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सिर्फ कुछ मिनट... और बदल गया जन्म-मृत्यु पंजीकरण का पूरा खेल, संसद में हुआ बड़ा फैसला



नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के दौरान शुक्रवार को लोकसभा में एक ऐसा महत्वपूर्ण विधेयक पारित हो गया, जिसका प्रभाव देश के करोड़ों नागरिकों पर पड़ सकता है। खास बात यह रही कि यह विधेयक विपक्षी दलों के भारी हंगामे के बीच बिना किसी चर्चा और बिना किसी संशोधन के ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। संसद के भीतर जहां विपक्ष प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई और राम मंदिर के चढ़ावे की कथित चोरी के मामले को लेकर नारेबाजी करता रहा, वहीं सरकार ने जन्म और मृत्यु के पंजीकरण से जुड़े कानून में संशोधन करने वाला विधेयक सदन से पारित करा लिया।

इस विधेयक के पारित होने के बाद जन्म और मृत्यु के विलंबित पंजीकरण की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सख्त हो जाएगी। साथ ही सरकार का दावा है कि इससे फर्जी दस्तावेजों पर लगाम लगेगी और डिजिटल रिकॉर्ड प्रणाली को और मजबूत बनाया जा सकेगा।

हंगामे के बीच पेश हुआ विधेयक

लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी दलों के सदस्य विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। विपक्ष की ओर से दिल्ली में प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई और राम मंदिर के चढ़ावे की कथित चोरी का मुद्दा जोर-शोर से उठाया गया। लगातार हो रहे हंगामे के बीच केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने जन्म और मृत्यु का पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 सदन में पेश किया।

हालांकि विपक्ष की ओर से किसी प्रकार की चर्चा में भाग नहीं लिया गया। न तो विधेयक पर विस्तृत बहस हुई और न ही विपक्षी सांसदों ने कोई संशोधन प्रस्तावित किया। इसके बाद सदन ने ध्वनिमत से विधेयक को पारित कर दिया।

राज्यसभा पहले ही दे चुकी थी मंजूरी

इससे पहले राज्यसभा 29 जुलाई को इस विधेयक को मंजूरी दे चुकी थी। वहीं केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 20 जुलाई को ही इस संशोधन प्रस्ताव को अपनी स्वीकृति दे दी थी। अब लोकसभा से पारित होने के बाद यह विधेयक कानून बनने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

सरकार का कहना है कि यह संशोधन मौजूदा जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 (जिसमें वर्ष 2023 में संशोधन किया गया था) की धारा 13(3) में बदलाव करने के उद्देश्य से लाया गया है।

आखिर क्यों जरूरी था यह संशोधन?

सरकार के अनुसार वर्तमान व्यवस्था में यदि किसी व्यक्ति के जन्म या मृत्यु का पंजीकरण एक वर्ष से अधिक की देरी से कराया जाता है, तो इसके लिए जिला मजिस्ट्रेट (DM), उप-मंडल मजिस्ट्रेट (SDM) या किसी कार्यपालक मजिस्ट्रेट के आदेश की आवश्यकता होती है।

लेकिन व्यवहार में कई मामलों में इस व्यवस्था का दुरुपयोग होने की शिकायतें सामने आती रही हैं। कई बार वर्षों बाद भी फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जन्म प्रमाणपत्र या मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने के प्रयास किए जाते रहे हैं।

इन्हीं समस्याओं को देखते हुए सरकार ने विलंबित पंजीकरण की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी तथा सख्त बनाने का फैसला किया है।

अब क्या बदल जाएगा?

नए संशोधन के तहत विलंबित पंजीकरण के लिए दो-स्तरीय मंजूरी प्रणाली लागू करने का प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अत्यधिक देरी से होने वाले पंजीकरण की गहन जांच हो सके।

सरकार का मानना है कि इससे फर्जी प्रमाणपत्र तैयार करने वाले गिरोहों पर प्रभावी रोक लगेगी और सरकारी रिकॉर्ड अधिक विश्वसनीय बनेंगे।

हालांकि विस्तृत नियम अधिसूचना के माध्यम से लागू किए जाएंगे, लेकिन सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रत्येक मामले की गंभीरता और देरी की अवधि को ध्यान में रखते हुए मंजूरी की प्रक्रिया तय की जाएगी।

डिजिटल रिकॉर्ड प्रणाली होगी और मजबूत

सरकार इस संशोधन को केवल कानूनी बदलाव नहीं बल्कि डिजिटल प्रशासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मान रही है।

देशभर में जन्म और मृत्यु से जुड़े रिकॉर्ड को पूरी तरह डिजिटल बनाने की दिशा में लंबे समय से प्रयास किए जा रहे हैं। डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होने से नागरिकों को भविष्य में प्रमाणपत्र प्राप्त करने में आसानी होगी और विभिन्न सरकारी विभागों के बीच डेटा साझा करना भी सरल हो जाएगा।

इसके साथ ही एकीकृत डिजिटल डेटाबेस तैयार होने से प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।

जन्म प्रमाणपत्र बनेगा सबसे अहम दस्तावेज

सरकार ने इस संशोधन के साथ यह भी स्पष्ट किया है कि भविष्य में जन्म प्रमाणपत्र को सरकारी सेवाओं और विभिन्न प्रशासनिक प्रक्रियाओं में प्रमुख दस्तावेज के रूप में स्वीकार किया जाएगा।

इसका अर्थ यह है कि नागरिकों की पहचान, आयु, शैक्षणिक प्रवेश, सरकारी योजनाओं, सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों और कई अन्य सेवाओं में जन्म प्रमाणपत्र की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाएगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जन्म के समय ही समयबद्ध पंजीकरण सुनिश्चित हो जाए तो बाद में नागरिकों को पहचान संबंधी विवादों या दस्तावेजी समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ेगा।

सरकार ने विपक्ष पर साधा निशाना

विधेयक पारित होने के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने विपक्ष के रवैये पर सवाल उठाए।

उन्होंने कहा कि सरकार चाहती थी कि इतना महत्वपूर्ण विधेयक सदन में विस्तृत चर्चा के बाद पारित हो, लेकिन विपक्ष ने बार-बार अनुरोध के बावजूद चर्चा में भाग नहीं लिया।

रीजीजू ने कहा कि अब विपक्ष को सदन के बाहर जाकर यह नहीं कहना चाहिए कि बिना चर्चा के विधेयक पारित किया गया, क्योंकि चर्चा का अवसर स्वयं विपक्ष ने गंवा दिया।

उन्होंने कहा,

"यह इतना महत्वपूर्ण विधेयक था कि हम चाहते थे सभी सदस्य इसमें भाग लें। लेकिन विपक्ष ने सहयोग नहीं किया। जनता भी इस पर जवाब मांगेगी।"

उन्होंने विपक्ष से अपील की कि आने वाले महत्वपूर्ण विधेयकों पर सदन की कार्यवाही में सहयोग करें और लोकतांत्रिक चर्चा की परंपरा को मजबूत बनाएं।

सभापति ने भी जताई नाराजगी

लोकसभा की कार्यवाही के दौरान पीठासीन सभापति दिलीप सैकिया ने भी विपक्ष के रवैये पर नाराजगी व्यक्त की।

उन्होंने कहा कि कार्य मंत्रणा समिति की बैठक में सभी दलों ने विधेयक पर सहयोग का भरोसा दिया था, लेकिन सदन में लगातार हंगामा किया गया।

सैकिया ने कहा,

"आपके सहयोग के बिना विधेयक पारित करना पड़ा। यह सही नहीं है।"

उन्होंने विपक्ष से व्यवस्था बनाए रखने की अपील की, लेकिन हंगामा जारी रहने के कारण अंततः सदन की कार्यवाही पूरे दिन के लिए स्थगित करनी पड़ी।

राजनीतिक बहस भी तेज

विधेयक पारित होने के बाद राजनीतिक हलकों में भी बहस तेज हो गई है। सरकार का कहना है कि यह कानून प्रशासनिक सुधार और फर्जी दस्तावेजों पर रोक लगाने के लिए आवश्यक है, जबकि विपक्ष का आरोप है कि संसद में महत्वपूर्ण विधेयकों पर पर्याप्त चर्चा होनी चाहिए ताकि सभी पक्षों की राय सामने आ सके।

लोकतांत्रिक व्यवस्था में संसद की बहस को कानून निर्माण का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। ऐसे में बिना चर्चा के विधेयक पारित होने को लेकर राजनीतिक दलों के बीच अलग-अलग राय देखने को मिल रही है।

आम नागरिकों पर क्या होगा असर?

यदि यह संशोधन कानून के रूप में पूरी तरह लागू होता है, तो नागरिकों को जन्म और मृत्यु का पंजीकरण समय पर कराना पहले से अधिक जरूरी होगा। लंबे समय तक पंजीकरण में देरी होने पर प्रक्रिया अधिक सख्त और जांच-आधारित हो सकती है।

साथ ही जन्म प्रमाणपत्र की बढ़ती कानूनी अहमियत को देखते हुए माता-पिता के लिए बच्चों का जन्म पंजीकरण समय पर कराना और भी महत्वपूर्ण हो जाएगा।

लोकसभा द्वारा पारित जन्म और मृत्यु का पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 देश की नागरिक पंजीकरण व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है। सरकार का दावा है कि इससे डिजिटल रिकॉर्ड मजबूत होंगे, फर्जी दस्तावेजों पर प्रभावी रोक लगेगी और जन्म प्रमाणपत्र की विश्वसनीयता बढ़ेगी। दूसरी ओर, विपक्ष ने विधेयक पर चर्चा न होने को लेकर सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नया कानून लागू होने के बाद इसकी प्रक्रिया आम नागरिकों के लिए कितनी सरल और प्रभावी साबित होती है तथा प्रशासनिक व्यवस्था में इससे कितना सुधार आता है।

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