोबार कितना बड़ा है, इसका अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि अदालत के पुराने रिकॉर्ड में Monster की बिक्री और उसके बड़े विज्ञापन खर्च का उल्लेख किया गया था।

छोटी कंपनी ने कानूनी फीस देने से क्यों किया इनकार?

रिपोर्ट किए जा रहे मामले में छोटी कंपनी की सबसे बड़ी आपत्ति कथित तौर पर यही है कि वह Monster की कानूनी कार्रवाई के खर्च की जिम्मेदारी क्यों उठाए।

किसी कानूनी विवाद में सामने वाले पक्ष की फीस चुकाने की मांग और उसे स्वीकार करना अलग-अलग कानूनी प्रश्न हैं। यह इस बात पर निर्भर करता है कि संबंधित समझौते, कानून, अदालत के आदेश या मामले की परिस्थितियां क्या हैं।

इसलिए केवल Cease-and-Desist पत्र में किसी रकम या कानूनी फीस की मांग किए जाने का मतलब यह नहीं होता कि वह रकम स्वतः देय हो गई।

क्या छोटी कंपनी का विरोध सफल होगा?

फिलहाल इस खास विवाद का अंतिम परिणाम स्पष्ट नहीं माना जा सकता। अगर मामला अदालत तक पहुंचता है तो दोनों पक्षों के ट्रेडमार्क अधिकार, प्रोडक्ट की समानता, ग्राहक भ्रम और दूसरे कानूनी मुद्दों की जांच हो सकती है।

छोटी कंपनी के लिए लड़ाई आर्थिक रूप से मुश्किल हो सकती है, लेकिन सार्वजनिक समर्थन और सोशल मीडिया की चर्चा कभी-कभी छोटे ब्रांडों को अतिरिक्त visibility भी देती है।

यानी कानूनी दबाव के साथ-साथ यह विवाद उसके लिए मुफ्त प्रचार का माध्यम भी बन सकता है।

ट्रेडमार्क की लड़ाई में मजाक भी पड़ सकता है भारी

आज इंटरनेट संस्कृति में मीम, मजाक और वायरल नामों से नए प्रोडक्ट बनना आम हो गया है। कोई मजेदार नाम कुछ ही दिनों में लाखों लोगों तक पहुंच सकता है और अगर उससे बिक्री शुरू हो जाए तो मामला सिर्फ मजाक नहीं रह जाता।

ब्रांड मालिक ऐसे इस्तेमाल को अपने ट्रेडमार्क की संभावित कमजोरी के रूप में देख सकते हैं। दूसरी तरफ छोटे क्रिएटर और कंपनियां इसे पैरोडी, हास्य या स्वतंत्र ब्रांडिंग के रूप में देख सकती हैं।

यही टकराव अक्सर कानूनी नोटिस तक पहुंच जाता है।

Monster Energy और छोटी कंपनी के बीच कथित विवाद ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि बड़े ब्रांड अपने ट्रेडमार्क की सुरक्षा के लिए कितनी दूर तक जा सकते हैं और छोटे कारोबारियों को ऐसी कानूनी चुनौती का सामना कैसे करना चाहिए।

कथित तौर पर मजाकिया फ्लेवर से शुरू हुई कहानी के Sold Out होने और फिर Cease-and-Desist नोटिस तक पहुंचने ने सोशल मीडिया का ध्यान खींच लिया है। सबसे ज्यादा चर्चा उस दावे की है कि छोटी कंपनी से Monster के कानूनी खर्चों की भरपाई करने को कहा गया और उसने कथित तौर पर इससे इनकार कर दिया।

हालांकि, इस विशेष मामले से जुड़े सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इसलिए कानूनी नोटिस, कथित फीस की मांग और छोटी कंपनी के जवाब से जुड़े दावों को अंतिम न्यायिक निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

इतना जरूर है कि Monster के ट्रेडमार्क विवादों का इतिहास पुराना है और कंपनी अपने ब्रांड नाम तथा लोगो की सुरक्षा को लेकर सक्रिय रही है।

अब देखना यह होगा कि यह कथित विवाद केवल कानूनी नोटिस और जवाब तक सीमित रहता है या फिर आगे चलकर अदालत तक पहुंचता है।

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