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IIT दिल्ली छात्र की मौत में बड़ा मोड़! परिवार के आरोपों के बाद जांच कमेटी, अब सामने आएंगे कौन से राज?

 


नई दिल्ली: देश के प्रतिष्ठित संस्थान IIT दिल्ली में MSc Physics के छात्र ऋषिकेश कुमार की मौत का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। 22 अगस्त को कैंपस में हुई इस घटना के बाद छात्रों के विरोध, परिवार के आरोपों और संस्थान की कार्यप्रणाली को लेकर उठे सवालों के बीच अब जांच का दायरा बढ़ गया है। IIT दिल्ली ने मामले की परिस्थितियों की जांच के लिए पांच सदस्यीय बाहरी जांच समिति गठित करने का फैसला किया है। समिति को घटना से जुड़े रिकॉर्ड, संस्थान की प्रक्रियाओं और छात्र-फैकल्टी से बातचीत के आधार पर अपनी रिपोर्ट तैयार करनी है।

मामला उस समय और ज्यादा चर्चा में आ गया जब बड़ी संख्या में छात्रों ने कैंपस में प्रदर्शन कर स्वतंत्र जांच और जवाबदेही की मांग की। छात्रों की मांगों के बाद संस्थान ने बाहरी समिति बनाने का फैसला किया। रिपोर्ट के अनुसार समिति को करीब दो सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा गया है।

आखिर 22 अगस्त को क्या हुआ था?

पुलिस के मुताबिक 22 अगस्त की सुबह ऋषिकेश कुमार IIT दिल्ली परिसर में पहुंचे थे। प्रारंभिक जांच के अनुसार वह Lecture Hall Complex की छठी मंजिल तक गए और वहां से गिरने के बाद उनकी मौत हो गई। पुलिस ने घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं होने की बात कही है। जांच एजेंसियां उनके मोबाइल फोन और संस्थान से संबंधित रिकॉर्ड समेत उपलब्ध साक्ष्यों की जांच कर रही हैं।

घटना के बाद कैंपस में शोक के साथ-साथ कई सवाल भी उठने लगे। छात्रों ने प्रशासन से यह जानने की मांग की कि घटना से पहले छात्र की परिस्थितियों और उसे उपलब्ध कराई गई सहायता की पर्याप्त समीक्षा क्यों नहीं हुई।

यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि मौत की परिस्थितियों को लेकर जांच अभी जारी है। इसलिए किसी भी आरोप को अंतिम निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जा सकता।

परिवार ने लगाए गंभीर आरोप

मामले में ऋषिकेश के परिवार की ओर से भी IIT प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए हैं। India Today की रिपोर्ट के अनुसार, परिवार ने आरोप लगाया कि प्रशासन को ऋषिकेश की मानसिक स्थिति और उसकी जरूरतों के बारे में जानकारी दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद उसे पर्याप्त सहायता नहीं मिली। परिवार ने आवास और अकादमिक प्रोजेक्ट से जुड़ी समस्याओं का भी आरोप लगाया है।

परिवार के इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना अभी बाकी है। यही कारण है कि जांच समिति की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। समिति को रिकॉर्ड और संबंधित लोगों से बातचीत के आधार पर यह समझने का अवसर मिलेगा कि घटना से पहले संस्थान के स्तर पर कौन-कौन से कदम उठाए गए थे और क्या कोई ऐसी प्रक्रिया थी जिसे बेहतर तरीके से लागू किया जा सकता था।

छात्रों के प्रदर्शन से बढ़ा दबाव

ऋषिकेश की मौत के बाद IIT दिल्ली में छात्रों का विरोध प्रदर्शन हुआ। छात्रों ने मामले की स्वतंत्र जांच के साथ-साथ संस्थान में छात्र कल्याण और मानसिक स्वास्थ्य सहायता व्यवस्था को मजबूत करने की मांग की। कुछ छात्रों ने प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों की जवाबदेही और परिवार के लिए मुआवजे की भी मांग की।

प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने केवल एक घटना की जांच की मांग नहीं की, बल्कि कैंपस में छात्रों को मिलने वाली सहायता और प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर व्यापक सवाल उठाए। रिपोर्टों के मुताबिक विरोध के बीच कक्षाएं भी प्रभावित हुईं।

यही दबाव जांच समिति के गठन के पीछे एक महत्वपूर्ण कारण माना जा रहा है।

पांच सदस्यीय कमेटी में कौन-कौन?

IIT दिल्ली द्वारा घोषित शुरुआती बाहरी जांच समिति में पूर्व उत्तराखंड DGP और IIT दिल्ली के पूर्व छात्र अशोक कुमार, AIIMS दिल्ली के मनोचिकित्सा विभाग के प्रमुख प्रोफेसर प्रताप शर्मा, दो छात्र प्रतिनिधि और IIT दिल्ली के रजिस्ट्रार को शामिल किया गया था। रजिस्ट्रार को समिति के सचिव और संयोजक की भूमिका दी गई थी। समिति को घटना से जुड़े तथ्यों की जांच के अलावा संस्थान की मौजूदा प्रक्रियाओं और प्रोटोकॉल की समीक्षा भी करनी थी।

हालांकि, इस समिति को लेकर भी छात्रों की आपत्तियां सामने आईं। Indian Express के अनुसार, प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने समिति में पूर्व DGP अशोक कुमार को शामिल किए जाने पर सवाल उठाया। इसके बाद IIT दिल्ली प्रशासन ने समिति की संरचना में बदलाव करने पर सहमति जताई और छात्रों से वैकल्पिक नाम सुझाने को कहा।

यानी अब इस मामले में जांच के साथ-साथ जांच समिति की संरचना भी एक अहम मुद्दा बन चुकी है।

IIT दिल्ली ने क्या कदम उठाने की बात कही?

संस्थान की ओर से छात्रों के साथ बातचीत के बाद कई कदमों की बात सामने आई है। इनमें बाहरी जांच समिति, परिवार को आर्थिक सहायता, बाहरी Ombudsperson की नियुक्ति और ऐसे छात्रों के लिए अतिरिक्त faculty-student mentor support system शामिल हैं जिन्हें विशेष सहायता की जरूरत हो सकती है।

IIT दिल्ली ने छात्रों से कैंपस में छात्र कल्याण और सहायता व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सुझाव भी मांगे हैं। संस्थान की ओर से उपलब्ध जानकारी के मुताबिक कैंपस में काउंसलर और AIIMS तथा VIMHANS से जुड़े मनोचिकित्सकीय विशेषज्ञों की सहायता भी उपलब्ध है।

अब जांच में किन सवालों के जवाब तलाशे जाएंगे?

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि घटना से पहले क्या हुआ था?

जांच समिति के सामने कई महत्वपूर्ण बिंदु हो सकते हैं—छात्र के संस्थान में लौटने के बाद उसकी स्थिति क्या थी, प्रशासन और परिवार के बीच किस तरह का संवाद हुआ, छात्र को किस प्रकार की अकादमिक और आवासीय सहायता उपलब्ध कराई गई, संस्थान के मौजूदा प्रोटोकॉल क्या थे और उन्हें किस तरह लागू किया गया।

इसके अलावा पुलिस भी अपनी जांच जारी रखे हुए है। घटनास्थल से सुसाइड नोट नहीं मिलने की जानकारी सामने आई है और जांचकर्ता मोबाइल फोन तथा अन्य रिकॉर्ड की जांच कर रहे हैं। इसलिए घटना के पीछे की पूरी परिस्थितियां अभी जांच का विषय हैं।

दो हफ्ते में रिपोर्ट से खुल सकता है बड़ा राज

जांच समिति को दो सप्ताह के भीतर रिपोर्ट देने को कहा गया है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मामले में कई अहम जानकारियां सामने आ सकती हैं। समिति अगर किसी प्रशासनिक कमी, प्रक्रिया की खामी या सहायता प्रणाली में सुधार की जरूरत की पहचान करती है तो उसकी सिफारिशें सिर्फ इस मामले तक सीमित नहीं रह सकतीं।

IIT जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में पढ़ने वाले छात्रों का शैक्षणिक दबाव, व्यक्तिगत परिस्थितियां और संस्थागत सहायता लंबे समय से चर्चा का विषय रहे हैं। ऋषिकेश कुमार की मौत के बाद यह बहस एक बार फिर तेज हो गई है कि कठिन परिस्थितियों से गुजर रहे छात्रों की पहचान और सहायता के लिए संस्थानों की जिम्मेदारी किस तरह तय होनी चाहिए।

फिलहाल इस मामले में किसी व्यक्ति या संस्था को घटना के लिए जिम्मेदार ठहराना जल्दबाजी होगी। पुलिस जांच और बाहरी समिति की रिपोर्ट के बाद ही तस्वीर ज्यादा स्पष्ट हो सकती है।

लेकिन एक बात तय है—ऋषिकेश कुमार की मौत के बाद उठे सवाल अब सिर्फ एक छात्र की मौत तक सीमित नहीं रह गए हैं। कैंपस में हुए प्रदर्शन और जांच समिति के गठन ने IIT दिल्ली की छात्र सहायता व्यवस्था, प्रशासनिक प्रक्रियाओं और जवाबदेही को भी चर्चा के केंद्र में ला दिया है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि जांच समिति क्या निष्कर्ष देती है और क्या उसकी रिपोर्ट उन सवालों का जवाब दे पाएगी, जिनके कारण छात्रों ने कैंपस में आवाज उठाई थी।

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